• Welcome to MeraPahad Community Of Uttarakhand Lovers.
 

Garhwali Poems by Balkrishan D Dhyani-बालकृष्ण डी ध्यानी की कवितायें

Started by एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720, October 03, 2011, 12:06:15 AM

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

बालकृष्ण डी ध्यानी
December 22
आ जा आना है तो

आ जा आना है तो
तू खुलकर आना पास मेरे
बांध ले जाना मुझे
मुझको मुझसे दूर यंह से

माना बाँध रखा है तूने
आस्तियों,मांस के लोथड़े से मुझको
मै तो मुक्त हूँ विचारों से
इन सब शरीर के अविकारों से

प्रकाश हूँ मै
ना कर पाया प्रकाशित तुझे
आने जाने वाले उस पथ के
अँधेरे गलियों के अंधकारों से

ना मेरा था ना ही वो तेरा था
मेरा तेरे धड़ में रैन बसेरा था
अब निठला रह जायेगा तू
जब मैं छोड़ चला जाऊँगा दूर

आ जा आना है तो
तू खुलकर आना पास मेरे
बांध ले जाना मुझे
मुझको मुझसे दूर यंह से

एक उत्तराखंडी

बालकृष्ण डी ध्यानी
देवभूमि बद्री-केदारनाथ
मेरा ब्लोग्स
http:// balkrishna_dhyani.blogspot.com
में पूर्व प्रकाशित -सर्वाधिकार सुरक्षित

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

बालकृष्ण डी ध्यानी
9 hours ago
क्या शांत हुआ ?

जल गयी तन चिता
धुंआ बन मन बस उड़ा
राख हुयी अहम काया
हवा पानी धरा किनारा

मिल गया अपने से
भागा जिस सच्चे सपने से
उसने अपना लिया मुझे
फिनके सा लाल तप के

अब भी लपक रहा
किस तरंह वो झपक रहा
चिर चिर कर ख़ाक हुआ
क्या चिरशांत हुआ

मोह और पनप रहा
दूर राह से टपका रहा
घर धड़ छोड़कर भी
आत्मा वो भटक रहा

एक उत्तराखंडी

बालकृष्ण डी ध्यानी
देवभूमि बद्री-केदारनाथ
मेरा ब्लोग्स
http:// balkrishna_dhyani.blogspot.com
में पूर्व प्रकाशित -सर्वाधिकार सुरक्षित

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

बालकृष्ण डी ध्यानी December 24वो हालते मेरी

हालत कि क्या बात करूँ
सुबह करूँ वही शाम करूँ

पायदान शिखर का पाने को
दिल रोज ही तड़पता रहा

ग़ालिब का शेर अकेले
याद आ कर गुनगुनाता रहा

सफर छाँव ने झुलसा दिया
अंदाजा मेरा झुठला दिया

आती रही कदम दर कदम
तकलीफ मेरी मौत के करीब

परेशानी उस हाल में भी
मुझे आ कर गुदगुदाती रही

फिर भी ये हालते जिंदगी
मुझे देखकर मुस्कुराती रही   

बस वो लड़ती रही ,लड़ती रही
वो हालते मेरी

एक उत्तराखंडी

बालकृष्ण डी ध्यानी
देवभूमि बद्री-केदारनाथ
मेरा ब्लोग्स
http:// balkrishna_dhyani.blogspot.com
में पूर्व प्रकाशित -सर्वाधिकार सुरक्षित

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

बालकृष्ण डी ध्यानी
December 22
आ जा आना है तो

आ जा आना है तो
तू खुलकर आना पास मेरे
बांध ले जाना मुझे
मुझको मुझसे दूर यंह से

माना बाँध रखा है तूने
आस्तियों,मांस के लोथड़े से मुझको
मै तो मुक्त हूँ विचारों से
इन सब शरीर के अविकारों से

प्रकाश हूँ मै
ना कर पाया प्रकाशित तुझे
आने जाने वाले उस पथ के
अँधेरे गलियों के अंधकारों से

ना मेरा था ना ही वो तेरा था
मेरा तेरे धड़ में रैन बसेरा था
अब निठला रह जायेगा तू
जब मैं छोड़ चला जाऊँगा दूर

