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शेर दा अनपढ -उत्तराखंड के प्रसिद्ध कवि-SHER DA ANPAD-FAMOUS POET OF UTTARAKHAND

Started by एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720, October 25, 2007, 01:55:05 PM

Jagga

शेरदा अनपंड एक भुतैऊ बलि लाइन
सब खानी आल प्याज मेरे शोब्नी खा शिकार

Risky Pathak

Sherda Ki 1 Poem Or..

न्है घागेरी, न्है सुरयाव



न्है घागेरी, न्है सुरयाव
कसि काटु हयून निगांव

टूटि घर छू, फूटि द्वार
जसि भिदेर उसै भ्यार

ख्वारेन चुन्गने पानी धार
जाड़ है रो जत्ती मार

भैर मरनि बादी श्याव
कसि काटु हयून निगांव
न्है घागेरी, न्है सुरयाव
कसि काटु हयून निगांव

ब्जी जाल यो ह्युनक जाड़
आंखन पानी नाखन धार

हाथ खुटान दुत्योव है रे
बेडू रवाट जे थोव है रे

उसे राती उसे ब्याव
कसि काटु हयून निगांव
न्है घागेरी, न्है सुरयाव
कसि काटु हयून निगांव

आंग में न्हाति फाटि धिन्गाद
खान पीने पड़े लान्गड़

घर ग्रहस्थी दुःख दुःख
नानतिन चै रई मुख मुख

कै कई करू सज समाव
कसि काटु हयून निगांव
न्है घागेरी, न्है सुरयाव
कसि काटु हयून निगांव

रात ह्युनाक मब छान
धकिन बिछुं  के न्हेतन

हाव लागने फराफर
ओ इजा उपन लागने सारा सर

भैर मरनि बादी श्याव
कसि काटु हयून निगांव
न्है घागेरी, न्है सुरयाव
कसि काटु हयून निगांव

लूण तेल मर्च चै
बीड़ शलाई खर्च चै

पिसुये कंट्रोल भे
च्हा पानी में जोर भे

खानि कि ये आना माव
कसि काटु हयून निगांव
न्है घागेरी, न्है सुरयाव
कसि काटु हयून निगांव

दाव लाग रे भिदेर ताव
भात लाग रे बुडिये गाव

बुडी करने छट बटात
बुद ज्यूँ करने कच कचाट

च्योल कुनो कैक फोड़ू टिकाव
कसि काटु हयून निगांव
न्है घागेरी, न्है सुरयाव
कसि काटु हयून निगांव

नॉन नॉन खानि च्हा घूटूक
ठूल ठूल खानि आलू गूटुक

चेलिक बीड़ सुट में सुट
चयला गावन बोतवेक टूट

और बाब थे ने है फाटि सुरयाव
कसि काटु हयून निगांव
न्है घागेरी, न्है सुरयाव
कसि काटु हयून निगांव

हेम पन्त

अति सुन्दर कविता है.. व्यंग का सहारा लेकर गरीब आदमी की चिन्ता को सुन्दरता से व्यक्त किया है शेरदा ने... हिमाशु भाई शेरदा की अन्य रचनाएं भी हमारे साथ बांटते रहना...

Anubhav / अनुभव उपाध्याय


एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720


शेर दा,

का लिखा गाना

महिला : ओह पुरुवा बाजू घागर की लाछा यस

पुरुष : ओह परुली ईजा तू कस मनिछे कस.

महिला : ओह पुरुवा बाजू धमेली की लाछा यस


पुरुष : ओह परुली ईजा तू कस मनिछे कस.




Risky Pathak

फूटकर ढेपू from Sher Daa's Hasne Bhaar

९ जनि परिवार चै रे ख्हिचेड ला रे खेल
३० दिन तक पूजूं छू द्वि लीटर मट्टी तेल

लाकाड अकाड हैरो क्ह्वेलो में धूर
२० किलो क्वेल ओ इजा १९ किलो चुल

बाब देखि खार भैयो मै देखि रीछ भे
सैनी इनार भाल, मै बाप चार सौ बीस भे

बूङ भयो जहरों पूड भयो, बुडी जहरे बीज भे
मै बाप भय की भे, सैन बड़ी चीज़ भे 

मै भई कांस पीतवो फदु तुम सुनु ब्याल भया
मैं अन्पड अन्पड भई तुम पड़ी लिखी गुनी च्याल भया

शेरदा शेरदा है गे भैर भिदेर
म्येर च्येल ले धाल लगु नो शेरदा कैबेर
होती हुनी मै ले कुणी अन्होती ले हूँ फ़ेगे
बैन नॉन कुनेर भे सैन रानि ले कुनेर भैगे

Risky Pathak

Sherda's Kavita "Bakhat Bakhtai Baat" from "Hasne Bhaar" Album

नामक हम जिम्दार भाई ग्यु रवोट खाणी नि भेइ
नामक हम दुधी भे दूध उज्यान चां नि भेइ

धीनाय ले भरी रूछी पेल बे चुल्यान
गै घ्यू हड़पी रूछी बुढ बाढ़ी सिरानी
दूधाक कस्यार उन्छी दै उन्छी थ्याक
नोडी छां पराई को को लागु छी ल्याख

