Author Topic: Tourism and Hospitality Industry Development & Marketing in Kumaon & Garhwal (  (Read 26758 times)

Bhishma Kukreti

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 योग गुरु बी के एस  आयंगार को भी अंग्रेजी नहीं आती थी

उत्तराखंड चिकित्सा सेवा निर्यात हेतु  विदेशी भाषा जानकार योग प्रशिक्षकों की आवश्यकता

Foreign language Conversant  Yoga Instructors for Medical Services Export Development 
Health Services Export Strategies -4
चिकित्सा सेवा निर्यात रणनीति - 4

उत्तराखंड में चिकत्सा पर्यटन  रणनीति - 227

Medical Tourism development  Strategies -227

उत्तराखंड पर्यटन प्रबंधन परिकल्पना - 334

Uttarakhand Tourism and Hospitality Management -334

 

आलेख - विपणन आचार्य भीष्म कुकरेती

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कल जब इस लेखक ने सॉस मीडिया में उत्तराखंड से मेडिकल सर्विसेज निर्यात हेतु योग प्रशिक्षकों की कमी चर्चा की तो एक प्रबुद्ध ग्रामीण उत्तराखंड में महाविद्यालय में सेवारत प्राध्यापक की टिप्पणी थी कि उत्तराखंड में योग अध्यापक बेरोजगार हैं।  समस्या कुछ और है।  योग सीखने या योग पर्यटन हेतु विदेशी पर्यटक ऋषिकेश, हरिद्वार  में अधिक आते हैं और उन्हें हिंदी ज्ञान नहीं होता तो उन्हें योग या अन्य धार्मिक ज्ञान हेतु हिंदी नहीं विदेशी भाषा जानकार प्रशिक्षक  ही चाहिए।  सर गुड मॉर्निंग गुड इवनिंग से विदेशियों को योग नहीं सिखाया जा सकता।  सर गुड मॉर्निंग या 'योगा बैग इन फोर्टी रुपया 'से गैर हिंदी भाषियों को ताम्बे का लोटा या रामनामी थैला तो बेचा जा सकता है किन्तु योग नहीं सिखाया जा सकता।  विदेशियों को योग सिखाने हेतु विदेशी भाषा जानकार होना आवश्य्क है।
    उत्तराखंडी हिंदी से इतना प्रेम करते हैं कि हिंदी हेतु अपनी मातृभाषा तो त्यागते ही हैं अंग्रेजी व विदेशी भाषा सीखने के बहाना भी खोज लेते हैं। यहां तक कि अंग्रेजी माध्यम में पढ़े भी अंग्रेजी से दूर रहने का बहाना खोजने में उस्ताद दीखते हैं।
     एक गलत फहमी यह है बल किसान पुत्र या गरीब घराने के , शिल्पकार घराने के पुत्री पुत्र कैसे अंग्रेजी सीखेगा।  यह केवल बहाना है।
 प्रसिद्ध योग गुरु  बी के ऐस आयंगर  की अंग्रेजी माध्यम में योग पर कई पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं और सबसे अधिक विदेशों में बिकने वाले लेखक हैं।  आचार्य आयंगर को भी अंग्रेजी नहीं आती थी किन्तु योग सिखाने के तीस वर्ष तक उन्हें अंग्रेजी ज्ञान ना के बराबर ही था।  जब उन्होंने अंग्रेजी में पुस्तक लिखने की सोची तो अंग्रेजी सीखी और ऐसी सीखी कि आज उनकी पुस्तकें योग पुस्तकों में सर्वाधिक निर्यात होती हैं।  उनके 'लाईट ऑन योग सूत्र ऑफ पतंजलि ' में उनकी प्रस्तावना में आयंगर लिखते हैं बल प्रशिक्षण शुरू करने के ३० साल बाद भी उनका अंग्रेजी ज्ञान सामन्य ही था।  मेहनत से उन्होंने अंग्रेजी भाषा में पारंगत हासिल की व प्रसिद्ध लेखक बने।   विदेशी भाषा सीखने की कोई उम्र नहीं होती व कोई समय या जाति बंधन नहीं होता है।   
 शल्य शास्त्र पितामह सुश्रुत भी शिल्पकार थे किन्तु उन्होंने भी संस्कृत अध्ययन किया व सुश्रुत संहिता की रचना की जो संसार की पहली शल्य चिकित्सा पुस्तक है। भाषा सीखने हेतु जाति कोई बंधन नहीं होटापितु आत्मबल बंधन होता है। 
     यदि कमाऊ योग पप्रशिक्षक   बनना है तो अंग्रेजी ही नहीं एक अन्य विदेशी भाषा का जानकार होना भी आवश्यक है।  उत्तराखंड समाज को ऋषिकेश , हरिद्वार में विदेशी भाषाएँ शिक्षण कोचिंग क्लासेज स्थापित करने ही चाहिए।  योग प्रशिक्षण विद्यार्थियों को योग संग संग अंग्रेजी व एक अन्य भासा भी सीखनी आवश्यक है।  ऋषिकेश में विदेशी भाषा सीखने के कोचिंग सेंटर्स में वृद्धि आवश्यक है और यह सरकार नहीं अपितु समाज का उत्तरदायित्व है।
   
 

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Foreign Language Conversant  Yoga Instructors  for Medical Services  Export from Garhwal , Uttarakhand ; Foreign Language Conversant  Yoga Instructors  for Medical Services  Export from Chamoli Garhwal , Uttarakhand;  Foreign Language Conversant  Yoga Instructors  for Medical Services  Export from  Rudraprayag Garhwal , Uttarakhand; Foreign Language Conversant  Yoga Instructors  for Medical Services  Export from   Pauri Garhwal , Uttarakhand; Foreign Language Conversant  Yoga Instructors  for Medical Services  Export from   Tehri Garhwal , Uttarakhand; Foreign Language Conversant  Yoga Instructors  for Medical Services  Export from  Uttarkashi  Garhwal , Uttarakhand; Foreign Language Conversant  Yoga Instructors  for Medical Services  Export from   Dehradun Garhwal , Uttarakhand; Foreign Language Conversant  Yoga Instructors  for Medical Services  Export from    Haridwar Garhwal , Uttarakhand; Foreign Language Conversant  Yoga Instructors  for Medical Services  Export from  Pithoragarh  Kumaon , Uttarakhand; Foreign Language Conversant  Yoga Instructors  for Medical Services  Export from Champawat    Kumaon , Uttarakhand; Foreign Language Conversant  Yoga Instructors  for Medical Services  Export from   Almora Kumaon , Uttarakhand; Foreign Language Conversant  Yoga Instructors  for Medical Services  Export from Nainital   Kumaon , Uttarakhand; Foreign Language Conversant  Yoga Instructors  for Medical Services  Export from  Udham Singh Nagar  Kumaon , Uttarakhand;

