Author Topic: Burninig Issues of Uttarakhand Hills- पहाड़ के विकास ज्वलन्तशील मुद्दे  (Read 14982 times)

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

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चन्द्रशेखर करगेती
किसके लिए बना उत्तराखण्ड ?
 
 देहरादून में विधानसभा पर प्रदर्शन कर रहे शिक्षा मित्रों को उत्तराखंड पुलिस ने एसएसपी केवल खुराना की अगुवाई में ना केवल लाठी-डंडों से पीटा बल्कि पुलिसिया बूटों से भी उनपर प्रहार किया, इंसान कम पड़े तो घोड़े दोड़ाये गए. राज्य के मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा कहते हैं कि शिक्षा मित्रों को धर्य रखना चाहिए. मुख्यमंत्री जी धैर्य रखने की सीख देनी हो तो अपनी पुलिस को दीजिए. जिनको डंडों और बूटों से आपकी पुलिस ने पीटा,वो कोई अपराधी, आतंकवादी या माफिया के आदमी नहीं थे,वो ध्याडी के शिक्षक थे,जिनके बूते इस राज्य के सरकारी स्कूल चल रहे हैं !
 
 मुख्यमंत्री जी आपका पेट तो सिर्फ मुख्यमंत्री बन जाने मात्र से नहीं भरता,आप खुद मुख्यमंत्री हो गए तो आपने सोचा कि अपने बेटे को भी संसद में पहुंचा कर पेंशन पक्की कर ली जाए (हो ना सकी,ये अलग बात है). तो आपके खानदान में तो बाप,बेटा,पोता,बहन सब सरकारी पेंशन खाने के पुश्तैनी हकदार हैं और गरीब आदमी का बेटा-बेटी कहे कि हमारी मजदूरी (मानदेय तो उन्हें छलने के लिए गढ़ा गया शब्द है) बढ़ा दो तो आप पहले उन्हें डंडों से पिटवाओ और फिर धैर्य रखने का उपदेश दो,इसे मक्कारी कहने पर तो आप नाराज हो जायेंगे मुख्यमंत्री जी,पर मैं समझ नहीं पा रहा हूँ कि इसे और क्या कहूँ ? 
 
 आपके शिक्षा मंत्री भाई मंत्री प्रसाद नैथानी की बोलती क्यूँ बंद है,इस प्रकरण में ? मंत्री भाई अभी कुछ साल पहले तक आप बेरोजगारों को लेकर रोजगार यात्राएं निकाला करते थे और आज आप कैबिनेट मंत्री हो गए हैं तो बेरोजगारों-अर्द्ध बेरोजगारों पर लाठी-डंडे बरसवा रहे हैं. अपने को विधायकी का टिकट ना मिला  तो फूट-फूट कर,जार-जार कर,बुक्का फाड़ कर रोओ और जिनका भविष्य दांव पर लगा है, उनको नियम-क़ानून का ठेंगा दिखाओ, वाह क्या कांग्रेसी होशियारी है. लेकिन बहुगुणा साहेब और मंत्री दीदा रे जनता बड़ी कारसाज चीज है, जिस दिन अपनी पे आ जाए तो ना तो साहबी अकड रहेगी और ना आंसुओं का ड्रामा चल सकेगा.
 
 निहत्थे शिक्षा मित्रों पर अपने पुलिसिया पराक्रम का प्रदर्शन करने वाले एसएसपी केवल खुराना साहेब, कल अंतरराष्ट्रीय मानव अधिकार दिवस पर आपने जो पराक्रम दिखाया, उसे देख कर एक बार फिर समझ में आया कि क्यूँ वर्षों पहले इलाहबाद उच्च न्यायालय के एक न्यायाधीश ने पुलिस को वर्दीधारी गुंडों की संज्ञा दी थी  ! महिला शिक्षा मित्रों से जोर आजमाइश करने वाले- खुराना साहेब पराक्रम इस कदर हिलोरें मार रहा हो और भुजाएं इतनी फडफडा रही हों तो अपराधियों पर आजमाओ उन्हें जो देहरादून में लूट, डकैती, ह्त्या, चैन-स्नैचिंग जैसे अपराध आये दिन कर रहे हैं.  पर उन के साथ आप ताकत दिखाओगे कैसे ? सुखदेव सिंह नामधारी जैसे अपराधी,माफिया को तो आपको सलाम ठोकना पड़ता है. किसी को पकड़ते भी हैं तो पता चलता है कि ये तो अपनी ही बिरादरी वाला है, जैसा कि अभी दो तीन दिन पहले ही हुआ दूँन  में हुआ. नशे का कारोबार करने वालों को आपकी पुलिस ने पकड़ा तो पता चला कि उनमें से एक तो आप ही के मातहत एक कोतवाल का बेटा है.
 
 मुख्यमंत्री ने कहा कि लाठीचार्ज की न्यायिक जांच करवाई जायेगी. लेकिन स्वतंत्र, निष्पक्ष जांच की तो शर्त यही है कि पहले एसएसपी से लेकर सिपाही तक सब निलंबित किये जाएँ और तब जांच हो !
 
 सवाल तो ये भी है कि नौजवानों की शहादत और माता-बहनों की कुर्बानियों से बने इस राज्य में हमारे हिस्से में सिर्फ पुलिस के डंडे और बूट ही आने हैं तो ये डंडे और बूट तो उत्तर प्रदेश की सरकार भी हमें खुशी-खुशी दे ही रही थी,तब इस अलग उत्तराखंड राज्य का औचित्य क्या है ?
 