अब स्यूना देखन हैगो थ्येक में दै
माजिर जोव खाने ओ इजा खरेरी गे गै

२ पैसे दूधाल पैली दैल फ़ैल है जान छी
मणि थ्येकेन हाल दे, मणि तत्त्ये खान छी
त्यार म्येर देखने शेरदा अन्केसी है गे
५ शेरो घ्यू मेरी बूढी आम खे गे

अब दै की तू बात नि कौ चाह कानी चूस
थेकिन बिराव बये रई हद्कान मूस

१०० रूपये हत्खान पैली ढाकिनी बचुली
कान मुनर हई नाखाक नथुली
१० २० खितो कू छी चनुरु सुनार
६ पली जंजीर सूत धागुल न्यार
अब कम जै हाथ कानाक कूने दुगुन जै गड़ाई
९ रूपये झगुली १०० रूपये सिलाई

१० रूपये पीसूएल पैली बिवे दी छी च्येल
अब १० रूपये में उने १ गूढे भ्येल
१०० रूपये भेंस मेइसल बई तक बांधो
आज मूसक प्वाथ लै कूनो १०० में नी छांटो

फिकर फरोछी यो है गे बाव ठोर बूढ ल्हे गो
झर फर कि रेगे साँपोवो ठोर स्यूं ल्हे गो



घडी घड़ी याद उने बढबाज्यू कूँ
कण बोजी कै ल्यू छे पोथा द्वी धकून लूं
९ आना लुकूड़ दी छी पट्टू दुरयाव
ठूली जै घगेरी हूँ छी ठूल बाज्यू सुरयाव

तामक डबल में जे मिले दी १ पाई
रवाट जे जलेबी दी छी केशी हलवाई
कचिक मटर लूं छी कचिक गुटुक
तिमूला पात में म्येर आम घुतुक

सुन सुन काथ तेरी च्यूँ पै गे राव
स्यु गाठे खुजन फेगे शेरदा सुरयाव
आज सुनुके जे भौ बे चाने लकाद पताड
चुठोनो तेल जे ल्यु धकिन्यु खताद
खवर में हथोद मरना पिसू तेल ज्वोड़
रूपये में लगड़ पना १०० रूपये में बड

जदुके पिसू बेचना अकर के
उदुके भूख लागने सकर के
महंगाई लात मारने पुछदी खेचन में
घुन च्युन एक लाग्दे उप्रेती ज्यूँ द्वि जवाद सेतन में

बूबूल आठ आन में मखमल लहए मील ९ रूपये में गजगाड़
बूबूल १ रूपये में सुरयाव लहए मील ९ रूपये में नाड़

राजेश जोशी/rajesh.joshee

दोस्तो,
कल गणतन्त्र दिवस की पूर्व सन्ध्या पर देहरादून के नगर निगम सभागार में कवि सम्मेलन/मुशायरे में देश व प्रदेश के प्रमुख कवियों/शायरों ने अपनी रचनाऎं प्रस्तुत की जैसे अतुल शर्मा जी, बल्ली सिंह चीमा, मदन मोहन डुकलान, डा० नीता कुकरेती, श्री उदय किरोला जी और श्री हेमन्त बिष्ट जी जो संचालक की भुमिका में भी थे।  देश के कवियों में सुर्यकान्त पाण्डेय जी, डा० सीता सागर और प्रो० अशोक चक्रधर, श्री जिया नहटोरी, मोहतरमा नुसरत मेहंदी आदि ने रचनाऎं प्रस्तुत की।
कार्यक्रम के अंत में शेरदा ने अपनी रचनाऎं प्रस्तुत जी तो उनको लाइव देखने का मौका मिला, शायद मैंने शेरदा को बीस से भी ज्यादा वर्षों बाद देखा तो बड़ा अच्छा लगा।  उन्होने अपनी मुर्दे की बात नाम की कविता सुनायी, और कुछ कविता की लाईने पढ़ कर सुनायी।  कुछ लाइने जो याद है वो इस प्रकार थी:-

जां बात और हात चलनी,
उकैं कौनी, ग्राम सभा।
जां बात और लात चलनी,
उकैं कौनी, विधान सभा।
जां एक बुलां, सब सुणनी,
उकैं कौनी, शोक सभा।
जां सब बुलानी, क्वै नी सुणन,
उकैं कौनी, लोक सभा।

मेरा कैमरा मेरे पास न होने के कारण मै रिकार्डिन्ग नही कर सका नही तो सदस्यों की सेवा में प्रस्तुत करता।  मुझे आशा है कि शायद हमारे वरिष्ठ सदस्य श्री पंकज महर जी ने जरुर इस बारे में अधिक जानकारी एकत्र की होगी।


हेम पन्त

कौसानी में एक कवि सम्मेलन के दौरान अपनी कविता सुनाते हुए शेर दा अनपढ..

को छै तू?

हेम पन्त