पौड़ी गढ़वाल मेडिकल सर्विसेज निर्यात हेतु विदेशी भाषा जानकार योग प्रशिक्षक ; उधम सिंह नगर कुमाऊं  मेडिकल सर्विसेज निर्यात हेतु विदेशी भाषा जानकार योग प्रशिक्षक ;  चमोली गढ़वाल मेडिकल सर्विसेज निर्यात हेतु विदेशी भाषा जानकार योग प्रशिक्षक  ; नैनीताल कुमाऊं  मेडिकल सर्विसेज निर्यात हेतु विदेशी भाषा जानकार योग प्रशिक्षक ;  रुद्रप्रयाग गढ़वाल मेडिकल सर्विसेज निर्यात हेतु विदेशी भाषा जानकार योग प्रशिक्षक ; अल्मोड़ा कुमाऊं  मेडिकल सर्विसेज निर्यात हेतु विदेशी भाषा जानकार योग प्रशिक्षक  ; टिहरी   गढ़वाल मेडिकल सर्विसेज निर्यात हेतु विदेशी भाषा जानकार योग प्रशिक्षक ; चम्पावत कुमाऊं  मेडिकल सर्विसेज निर्यात हेतु विदेशी भाषा जानकार योग प्रशिक्षक ;  उत्तरकाशी गढ़वाल मेडिकल सर्विसेज निर्यात हेतु विदेशी भाषा जानकार योग प्रशिक्षक ; पिथौरागढ़ कुमाऊं  मेडिकल टूरिज्म विकास;  देहरादून गढ़वाल मेडिकल सर्विसेज निर्यात हेतु विदेशी भाषा जानकार योग प्रशिक्षक ; रानीखेत कुमाऊं  मेडिकल टूरिज्म विकास; हरिद्वार  गढ़वाल मेडिकल सर्विसेज निर्यात हेतु विदेशी भाषा जानकार योग प्रशिक्षक ; डीडीहाट  कुमाऊं  मेडिकल सर्विसेज निर्यात हेतु विदेशी भाषा जानकार योग प्रशिक्षक ;   नैनीताल  कुमाऊं मेडिकल सर्विसेज निर्यात हेतु विदेशी भाषा जानकार योग प्रशिक्षक :





Bhishma Kukreti

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योग पर्यटक स्थल पथप्रर्दशक  पुस्तक की आवश्यकता

Need of Yoga Tourist Guide book  for Medical Services Export Development 
Health Services Export Strategies -5
चिकित्सा सेवा निर्यात रणनीति - 45

उत्तराखंड में चिकत्सा पर्यटन  रणनीति - 228

Medical Tourism development  Strategies -228

उत्तराखंड पर्यटन प्रबंधन परिकल्पना - 335

Uttarakhand Tourism and Hospitality Management -335

 

आलेख - विपणन आचार्य भीष्म कुकरेती

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 मेडिकल या कोई भी पर्यटन कोई फैक्ट्री नहीं कि  कच्चा माल मशीन में डाला और बिक्री हेतु माल बाहर आ जाय।  मेडिकल या आनंद पर्यटन एक जटिल व्यवसाय है जिसमे दसियों भागीदारों की आवश्यकता पड़ती है।  कई भागीदार (Stakeholder ) तो सदा नेपथ्य में ही रहते हैं किन्तु उनकी  आवश्यकता अधिक पड़ती है।

  योग पर्यटन सेवा निर्यात के कई आयाम हैं उनमे से एक - उत्तराखंड : सर्व श्रेष्ठ योग स्थल ब्रैंडिंग भी है . योग पर्यटक क्षेत्र ब्रैंडिंग हेतु उत्तराखंड में चल रहे सभी छोटे बड़े योग केंद्र , योग आश्रम व होटल /रिजॉर्ट में योग अभ्यास सुविधा की समग्र जानकारी एक ही पुस्तक में मिलना आवश्यक है और समय की भी मांग है।

 जब किसी पुस्तक में सभी योग केंद्रों की सूचना उपलब्ध होगी तो ग्राहकों को सुविधा भी रहेगी वउत्तराखंड योग टूरिज्म का प्रचार प्रसार व सकारात्मक छवि बनेगी।

  उत्तराखंड  योग पर्यटन गाइड में निम्न सूचनाएं होनी आवश्यक हैं

केंद्र /आश्रम /योग अभ्यास सेवा - किस तरह का योग अभ्यास होता है।

केंद्र किस प्रकार का है आश्रम , ट्रस्ट , व्यापारिक आदि

सम्पर्क , पता आदि

कितने सालों से योग अभ्यास सुविधा उपलब्ध है

योग प्प्रशिक्षक सूचना

अभ्यास समय

क्या क्या अन्य सुविधाएं मिलती हैं

रजिस्ट्रेशन

फीस की सूचना , क्रडिट कारदादि सुविधा

बुकिंग नियम

आवास  भोजन, परिहवन   पास पोर्ट वीसा सुविधा वृत्तांत

कैसे पहुंचें - रेल , बस , कार , हवाई जहाज आदि सभी सूचनाएं

निकटवर्ती टूरिस्ट स्थलों , होटलों ,  भोजनालयों की सूचना

अन्य विशेष सूचनाएं यदि हों तो

याने पुस्तक समग्र  उत्तराखंड योग पर्यटन गाइड हो।

इस कार्य में सौ हेमा उनियाल जैसे पर्यटन अन्वेषी को आगे आना चाहिए और उत्तराखंड योग पथ प्रर्दशनिका पुस्तक प्रकाशित करनी ही चाहिए व साथ में अंग्रेजी में भी पुस्तक छपनी आवश्यक है। श्री सुनील उनियाल , सुनील नेगी व गणेश सती  जैसे अंग्रेजी लेखकों को अनुवाद कर इस यज्ञ में शामिल होना उचित है। 


 


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Yoga Tourist Guide books for Medical Tourism development in Garhwal , Uttarakhand ; Yoga Tourist Guide books for Medical Tourism development in Chamoli Garhwal , Uttarakhand;  Yoga Tourist Guide books for Medical Tourism development in  Rudraprayag Garhwal , Uttarakhand; Yoga Tourist Guide books for Medical Tourism development in   Pauri Garhwal , Uttarakhand; Yoga Tourist Guide books for Medical Tourism development in   Tehri Garhwal , Uttarakhand; Yoga Tourist Guide books for Medical Tourism development in  Uttarkashi  Garhwal , Uttarakhand; Yoga Tourist Guide books for Medical Tourism development in   Dehradun Garhwal , Uttarakhand; Yoga Tourist Guide books for Medical Tourism development in    Haridwar Garhwal , Uttarakhand; Yoga Tourist Guide books for Medical Tourism development in  Pithoragarh  Kumaon , Uttarakhand; Yoga Tourist Guide books for Medical Tourism development in Champawat    Kumaon , Uttarakhand; Yoga Tourist Guide books for Medical Tourism development in   Almora Kumaon , Uttarakhand; Yoga Tourist Guide books for Medical Tourism development in Nainital   Kumaon , Uttarakhand; Yoga Tourist Guide books for Medical Tourism development in  Udham Singh Nagar  Kumaon , Uttarakhand;

