Author Topic: History of Haridwar , Uttrakhnad ; हरिद्वार उत्तराखंड का इतिहास  (Read 40346 times)

Bhishma Kukreti

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 युअन  च्वांग  / हुएन  सांग यात्रा  संस्मरण में पांडुवाला सोत की पहचान

 Panduwala Sot (Haridwar , Bijnor ) in Harsha Vardhan Period

हर्षवर्धन शासन   काल में हरिद्वार, सहारनपुर व बिजनौर इतिहास   11

 History of Haridwar, Bijnor, Saharanpur  in Harsha Vardhana regime    Period - 11
Ancient  History of Haridwar, History Bijnor,   Saharanpur History  Part  -  265                     
                           
    हरिद्वार इतिहास ,  बिजनौर  इतिहास , सहारनपुर   इतिहास  -आदिकाल से सन 1947 तक-भाग -  265               


                  इतिहास विद्यार्थी ::: आचार्य भीष्म कुकरेती 

-                             ब्रह्मपुर नगर की स्थति

                         डा डबराल ने अपने इतिहास पुस्तक  में युअन  च्वांग या हुएन सांग द्वारा उल्लेखित ब्रह्मपुर नगर पर विद्वानों के विभिन्न मतों  का उद्धरण देते निश्चित नहीं किया कि आखिर ब्रह्मपुर नगर कहाँ था।  डबराल  ने उल्लेख किया कि  निम्न विद्वानों ने ब्रह्मपुर पर निम्न मत दिए हैं (1 ) -
एटकिंसन, राहुल , ओकले अनुसार  - बाड़ाहाट , उत्तरकाशी
कनिंघम व गुप्ते - लखनपुर बैराटपटट्न
सेंत मार्टिन व मुकंदी लाल -श्रीनगर
फुरर अनुसार - लाल ढांग के पास
   डबराल ने आगे लिखा कि  बिजनौर जिले में गंगा तट के पूर्व में मुअजमपर नारायण स्टेशन निकट एक गाँव का नाम ब्रह्मपुर है जहां एक खेड़ा टीला किसी प्राचीन नगर का द्योतक है ( १ )

                       युअन च्वांग उल्लेखित  ब्रह्मपुर नगर का पांडुवाला सोत  से पहचान

  डबराल (२ ) ने लिखा कि ब्रह्मपुर का बाड़ाहाट  या श्रीनगर होने में सबसे बड़ा विपक्षी तर्क है कि  इन नगरों के पास कोई नाग मंदिर नहीं हैं जिसकी पहचान अनंत नाग अवतार वीरणेश्वर से की जाय।  केदारखंड पुराण अनुसार (१२३ /१० ) पांडुवाला सोत  निकट अनंत नाग अवतार लक्ष्मण ने तपस्या की थी व महाभारत आदि पर्व (75 /6 ) अनुसार कनखल नरेश दक्ष पत्नी का नाम वीरिणी था।  डबराल ने लिखा कि इस नाम से संबंध जोड़ा जा सकता है।
         इतिहासकार डबराल को पांडुवाला सोत की खुदाई से कुछ पात्र मिले थे जो पुरात्व विभाग ने चौथी सदी के निर्धारित किये।  याने चौथी सदी में पांडुवाला सोत में वस्ति थी।  अतः माना जा सकता है कि हुएन सांग /युअन च्वांग यात्रा समय पांडुवाला सोत में वस्ती  थी। 
तर्क अनुसार पांडुवाला सोत वास्तव में चंडीघाट  से गोविषाण  मार्ग पर भी सही बैठता भी है।   
   पांडुवाला सोत  हरिद्वार कोटद्वार मार्ग पर लालढांग  के निकट है


सन्दर्भ :

 

१ -Dabral, Shiv Prasad, (1960), Uttarakhand ka Itihas Bhag- 3, Veer Gatha Press, Garhwal, India page 392 -394 

२- Dabral, Shiv Prasad, (1960), Uttarakhand ka Itihas Bhag- 3, Veer Gatha Press, Garhwal, India page 394

 

 

 

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कनखल , हरिद्वार  का प्राचीन इतिहास में पांडुवाला सोत की पहचान  ; तेलपुरा , हरिद्वार  का प्राचीन      इतिहास में पांडुवाला सोत की पहचान ;  सकरौदा ,  हरिद्वार  का प्राचीन  इतिहास में पांडुवाला सोत की पहचान ;   भगवानपुर , हरिद्वार  का प्राचीन इतिहास में पांडुवाला सोत की पहचान ;रुड़की ,हरिद्वार का प्राचीन  इतिहास में पांडुवाला सोत की पहचान ;                 झाब्रेरा हरिद्वार  का प्राचीन      इतिहास में पांडुवाला सोत की पहचान ; मंगलौर हरिद्वार  का प्राचीन  इतिहास में पांडुवाला सोत की पहचान ;   लक्सर हरिद्वार  का प्राचीन इतिहास में पांडुवाला सोत की पहचान  ;सुल्तानपुर ,हरिद्वार  का प्राचीन इतिहास में पांडुवाला सोत की पहचान  ;पाथरी , हरिद्वार  का प्राचीन इतिहास में पांडुवाला सोत की पहचान ;                 बहदराबाद , हरिद्वार  का प्राचीन   इतिहास में पांडुवाला सोत की पहचान ;  लंढौर , हरिद्वार  का प्राचीन इतिहा ;ससेवहारा  बिजनौर , बिजनौरइतिहास में पांडुवाला सोत की पहचान ;    नगीना ,  बिजनौर  इतिहास में पांडुवाला सोत की पहचान ; नजीबाबाद , नूरपुर , बिजनौर इतिहास;सहारनपुर      इतिहास में पांडुवाला सोत की पहचान ;  देवबंद सहारनपुर का प्राचीन  इतिहास में पांडुवाला सोत की पहचान ;  बेहट सहारनपुर का प्राचीन  इतिहास में पांडुवाला सोत की पहचान ;   नकुर सहरानपुर का प्राचीन इतिहास में पांडुवाला सोत की पहचान    ; Haridwar Itihas, Bijnor Itihas, Saharanpur Itihas

