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Garhwali Poems by Balkrishan D Dhyani-बालकृष्ण डी ध्यानी की कवितायें

Started by एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720, October 03, 2011, 12:06:15 AM

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

बालकृष्ण डी ध्यानी 48 minutes agoअलविदा साल २०१३

नया क्या है सब तो यंहा पर पुराना है
आता जाता बस ये साल तो दीवाना है
एक को छोड़ कर दूजे को अपनान है
नया क्या है सब तो यंहा पर पुराना है .....

बिता दिन बिता यंहा बिता गुजरा साल
एक को जाते देखा मैंने एक का किया इंतजार
बोलो हर दिन वो ,हर साल क्या किया तुम ने
नया क्या है सब तो यंहा पर पुराना है ...

मिले या ना मिले जो भी खुश रहो यंहा यार
जिंदगी का है ये फसाना बस बचे दिन चार
गुजर जाये ये सफर यूँ ही गाकर तराने यार
नया क्या है सब तो यंहा पर पुराना है ...

अलविदा साल अब तू हुआ है पुराना
नये साल को मुबारक आगाज का बहाना
दुःख सुख जो मिले मिलकर हमे बिताना
नया क्या है सब तो यंहा पर पुराना है ...

नया क्या है सब तो यंहा पर पुराना है
आता जाता बस ये साल तो दीवाना है
एक को छोड़ कर दूजे को अपनान है
नया क्या है सब तो यंहा पर पुराना है ...।

एक उत्तराखंडी

बालकृष्ण डी ध्यानी
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एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

बालकृष्ण डी ध्यानी December 29रहे याद बस

भूल जाता हूँ
याद कुछ रहता नही
रहे याद बस
तेरा इन्तजार ...इन्तजार

उसमे बसा बस तेरा प्यार
वो आँखें कर के चार
दिन रात बस तेरा ख्याल
रहे याद बस
तेरा इन्तजार ...इन्तजार

वो नजर वो कसक
वो आशिकी का असर
चढ़ा मुझ पर इस कदर
रहे याद बस
तेरा इन्तजार ...इन्तजार

महफिल मेरी तुम
मंजिल हो तुम मेरा सहर
गुजरती सांस मेरी तेरी तरफ
रहे याद बस
तेरा इन्तजार ...इन्तजार

रहे हरदम  मुझे
इस तरह बस तेरा इन्तजार
गुजरे सात जन्म  यूँ ही
रहे याद बस
तेरा इन्तजार ...इन्तजार
 
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बालकृष्ण डी ध्यानी December 28आप चल

आम के भी
अब बढ़ने लगे हैं दम
पेशकाश कि थी सब ने
उकसाया था हमने
कोंग्रेस बी. जे. पी को दे लताड़ा
ले ली अब आप ने 
अब दिल्ली कि लगाम थाम
पहले ही दिन 
मेट्रो में लगाकर जाम
रामलीला मैदान में
केजरीवाल ने लिया
दिल्ली का झाड़ू
अब आप के हाथों में थाम
बाण कुछ चलाये
भ्रस्टाचार को कैसे मिटाये
एक नंबर शीघ्र आयेगा
उसे मिलाये
भ्रस्टाचार भ्रस्टाचारी  दिल्ली
से अब भगाये या मिटाये
  ...... अब तो शुरुवात

सतत जारी है

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अपने को छुपा रखा

अपने को छुपा रखा
उस मकबरे सीने में दबा रखा है
बस सांस ही चलती है भक भक
नक छिद्रों से झक झक
अपने को छुपा रखा.............. ......

आँखों ने कोण बना रखा है
सबको समकोण सा सजा रखा है
कानों कि देख-रेख में
बालों के अड़े तिरछे फेर में
अपने को छुपा रखा.............. ......

माथे कि लकीरों में
हाथों कि तकदीरों में
दो बाहों को फैला रखा है
इस पेट को अड़ा रखा है
अपने को छुपा रखा.............. ......

जांध का ले सहारा
पैरों ने ताड़ा वो किनारा
उंगलियां ही बस ये थिरकी हैं
साथ वो पलकें अब झपकी है
अपने को छुपा रखा.............. ......

शरीर के इस आकार साथ
फिर रहा हूँ बस मौका झाड़ में
लहू और आँतों के खेल में 
आत्म और दिमाग के व्यापार में   
अपने को छुपा रखा.............. ......

बस मै रह गया तेरे प्यार में
गड़बड़ा गया माया संसार में
जोड़ गुना भागा से भागा मै
अपने आप से अब  हार मै
अपने को छुपा रखा.............. ......

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वो पहाड़ मेरा

एक तरफ है जिमेदारी खड़ी
एक तरफ वो पहाड़ मेरा

एक तरफ वो उजाड़ा खड़ा
एक तरफ वो बहार कि और बढ़

एक तरफ कदम वो छूट रहे
एक तरफ वो कदम चले जा रहे

एक तरफ मनमाया खड़ी
एक तरफ जगमाया से जंग छिड़ी

एक तरफ मैं दूजी तरफ वो
किसको छोङो किसको अपनाओं

बस मेरे पहाड़ में ये सवाल खड़ा
एक तरफा मैं वो ख्याल मेरा

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कया आलू त्यार पिछने     

ब्याळि बोलि मि
बोलि भोळ यख
जखम लिख्युं छ
भाग मा कख क्ख्क

बाच ले ये भाग
ज्युओंदगि कि जेल मा
कैल समोंण कैल ले जाण
सब  रै जाणु भोळ यख

क्वी नि अपरु
ना ई यख मा क्वी परायु
गैरा लगणा किले इतगा
सोंसारा का नाता किले यख

ह्वे सकद सब-कुच
मिल बि जालू ऊ तेथे यख
मिल के ऊ बिरानू
कया आलू त्यार पिछने     

एक उत्तराखंडी

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एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