आ जा आना है तो
तू खुलकर आना पास मेरे
बांध ले जाना मुझे
मुझको मुझसे दूर यंह से

एक उत्तराखंडी

बालकृष्ण डी ध्यानी
देवभूमि बद्री-केदारनाथ
मेरा ब्लोग्स
http:// balkrishna_dhyani.blogspot.com
में पूर्व प्रकाशित -सर्वाधिकार सुरक्षित

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

वो चौराह

आम कि बात है
जीती क्या ? जनलोकपाल है
लोकपाल का जन-मण रहा
आम में ही मतभेद रहा

आम जागा था , ठगा रहा
खास सोया था पनपा रहा
कर आंदोलन क्या तूने पाया
आम चौराह पर फिर लौट आया

खेल है ये खेला सदियों से
शतरंज कि बिछी बिसात पर
राजनीती का अंत,वंहा शुरुवात है
आम क्या तेरी औकात है

एक उत्तराखंडी

बालकृष्ण डी ध्यानी
देवभूमि बद्री-केदारनाथ
मेरा ब्लोग्स
http:// balkrishna_dhyani.blogspot.com
में पूर्व प्रकाशित -सर्वाधिकार सुरक्षित

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

बालकृष्ण डी ध्यानी 
पास मेरे आ जा

मेरे
आस पास आज
नजदीकियां दूरियां
ऊंचाईयां गहराईयां
बनते बिगड़ते
लड़ते झगड़ते
टूटते लड़खड़ते
रिश्तों कि तस्वीरें
टंगी दीवारों में
कुछ तिरछी कुछ सुलझी
कुछ धूल खायी
कुछ कांच चटकी
अपने से लटकी
नजरों में किसी के ख़टकी
लेना देना और देना
और सब कुछ ले जाना
ना तेरा ना मेरा
किस्सा ये अंजाना
ले जाता है दूर कंही
अकेले में तन्हा
अपनों से वो बेगाना
सफर कंहा चला
बड़ा याद आता है
पीछे छूटा वो
एक मेरा गाँव पुराना
किसी कोने में बैठा
पंगडंडी सा वो अलबेला
बंसुरी तिरछी तेड़ पर
बुलबुल बैठी उस पेड़ पर
वंही दूर उस मेड़ पर
वो मुझसे रूठा
मेरा बचपन बुलाता है
आ आ जा
पास मेरे आ जा

एक उत्तराखंडी

बालकृष्ण डी ध्यानी
देवभूमि बद्री-केदारनाथ
मेरा ब्लोग्स
http:// balkrishna_dhyani.blogspot.com
में पूर्व प्रकाशित -सर्वाधिकार सुरक्षित

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

अपने को छुपा रखा

अपने को छुपा रखा
उस मकबरे सीने में दबा रखा है
बस सांस ही चलती है भक भक
नक छिद्रों से झक झक
अपने को छुपा रखा.............. ......

आँखों ने कोण बना रखा है
सबको समकोण सा सजा रखा है
कानों कि देख-रेख में
बालों के अड़े तिरछे फेर में
अपने को छुपा रखा.............. ......

माथे कि लकीरों में
हाथों कि तकदीरों में
दो बाहों को फैला रखा है
इस पेट को अड़ा रखा है
अपने को छुपा रखा.............. ......

जांध का ले सहारा
पैरों ने ताड़ा वो किनारा
उंगलियां ही बस ये थिरकी हैं
साथ वो पलकें अब झपकी है
अपने को छुपा रखा.............. ......

शरीर के इस आकार साथ
फिर रहा हूँ बस मौका झाड़ में
लहू और आँतों के खेल में
आत्म और दिमाग के व्यापार में
अपने को छुपा रखा.............. ......

बस मै रह गया तेरे प्यार में
गड़बड़ा गया माया संसार में
जोड़ गुना भागा से भागा मै
अपने आप से अब हार मै
अपने को छुपा रखा.............. ......