 

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हर्ष वर्धन काल में मोरध्वज की स्तिथि (बिजनौर इतिहास )

Mordhwaj (Bijnor )  : Important city in Harsha Vardhan period

हर्षवर्धन शासन   काल में हरिद्वार, सहारनपुर व बिजनौर इतिहास   12

 History of Haridwar, Bijnor, Saharanpur  in Harsha Vardhana regime    Period - 12
Ancient  History of Haridwar, History Bijnor,   Saharanpur History  Part  -  266                     
                           
    हरिद्वार इतिहास ,  बिजनौर  इतिहास , सहारनपुर   इतिहास  -आदिकाल से सन 1947 तक-भाग -  266               


                  इतिहास विद्यार्थी ::: आचार्य भीष्म कुकरेती 

  चीनी यात्री युअन च्वांग।/हुएन सांग ने मोरध्वज का जिक्र नहीं किया।  पुरातत्व विभाग की वेब साइट (2 ) व की पी नौटियाल की पुस्तक हिम कांति : आर्कियोलॉजी , आर्ट ऐंड  हिस्ट्री  (पृष्ठ 228  ) से पता चलता है कि मोरध्वज या मयूरध्वज नगर  (बिजनौर ) हर्ष काल से भी पहले अस्तित्व में था।
  पुराव विभाग अनुसार मोरध्वज संस्कृति के दो चरण हैं  -
१- 5 वीं सदी ईशा पूर्व से 2 सड़े ईशा पूर्व की कृष्ण मार्जित संस्कृति
२ - द्वितीय चरण की संस्कृति 2 -1 सदी ईशा पूर्व कुषाण कालीन संस्कृति , बुद्ध मूर्ति स्तूप आदि
  डबराल उल्लेख करते हैं कि स्तूप शायद सातवीं सदी के हैं तो हर्ष काल में मोरध्वज शहर विद्यमान था
-   
सन्दर्भ :

 

१- Dabral, Shiv Prasad, (1960), Uttarakhand ka Itihas Bhag- 3, Veer Gatha Press, Garhwal, India page 395

 २- आर्किलोजिकल वेब साइट (गूगल scholar )- www. asidehraduncircle.inexcavation_hn.html





 

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 Mordhwaj( Bijnor)  in Harsha Period , History of  Kankhal, Haridwar, Uttarakhand ;  Mordhwaj( Bijnor)  in Harsha Period , History of Har ki Paidi Haridwar, Uttarakhand ;  Mordhwaj( Bijnor)  in Harsha Period , History of Jwalapur Haridwar, Uttarakhand ;   Mordhwaj( Bijnor)  in Harsha Period , History of Telpura Haridwar, Uttarakhand  ;  Mordhwaj( Bijnor)  in Harsha Period , History of Sakrauda Haridwar, Uttarakhand ;    , Mordhwaj( Bijnor)  in Harsha Period , History of Bhagwanpur Haridwar, Uttarakhand ;  Mordhwaj( Bijnor)  in Harsha Period , History of Roorkee, Haridwar, Uttarakhand  ;    Mordhwaj( Bijnor)  in Harsha Period , History of Jhabarera Haridwar, Uttarakhand  ;  Mordhwaj( Bijnor)  in Harsha Period , History of Manglaur Haridwar, Uttarakhand ;   Mordhwaj( Bijnor)  in Harsha Period , History of Laksar; Haridwar, Uttarakhand ;  Mordhwaj( Bijnor)  in Harsha Period , History of Sultanpur,  Haridwar, Uttarakhand ;  Mordhwaj( Bijnor)  in Harsha Period , History of Pathri Haridwar, Uttarakhand ; Mordhwaj( Bijnor)  in Harsha Period , History of Landhaur Haridwar, Uttarakhand ;   Mordhwaj( Bijnor)  in Harsha Period , History of Bahdarabad, Uttarakhand ; Haridwar; , Mordhwaj( Bijnor)  in Harsha Period , History of Narsan Haridwar, Uttarakhand ;  Mordhwaj( Bijnor)  in Harsha Period , History of Bijnor;   Seohara ,  Mordhwaj( Bijnor)  in Harsha Period , History of Nazibabad Bijnor ;   Mordhwaj( Bijnor)  in Harsha Period , History of Saharanpur;  Mordhwaj( Bijnor)  in Harsha Period , History of Nakur , Saharanpur;   , Mordhwaj( Bijnor)  in Harsha Period , History of Deoband, Saharanpur;     Mordhwaj( Bijnor)  in Harsha Period , History of Badhsharbaugh , Saharanpur;   Ancient Saharanpur History,     Ancient Bijnor History; Mordhwaj( Bijnor)  in Harsha Period , History Behat Saharanpur