पौड़ी गढ़वाल मेडिकल टूरिज्मविकास हेतु योग टूरिस्ट गाइड बुक की आवश्यकता ; उधम सिंह नगर कुमाऊं  मेडिकल टूरिज्मविकास हेतु योग टूरिस्ट गाइड बुक की आवश्यकता ;  चमोली गढ़वाल मेडिकल टूरिज्मविकास हेतु योग टूरिस्ट गाइड बुक की आवश्यकता  ; नैनीताल कुमाऊं  मेडिकल टूरिज्मविकास हेतु योग टूरिस्ट गाइड बुक की आवश्यकता ;  रुद्रप्रयाग गढ़वाल मेडिकल टूरिज्मविकास हेतु योग टूरिस्ट गाइड बुक की आवश्यकता ; अल्मोड़ा कुमाऊं  मेडिकल टूरिज्मविकास हेतु योग टूरिस्ट गाइड बुक की आवश्यकता  ; टिहरी   गढ़वाल मेडिकल टूरिज्मविकास हेतु योग टूरिस्ट गाइड बुक की आवश्यकता ; चम्पावत कुमाऊं  मेडिकल टूरिज्मविकास हेतु योग टूरिस्ट गाइड बुक की आवश्यकता ;  उत्तरकाशी गढ़वाल मेडिकल टूरिज्मविकास हेतु योग टूरिस्ट गाइड बुक की आवश्यकता ; पिथौरागढ़ कुमाऊं  मेडिकल टूरिज्म विकास;  देहरादून गढ़वाल मेडिकल टूरिज्मविकास हेतु योग टूरिस्ट गाइड बुक की आवश्यकता ; रानीखेत कुमाऊं  मेडिकल टूरिज्म विकास; हरिद्वार  गढ़वाल मेडिकल टूरिज्मविकास हेतु योग टूरिस्ट गाइड बुक की आवश्यकता ; डीडीहाट  कुमाऊं  मेडिकल टूरिज्मविकास हेतु योग टूरिस्ट गाइड बुक की आवश्यकता ;   नैनीताल  कुमाऊं मेडिकल टूरिज्मविकास हेतु योग टूरिस्ट गाइड बुक की आवश्यकता :



Bhishma Kukreti

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इष्टवाळ  , कंडवाळ  , नेगी , कोठारी, जोशी , सती   जैसे ब्लॉगरों से प्रार्थना !
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ब्लॉगर्स का चिकित्सा सेवा निर्यात में सहयोग

Contribution by Bloggers in Health Service Export 
Health Services Export Strategies -6
चिकित्सा सेवा निर्यात रणनीति - 6

उत्तराखंड में चिकत्सा पर्यटन  रणनीति - 229

Medical Tourism development  Strategies -229

उत्तराखंड पर्यटन प्रबंधन परिकल्पना - 336

Uttarakhand Tourism and Hospitality Management -336

 

आलेख - विपणन आचार्य भीष्म कुकरेती

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मैं सन 2007 से उत्तराखंड टूरिज्म पर निरंतर लिखता हूँ।  अंतर्राष्ट्रीय पत्रिकाओं में भी टूरिज्म पर लेख प्रकाशित हुए हैं।  मेरा मानना है टूरिज्म विकास हेतु सरकार सब कुछ नहीं कर सकती किन्तु समाज सब कुछ कर सकता है।  माना कि महाभारत व पुराणों में देव वर्णन कल्पना है किंतु उत्तराखंड पर्यटन वर्णन तो सही ही है।  जय विजय (पहले रचा महाभारत ) में गढ़वाल नहीं है किन्तु दक्षिण आख्यान में गढ़वाल भरपूर है याने गुप्त काल में गढ़वाली व्यासों ने महाभारत में गढ़वाल जोड़ा था।  जब उस समय आज की जैसी सरकारी तंत्र न थे तब भी पर्यटन सुचारु रूप से चलता था , तब भी पर्यटकों को डिजास्टर का सामना करना (महाभारत ) पड़ता था।  और पर्यटन समाज स्वयं संभालता था।  आठवीं नवीं  सदी में शंकराचार्य जब उत्तराखंड आये तो उत्तराखंडी समाज के बल पर ही बद्रीनाथ रहे व कई कार्यों में समाज ने सहयोग दिया।  शाह वंशीय राज्य वा ब्रिटिश राज में भी उत्तराखन पर्यटन को समाज संभालता था।  सरकारें नीति बनातीं थीं। 

    आज भी समाज के हर तबके व व्यक्ति को अपनी शक्ति अनुसार मेडिकल टूरिज्म प्रचार  प्रसार , निवेश आदि में योगदान आवश्यक है। ब्लॉगरों भी पर्यटन विकास में कई तरह के योगदान दे सकते हैं

 इंटरनेट काल चल रहा है तो देसी विदेशी इंटरनेट द्वारा उत्तराखंड में योग चिकित्सा के डिटेल्स खोजते  ही  हैं।  इन खोजी सभावित ग्राहकों के प्रश्नों के उत्तर आवश्यक हैं। संभावित पर्यटकों के जबाब की  समस्या आप सब ब्लॉगर्स दूर कर सकते हैं।

   आज दसियों उत्तराखंडियों के ब्लॉग्स हैं न्यूज पोर्टल्स हैं जैसे मनोज इष्टवाळ  , दिनेश कंडवाळ  ,  सुनील नेगी  , राजेंद्र जोशी , शिव  प्रसाद सती के न्यूज पोर्टल हैं व धनेश कोठारी  श्याम रतूड़ी , विजय जेठुरी हरीश कंडवाळ  की वेब साइट्स/ब्लॉग्स    हैं।  इस सबके कार्य स्तुतीय  हैं। वैसे मनोज इष्टवाल व दिनेश कंडवाल के पोर्टलों  में पर्यटन विषय सबसे अधिक मुखर होते हैं इसमें दो राय नहीं होनी चाहिए। 

 इसके अतिरिक्त मेरा पहाड़ , बेडू  पाको , यंग उत्तराखंड , समूण , गढ़वाली सम्राट , पौड़ी गढ़वाल ग्रुप के भी वेब साइट हैं।  इनमे मेरापहाड़ की साइट सबसे अधिक संगठित है।

   अब तकरीबन हर उत्तराखंड से प्रकाशित होने वाली छोटी पत्रिकाएं भी वेब साइट स्थापित कर ही रही हैं। 