 (मित्र इन्द्रेश मैखुरी की वाल से)

विनोद सिंह गढ़िया

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दावे तो तमाम हुए लेकिन बीतते साल कुमाऊं की हवाई पट्टियों पर सियासी उड़ान ही देखने को मिली।





 दावे तो तमाम हुए लेकिन बीतते साल कुमाऊं की हवाई पट्टियों पर सियासी उड़ान ही देखने को मिली। आम जनता के लिए यह सेवा सपना बनकर ही रह गई। बात चाहे पंतनगर हवाई पट्टी की करें या नैनी-सैनी हवाई पट्टी की, दोनों जगह हवाई सेवा पूरे साल वीवीआइपी मूवमेंट तक ही सिमटी रही।

पंत विश्वविद्यालय की स्थापना के वक्त ही वर्ष 1960 में पंतनगर में हवाई पट्टी बन गई थी। देशी विदेशी वैज्ञानिकों की सुविधा के लिए यह हवाई पट्टी निर्मित की गई थी। बाद में इस पट्टी पर वीवीआइपी मूवमेंट होता रहा। वर्षो बाद 1986-87 में वायुदूत नाम की एयरलाइंस ने हवाई सेवा दिल्ली- पंतनगर के मध्य शुरू की थी। इसका मकसद पर्यटन को बढ़ावा देना था, लेकिन यह सेवा यात्रियों की कमी से कुछ माह चल कर बंद हो गई। वर्ष 2005 में सिडकुल की स्थापना के बाद फिर हवाई सेवा शुरू कराने की कवायद हुई। तत्कालीन मुख्यमंत्री एनडी तिवारी के प्रयास से जैगसन एयरलाइंस ने यहां से सेवा करने का साहस दिखाया।

यह सेवा 50 प्रतिशत अनुदान पर प्रारंभ हुई थी, यानी यात्रियों का आधा किराया ही अदा करना होता था बाकी किराये का राज्य सरकार भुगतान करती थी। लेकिन कुछ ही महीनों में यह सेवा बंद हो गई। बाद में वर्ष 2011 में किंगफिशर ने भी सेवा शुरू की, खासा बिजनेस के बावजूद कंपनी के आंतरिक कारणों की वजह से यह सेवा भी बंद हो गई। राज्य के उड्डयन सचिव राकेश शर्मा ने इस साल एक दिसंबर से एक बार फिर हवाई सेवा शुरू होने का दावा किया था, लेकिन यह दावा खोखला साबित हुआ। पिथौरागढ़ के नैनी-सैनी गांव में बनी हवाई पट्टी आज तक वीरान पड़ी है। 1994 में तत्कालीन उड्डयन मंत्री गुलाम नबी आजाद, उत्तर प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव ने हवाई पट्टी का शिलान्यास किया था। तब दोनों नेताओं ने कहा था कि हवाई पट्टी बनने से पर्यटन के मामले में पिथौरागढ़ कश्मीर से आगे निकल जाएगा। बासमती पैदा करने वाले इस गांव की बेशकीमती जमीन पर हवाई पट्टी का निर्माण किया गया।

किसानों को क्षेत्र के विकास के साथ ही स्थानीय लोगों को रोजगार के तमाम अवसर मिलने के सपने दिखाए गए। ये वायदे 18 साल बाद भी कोरे ही साबित हुए हैं। अभी तक हवाई पट्टी का लाभ स्थानीय जनता को तो नहीं मिला, लेकिन नेताओं का पिथौरागढ़ आगमन जरूर आसान हो गया। नेताओं के हवाई जहाज दर्जनों बार इस हवाई पट्टी पर उतर चुके हैं।

स्रोत : दैनिक जागरण

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

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Timeline Photos कौन भारी पडेगा ?
 
 पौड़ी के विधायक श्री सुंदर लाल मन्द्रवाल या तो बेहद शरीफ है या उन्हें अपने संवैधानिक अधिकारों का कुछ पता ही नहीं है ? वरना सर्किट हाउस में उनके द्वारा बुक कराये गये कमरों में जिले के अफसर अपने मेहमानों को ठहराकर विधायक महोदय को बाहर का रास्ता दिखाने की हिम्मत नहीं जूटा पाते l
 
 यह विधायक सुंदर लाल मन्द्रवाल की शराफत ही थी कि वे अपने लोगों के साथ चुपचाप घुडदौडी कॉलेज के गेस्ट हाउस में चले गये l मन्द्रवाल की जगह पडौसी उत्तरप्रदेश का कोई विधायक रहा होता तो डीएम साहब और उनके मेहमान इस दिन को ता जिंदगी नहीं भूला पाते !
 
 डीएम पौड़ी के व्यवहार से व्यथित विधायक मन्द्रवाल मुख्यमंत्री से डीएम की शिकायत करने की बात कह रहें हैं, अब देखने वाली बात है कि दक्षिण अफ्रीका के 9 दिन के दौरे को पूरा कर 29 दिसम्बर को लौट के आने के बाद सजने वाले बिज्जी भैजी के दरबार में माननीय विधायक की व्यथा भारी पड़ती है कि डीएम साहब की कलेक्टरगिरी ?
 
 ग्याडूओं रे इस राज्य में जब साहब लोग जनता द्वारा निर्वाचित विधायक महोदय को भी कुछ नहीं समझते तो अपने जैसे और लोगो की बिसात ही क्या है ? इस राज्य में जो कुछ है वो यही लोग तो है !
 
 जाने किसके लिए बना होगा यह निगौडा उत्तराखंड ?
     