कनखल , हरिद्वार  का प्राचीन   इतिहास में हर्ष काल में मोरध्वज(बिजनोर )  ; तेलपुरा , हरिद्वार  का प्राचीन        इतिहास में हर्ष काल में मोरध्वज(बिजनोर ) ;  सकरौदा ,  हरिद्वार  का प्राचीन    इतिहास में हर्ष काल में मोरध्वज(बिजनोर ) ;   भगवानपुर , हरिद्वार  का प्राचीन   इतिहास में हर्ष काल में मोरध्वज(बिजनोर ) ;रुड़की ,हरिद्वार का प्राचीन    इतिहास में हर्ष काल में मोरध्वज(बिजनोर ) ;                 झाब्रेरा हरिद्वार  का प्राचीन        इतिहास में हर्ष काल में मोरध्वज(बिजनोर ) ; मंगलौर हरिद्वार  का प्राचीन    इतिहास में हर्ष काल में मोरध्वज(बिजनोर ) ;   लक्सर हरिद्वार  का प्राचीन   इतिहास में हर्ष काल में मोरध्वज(बिजनोर )  ;सुल्तानपुर ,हरिद्वार  का प्राचीन   इतिहास में हर्ष काल में मोरध्वज(बिजनोर )  ;पाथरी , हरिद्वार  का प्राचीन   इतिहास में हर्ष काल में मोरध्वज(बिजनोर ) ;                 बहदराबाद , हरिद्वार  का प्राचीन     इतिहास में हर्ष काल में मोरध्वज(बिजनोर ) ;  लंढौर , हरिद्वार  का प्राचीन इतिहा ;ससेवहारा  बिजनौर , बिजनौर  इतिहास में हर्ष काल में मोरध्वज(बिजनोर ) ;    नगीना ,  बिजनौर    इतिहास में हर्ष काल में मोरध्वज(बिजनोर ) ; नजीबाबाद , नूरपुर , बिजनौर इतिहास ;सहारनपुर      इतिहास में हर्ष काल में मोरध्वज(बिजनोर ) ;  देवबंद सहारनपुर का प्राचीन    इतिहास में हर्ष काल में मोरध्वज(बिजनोर ) ;  बेहट सहारनपुर का प्राचीन    इतिहास में हर्ष काल में मोरध्वज(बिजनोर ) ;   नकुर सहरानपुर का प्राचीन   इतिहास में हर्ष काल में मोरध्वज(बिजनोर )    ; Haridwar Itihas, Bijnor Itihas, Saharanpur Itihas

 

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 उत्तराखंड, बिजनौर  इतिहास संदर्भ में मतिपुर का स्थान

Status of Matipur  as per in Yuan Chwang /Hiuen Tsang Tour ( Uttarakhand, Bijnor History reference  ) 


हर्षवर्धन शासन  काल में हरिद्वार, सहारनपुर व बिजनौर इतिहास   13

 History of Haridwar, Bijnor, Saharanpur  in Harsha Vardhana regime    Period - 13
Ancient  History of Haridwar, History Bijnor,   Saharanpur History  Part  -  267                     
                           
    हरिद्वार इतिहास ,  बिजनौर  इतिहास , सहारनपुर   इतिहास  -आदिकाल से सन 1947 तक-भाग -  267               


                  इतिहास विद्यार्थी ::: आचार्य भीष्म कुकरेती 
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    हुएन सांग  /युअन च्वांग की यात्रा में मयूर या मतिपुर  ब्रह्मपुर नगर या जनपद  से मतिनगर गया व वहां से गोविषाण गया।  कनिंघम व सेंत मार्टिन ने मतिपुर की पहचान बिजनौर के मंडावर सिद्ध करने का पर्यटन किया जो किसी भी स्थिति में सही नहीं बैठता (डबराल ) . वाटर्स व स्मिथ ने भी कनिंघम के गणित को गलत सिद्ध किया जो सही है।
 डबराल ने वाटर्स के गणित को सही ठहराते कहा कि च्वांग मतिपुर नगर नहीं अपितु  मति पुर जनपद था ( Moti -pu -lo) .  मतिपुर जनपद  . चंडीघाट गंगा के पूर्व में पड़ता रहा होगा जो वर्तमान हिसाब से  बिजनौर में भी हो सकता है या दक्षिण गढ़वाल या हरिद्वार ।   (डबराल )
 डबराल  (उपरोक्त पृष्ठ ३९० ) वाटर्स व कनिंघम के बयानों का विश्लेषण कर लिखते हैं कि स्रुघ्न , ब्रह्मपुर व गोविषाण जनपद हर्ष शासन अंतर्गत थे किन्तु मतिपुर जनपद पर एक स्वतंत्र शूद्र के अधीन था।  डबराल आश्चर्य व्यक्त करते लिखते हैं कि  परम प्रतापी ईशान वर्मन और सर्व वर्मन के राज्य सीमा पर मतिपुर  राज्य कैसे एक शूद्र नरेश के यहीं रह गया इसका समाधान अभी तक नहीं हुआ। 

सन्दर्भ :

 

Dabral, Shiv Prasad, (1960), Uttarakhand ka Itihas Bhag- 3, Veer Gatha Press, Garhwal, India page 389 -91

 

 