 मेरी सबसे प्रार्थना है की अपने पोर्टल , वेब साइट या ब्लॉग में उत्तराखंड मेडिकल टूरिज्म संबंधी या योग टूरिज्म संबंधी विषयों पर भी कंटेंट पोस्ट करें।  आपको जानकार आश्चर्य होगा कि इंटरनेट पर सबसे अधिक

 खोजी पर्यटन विषय खोजते हैं।  यदि पोर्टल  वेब साइट , ब्लॉग उत्तराखंड पर्यटन पर कंटेंट  पोस्ट करेंगे तो पोर्टल , वेब साइट या ब्लॉग में विजिटर्स की संख्या भी बढ़ेगी।

 व्यक्तिगत ब्लॉग वालों को भी उत्तराखंड पर्यटन संबंधी कंटेंट अवश्य पोस्ट करनी चाहिए।

 पोर्टल , वेब साइट या ब्लोगर्स को एफिलिएटेड मार्केटिंग आहारित सिद्धांत से किसी अन्य पर्यटन विषयी व्यवसायी पोर्टल से जुड़ने में लाभ ही होगा।

 मेरी सभी ब्लॉगरों से पुनः दर्ख्वास्त  है बल अपने पोर्टल ,    वेब साइट , ब्लॉग्स में उत्तराखंड पर्यटन संबंधी विषय अवश्य पोस्ट करें।


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Contribution by Bloggers in Medical Tourism development in Garhwal , Uttarakhand ; Contribution by Bloggers in Medical Tourism development in Chamoli Garhwal , Uttarakhand;  Contribution by Bloggers in Medical Tourism development in  Rudraprayag Garhwal , Uttarakhand; Contribution by Bloggers in Medical Tourism development in   Pauri Garhwal , Uttarakhand; Contribution by Bloggers in Medical Tourism development in   Tehri Garhwal , Uttarakhand; Contribution by Bloggers in Medical Tourism development in  Uttarkashi  Garhwal , Uttarakhand; Contribution by Bloggers in Medical Tourism development in   Dehradun Garhwal , Uttarakhand; Contribution by Bloggers in Medical Tourism development in    Haridwar Garhwal , Uttarakhand; Contribution by Bloggers in Medical Tourism development in  Pithoragarh  Kumaon , Uttarakhand; Contribution by Bloggers in Medical Tourism development in Champawat    Kumaon , Uttarakhand; Contribution by Bloggers in Medical Tourism development in   Almora Kumaon , Uttarakhand; Contribution by Bloggers in Medical Tourism development in Nainital   Kumaon , Uttarakhand; Contribution by Bloggers in Medical Tourism development in  Udham Singh Nagar  Kumaon , Uttarakhand;

पौड़ी गढ़वाल मेडिकल टूरिज्म विकास में ब्लौगरों का सहयोग ; उधम सिंह नगर कुमाऊं  मेडिकल टूरिज्म विकास में ब्लौगरों का सहयोग ;  चमोली गढ़वाल मेडिकल टूरिज्म विकास में ब्लौगरों का सहयोग  ; नैनीताल कुमाऊं  मेडिकल टूरिज्म विकास में ब्लौगरों का सहयोग ;  रुद्रप्रयाग गढ़वाल मेडिकल टूरिज्म विकास में ब्लौगरों का सहयोग ; अल्मोड़ा कुमाऊं  मेडिकल टूरिज्म विकास में ब्लौगरों का सहयोग  ; टिहरी   गढ़वाल मेडिकल टूरिज्म विकास में ब्लौगरों का सहयोग ; चम्पावत कुमाऊं  मेडिकल टूरिज्म विकास में ब्लौगरों का सहयोग ;  उत्तरकाशी गढ़वाल मेडिकल टूरिज्म विकास में ब्लौगरों का सहयोग ; पिथौरागढ़ कुमाऊं  मेडिकल टूरिज्म विकास;  देहरादून गढ़वाल मेडिकल टूरिज्म विकास में ब्लौगरों का सहयोग ; रानीखेत कुमाऊं  मेडिकल टूरिज्म विकास; हरिद्वार  गढ़वाल मेडिकल टूरिज्म विकास में ब्लौगरों का सहयोग ; डीडीहाट  कुमाऊं  मेडिकल टूरिज्म विकास में ब्लौगरों का सहयोग ;   नैनीताल  कुमाऊं मेडिकल टूरिज्म विकास में ब्लौगरों का सहयोग :



Bhishma Kukreti

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पक्षी निहारण पर्यटन का उत्तराखंड हेतु महत्व 


उत्तराखंड पक्षी निहारण पर्यटन -1

Bird Watching Tourism in Uttarakhand -1

उत्तराखंड पर्यटन प्रबंधन परिकल्पना - 337

Uttarakhand Tourism and Hospitality Management -337

 

आलेख - विपणन आचार्य भीष्म कुकरेती

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   इस लेखक को कोई ज्ञान नहीं है कि उत्तराखंड में प्रशासनिक स्तर पर कोई बर्ड फेस्टिवल या पक्षी निहारण मेला आयोजित हुआ हो।   दिसंबर 2018  में कोटद्वार में पक्षी मेला या बर्ड फेस्टिवल आयोजित हो रहा है जिसकी भुरू भूरी प्रशंसा होनी चाहिए।

 

 पक्षी मनुष्य को सदा से आकर्षित करते रहे हैं व प्रेरणा स्रोत्र भी होते  हैं।

भौगोलिक सूचना हेतु पक्षी महत्वपूर्ण हैं

पक्षी निहारन आनंद तो देता है किन्तु साथ में जैविक प्रक्रियाओं व भविष्य में परिवर्तन सूचना भी देते हैं।

पक्षी पर्यावरण हेतु आवश्यक हैं जैसे पेड़ पौधे पराग गण व बीज विकिरण

पक्षी पर्यटन पर्यावरण शिक्षा में सहयोगी है

पक्षियों का सांस्कृतिक व धार्मिक महत्व होता है जैसे घुघती

कई पक्षी आय साधन भी हैं जैसे मुर्गी पालन

पक्षियों का पालतू पशुओं के स्वास्थ्य से सीधा संबंध होता है अतः  मनुष्य हेतु आवश्यक


         पक्षी निहारण पर्यटन


पक्षी निहारण  पर्यटन में पर्यटक पक्षियों को विभिन्न कोण से देखने आते हैं जिसमे निम्न पर्यटक मुख्य होते हैं