घैल पाड़ ,हर्ची बाट

घैल घैल च पाड़
दैल फ़ैल पसरी दून बाट
उकालो का सुमसाम घाट
देक ले फिरेकी एक बार
घैल पाड़ ,हर्ची बाट

धै लगा दे मेरा दीदा
क्ख्क लुक्यां ऐ मेरा नेता
बारमंबार दिल्ली भगदा
पांच बरसा मा एक बारी दिक्दा
घैल पाड़ ,हर्ची बाट

रोज फाइलुँ चट्टा लगणु
बिण योजना पुल बणाणु
पड्या फ़ाइलों लेकि टक्का
फाइलुं बस तब हुनु निपटारु
घैल पाड़ ,हर्ची बाट

खै खै कि कद्ग खाला
पाड़ पीड़ा कब कनुडी पड़ला
बिज़ी मेरा मंत्री पाड़ा का
रंगरिला ऊँ का कब थमाला
घैल पाड़ ,हर्ची बाट

ब्याल बि बिरड़या छा
आच बि वा बिरड़या छन
म्यारा पाड़ा म्यलदु बाटा
आंखी व्हैकि बि आच हर्ची छन
घैल पाड़ ,हर्ची बाट


एक उत्तराखंडी

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एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

अपरि भाषा बोल्दै

ई अंग्रेजी ई अंग्रेजी
ई अंग्रेजी खै गे मेर बोलि थे
गढ़ कि झोळी थे
ई अंग्रेजी नि

घ्याळ अपण छों
औरि ह्वे गे छे देकि ईं कि दैल फ़ैल
लुचि ली गे छा वा मेरु पुंगडु मेरु बैल
ई अंग्रेजी नि

जी बड़ी मुस्किल व्हैगै
लेक दौड़ि दौड़िक ले जाणि छे
वा अपण तरफ
ई अंग्रेजी नि

क्वी नि जाणद अपरि गढ़ भाष
मंत्री , संतरी अर चपड़ासी सबि ऊं तैं
बुल्दन देकि अंग्रेजी भाष
ई अंग्रेजी नि

नौकरी पर लगिन
अंग्रेजी त यख बि अगिन
ऊँन पब्लिक सर्विस सरकारी दफतर
ई अंग्रेजी नि

सब बगत कि बात च
छौं मि सात या मेर वा अंग्रेजी
मेर दगड तैं ह्वावन। अस्तु वूं व्हैगै
ई अंग्रेजी नि

बुल्दा छा कि भाग्य का वजै
बणी गेन निथर व त कै संगे
लोगुन ऊंक नाम मा अंग्रेजी
ई अंग्रेजी नि

धौर दे सब जिकुड़ी खोल दे
खुस छन भले ही दि सब
खतम कौर दे अपरि गढ़बोलि बोल्दै
ई अंग्रेजी नि

हो पण वो अबि बि त अपरि
बोई -बोलि गढ़वाली -कुम्मयों दादा
उत्तराखंड्यूं मेर भूलूं
ई अंग्रेजी नि

तैं नापणो तराजू तौलि कि
खैकर अर सिरतानी बिच बाजार मा
तौळ छौंपि दे यख गढ़ बोली कि मेर दीदी
ई अंग्रेजी नि

कौर दे हाँ !"
गढ़ बोली कु हि ये बोई पैलू कौर दे
रौब दाब का मेर पाड़ा जनि रौब दे
ई अंग्रेजी नि

पथरड्या बांज पुंगड़
समिण पासंग बि नी च
सीधा इन किलै नि बुलणा छां
मितरा मेर पाड़ी भासा बोल्दै

एक उत्तराखंडी

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धै लगाणी

धै लगाणी
मेर डंडी कंठी
मै अ बुलाणी
ऊ उकाळु कि बाटी
धै लगानि....

काफला कि दाणी
पाड़ो को ठंडो पाणि.....ऐजा ऐजा भुला
धरा बि ये गीत लगाणी
देक कण बथो फरफराणी
धै लगानि....

बलपण कू झुम्पा
बुड्यापण कू गूड-गुडा
कण तै दगड़ी माया लगाणु....ऐजा ऐजा दीदा
अब दा पाड़ा मा जौणों कि बि कथा लगा दे
धै लगानि....

देकेनी यक ब्स मेर लाटी-काटी
मेर बाजू वा मेर बेटी ब्वारी
क्ख्क बिरड़ी तू मेर आसा कू लाठी....ऐजा ऐजा बोबा
किले बिसी तेर ऊ आँनक्यू पाणि
धै लगानि....

धै लगाणी
मेर बोई मेर धरणी
मै अ बुलाणी
उन्का ऊ हेर्दी अंकि
धै लगानि....धै लगानि....धै लगानि....

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बस मिल इनी

परसि कि बात छे
पाड़ों कि वा आग छे
जगदि रैंद कबि यख अब बणी
भैरदेस जाणा कि वा बाट छे
परसि कि बात छे
पाड़ों मा बि आग छे.....

बाबा बोई सौंजड्या
रैगे अब वा घार छे
सौरास मैता मची च
नाना बुढ्यों कि फौज छे
परसि कि बात छे
पाड़ों कि वा आग छे ....

रै- जांदी बस जि यख
आँखि,यखुली बरसात छे
वा बि अबै तक भिजैनि
ज्यु पौडनि पल्या डंडा पार छे
परसि कि बात छे
पाड़ों कि वा आग छे ....

कैल नि सम्झण
अब कैल नि मणंन
कैल बोल्ण कैल ऐकण
बस मिल इनी रुणंन
परसि कि बात छे
पाड़ों कि वा आग छे ....

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