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  Status of Matipur in History of  Kankhal, Haridwar, Uttarakhand ;  Status of Matipur in History of Har ki Paidi Haridwar, Uttarakhand ;  Status of Matipur in History of Jwalapur Haridwar, Uttarakhand ;   Status of Matipur in History of Telpura Haridwar, Uttarakhand  ;  Status of Matipur in History of Sakrauda Haridwar, Uttarakhand ;    , Status of Matipur in History of Bhagwanpur Haridwar, Uttarakhand ;  Status of Matipur in History of Roorkee, Haridwar, Uttarakhand  ;    Status of Matipur in History of Jhabarera Haridwar, Uttarakhand  ;  Status of Matipur in History of Manglaur Haridwar, Uttarakhand ;   Status of Matipur in History of Laksar; Haridwar, Uttarakhand ;  Status of Matipur in History of Sultanpur,  Haridwar, Uttarakhand ;  Status of Matipur in History of Pathri Haridwar, Uttarakhand ; Status of Matipur in History of Landhaur Haridwar, Uttarakhand ;   Status of Matipur in History of Bahdarabad, Uttarakhand ; Haridwar; , Status of Matipur in History of Narsan Haridwar, Uttarakhand ;  Status of Matipur in History of Bijnor;   Seohara ,  Status of Matipur in History of Nazibabad Bijnor ;   Status of Matipur in History of Saharanpur;  Status of Matipur in History of Nakur , Saharanpur;   , Status of Matipur in History of Deoband, Saharanpur;     Status of Matipur in History of Badhsharbaugh , Saharanpur;   Ancient Saharanpur Status of Matipur in History ;     Ancient Bijnor Status of Matipur in History ; Status of Matipur in History Behat Saharanpur

कनखल , हरिद्वार  का प्राचीन इतिहास में मतिपुर का स्थान  ; तेलपुरा , हरिद्वार  का प्राचीन      इतिहास में मतिपुर का स्थान ;  सकरौदा ,  हरिद्वार  का प्राचीन  इतिहास में मतिपुर का स्थान ;   भगवानपुर , हरिद्वार  का प्राचीन इतिहास में मतिपुर का स्थान ;रुड़की ,हरिद्वार का प्राचीन  इतिहास में मतिपुर का स्थान ;                 झाब्रेरा हरिद्वार  का प्राचीन      इतिहास में मतिपुर का स्थान ; मंगलौर हरिद्वार  का प्राचीन  इतिहास में मतिपुर का स्थान ;   लक्सर हरिद्वार  का प्राचीन इतिहास में मतिपुर का स्थान  ;सुल्तानपुर ,हरिद्वार  का प्राचीन इतिहास में मतिपुर का स्थान  ;पाथरी , हरिद्वार  का प्राचीन इतिहास में मतिपुर का स्थान ;                 बहदराबाद , हरिद्वार  का प्राचीन   इतिहास में मतिपुर का स्थान ;  लंढौर , हरिद्वार  का प्राचीन इतिहा ;ससेवहारा  बिजनौर , बिजनौरइतिहास में मतिपुर का स्थान ;    नगीना ,  बिजनौर  इतिहास में मतिपुर का स्थान ; नजीबाबाद , नूरपुर , बिजनौर इतिहास में मतिपुर का स्थान ;सहारनपुर      इतिहास में मतिपुर का स्थान ;  देवबंद सहारनपुर का प्राचीन  इतिहास में मतिपुर का स्थान ;  बेहट सहारनपुर का प्राचीन  इतिहास में मतिपुर का स्थान ;   नकुर सहरानपुर का प्राचीन इतिहास में मतिपुर का स्थान    ; Haridwar Itihas, Bijnor Itihas, Saharanpur Itihas


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हर्षवर्धन युग में हरिद्वार , बिजनौर व सहारनपुर जलवायु

Season of Haridwar, Bijnor, Saharanpur in Harshavardhan Period (Yuan Chwang Travel)
हर्षवर्धन शासन  काल में हरिद्वार, सहारनपुर व बिजनौर इतिहास   14

 History of Haridwar, Bijnor, Saharanpur  in Harsha Vardhana regime    Period - 14
Ancient  History of Haridwar, History Bijnor,   Saharanpur History  Part  -  268                     
                           
    हरिद्वार इतिहास ,  बिजनौर  इतिहास , सहारनपुर   इतिहास  -आदिकाल से सन 1947 तक-भाग -  268               


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  युअन च्वांग यात्रा वर्णन से पता चलता है कि स्रुघ्न (सहारनपुर व हरिद्वार क्षेत्र की जलवायु थानेश्वर समान थी (2 )
भाभर प्रदेश होने कारण हरिद्वार , बिजनौर , सहारनपुर की जलवायु थानेश्वर सामान शुष्क रही होगी (1 ). चूंकि ब्रह्मपुर ऊंचाई पर था तो अवश्य ही जलवायु शीतल रही होगी जो कि यात्री ने कुछ शीतल बताई भी है (3 ) , गोविषाण याने कुमाऊं भाभर व बिजनौर के आसपास का क्षेत्र मतिपुर के जलवायु अनुसार ही था (4 ) . अर्थात ,  हरिद्वार , बिजनौर , सहारनपुर की जलवायु हरियाणा जैसे ही रही होगी।  शुष्क व गरम। गर्मियों में
सन्दर्भ :
 

1 -Dabral, Shiv Prasad, (1960), Uttarakhand ka Itihas Bhag- 3, Veer Gatha Press, Garhwal, India page 395 -96

2 -वाटर्स  , ऑन युअन च्वांग ट्रेवल्स , पृष्ठ 318

3 -वाटर्स , पूर्वोक्त पृष्ठ 329

4 - वाटर्स , उपरोक्त , पृष्ठ 330

 