 (आभार दैनिक हिन्दुस्तान)By: चन्द्रशेखर करगेती

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

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चन्द्रशेखर करगेती9 hours ago
इस व्यवस्था को चाहिए ढाई किलो का घूंसा, क्यों कि यहाँ सिर्फ तारीख पर तारीख ही है ...
 
 एक फिल्म में सनी दियोल का डायलॉग खूब चला था 'तारीख पर तारीख'... यह संवाद देश के लोगों ने इसलिए पसंद किया था क्योंकि यह संवाद आम भारतीयों के जीवन का हिस्सा है। देश की न्याय व्यवस्था बस 'तारीख पर तारीख' है। ऐसी व्यवस्था पर सनी दियोल का ढाई किलो का घूंसा भी अच्छा लगेगा, क्योंकि हम सब देश की सडिय़ल व्यवस्था से आक्रांत हैं और इस सडिय़ल व्यवस्था पर घूंसा चलाने की हमारी औकात नहीं है। आप देखिए न, दिल्ली की सड़कों पर चलती हुई बस में वीभत्स तरीके से किसी लड़की के साथ दुराचार किया जाता रहा और हम इस व्यवस्था का एक बाल भी बांका नहीं कर पाए। एक सिपाही मारा गया तो इतना हल्ला मचा। जबकि सिपाही अपनी शारीरिक वजहों से मारा गया, लेकिन इस पर मचाया गया बावेला देश का मौलिक चरित्र है। यह नहीं होता तो दुनिया को कैसे पता चलता कि एक युवती के साथ हुए बलात्कार की लोमहर्षक घटना पर साबित हुए सत्ताई नाकारेपन को लेकर भारतवर्ष में किस तरह झूठ बोला जाता है और उसे परोसा जाता है। इस झूठ को परोसने के लिए कैसे-कैसे आडम्बरी चेहरे आ रहे हैं सामने, वह देख रहे हैं न।
 
 पीडि़त छात्रा को सरकार ने आनन-फानन एयर एम्बुलेंस के जरिए सिंगापुर के माउंट एलिजाबेथ अस्पताल भेज दिया था। अब वो इस दुनिया में नहीं है। आप किसी भ्रम में न रहें, यह युवती के इलाज के लिए नहीं बल्कि आंदोलन का इलाज करने के लिए पीडिता को सिंगापूर भेज गया था। जब झूठ और भ्रष्टाचार की बुनियाद पर टिकी सरकार सिपाही की हत्या का कुचक्र फैलाने में कामयाब नहीं हो पाई और तथाकथित हत्याकांड प्रामाणिक तौर पर टांय-टांय-फिस्स हो गया तो फौरन युवती को सिंगापुर भेजने की जरूरत याद आ गई। सरकार नई-नई पेशबंदियां कर रही है, देशवासियों को इसके बारे में सतर्क रहने की जरूरत है। युवती को सिंगापुर के लिए बड़े ही गोपनीय तरीके से रवाना करने के बाद सफदरजंग अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक बीडी अथानी जिस तरह युवती के स्वास्थ्य की अद्यतन जानकारियां दे रहे थे, उसे आप गौर से देखते सुनते और गुनते तो आप इसे दो दिन पहले की रात ही युवती की मौत के बुलेटिन के रूप में समझ लेते। इस हृदय विदारक घटना के बाद जिस तरह सरकार अपना आचरण दिखा रही है, उससे पूरी दुनिया को यह भ्रम हो गया है कि केंद्र की सरकार बलात्कारियों के साथ है या भुक्तभोगी के साथ? जो घटना प्रामाणिक है, उसकी जांच और प्रति-जांच की जरूरत ही क्या है? यह कोई राजनीतिक मसला था कि जांच की जांच के लिए जांच आयोग का गठन किया जा रहा है। सरकार समझती है कि वह देश के लोगों को झांसा पट्टी दे रही है, जबकि सरकार अपनी असलियत का पर्दाफाश करा रही है।
 
 अगर देश की जनता को जरा भी शर्म होगी तो समय आने पर ऐसी सरकारों, ऐसे नेताओं और ऐसी पार्टियों का हिसाब-किताब चुकता कर लेगी। अपराध पर परदा डालने और न्याय की मांग करने वाले लोगों के खिलाफ आपराधिक कुचक्र में सरकार के शामिल रहने का उदाहरण भारतवर्ष में ही मिल सकता है। इस घटना के बाद तो सड़कों पर यह चर्चा आप सुन लेंगे कि अगर अमेरिका में ऐसी घटना होती और नाराज नागरिक व्हाइट हाउस घेर लेते तो अमेरिकी राष्ट्रपति क्या करते! अमेरिकी राष्ट्रपति बाहर आते, नाराज लोगों से बातें करते, उनके साथ शोक में शरीक होते, आंसुओं से रोते और अपनी प्रशासनिक नाकामियों को कबूल करते हुए अमेरिकी जनता से माफी मांगते। लेकिन यह भारतवर्ष में नहीं हो सकता, क्योंकि ऐसा करने के लिए राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, मंत्री या नेता का नैतिक रूप से मजबूत होना सबसे अधिक जरूरी है।
 
 नैतिकता से हीन लोगों की जमात भारतीय लोकतंत्र की अलमबरदार है, तो उनसे आप नैतिक और साहसिक कदम की अपेक्षा करने की बेवकूफी कैसे कर सकते हैं! हमारे नेता इतने छद्मी और आडम्बरी हैं कि उन्हें जनता के बीच आना सम्मान के खिलाफ लगता है। दरअसल, भारतवर्ष का नेता हीनभावना का शिकार है, वह कुएं का मेढ़क है और कुएं को ही अपना संसार मानता है। उसी कुएं में गंदगी फैलाता है, उसी गंदगी को खाता है और उसी में अन्य मेढ़कों के साथ सियासत करता है। बाहर झांके तब तो उसे पता चले कि व्यक्तित्वों का कैसा आभामंडल है!
 