एक उत्तराखंडी

बालकृष्ण डी ध्यानी
देवभूमि बद्री-केदारनाथ
मेरा ब्लोग्स
http:// balkrishna_dhyani.blogspot.com
में पूर्व प्रकाशित -सर्वाधिकार सुरक्षित

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

बालकृष्ण डी ध्यानी

अपने को छुपा रखा

अपने को छुपा रखा
उस मकबरे सीने में दबा रखा है
बस सांस ही चलती है भक भक
नक छिद्रों से झक झक
अपने को छुपा रखा.............. ......

आँखों ने कोण बना रखा है
सबको समकोण सा सजा रखा है
कानों कि देख-रेख में
बालों के अड़े तिरछे फेर में
अपने को छुपा रखा.............. ......

माथे कि लकीरों में
हाथों कि तकदीरों में
दो बाहों को फैला रखा है
इस पेट को अड़ा रखा है
अपने को छुपा रखा.............. ......

जांध का ले सहारा
पैरों ने ताड़ा वो किनारा
उंगलियां ही बस ये थिरकी हैं
साथ वो पलकें अब झपकी है
अपने को छुपा रखा.............. ......

शरीर के इस आकार साथ
फिर रहा हूँ बस मौका झाड़ में
लहू और आँतों के खेल में
आत्म और दिमाग के व्यापार में
अपने को छुपा रखा.............. ......

बस मै रह गया तेरे प्यार में
गड़बड़ा गया माया संसार में
जोड़ गुना भागा से भागा मै
अपने आप से अब हार मै
अपने को छुपा रखा.............. ......

एक उत्तराखंडी

बालकृष्ण डी ध्यानी
देवभूमि बद्री-केदारनाथ
मेरा ब्लोग्स
http:// balkrishna_dhyani.blogspot.com
में पूर्व प्रकाशित -सर्वाधिकार सुरक्षित

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

बालकृष्ण डी ध्यानी
8 hours ago
रहे याद बस

भूल जाता हूँ
याद कुछ रहता नही
रहे याद बस
तेरा इन्तजार ...इन्तजार

उसमे बसा बस तेरा प्यार
वो आँखें कर के चार
दिन रात बस तेरा ख्याल
रहे याद बस
तेरा इन्तजार ...इन्तजार

वो नजर वो कसक
वो आशिकी का असर
चढ़ा मुझ पर इस कदर
रहे याद बस
तेरा इन्तजार ...इन्तजार

महफिल मेरी तुम
मंजिल हो तुम मेरा सहर
गुजरती सांस मेरी तेरी तरफ
रहे याद बस
तेरा इन्तजार ...इन्तजार

रहे हरदम मुझे
इस तरह बस तेरा इन्तजार
गुजरे सात जन्म यूँ ही
रहे याद बस
तेरा इन्तजार ...इन्तजार

एक उत्तराखंडी

बालकृष्ण डी ध्यानी
देवभूमि बद्री-केदारनाथ
मेरा ब्लोग्स
http:// balkrishna_dhyani.blogspot.com
में पूर्व प्रकाशित -सर्वाधिकार सुरक्षित

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

बालकृष्ण डी ध्यानी
December 28
आप चल

आम के भी
अब बढ़ने लगे हैं दम
पेशकाश कि थी सब ने
उकसाया था हमने
कोंग्रेस बी. जे. पी को दे लताड़ा
ले ली अब आप ने
अब दिल्ली कि लगाम थाम
पहले ही दिन
मेट्रो में लगाकर जाम
रामलीला मैदान में
केजरीवाल ने लिया
दिल्ली का झाड़ू
अब आप के हाथों में थाम
बाण कुछ चलाये
भ्रस्टाचार को कैसे मिटाये
एक नंबर शीघ्र आयेगा
उसे मिलाये
भ्रस्टाचार भ्रस्टाचारी दिल्ली
से अब भगाये या मिटाये
...... अब तो शुरुवात

सतत जारी है

एक उत्तराखंडी

बालकृष्ण डी ध्यानी
देवभूमि बद्री-केदारनाथ
मेरा ब्लोग्स
http:// balkrishna_dhyani.blogspot.com
में पूर्व प्रकाशित -सर्वाधिकार सुरक्षित