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   Social, Cultural  and Political History of Haridwar; Social, Cultural  and Political History of  Kankhal , Haridwar; Social, Cultural  and Political History of Jwalapur , Haridwar; Social, Cultural  and Political History of  Rurki Haridwar; Social, Cultural  and Political History of Haridwar; Social, Cultural  and Political History of Laksar , Haridwar; Social, Cultural  and Political History of  Saharanpur;  Social, Cultural  and Political History of  Behat , Saharanpur; Social, Cultural  and Political History of  Saharanpur;   Social, Cultural  and Political History of Nakur,  Saharanpur Social, Cultural  and Political History of  Devband , Saharanpur;  Social, Cultural  and Political History of  Bijnor ; Social, Cultural  and Political History of  Bijnor ; Social, Cultural  and Political History of  Nazibabad , Bijnor Social, Cultural  and Political History of  Bijnor; Social, Cultural  and Political History of Nagina  Bijnor ; Social, Cultural  and Political History of  Dhampur , Bijnor ;  Social, Cultural  and Political History of  Chandpur Bijnor ; 



 






 


 














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  युअन च्वांग की यात्रा वर्णन में हरिद्वार , सहारनपुर बिजनौर की उपज

Produces in Haridwar, Bijnor, Saharanpur in Yuan Chwang Travel Memoir
हर्षवर्धन शासन  काल में हरिद्वार, सहारनपुर व बिजनौर इतिहास   15

 History of Haridwar, Bijnor, Saharanpur  in Harsha Vardhana regime    Period - 15
Ancient  History of Haridwar, History Bijnor,   Saharanpur History  Part  -  269                     
                           
    हरिद्वार इतिहास ,  बिजनौर  इतिहास , सहारनपुर   इतिहास  -आदिकाल से सन 1947 तक-भाग -  269               


                  इतिहास विद्यार्थी ::: आचार्य भीष्म कुकरेती 
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डबराल ने थॉमस वाटर्स के पुस्तक ' ऑन युअन च्वांग ट्रैवल्स इन इण्डिया जिल्द 1 के संदर्भ में उपज बारे में निम्न सूचनाएं दीं हैं
    स्रुघ्न (वर्तमान सहरानपुर  क्षेत्र विशेषकर वेहट ) की धरती स्थाणेश्वर  (हरियाणा ) के समान उपजाऊ थी। स्रुघ्न में भी वही फसलें होती थीं।  ब्रह्मपुर में नियमित रूप से दो फसलें होती थीं।  गोविषाण में भी वही फसलें होती थीं जो मतिपुर में होती थीं याने फलसों , उपज लिहाज से सहारनपुर, हरिद्वार , भाभर , बिजनौर ,काशीपुर क्षेत्र उपजाऊ ही थे।  वाटर्स (पृष्ठ 178 )अनुसार   इन क्षेत्रों में धन , गेंहू , जौ , चना , गन्ना , फल सब्जियों का उत्पादन होता था।
   डबराल ने हर्ष चरित  का उद्धरण देकर उल्लेख किया कि हरिद्वार , बिजनौर , सहारनपुर के शहरों में हिमालयी बर्फ की मांग थी और ज्वर में लोग बर्फ की पट्टी माथे व शरीर पर बान्धत्ते थे।  छाछ आदि की मटकियों को बर्फ से लपेटकर ठंडा रखने हेतु भी बर्फ उपयोग  होता था।  इसका अर्थ है कि हिमालय क्षेत्रों से बर्फ लाने हेतु तकनीक व परिहवन उपलब्ध था व अन्य साधन भी प्रयोग होते थे।  लकड़ी का बुरादा आदि भी उपयोग में आता होगा , बुरादा बनाने हेतु  आरी आदि उपकरण प्रयोग किये जाते होंगे।  बर्फ शायद जानवरों की खाल से बने थैलों में लाया जाता रहा होगा।   पहाड़ों में ब्रिटिश काल के समय लकड़ी की परोठी में ठंडा या गर्म खाद्य पदार्थ रखा जाता था कि तापमान जस का तस रहे तो हो सकता है कि लकड़ी की मटकियों में बर्फ रखकर लाया जाता रहा होगा।  बर्फ लाने हेतु जो भी उपकरण प्रयोग होत्ते थे उससे पता चलता है कि  मैदानों  में खुशहाली थी।   

सन्दर्भ :

 

1-Dabral, Shiv Prasad, (1960), Uttarakhand ka Itihas Bhag- 3, Veer Gatha Press, Garhwal, India page 396

2- Watters , Thomas , On Yuan Chwang Travels in India 629-645 AD Vol I, , pages   318 , 328 -330



 

 

 

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   Produces of Haridwar, Saharanpur , Bijnor &  Social , Cultural  and Political History of Haridwar; Produces of Haridwar, Saharanpur , Bijnor &  Social , Cultural  and Political History of  Kankhal , Haridwar; Produces of Haridwar, Saharanpur , Bijnor &  Social , Cultural  and Political History of Jwalapur , Haridwar; Produces of Haridwar, Saharanpur , Bijnor &  Social , Cultural  and Political History of  Rurki Haridwar; Produces of Haridwar, Saharanpur , Bijnor &  Social , Cultural  and Political History of Haridwar; Produces of Haridwar, Saharanpur , Bijnor &  Social , Cultural  and Political History of Laksar , Haridwar; Produces of Haridwar, Saharanpur , Bijnor &  Social , Cultural  and Political History of  Saharanpur;  Produces of Haridwar, Saharanpur , Bijnor &  Social , Cultural  and Political History of  Behat , Saharanpur; Produces of Haridwar, Saharanpur , Bijnor &  Social , Cultural  and Political History of  Saharanpur;   Produces of Haridwar, Saharanpur , Bijnor &  Social , Cultural  and Political History of Nakur,  Saharanpur Produces of Haridwar, Saharanpur , Bijnor &  Social , Cultural  and Political History of  Devband , Saharanpur;  Produces of Haridwar, Saharanpur , Bijnor &  Social , Cultural  and Political History of  Bijnor ; Produces of Haridwar, Saharanpur , Bijnor &  Social , Cultural  and Political History of  Bijnor ; Produces of Haridwar, Saharanpur , Bijnor &  Social , Cultural  and Political History of  Nazibabad , Bijnor Produces of Haridwar, Saharanpur , Bijnor &  Social , Cultural  and Political History of  Bijnor; Produces of Haridwar, Saharanpur , Bijnor &  Social , Cultural  and Political History of Nagina  Bijnor ; Produces of Haridwar, Saharanpur , Bijnor &  Social , Cultural  and Political History of  Dhampur , Bijnor ;  Produces of Haridwar, Saharanpur , Bijnor &  Social , Cultural  and Political History of  Chandpur Bijnor ; 