१- पक्षी जैविक अनुसंधान विद्यार्थी या वैज्ञानिक

२- मूर्धन्य फोटोग्राफर्स /चित्रकार

३- पर्यावरण विशेषज्ञ

४- पर्यावरण प्रेमी

५- पक्षी प्रेमी

६- टूरिज्म लेखक व पत्रकार

७- लाइफ साइंस अन्वेषक , लेखक व पत्रकार

८- जिओग्राफिक टीवी चैनल  जैसे संस्थान

९- कृषि विशेषज्ञ जो पक्षियों का कृषि व वन्य जीवन पर प्रभाव अध्ययन हेतु आते हैं

१०- जल व भू विज्ञान अध्ययन कर्ता

         उपरोक्त सभी पर्यटक प्रीमियम श्रेणी के पर्यटक होते हैं . इनमे कई पर्यटक जनसम्पर्क में विशेषज्ञ होते हैं जैसे सम्पादक व फोटोग्राफर्स या चित्रकार जो पक्षी स्थल की छवि वृद्धि हेतु प्रभावशाली सिद्ध होते हैं। 

    प्रीमियम पर्यटक होने के कारण आय के अच्छे साधन भी हैं।  पक्षी निहारण से किसानों को भी कई ज्ञान लाभ ही नहीं मिलता अपितु ग्रामीण टूरिज्म या प्राकृतिक पर्यटन को भी संबल मिलता है। 

  उत्तराखंड हेतु पक्षी निहारण पर्यटन प्रचार प्रसार अत्त्यावष्यक है।               





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Bhishma Kukreti

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लैंसडाउन तहसील क्षेत्र  पक्षी निहारण पर्यटन हेतु उत्तम  क्षेत्र है आओ क्षेत्र को  प्रसिद्धि दिलाएं !

Impact of Bird Watching Fair on Lansdown region

उत्तराखंड पक्षी निहारण पर्यटन -2

Bird Watching Tourism in Uttarakhand -2

उत्तराखंड पर्यटन प्रबंधन परिकल्पना - 338

Uttarakhand Tourism and Hospitality Management -338

 

आलेख - विपणन आचार्य भीष्म कुकरेती

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   पक्षी निहारण  पर्यटन में उत्तराखंड का नाम विशेषतः बिनसर सैंक्चुरिटी  व जिम कॉर्बेट पार्क का नाम दुनिया में प्रसिद्ध हैं।

7 दिसंबर से 9 दिसंबर 2018 कोटद्वार में अंतर्राष्ट्रीय पक्षी निहारण मेला आयोजित होने से लैंसडाउन (प्राचीन सलाण ) क्षेत्र भी बर्ड वाचिंग मैप में अवश्य शामिल हो जाएगा।

                    300 से अधिक   पक्षी प्रजातियों से भरपूर सलाण /लैंसडाउन क्षेत्र

डा मोहन कुकरेती व डा दिनेश भट्ट ने एक रिसर्च प्रोजेक्ट   इस क्षेत्र में 216 पक्षी प्रजातियां रिकॉर्ड कीं। अतः हम अनुमान लगा सकते हैं कि लैंसडौन  तहसील में 250 से अधिक पक्षी प्रजातियां होंगे ही।  यमकेश्वर क्षेत्र से पक्षी प्रेमी  श्री दिनेश कंडवाल ने भी कई आकर्षक पक्षियों की जानकारी दी है। श्री  दिनेश कंडवाल ने मुझे सूचना कि कोटद्वार में श्री राजिव  बिष्ट लैंसडाउन क्षेत्र में पक्षी निहारन गाइड प्रसिद्ध हैं व पर्यटकों को सही स्थान पर ले जाते हैं।

      पक्षी निहारण पर्यटन से लैंसडाउन क्षेत्र को निम्न लाभ मिलेंगे -

देश  विदेशों के बर्ड वाचर्स लैंसडाउन क्षेत्र में आने से  लैंसडाउन क्षेत्र की छवि प्रसारण में वृद्धि होगी व कई नए पर्यटन आयाम खुलेंगे।  लैंसडाउन क्षेत्र के समाचार अंतर्राष्ट्रीय माध्यमों में स्थान पायेगा।

पक्षी निहारण पर्यटन से पर्यावरण संरक्षण को बल मिलेगा व लुप्त होते पक्षियों को बचाने का कार्य भी शुरू होगा।

  कई दुर्लभ प्रजातियों का पता भी चलेगा जो पर्यटनगामी सिद्ध होगा

विलेज टूरिज्म को बल मिलेगा व कृषि पर्यटन को भी बल मिलेगा।  खंड में श्री सत्यप्रसाद बड़थ्वाल के बगीचे देखने  पर्यटक आएंगे।

  कई उपेक्षित धार्मिक पर्यटक स्थल जैसे भैरों गढ़ी , जसपुर नागराजा , ठंठोली का गोदेश्वर मंदिर , कड़ती का सिलसू मंदिर , डवोली द्वाली , कठूड़ व बनचुरी के देवी मंदिर  तिमली का  बाणेश्वर मंदिर कैन्डुळ  का सटी सावित्री मंदिर , यमकेश्वर व उदयपुर का बिलायत क्षेत्रो, ताड़केश्वर   रिखणी खाळ  पैनो बदलपुर में गोरखनाथ  उड़्यारी , को नए पर्यटक मिलेंगे . इसी तरह  उपेक्षित पड़े ऐतिहासिक स्थल ढांगू गढ़ , लँगूरगढ़ , बंदर भेळ , अजमेर में मालनी तट  अजमेर में रमाई (जहां प्रद्युम्न शाह के मंत्री रामपति खंडूड़ी की हत्त्या हुयी थी  ) , आदि भी पर्यटन मैप में जगह प्राप्त कर लेंगे।

व्यासचट्टी से ऋषिकेश तक गंगा तट में पक्षी निहारण  पर्यटन को भी बल मिलेगा। इसी तरह पश्चमी राम गंगा क्षेत्र में भी पक्षी पर्यटन के कई नए आयाम खुलेंगे।

  जूलॉजी के विद्यार्थी डा मोहन कुकरेती व डा दिनेश भट्ट के कार्यों को आगे बढ़ाएंगे व पक्षी रिकॉर्ड का कार्य भी बढ़ेगा।

  कोटद्वार व अन्य स्थलों में पर्यटन इन्फ्रास्ट्रक्चर में सुधार होगा व पर्यटन उद्यम को लाभ पंहुचेगा। पक्षी निहारण  पर्यटकों को भी होटल  परिहवन , विशेषज्ञ गाइड की आवश्यकता पड़ती हैं अतः इंफ्रास्ट्रचर पर निवेश आवश्यक है।

पक्षी दर्शन पर्यटन की छवि से माळा बिज्नी -तल्ला ढांगू की तर्ज पर पर्यटन मल्ला ढांगू व सदूर उदयपुर , डबराल स्यूं में भी बढ़ेगा।  इसी तरह बदलपुर , पैनो  आदि क्षेत्रों में पर्यटन विकास होगा