 यूपी की छात्रा के साथ दिल्ली में जघन्य अपराध करने वाले लोग जिस चरित्र और स्तर के हैं, ऐसे ही लोग अधिकांशत: जब संसद में भी हों तो कैसा व्यक्तित्व और कैसा चरित्र। यह बातें सामान्य नाराजगी में नहीं कही या लिखी जा रही हैं, यह बातें अब दस्तावेजी प्रमाण की तरह हैं। वैसे, नेताओं का व्यवहार अपने आप ही ऐसी दुश्चरित्रता का प्रमाण दे देता है। राजपथ और जनपथ पर प्रदर्शन कर रही महिलाओं पर जब लाठियां बरस रही थीं, तब यही प्रमाण तो देशवासियों के जेहन पर मुहर लगा रहा था....।
 
 
 
 (साभार गगन मिश्र खरी न्यूज डॉट कॉम से )

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

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चन्द्रशेखर करगेती राजतंत्र की राह पर उत्तराखण्ड ?
 
 आज भारत में राजतंत्र के जरिये राजकाज चलाने की प्रथा भले ही इतिहास की बात हो गयी पर, अपने राज्य उत्तराखण्ड के राजनीतिक दलों की राज करने की नीति छद्म लोकतंत्र की आड में बेहतर रूप से राजशाही की राह में अग्रसर है ! आज उत्तराखण्ड में राजनैतिक पदों पर नियुक्तियां, किसी आम कार्यकर्ता के रूप में पार्टी में दिये गये उसके योगदान पर आधारित ना होकर, उसके किसी राजनेता पुत्र तथा परिवारीजन या विशेष दरबारी होने के कारण की जा रही है l
 
 कांगेस हो या भारतीय जनता पार्टी, इनके ज्यादातर नेताओं ने पार्टी के कर्मठ, लगनशील तथा स्वच्छ ईमानदार छवि के आम कार्यकर्ताओं को नजरअंदाज कर अपने परिवारीजनों, खासकर अपने बेटों को आगे बढाने की होड़ सी मची हुई है l चुनावों में टिकट देने की बात हो या फिर समितियों, संस्थाओं में मनोनयन, इन सबकी दौड में नेता पुत्र ही सबसे आगे खड़े मिलेंगे !   
 
 नेता पुत्रों के अतिरिक्त समितियों, संस्थाओं में मनोनयन पर अगर चर्चा की जाये तो, यहाँ भी नेताओं ने सारे पद अपने जकड़ेत दरबारियों में ही बांटे हैं, राजशाही के दौरान ये जकड़ेत राजाओं के चारण-भाट हुआ करते थे, जिनसे राजा घिरा रहता था, ये अपने राजा की हर सही-गलत बात को बिना परखे, राजा की हाँ में हाँ मिलाते थे, तब भी इन जकड़ेतों का राज्य की आम प्रजा के सुख दुखो से कोई वास्ता नहीं होता था, लेकिन राजा इनसे प्रसन्न रहता था, कोमोबेश इसी प्रकार माहोल का आज उत्तराखण्ड में पुन: बनने लगा है l
 
 राज्य बनने के बाद से लेकर वर्तमान समय तक ये दरबारी जकड़ेत पार्टीयों के कर्मठ, समर्पित और ईमानदार आम कार्यकर्ताओं पर हावी रहें है, इनकी पैतरेबाजी से पार पाना आम पार्टी कार्यकर्ता के बस की बात भी नहीं है l हल्द्वानी ,रुद्रपुर, देहरादून, हरिद्वार की सड़कों-गली मोहल्लों के मेंन चौराहों तथा नेताओं की आलीशान कोठियों के बाहर लगे इनके बधाई संदेशो और मुशायरों के बड़े-बड़े फ्लेक्सी बोर्ड, इस बात की गवाही देते हैं l 
 
 ऐसा लगता है कि वर्तमान पीढ़ी के ज्यादातर राजनेता जब अपनी राजनैतिक पारी को खत्म करेंगे, तब तक इनके नौनिहाल और जकड़ेत राजदरबारी इनकी राजनैतिक विरासत के उत्तराधिकारी के रूप में सत्ता का आनन्द लेने लायक हो जायेंगे, इन सबका खामियाजा उन तमाम आम युवा कार्यकर्ताओं के साथ ही राज्य की जनता को भी भुगतना पडेगा जो राज्य और अपने समाज के लिए कुछ करने की तमन्ना लेकर राजनीति में आयें हैं l     
 