 






 


 














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हर्षवर्धन काल में हरिद्वार , बिजनौर , सहरानपुर के निवासी

People of Haridwar, Bijnor and Saharanpur in HarshaVardhan Period

हर्षवर्धन शासन  काल में हरिद्वार, सहारनपुर व बिजनौर इतिहास   16

 History of Haridwar, Bijnor, Saharanpur  in Harsha Vardhana regime    Period - 16
Ancient  History of Haridwar, History Bijnor,   Saharanpur History  Part  -  270                     
                           
    हरिद्वार इतिहास ,  बिजनौर  इतिहास , सहारनपुर   इतिहास  -आदिकाल से सन 1947 तक-भाग -  270               


                  इतिहास विद्यार्थी ::: आचार्य भीष्म कुकरेती 
-
वाटर्स के च्वांग यात्रा  पुस्तक से स्रुघ्न , ब्रह्मपुर , गोविषाण में हर्ष काल में निवासियों की सूचना मिलती है।   च्वांग अनुसार स्रुघ्न , ब्रह्मपुर , मयूर की जनसंख्या घनी थी।  यात्री का संदर्भ इन शहरों से रहा होगा। 
   च्वांग अनुसार स्रुघ्न के निवासी स्वाभाव से विश्वास पात्र थे (2 ) . स्रुघ्न निवासी विद्वानों का सत्कार करते थे व धार्मिक व दार्शनिक विद्वानों के प्रति विशेष श्रद्धावान थे।
    गोविषाण (बिजनौर का भूभाग भी ) निवासी विश्वासपात्र व सत्यवादी थे।  वे विद्याध्ययन प्रति ध्यान रखते थे।  धार्मिक कृत्य प्रेमी थे।  बौद्ध अनुयायी बिरले ही थे यहां के निवासी भौतिक सुख को और अधिक ध्यान देते थे (3 )

सन्दर्भ :

 

1- Dabral, Shiv Prasad, (1960), Uttarakhand ka Itihas Bhag- 3, Veer Gatha Press, Garhwal, India page 396 -397

 2 -वाटर्स , ऑन युअन च्वांग ट्रैवल्स इन इण्डिया , जिल्द 1 , पृष्ठ , 318

3 --वाटर्स , ऑन युअन च्वांग ट्रैवल्स इन इण्डिया , जिल्द 1 , पृष्ठ 329

4 -वाटर्स , ऑन युअन च्वांग ट्रैवल्स इन इण्डिया , जिल्द 1 , पृष्ठ  ३३०

 

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हर्षवर्धन काल में हरिद्वार , बिजनौर , सहरानपुर में आश्रम व्यवस्था

Ashram Culture in  Haridwar, Bijnor and Saharanpur in HarshaVardhan Period

हर्षवर्धन शासन  काल में हरिद्वार, सहारनपुर व बिजनौर इतिहास   17

 History of Haridwar, Bijnor, Saharanpur  in Harsha Vardhana regime    Period - 17
Ancient  History of Haridwar, History Bijnor,   Saharanpur History  Part  -  271                   
                           
    हरिद्वार इतिहास ,  बिजनौर  इतिहास , सहारनपुर   इतिहास  -आदिकाल से सन 1947 तक-भाग -  271               