लैंसडाउन क्षेत्र वासियों व प्रवासियों को पक्षी निहारण पर्यटन को मद्दे नजर रखकर कई कार्य करने चाहिए कि लैंसडाउन क्षेत्र अंतर्राष्ट्रीय पर्यटन में अग्रणी क्षेत्र हो जाय।

पत्रकारों व लेखकों को यत्र तत्र  लेख प्रकाशित करवाने चाहिए आदि आदि पक्षी गाइड भी त्यार होने चाहिए।  कृषि पर्यटन हेतु निवेश कार्य होने चाहिए।


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पौड़ी गढ़वाल पक्षी निहारण टूरिज्म विकास ; उधम सिंह नगर कुमाऊं  पक्षी निहारण टूरिज्म विकास ;  चमोली गढ़वाल पक्षी निहारण टूरिज्म विकास  ; नैनीताल कुमाऊं  पक्षी निहारण टूरिज्म विकास ;  रुद्रप्रयाग गढ़वाल पक्षी निहारण टूरिज्म विकास ; अल्मोड़ा कुमाऊं  पक्षी निहारण टूरिज्म विकास  ; टिहरी   गढ़वाल पक्षी निहारण टूरिज्म विकास ; चम्पावत कुमाऊं  पक्षी निहारण टूरिज्म विकास ;  उत्तरकाशी गढ़वाल पक्षी निहारण टूरिज्म विकास ; पिथौरागढ़ कुमाऊं  पक्षी निहारण टूरिज्म विकास;  देहरादून गढ़वाल पक्षी निहारण टूरिज्म विकास ; रानीखेत कुमाऊं  पक्षी निहारण टूरिज्म विकास; हरिद्वार  गढ़वाल पक्षी निहारण टूरिज्म विकास ; डीडीहाट  कुमाऊं  पक्षी निहारण टूरिज्म विकास ;   नैनीताल  कुमाऊं पक्षी निहारण टूरिज्म विकास :

 

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उत्तराखंड में पक्षी निहारण पर्यटन हेतु   बर्ड वाचर्स या पक्षी निहारकों की वरीयतायें / पसंद 
 
Different Preferences of Avitourists/ Bird Watching Tourists

उत्तराखंड पक्षी निहारण पर्यटन -3

Bird Watching Tourism/ Avitourism   in Uttarakhand -3

उत्तराखंड पर्यटन प्रबंधन परिकल्पना - 339

Uttarakhand Tourism and Hospitality Management -339

 

आलेख - विपणन आचार्य भीष्म कुकरेती

-

 वास्तव में पक्षी निहारण या बर्ड वाचिंग विचार का जन्म ही 1901 के लगभग हुआ और एवीटूरिज्म नए शब्द का भी आवष्कार हुआ।  तो भी अभी भी बर्ड वाचिंग पर्यटन पर काम कम ही हुआ।  अंग्रेजी में भी पक्षी निहारण प्रबंधन साहित्य में बहुत कम काम हुआ है। एवीटूरिज्म पर विशेष पुस्तक नहीं छपी हैं।  हिंदी गूगल सर्च में यदि बर्ड वाचिंग , पक्षी निहारण टाइप करेंगे तो मी ही ताजे ताजे लेख प्रथम पृष्ठ पर दृष्टिगौचर होंगे. उत्तराखंड में बर्ड वाचर्स या पक्षी निहारक पर्यटक आते हैं किन्तु अभी तक कोई विशेष साहित्य उपपलब्ध भी उपलब्ध नहीं है।

यदि उत्तराखंड में पक्षी निहारण पर्यटन / बर्ड वाचिंग टूरिज्म / एवीटूरिज्म विकसित करना है तो बर्ड वाचर्स  / एवीटूरिस्ट/ पक्षी निहारकों हेतु सुविधा जुटानी होंगी। बर्ड वाचिंग टूरिज्म विकास  हेतु सुविधाएं तभी जुटायी  जा सकती हैं   जब पता हो कि एवीटूरिस्टों /बर्डर्स /बर्ड वाचर्स / पक्षी निहारकों की क्या क्या पसंद हैं और उनका व्यवहार कैसा है।

   विभिन्न स्रोत्रों में एवीटूरिस्टों /बर्डर्स /बर्ड वाचर्स की निम्न वरीयताएं या पसंद सामने आयी हैं जो कुछ हद  तक उत्तराखंड एवीटूरिज्म , बर्ड वाचिंग टूरिज्म , पक्षी निहारण पर्यटन पर भी लागू होंगी।

                  किम (2010 ) आदि अनुसार एवीटूरिस्टों / बर्ड वाचिंग पर्यटकों की पसंद

-

अनिष्क किम अनुसार वर्ड वाचरों की वरीयताएं निम्न है

      दुर्लभ  व स्थानिक चिड़ियाओं का होना

      जानकार व व्यवहार कुशल गाइड

  आवास , भोजन व शराब की उपलब्धता

परिहवन सुविधा (अधिकांश कार )

   विभिन्न पक्षी प्रजातियां

प्राकृतक सौंदर्य , आनंद दायक , शान्ति क्षेत्र


         दक्षिण अफ्रीका टूरिज्म विभाग (2010) अनुसार

-

पक्षियों की संख्या

स्थानिक पक्षी / दुर्लभ पक्षी

अन्य जैविक प्रजातियां  अन्य वन आकर्षण

परिहवन किन्तु  वन में पैदल घूमने की आजादी

अन्य पक्षी निहारकों से मेल मिलाप

गाइड


   BLSA बर्ड लाइफ साउथ अफ्रिका की फीजिबिलिटी रिपोर्ट (2006 )

-


पक्षियों की पूरी जानकारी

पैदल घूमने के रास्ते व स्थल व घूमने की आजादी , घूमते समय प्राकृतिक आकर्षण

ढाबे , भोजन

नया सीखने के अवसर

नए व निषिद्ध स्थलों  में जाने की अनुमति

प्रोफेसनल गाइड

अन्य रामचकारी आकर्षण , खेल , बोटिंग आदि

तितलियाँ , वन पुष्प दर्शन

सांस्कृतिक आकर्षण

स्थानीय शिल्प खरीददारी

होटल व्यवस्था

वन में कैम्पिंग व्यवस्था

व्यवसायी एजेंट्स

पक्षी प्रेमी व्यवस्था


 एलिस व वोगलसौंग (2004 )