 (सन्दर्भ : दैनिक हिन्दुस्तान) — with Vijaya Pant Tuli Mountaineer and 55 others.राजतंत्र की राह पर उत्तराखण्ड ? आज भारत में राजतंत्र के जरिये राजकाज चलाने की प्रथा भले ही इतिहास की बात हो गयी पर, अपने राज्य उत्तराखण्ड के राजनीतिक दलों की राज करने की नीति छद्म लोकतंत्र की आड में बेहतर रूप से राजशाही की राह में अग्रसर है ! आज उत्तराखण्ड में राजनैतिक पदों पर नियुक्तियां, किसी आम कार्यकर्ता के रूप में पार्टी में दिये गये उसके योगदान पर आधारित ना होकर, उसके किसी राजनेता पुत्र तथा परिवारीजन या विशेष दरबारी होने के कारण की जा रही है l कांगेस हो या भारतीय जनता पार्टी, इनके ज्यादातर नेताओं ने पार्टी के कर्मठ, लगनशील तथा स्वच्छ ईमानदार छवि के आम कार्यकर्ताओं को नजरअंदाज कर अपने परिवारीजनों, खासकर अपने बेटों को आगे बढाने की होड़ सी मची हुई है l चुनावों में टिकट देने की बात हो या फिर समितियों, संस्थाओं में मनोनयन, इन सबकी दौड में नेता पुत्र ही सबसे आगे खड़े मिलेंगे ! नेता पुत्रों के अतिरिक्त समितियों, संस्थाओं में मनोनयन पर अगर चर्चा की जाये तो, यहाँ भी नेताओं ने सारे पद अपने जकड़ेत दरबारियों में ही बांटे हैं, राजशाही के दौरान ये जकड़ेत राजाओं के चारण-भाट हुआ करते थे, जिनसे राजा घिरा रहता था, ये अपने राजा की हर सही-गलत बात को बिना परखे, राजा की हाँ में हाँ मिलाते थे, तब भी इन जकड़ेतों का राज्य की आम प्रजा के सुख दुखो से कोई वास्ता नहीं होता था, लेकिन राजा इनसे प्रसन्न रहता था, कोमोबेश इसी प्रकार माहोल का आज उत्तराखण्ड में पुन: बनने लगा है l राज्य बनने के बाद से लेकर वर्तमान समय तक ये दरबारी जकड़ेत पार्टीयों के कर्मठ, समर्पित और ईमानदार आम कार्यकर्ताओं पर हावी रहें है, इनकी पैतरेबाजी से पार पाना आम पार्टी कार्यकर्ता के बस की बात भी नहीं है l हल्द्वानी ,रुद्रपुर, देहरादून, हरिद्वार की सड़कों-गली मोहल्लों के मेंन चौराहों तथा नेताओं की आलीशान कोठियों के बाहर लगे इनके बधाई संदेशो और मुशायरों के बड़े-बड़े फ्लेक्सी बोर्ड, इस बात की गवाही देते हैं l ऐसा लगता है कि वर्तमान पीढ़ी के ज्यादातर राजनेता जब अपनी राजनैतिक पारी को खत्म करेंगे, तब तक इनके नौनिहाल और जकड़ेत राजदरबारी इनकी राजनैतिक विरासत के उत्तराधिकारी के रूप में सत्ता का आनन्द लेने लायक हो जायेंगे, इन सबका खामियाजा उन तमाम आम युवा कार्यकर्ताओं के साथ ही राज्य की जनता को भी भुगतना पडेगा जो राज्य और अपने समाज के लिए कुछ करने की तमन्ना लेकर राजनीति में आयें हैं l (सन्दर्भ : दैनिक हिन्दुस्तान) height=131Like ·  · Share · 2 hours ago ·

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

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हुजूर माई बाप रहम करो इस राज्य पर !

वाह बिज्जी भैजी, क्या खूब तोहफा दिया आपने नये साल का इस राज्य की जनता को, मानना पडेगा साहब, आप वाकई में दूर दृष्टि (गिद्ध) रखते हैं, बस कमी रही तो इस बात की, कि आपको नजदीक में कुछ दिखाई नहीं देता ?

अरे साहब आप और आपके मंत्री साहिबान कभी हिमाचल का ही दौरा कर आते, वहाँ का भूमि प्रबंधन ही देख आते, अरे साहब कभी केरल और आंध्र प्रदेश का या राजस्थान का पंचायती राज एक्ट ही पढ़ आते, देखते तो सही वहाँ की स्थानीय निकायों को क्या क्या अधिकार दिए है वहाँ के हुक्मरानों ने ? अरे साहब और कुछ नहीं तो हरियाणा, पंजाब या गुजरात के डेयरी उद्योग का ही अध्ययन करवा देते ? खैर साहब वो समझ में नहीं आता तो असम की कम्पाउंड एग्रीकल्चर का मुआयना ही करवा देते अपने सहोदरों को ? अरे साहब और कुछ और नहीं तो अपनी मेडम सोनियां आन्टी के बोल बचन की ही लाज रख लेते, जो अभी थोड़े दिन पहले सूचना अधिकार की उपलब्धि का ढिंढोरा पीटते नहीं थक रही थी, आपने तो कल अपने सहयोगियों के साथ मिलकर उसे भी अपाहिज बनाने में कोई कौर कसार नहीं छोड़ी ?

वाकई माई लॉर्ड भैजी आप महान हैं, जो काम आपके बब्बा कभी परदे में भी ना कर पाये, वो आप खुल्लम खुल्ला कर रहें है ? अरे साहब इस गरीब प्रदेश की माली हालत का तो ध्यान रख लिया होता, अपने पिछले सहोदरों के विदेशी दौरों की रिपोर्ट का तो अध्ययन कर लिया होता, इस राज्य की जनता से उसे शेयर तो कर लिया होता, अरे साहब इस जनता का भी तो कुछ हक बनता है ना ? आखिर उसी के प्रताप से ही तो आपके घर का चूल्हा जलता है !

खैर भैजी रे इस ग्याडू जनता को भी दिन आलू, अभी बात गयी नहीं ना चुनाव रिते हैं, एक दिन टिहरी फिर दोहराई जायेगी !
By: चन्द्रशेखर करगेती

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चन्द्रशेखर करगेती उत्तराखण्ड सुचना आयोग में भी बड़ा गडबडझाला है महाराज ?
 