                  इतिहास विद्यार्थी ::: आचार्य भीष्म कुकरेती 
-
     हर्षकाल में हरिद्वार , बिजनौर , सहारनपुर आदि की संस्कृति जानने हेतु वाण भट्ट कृत हर्ष चरित का संदर्भ सटीक संदर्भ है।  हर्ष के परिवार की पुरानी राजधानी या राज्य भी हरिद्वार के निकट ही था। 
     हर्ष कल में भारतियों मुख्यतया हिन्दुओं में ब्रह्मचर्य , गृहस्थ , वानप्रस्थ तीन आश्रम स्थिति बनी हुयी थी।  बालक बालिकाएं घर पर या ब्रह्मणों के लघु विद्यालयों में शिक्षा लेते थे। ब्राह्मणो के घर में विद्याध्ययन व चर्चा की आवाज आतीं थी (2 )
   ब्राह्मण वेद अभ्यासी थे (3 ) . ब्राह्मण अपनी सामर्थ्य अनुसार शास्त्रों पर चर्चा करते थे तथा सुभषितों की रचना होती थी।
    हर्षचरित (उ  पृष्ठ १४४ ) अनुसार गुरुकुल की दिनचर्या में उप्पध्याय व शिष्य संतोषी होते थे।  प्रातः स्नान उपरान्त तीर्थ मृतिका  व गोरचन का तिलक लगते थे।  आँखों में अंजन लगाते व पैन चर्वण करते थे।
   हर्षचरित ु उ 3 पृष्ठ १४९ अनुसार शिष्य संध्या तक बलकल बटोर लेते थे व उपाध्याय पत्नी अग्निहोत्र हेतु अग्नि तैयार करती थी।  गौवों का दुग्ध दोहन होता था। बतज़्न अपने आसन में बैठ जप करते थे व योगीजन ब्रह्म ध्यान करते थे।
   हच ३ पृष्ठ १८० में उल्लेख है कि बटुओं को भोजन व वस्त्र गुरुकुल में उपलब्ध होते थे।  गुरु आसन उललंघन वर्जित था।
 हच 3 , पृष्ठ 265 में बौद्ध धर्मियों पर प्रकाश पड़ता है कि भूढ़ मत संबंधी पाठन व महा मयूरी  जैसे ग्रंथों पर चर्चा होती थी।
 हच  3 , पृष्ठ 238 अनुसार विवाह बड़ी आयु में होते थे।
  हक ३ , पृष्ठ २२८ अनुसार पुत्र जन्म पर उत्तस्न होते थे।
 हर्ष चरित में वर्णित संदर्भ के आधार पर डबराल लिखते हैं कि -
   सती प्रथा थी व अशुच दिवस मनाये जाते थे।  प्रेत पिंड खाने वाले ब्राह्मण को भोजन दिया जाता था, मृतक के उपयोगी वस्तुएं उसे दी जातीं थीं ।  मृतक की हड्डी तीर्थों में भेजी जाती थी।  गढ़वाल में यह प्रथा ब्रिटिश समय तक विद्यमान थी व्  ऐसे ब्राह्मणों को भैड़ा कहते थे।
डबराल ने हर्ष चरित अनुसार जनता में ज्योतिष तंत्र मंत्र , ग्रह पूजन पर विश्वास था।
 पुराणों पर जनता में आदर था व कथावाचक पुराण कथा सुनते थे (डबराल )
 

सन्दर्भ :

 

1- Dabral, Shiv Prasad, (1960), Uttarakhand ka Itihas Bhag- 3, Veer Gatha Press, Garhwal, India page 397

2- हर्षचरित उ  २ , पृष्ठ 77

3 -हर्षचरित उ  २ , पृष्ठ 135

4 -हर्षचरित उ  २ , पृष्ठ 144

हर्षचरित उ  २ , पृष्ठ 

 हर्षचरित उ  २ , पृष्ठ

हर्षचरित उ  २ , पृष्ठ   

हर्षचरित उ  २ , पृष्ठ 

 हर्षचरित उ  २ , पृष्ठ

हर्षचरित उ  २ , पृष्ठ 



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हर्षवर्धन काल में हरिद्वार , बिजनौर , सहरानपुर में आम नागरिकों की भाषा

Common Men language  in  Haridwar, Bijnor and Saharanpur in HarshaVardhan Period

हर्षवर्धन शासन  काल में हरिद्वार, सहारनपुर व बिजनौर इतिहास   17

 History of Haridwar, Bijnor, Saharanpur  in Harsha Vardhana regime    Period - 17
Ancient  History of Haridwar, History Bijnor,   Saharanpur History  Part  -  271                   
                           
    हरिद्वार इतिहास ,  बिजनौर  इतिहास , सहारनपुर   इतिहास  -आदिकाल से सन 1947 तक-भाग -  271               


                  इतिहास विद्यार्थी ::: आचार्य भीष्म कुकरेती
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 जनसाधारण की भाषा स्थानीय भाषा थी जिसे अपभृंश या केवल भाषा कहते हैं।  स्थानीय भाषाओँ में अधिकतर लोक साहित्य रचा जाता था जो श्रुति साहित्य होता था।  डबराल ने सूचित किया कि हर्ष चरित अनुसार वां भट्ट के एक मित्र 'ईशान 'भाषा कवि' था। राजकार्य संस्कृत में होते थे।  उच्च वर्गीय विद्वान संस्कृत में साहित्य रचते थे व वार्ता करते थे।  विद्यालयों में संस्कृत पढ़ाई जाती थी।  यही कारण है कि स्थानीय भाषाओँ में संस्कृत शब्द व संस्कृत भाषायी संस्कृति घुसने लगी थी।  अगले अध्याय में  बताया  जायेगा कि किस तरह गाँवों के नाम रिकॉर्ड में संस्कृतनिष्ठ होने लगे थे।
 उत्तराखंड में मिले सातवीं सदी के शिलालेख शुद्ध संस्कृत में मिले हैं जो द्योतक हैं कि उत्तराखंड , बिजनौर व सहारनपुर में संस्कृत का पठन पठान सुलभ था।  डबराल अनुसार संस्कृत में ललित छंद रचने वाले संस्कृत कवि थे।

सन्दर्भ :

 

1- Dabral, Shiv Prasad, (1960), Uttarakhand ka Itihas Bhag- 3, Veer Gatha Press, Garhwal, India 398

 

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    हर्षवर्धन काल में शैव्य पंथ
Shaivism इन Harsha Period
हर्षवर्धन शासन  काल में हरिद्वार, सहारनपुर व बिजनौर इतिहास   18

 History of Haridwar, Bijnor, Saharanpur  in Harsha Vardhana regime    Period - 18
Ancient  History of Haridwar, History Bijnor,   Saharanpur History  Part  -  272                   
                           
    हरिद्वार इतिहास ,  बिजनौर  इतिहास , सहारनपुर   इतिहास  -आदिकाल से सन 1947 तक-भाग -  272               