-

स्थल व पक्षी प्रजातियों में विवधता /अधिकता

खरीददारी वयवस्था

पैदल घूमने की आजादी

 शांत व प्रकृति प्रेमी

स्थानी समाज से मिलना

  नास्ते की व्यवस्था  भोजनालय  आवास सुविधा

व्यवसायी गाइड

अन्य आकर्षक स्थल

प्रकृति शिक्षण प्रोग्रैम

चिकित्सा व्यवस्था

ऐतिहासिक स्थल निकटवर्ती , कस्बे पसंद

फोटोग्राफी सुविधा व परमिशन


 अन्य अन्वेषण साहित्य से

-

बर्ड वाचिंग साहित्य

वन्य प्राणी विहार

घूमने की आजादी

अन्य आकर्षक स्थल विशेषतः हेरिटेज स्थल

अपराध मुक्त व शहरी जीवन से मुक्त

अच्छी सड़कें

पक्षी निहारन हेतु प्लेटफार्म आदि व्यवस्था

कैंपिंग , सांस्कृतिक कार्य क्रम


उपरोक्त अध्ययन से पता चलता है कि बर्ड वाचर्स को वे सभी सुविधाएं चाहिए जो आम पर्यटक को चाहिए किन्तु केंद्र विन्दु वन , वन प्राणी , बन वनस्पति पक्षियों के छुपने स्थल   व पक्षी हैं।  फोटोग्राफी महत्वपूर्ण है         


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पौड़ी गढ़वाल पक्षी निहारण टूरिज्म  विकास हेतु बर्ड  वाचेर्स की वरीयताएँ ; उधम सिंह नगर कुमाऊं  पक्षी निहारण टूरिज्म  विकास हेतु बर्ड  वाचेर्स की वरीयताएँ ;  चमोली गढ़वाल पक्षी निहारण टूरिज्म  विकास हेतु बर्ड  वाचेर्स की वरीयताएँ  ; नैनीताल कुमाऊं  पक्षी निहारण टूरिज्म  विकास हेतु बर्ड  वाचेर्स की वरीयताएँ ;  रुद्रप्रयाग गढ़वाल पक्षी निहारण टूरिज्म  विकास हेतु बर्ड  वाचेर्स की वरीयताएँ ; अल्मोड़ा कुमाऊं  पक्षी निहारण टूरिज्म  विकास हेतु बर्ड  वाचेर्स की वरीयताएँ  ; टिहरी   गढ़वाल पक्षी निहारण टूरिज्म  विकास हेतु बर्ड  वाचेर्स की वरीयताएँ ; चम्पावत कुमाऊं  पक्षी निहारण टूरिज्म  विकास हेतु बर्ड  वाचेर्स की वरीयताएँ ;  उत्तरकाशी गढ़वाल पक्षी निहारण टूरिज्म  विकास हेतु बर्ड  वाचेर्स की वरीयताएँ ; पिथौरागढ़ कुमाऊं  पक्षी निहारण टूरिज्म विकास;  देहरादून गढ़वाल पक्षी निहारण टूरिज्म  विकास हेतु बर्ड  वाचेर्स की वरीयताएँ ; रानीखेत कुमाऊं  पक्षी निहारण टूरिज्म विकास; हरिद्वार  गढ़वाल पक्षी निहारण टूरिज्म  विकास हेतु बर्ड  वाचेर्स की वरीयताएँ ; डीडीहाट  कुमाऊं  पक्षी निहारण टूरिज्म  विकास हेतु बर्ड  वाचेर्स की वरीयताएँ ;   नैनीताल  कुमाऊं पक्षी निहारण टूरिज्म  विकास हेतु बर्ड  वाचेर्स की वरीयताएँ

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पक्षी निहारकों की विशेषतायें



Bird Watchers Profiles


उत्तराखंड पक्षी निहारण पर्यटन -4

Bird Watching Tourism/ Avitourism   in Uttarakhand -4

उत्तराखंड पर्यटन प्रबंधन परिकल्पना - 340

Uttarakhand Tourism and Hospitality Management -340

 


आलेख - विपणन आचार्य भीष्म कुकरेती

-

सामन्य तौर पर पक्षी निहारक निम्न प्रकार के होते हैं

१- सामन्यतया पक्षी निहारक अधिक पढ़े लिखे याने हाइली एज्युकेटेड होते हैं - अन्वेषक मिलाकर भी।

२- पक्षी निहारकों की वार्षिक आय अधिक होती है व इन्हे रिटायरमेंट के बाद आय की चिंता नहीं होती है।

३- फोटोग्राफी शौकीन

४- स्त्रियों की तुलना में मर्द  अधिक होते हैं

५- प्रौढ़

६- अधिकतर किसी पक्षी निहारक या पर्यावरण क्लब से जुड़े होते हैं या फोटोग्राफी संस्था से जुड़े होते हैं

७- पक्षी देखने में कुछ कुछ धसकी किस्म के

८- ग्रुप /सामूहिक यात्रा के स्थान पर अकेले भ्रमण पसंद

९- वर्ष में कम से कम १० से १३ दिन पक्षी निहारन को समय देते हैं

१० प्रकृति प्रेमी  शांत , धैर्यशील

११- अन्य कार्य /टूर  संबंधी , में कम रूचि





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अनौपचारिक  पक्षी निहारकों की विशेषतायें



Bird Watchers Profiles - Casual


उत्तराखंड पक्षी निहारण पर्यटन -5

Bird Watching Tourism/ Avitourism   in Uttarakhand -6

उत्तराखंड पर्यटन प्रबंधन परिकल्पना - 342

Uttarakhand Tourism and Hospitality Management -342

 


आलेख - विपणन आचार्य भीष्म कुकरेती

-

 

समर्पित , उत्साही पक्षी निहारकों के अतिरिक्त औपचारिक पक्षी निहारक भी पक्षी पर्यटन  संबल हेतु आवश्यक होते हैं।  अनौपचारिक पक्षी निहारकों की विशेषताएं इस प्रकार हैं -

१- अनौपचारिक पक्षी निहारक पक्षी विशेषज्ञ नहीं होते हैं

२- प्रकृति प्रेमी

३-पक्षी निहारण को अन्य प्रकृति पर्यटन के साथ जोड़ते हैं

४-पक्षी निहारण  को अन्य पर्यटनो गामी कार्य के साथ जोड़ देते हैं।

५-घर से कुछ अलग करने व देखने के शौकीन

६-प्राकृतिक पर्यटक स्थल तक पंहुचने हेतु सड़क माध्यम पसंद करते हैं।

७- प्रकृति के साथ संवाद से ही संतोष प्राप्त कर लेते हैं।

८-30 % पक्षी निहारक पर्यटन सहभागी

९- इन पक्षी निहाकों के बल बुते पर्यटक स्थल को आर्थिक लाभ मिलता है



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भारत के प्रसिद्ध पक्षी निहारक स्थल

Famous Birdwatcher Sites in India

उत्तराखंड पक्षी निहारण पर्यटन -6

Bird Watching Tourism/ Avitourism   in Uttarakhand -6

उत्तराखंड पर्यटन प्रबंधन परिकल्पना - 343

Uttarakhand Tourism and Hospitality Management -343

 