 जो लोग ये समझते है कि राज्य सुचना आयोग निष्पक्ष हो सुनवाई करता है वे सचेत हो जाये ! जिस संस्थान की जिम्मेदारी है कि वह "सुचना अधिकार अधिनियम 2005" के अधीन पहले स्वयं स्वतंत्र रूप से कार्य करें और सुचना नहीं देने वाले विभागों के खिलाफ कार्यवाही करे, उस संस्थान के खुद के लोक सुचना अधिकारी एवं विभागीय अपीलीय अधिकारी आवेदक को सही सुचना देने के प्रति गंभीर नहीं है !
 
 उन्होंने मेरे द्वारा माँगी गयी सुचना पर इस प्रकार के उटपटाँग जवाब दिए है कि उन्हें अगर सामान्य बुद्धि का व्यक्ति भी पढेगा तो कहेगा कि सुचना आयोग का कार्यालय जानबूझकर स्वयं जवाब नहीं देना चाहता, और वे सुचना के सार्वजनिक हो जाने से डर रहें हैं ?
 
 आयोग का कार्यालय सुचना आवेदन पर सीधे जवाब क्यों नहीं देना चाहता यह तो वे ही जाने पर अपनी खोपड़ी च में एक ही बात आती है, गुरु कहीं न कहीं जरुर कोई बड़ा लोचा है !
 
 क्या होलू भैजी अपरा उत्तराखण्ड को.....

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चन्द्रशेखर करगेती लो एक और लो !
 
 पूरा देश कीचड़ में तब्दील हो गया है, कीचड़ में हाथी नाच रहा है, इसी कीचड़ में
 कुछ लोग अपनी सायकिल चलाने में व्यस्त हैं, हसिया-हथोड़ा वाले कीचड़ हटाने
 में विश्वास नहीं करते, उनका मत है कि यहीं से घास उगेगी, हसिया लेकर वो
 घास काटने जायेंगे, हथोडे कभी सायकिल ठीक करने के काम आते हैं तो कभी पंजे
 में पकड़ने के काम आते हैं,
 
 पंजे की गिरफ्त में हाथी भी है, सायकिल भी पंजे  ने ही पकड़ रखी है, हसिया-हथोड़ा भी पंजे की पकड़ में है.....एक पंजा लंबे अरसे से सब पर कीचड़ उछालने में लगा है....कुछ लोग इस कीचड़ में कमल खिलते हुए देखना चाहते हैं....कीचड़ हटाने में उन्हें मजा नहीं आता, कीचड़ ही नहीं रहेगा तो कमल कैसे खिलेगा...
 
 उन्हें इस बात की बेहद चिंता है......काश कि कोई फावड़ा लेकर आता...तो शायद कीचड़ हट पाता...लेकिन इतनी हिम्मत किसमें है...फावड़ा उठाने के लिए दो पूरे-पूरे हाथों की जरुरत है....कटे हुए पंजों की नहीं...!
 
 इस कीचड़ से सने हुए देश में गब्बर सिंह को होली खेलने में बड़ा मजा आता है....वो हाथ कटे हुए ठाकुर को चिढाने के लिए आज भी सम्भा से पूछता है "होली कब है...कब है होली..?" 
 
 कालिया सिर्फ़ मरने के लिए पैदा हुआ है, क्योंकि उसने गब्बर का नमक खाया है. वीरू बसंती के चक्कर में फंसा है, अंग्रेजों के जमाने के जेलर आज भी जय और वीरू को कैद करके आतंकवादी घोषित करने में लगे हैं.....!...
 
 (ये भी बूँद से शेयर है)

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चन्द्रशेखर करगेती माताजी का अवतार.........
 
 इस पर्चे को ध्यान से पढ़े। यह एक सत्य कथा है। उत्तराखंड में एक माताजी का अवतार हुआ है । वह जो कहती हैं उसका पफल तुरंत प्राप्त होता है । सतयुग के बाद देवभूमि उत्तराखंड में माताजी का पहली बार अवतार हुआ है । जो भी माताजी की कथा का श्रवण करता है उसे ध्न की प्राप्ति होती है । प्रवास में रहने वाले भक्तों का दुख हरने के लिये ही माताजी ने धरती पर अवतार लिया है । जो माताजी की कहानी को नही पढ़ेगा उसे कोई भी नुकसान हो सकता है । जिसने माताजी का गुणगान किया वो मालामाल हो गया । इस पर्चे पढ़ने के बाद जो इसको एक हजार बार फारवार्ड करेगा उसे मनवांछित पफल मिलेगा । जो इस कथा को झूठ समझेगा उसे माताजी के कोप का भाजन होना पड़ेगा ।
 