                  इतिहास विद्यार्थी ::: आचार्य भीष्म कुकरेती 
-
  हर्षचरित से पता चलता है कि भारत में कई पंथ अनुयायी थे उनमे पाशुपात शैव , कापालिक , पाचारात्रिक , भागवत , चार्वाक , बौद्ध , जैन प्रमुख थे।  (2  )
 हर्षचरित अनुसार शैव्यों में शांत व रौद्र दोनों रूप विद्यमान थे। अनेक दक्षिणा त्य शैव्य उत्तर भारत में आकर चंडिका , शिव , भैरव आदि मंदिरों में रहने लगे थे (1 ) उत्तराखंड हरिद्वार सह के प्रति शैव्य साधकों का विशेष आकर्षण था।
    हर्षचिरत अनुसार शैव्य साधु प्रातः जगकर स्नान करते थे , अष्टमूर्ति को मालाएं पहनाकर अग्निहोत्र करते थे।  मैनसिल का तिलक , राख का त्रिपुण्ड , छोटी पर रुद्राक्ष बांधते थे व शंख पुटिका बांधते थे (3 )
   शैव्य साधकों के बांये हाथ पर लोहे का कड़े में छोटा शंख पिरोया होता था और कई सुष्ढियों के पत्तियों में मंत्र सिद्ध औषधियां बंधी होती थीं।  दाहिने हाथ  में रुद्राक्ष माला से जाप करते थे (1 )। 
    शैव्य साधक कोपों धारण करते , खड़ाऊं पहनते थे।  वीरासन लगाते थे व बांस की बैसाखी रखते थे तथा नदियों व तीर्थों में स्नान करते थे (4 )
  शैव्य साधक विकट साधक थे धन का लोभी  न थे व भिक्षाटन से काम चला लेते थे (5 )
  डबराल ने हर्षचरित का संदर्भ लेते लिखा है कि  शैव्य साधक विधि पूर्वक दीक्षा लेते थे (1 )

 
   शैव्य साधक वेताल साधना में रुधिर बलि चढ़ाते थे और वेटलों की जिव उन्हें चाटती थीं।  ये असुर व विकट साधना करते थे (6 ). शैव्य बाम पंथी श्मशान में महामांश भक्षण करते थे व इष्ट को अर्पित करते थे (7 )
सन्दर्भ :

 

1- Dabral, Shiv Prasad, (1960), Uttarakhand ka Itihas Bhag- 3, Veer Gatha Press, Garhwal, India 399

2 - हर्षचरित उ 8 , पृष्ठ 423

3 -हर्षचरित उ 5 , पृष्ठ 171

 4 -हर्षचरित उ 3 , 178

5 -हर्षचरित उ 3 पृ 380 -81

6 -हर्षचरित उ , पृ 185

७- हर्षचरित 3 175

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 हर्षकाल में गृहस्थ शैव्य (हरिद्वार बिजनौर सहरानपुर इतिहास संदर्भ )

Family Shivya in  Harsha Period
हर्षवर्धन शासन  काल में हरिद्वार, सहारनपुर व बिजनौर इतिहास   19

 History of Haridwar, Bijnor, Saharanpur  in Harsha Vardhana regime    Period - 19
Ancient  History of Haridwar, History Bijnor,   Saharanpur History  Part  -  273                     
                           
    हरिद्वार इतिहास ,  बिजनौर  इतिहास , सहारनपुर   इतिहास  -आदिकाल से सन 1947 तक-भाग -  273                 


                  इतिहास विद्यार्थी ::: आचार्य भीष्म कुकरेती 
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 गृहस्थ शैव्य शिव पूजन में गूगल की धूप , दुग्धस्नान , व विल्वपत्र की मालाएं अर्पण करते थे(2 )।  श्रद्धालु भक्त शिव देवालयों में शव्त बैल , कलस , पूजा या धूप पात्र , उत्तम वस्त्र , दिए , जनेऊ , अपनी सामर्थ्य अनुसार अर्पित करते थे। (3 )
     शिव भक्त रूद्र शिव पर विश्वास करते थे व रूद्र एकादस पाठ करवाते थे व् शिवलिंग पर दूध चढ़ाते थे। (4 )
  कुछ भक्त महाकाल पूजा हेतु गुग्गुल जलाकर चोटी पर भी रखते थे  (5 )
   भक्तों मध्य विश्वास था कि उपवास से शिव प्रसन्न होते हैं (6 ) .


सन्दर्भ :

 

1- Dabral, Shiv Prasad, (1960), Uttarakhand ka Itihas Bhag- 3, Veer Gatha Press, Garhwal, India page 400

2 -हर्षचरित , उ ० 3 , पृष्ठ 170

3 -हर्षचरित , उ ० 3 , पृष्ठ  171

4 -हर्षचरित , उ ० 5 , पृष्ठ 280

5 -हर्षचरित , उ ० , 5 पृष्ठ 263

6 हच   उ  4 पृ 208 

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Shaivya family , History of Haridwar; Shaivya family , History of  Kankhal , Haridwar; Shaivya family , History of Jwalapur , Haridwar; Shaivya family , History  of  Rurki Haridwar; Shaivya family , History  of Haridwar; Shaivya family , History  of Laksar , Haridwar; Shaivya family , History  of  Saharanpur; Shaivya family , History of  Behat , Saharanpur; Shaivya family , History  of  Saharanpur; Shaivya family , History  of Nakur,  SaharanpurShaivya family , History of  Devband , Saharanpur; Shaivya family , History of  Bijnor ; Shaivya family , History  of  Bijnor ; Shaivya family , History  of  Nazibabad , BijnorShaivya family , History of  Bijnor; Shaivya family , History  of Nagina  Bijnor ; Shaivya family , History  of  Dhampur , Bijnor ; Shaivya family , History of  Chandpur Bijnor ; 

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