आलेख - विपणन आचार्य भीष्म कुकरेती

- -

भारत में 30 से अधिक बिर्डिंग साइट्स हैं जिनमे निम्न स्थल अधिक प्रसिद्ध हैं -

       उत्तरी भारत

राजस्थान -भरतपुर

हरियाणा - सुल्तानपुर , झज्जर

उत्तराखंड - बिनसर , कोर्बर्ट पार्क

 पंजाब -हरिक वेटलैंड

 दक्षिण

कर्नाटक -रंगनथिट्टू

केरल -थटकाड , कुमारकॉड

 पश्चिम

गोवा

महाराष्ट्र -मुंबई केवल प्रवासी पक्षी )  व कर्नाला

गुजरात -नालसरोवर , कच्छ , जमानगर

 पूर्व

ओडीसा -छिलका लेक

बंगाल -दार्जिलिंग , नियरा व लावा घाटी

अरुणाचल प्रदेश -मुष्मि हिल , छगलांग , ईगलनेस्ट

आसाम -काजीरंगा 







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पौड़ी गढ़वाल पक्षी निहारण टूरिज्म विकास हेतु भारत में प्रसिद्ध पक्षी निहारक स्थलों की जानकारी आवश्यकता ; उधम सिंह नगर कुमाऊं  पक्षी निहारण टूरिज्म विकास हेतु भारत में प्रसिद्ध पक्षी निहारक स्थलों की जानकारी आवश्यकता ;  चमोली गढ़वाल पक्षी निहारण टूरिज्म विकास हेतु भारत में प्रसिद्ध पक्षी निहारक स्थलों की जानकारी आवश्यकता  ; नैनीताल कुमाऊं  पक्षी निहारण टूरिज्म विकास हेतु भारत में प्रसिद्ध पक्षी निहारक स्थलों की जानकारी आवश्यकता ;  रुद्रप्रयाग गढ़वाल पक्षी निहारण टूरिज्म विकास हेतु भारत में प्रसिद्ध पक्षी निहारक स्थलों की जानकारी आवश्यकता ; अल्मोड़ा कुमाऊं  पक्षी निहारण टूरिज्म विकास हेतु भारत में प्रसिद्ध पक्षी निहारक स्थलों की जानकारी आवश्यकता  ; टिहरी   गढ़वाल पक्षी निहारण टूरिज्म विकास हेतु भारत में प्रसिद्ध पक्षी निहारक स्थलों की जानकारी आवश्यकता ; चम्पावत कुमाऊं  पक्षी निहारण टूरिज्म विकास हेतु भारत में प्रसिद्ध पक्षी निहारक स्थलों की जानकारी आवश्यकता ;  उत्तरकाशी गढ़वाल पक्षी निहारण टूरिज्म विकास हेतु भारत में प्रसिद्ध पक्षी निहारक स्थलों की जानकारी आवश्यकता ; पिथौरागढ़ कुमाऊं  पक्षी निहारण टूरिज्म विकास;  देहरादून गढ़वाल पक्षी निहारण टूरिज्म विकास हेतु भारत में प्रसिद्ध पक्षी निहारक स्थलों की जानकारी आवश्यकता ; रानीखेत कुमाऊं  पक्षी निहारण टूरिज्म विकास; हरिद्वार  गढ़वाल पक्षी निहारण टूरिज्म विकास हेतु भारत में प्रसिद्ध पक्षी निहारक स्थलों की जानकारी आवश्यकता ; डीडीहाट  कुमाऊं  पक्षी निहारण टूरिज्म विकास हेतु भारत में प्रसिद्ध पक्षी निहारक स्थलों की जानकारी आवश्यकता ;   नैनीताल  कुमाऊं पक्षी निहारण टूरिज्म विकास हेतु भारत में प्रसिद्ध पक्षी निहारक स्थलों की जानकारी आवश्यकता :


 


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पक्षी निहारण /बर्ड वाचिंग पर्यटन हेतु आधारभूत सरंचना /सुविधाएं


पक्षी निहारण पर्यटन विकास हेतु आधारभूत संरचनायें /सुविधायें -1

Infrastructure for Bird Watching Tourism Development -1

उत्तराखंड पक्षी निहारण पर्यटन -7

Bird Watching Tourism/ Avitourism   in Uttarakhand -7

उत्तराखंड पर्यटन प्रबंधन परिकल्पना - 344

Uttarakhand Tourism and Hospitality Management -344

 

आलेख - विपणन आचार्य भीष्म कुकरेती

-

  किसी भी पर्यटन विकास हेतु कई इंफ्रास्ट्रक्चर की आवश्यकताएं होती हैं उसी प्रकार बर्ड वाचिंग टूरिज्म विकास हेतु भी कई सुविधाओं की आवश्यकता होती हैं।  बर्ड वाचिंग टूरिज्म हेतु निम्न सुविधाएं आवश्यक हैं

      भौगोलिक व भूगर्भीय सुविधाएं या संरचना व साहित्य

  पक्षी अधिसंख्य में तभी मिलते हैं जब क्षेत्र का भूगोल व भूगर्भीय संरचना पक्षी निवास व प्रवास हेतु सुविधाजनक हो।  पहाड़ , पानी , भूमि , जंगल , ठिकाने , ववनस्पति , अन्य जीव  जंतु होने आवश्यक हैं।  पक्षी निहारक पर्यटकों हेतु भौगोलिक , भूगर्भीय , वानस्पतिक , पक्षियों की पूरी जानकारी साहित्य उपलब्ध होना आवश्यक है। नियमावली की सूचना भी आवश्यक है।

        पक्षी निहारण हेतु आवश्यक उपकरण

पक्षी निहारण हेतु कई नितांत व्यक्तिगत उपकरणों की आवश्यकता पड़ती है जैसे दूरबीन , कैमरा , इंटरनेट कनेक्टेड कैमरा , ध्वनि रिकॉर्डर्स , स्पाई ग्लासेज, गाइड  आदि।  इसके अतिरिक्त मचान , कैम्पिंग सुविधाएं , सुरक्षा सुविधा व स्वास्थ्य सुविधा भी आवश्यक हैं जो टूरिज्म विकास प्राधिकरण के कर्तव्य हैं

   आम टूरिस्टों की सुविधाएं

  पक्षी निहारण कार्य छोड़कर बाकी काम पर्यटक के ही हैं अतः राज्य या समाज को बर्ड वाचिंग टूरिज्म विकास हेतु निम्न सुविधाओं को प्रदान करना होता है -

जैसे - पक्षी निहारण के अतिरिक्त अन्य प्रकृति संबंधी टूरिज्म सुविधाएं , परिहवन , होटल , ढाबे , भोजनालय , चिकित्सालय , संचार सुविधा , मनोरंजन , गाइड आदि

         


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