 राजधानी दिल्ली में कई संगठनों और व्यक्तियों ने माताजी के चरणों में अपने को समर्पित किया वो मालामाल हो गये हैं  । माताजी की कृपा से उत्तराखंड की संस्कृति, गीत-संगीत, कला बची हुयी है । माताजी नहीं होती तो उत्तराखंडी गीत-संगीत ही समाप्त हो गया था । कलयुग की इस देवी को शत्-शत् नमन । माताजी आपने उत्तराखंड को बचा लिया । माताजी की छाया में प्रवास में कई संगठनों ने उत्तराखंड के स्वाभिमान को जिन्दा रखा है । एक संगठन ने माताजी का गुणगान किया तो उसे पांच लाख रुपये मिले । इसके बाद दूसरा संगठन भी माताजी के चरणों में गया उसे 11 लाख की कृपा बरसी। देखते ही देखते पिछले दो-तीन सालों में दिल्ली में माताजी की ऐसी कृपा बरसी कि सारे लोग उत्तराखंड की संस्कृति पर कुर्बान हो गये हैं । दिल्ली के कई कार्यक्रमों में मंचों पर माताजी की कृपा पाने के लिये हजारों की तादात में लोग जुट रहे हैं। हर कोई माताजी की कृपा पाना चाहता है । इस धनवर्षा में सब भीगना चाह रहे हैं । जय हो माता जी की । माताजी ने पूरे पहाड़ को तारने के लिये अब जगह-जगह अपने दर्शन देने शुरू कर दिये है । हमारे नेता माताजी के हर आयोजन में जा रहे हैं । उनसे अपना आशीर्वाद ले रहे हैं । माताजी की ऐसी कृपा है कि जो कल तक बेचारे दर-दर की ठोकरें खा रहे थे आज कारों में घूम रहे हैं । माताजी ने कई बीमार लोगों को मौत के मुंह से बाहर निकाला है । माताजी के भक्त पूरे उत्तराखंड में फैले हैं जहां जिस तरह की जरूरत होती है माताजी को सूचित किया जाता है । माताजी वहां तुरंत पहुंचती हैं । भक्तों पर लाखों की बरसात करती हैं । आपको किसी प्रकार का सामाजिक काम करना हो तो लोगों के बीच चंदा मांगने की बजाए माताजी के चरणों में जाना चाहिये । वहां आपकी मनोकामना पूरी होगी । इस पर्चे को अध्कि से अध्कि लोगों तक पहुंचाने से आपको भी पुण्य मिलेगा ।
 
 आप यह समझेंगे कि माताजी का यह गुणगान फर्जी है तो आप विद्वानों से भी पूछ सकते हैं । पिछले दो सालों से विद्वानों पर भी माताजी की कृपा बरस रही है । जिन लोगों को पहाड़ के सवालों पर सरकार और नीति-नियंताओं से बात करनी थी वे भी अब माताजी के शरणागत हैं । इन लोगों पर माताजी की ध्न कृपा लगातार बनी है। मैं आपको एक कहानी सुनाता हूँ भारत देश की राजधनी में लिखने-पढ़ने वालों का एक संगठन था । यह संगठन बहुत गरीब था । खाने-पीने के भी लाले पड़े थे । कई दिनों से बुद्धिजीवियों के संगठनों ने अपने घर के दरवाजा आध ही खोला था । घर की माली हालत को देखकर कोई उधर जाता भी नहीं था । ये गरीब बेचारे किसी सहारे के इंतजार में थे ।
 
 आखिरकार इन्होंने फैसला किया कि सामूहिक आत्महत्या कर लें । इन लोगों ने यह फैसला लिया ही था कि माताजी की अंतरदृष्टि इन पर पड़ गयी । दो वर्ष पहले इन बेचारों पर पांच लाख की कृपा बरसी । उसके बाद तो माताजी की कृपा से राज्य के मुखियाओं का भी आना-जाना शुरू हुआ । अब माताजी ने इनके कुनवे को मालोमाल कर दिया है । माताजी की कृपा से कई वे लोग भी तर गये हैं जिन्हें राज्य में कोई नहीं पूछ रहा था । कई लोगों को माताजी की कृपा से सम्मान भी प्राप्त हो रहा है । जो लोग इस कहानी के खिलाफ बोल रहे थे उन्हें माताजी और उनके भक्तों का कोपभाजन बनना पड़ा है । कई लोगों को कुनबे वालों ने या तो निकाल दिया या फिर घर के दरवाजे नये लोगों के लिये बंद कर दिये । जिस समय एक क्लब में माताजी पैसों की वर्षा कर रही थी उसमें कोई राक्षस विध्न पैदा न करें इसके इंतजाम पहले से ही कर दिये थे ।
 
 पिछले सत्संग में कुछ राक्षस अंदर घुस आये थे जो माताजी की सरपरस्ती में तत्कालीन राज्य प्रमुख से कुछ सवाल कर रहे थे । आप भी इस पर्चे को अधिक से अधिक  लोगों तक पहुंचाकर पुण्य के भागी बनें । जो इसे झूठ समझेगा उसका भला नहीं होगा । माताजी का अवतार सबको तारने वाला है । जय हो माताजी की ।Unlike ·  · Follow Post · Monday at 8:04pm

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

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आंटी आप तो कहती थी कि विकास की गंगा बहेगी, पर ये क्या ? 
 
 
 अपने उत्तराखण्ड में बयानों और कागजों में विकास की गंगा खूब बह रही है, मगर जमीनी हकीकत क्या है, यह हल्द्वानी शहर के राजपुरा वार्ड न. 02 क्षेत्र की यह तस्वीर साफ बयां कर रही है । वर्षो से एक सड़क व नाली निर्माण के लिए संघर्ष कर रहे लोगों ने जनप्रतिनिधियों से लेकर अधिकारियों तक न जाने कितनी मिन्नतें कीं होंगी । इस दौरान इस शहर ने तीन-तीन चुनाव भी देखे, चुनाव लड़ने वाले राजनैतिक दलों के प्रत्यासियों ने सुख दुःख में काम आने के अटूट आश्वासन भी दिये साथ ही विकास के कुछ वादे भी किये पर, राजनेताओं के वादे आखिरकार वादे ही होते हैं l जब क्षेत्र के निवासियों की समस्या को किसी ने नहीं सुना तो लोगों ने मिल बैठ कुछ ऐसा करने का निर्णय लिया जो इस शहर में विकास के ठेकेदार बने मंत्री-संत्रियों और उनके लगुवे भगुवों के मुंह पर किसी तमाचे से कम नहीं है ।
 
 राजपुरा वार्ड न. 02 के निवासियों ने दिनांक 30-01-2013 को सरकारी तंत्र के सामने अपने जज्बे की एक ऐसी मिसाल पेश की जिसे आने वाले समय में शहर के लोग भले ही याद करें न करें लेकिन इन मोहल्ले वालों को अपनी समस्याओं का समाधान निकालने का रास्ता जरुर मिल गया l करीब पांच साल से मोहल्ले की ध्वस्त पडी सड़क के पुनर्निर्माण की मांग को लेकर नगर निगम के दफ्तर में कई बार शिकायतें करने के बाद भी जब कोई कार्यवाही नहीं हुई, तो मोहल्ले वालों ने चन्दा कर अपने संशाधनो से करीब 60 मीटर आरसीसी सड़क के साथ नाली का भी निर्माण कर डाला ।
 
 राजपुरा वार्ड न. 02 शिव मंदिर स्थित मोहल्ले में सड़क सालों से खस्ताहाल थी । जब नगर निगम और जन प्रतिनिधियों के दरबार में शिकायत पर सुनवाई नहीं हुई तो मोहल्ले के करीब 15 उत्साही लोगो ने चन्दा इकठ्ठा कर स्वयं सड़क और नाली बना डाली, इस काम को पूरा करने में खास बात यह रही कि पुरे मोहल्लेवालों ने इस कार्य को करने में श्रमदान भी किया ।
 
 यह बात दीगर  है कि राजपुरा वार्ड 02 में जहां यह निर्माण कार्य हुआ है, वहाँ रहने वाले अधिकाशं लोग स्वयं नगर निगम के कर्मचारी है । चेतना के आभाव में सोये पड़े इस हल्द्वानी शहर को दिशा दिखाने  की यह पहल बाल्मीकि समाज सेवा समिति ने की l इस पहल को करने वालो में राजपुरा वार्ड न. 02 के निवासी कुलदीप सिंह बिष्ट, अंकित पंवार, दीपक कुमार, सौरभ कुमार, संजय कुमार तथा अरुण के नाम उल्लेखनीय है l       
 
 (आभार: दैनिक दिन्दुस्तान एवं दैनिक जागरण) — with Vinod Singh Gariya and 92 others.आंटी आप तो कहती थी कि विकास की गंगा बहेगी, पर ये क्या ? अपने उत्तराखण्ड में बयानों और कागजों में विकास की गंगा खूब बह रही है, मगर जमीनी हकीकत क्या है, यह हल्द्वानी शहर के राजपुरा वार्ड न. 02 क्षेत्र की यह तस्वीर साफ बयां कर रही है । वर्षो से एक सड़क व नाली निर्माण के लिए संघर्ष कर रहे लोगों ने जनप्रतिनिधियों से लेकर अधिकारियों तक न जाने कितनी मिन्नतें कीं होंगी । इस दौरान इस शहर ने तीन-तीन चुनाव भी देखे, चुनाव लड़ने वाले राजनैतिक दलों के प्रत्यासियों ने सुख दुःख में काम आने के अटूट आश्वासन भी दिये साथ ही विकास के कुछ वादे भी किये पर, राजनेताओं के वादे आखिरकार वादे ही होते हैं l जब क्षेत्र के निवासियों की समस्या को किसी ने नहीं सुना तो लोगों ने मिल बैठ कुछ ऐसा करने का निर्णय लिया जो इस शहर में विकास के ठेकेदार बने मंत्री-संत्रियों और उनके लगुवे भगुवों के मुंह पर किसी तमाचे से कम नहीं है । राजपुरा वार्ड न. 02 के निवासियों ने दिनांक 30-01-2013 को सरकारी तंत्र के सामने अपने जज्बे की एक ऐसी मिसाल पेश की जिसे आने वाले समय में शहर के लोग भले ही याद करें न करें लेकिन इन मोहल्ले वालों को अपनी समस्याओं का समाधान निकालने का रास्ता जरुर मिल गया l करीब पांच साल से मोहल्ले की ध्वस्त पडी सड़क के पुनर्निर्माण की मांग को लेकर नगर निगम के दफ्तर में कई बार शिकायतें करने के बाद भी जब कोई कार्यवाही नहीं हुई, तो मोहल्ले वालों ने चन्दा कर अपने संशाधनो से करीब 60 मीटर आरसीसी सड़क के साथ नाली का भी निर्माण कर डाला । राजपुरा वार्ड न. 02 शिव मंदिर स्थित मोहल्ले में सड़क सालों से खस्ताहाल थी । जब नगर निगम और जन प्रतिनिधियों के दरबार में शिकायत पर सुनवाई नहीं हुई तो मोहल्ले के करीब 15 उत्साही लोगो ने चन्दा इकठ्ठा कर स्वयं सड़क और नाली बना डाली, इस काम को पूरा करने में खास बात यह रही कि पुरे मोहल्लेवालों ने इस कार्य को करने में श्रमदान भी किया । यह बात दीगर  है कि राजपुरा वार्ड 02 में जहां यह निर्माण कार्य हुआ है, वहाँ रहने वाले अधिकाशं लोग स्वयं नगर निगम के कर्मचारी है । चेतना के आभाव में सोये पड़े इस हल्द्वानी शहर को दिशा दिखाने  की यह पहल बाल्मीकि समाज सेवा समिति ने की l इस पहल को करने वालो में राजपुरा वार्ड न. 02 के निवासी कुलदीप सिंह बिष्ट, अंकित पंवार, दीपक कुमार, सौरभ कुमार, संजय कुमार तथा अरुण के नाम उल्लेखनीय है l (आभार: दैनिक दिन्दुस्तान एवं दैनिक जागरण) height=278Like ·  · Share · about an hour ago ·

 

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