• Welcome to MeraPahad Community Of Uttarakhand Lovers.
 

Garhwali Poems by Balkrishan D Dhyani-बालकृष्ण डी ध्यानी की कवितायें

Started by एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720, October 03, 2011, 12:06:15 AM

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

बालकृष्ण डी ध्यानी
July 7
और बस

आडंबर है मचा हुआ
अपने से वो लगा हुआ
असत्य कथनी जग जाहिर है
अकरण ही तू उस में उलझा हुआ
और बस

कितना और तू उलझेगा
कितना तू सुलझना चाहेगा
कितना तेरे पास रह जायेगा
कितना तेरे साथ आयेगा
और बस

खुद ही अब सोच ले
खुद ही अपने पग आगे बड़ा
खुद ही में जब तू खो जायेगा
खुद ही तू उसे जान जायेगा
और बस

एक बिंदु है वो
एक अखंड सत्य है वो
एक से तू जब एकाकार हो जायेगा
एक में तू उसे बस पायेगा
और बस

आडंबर है मचा हुआ
अपने से वो लगा हुआ
असत्य कथनी जग जाहिर है
अकरण ही तू उस में उलझा हुआ
और बस !!और बस !!और बस !!

एक उत्तराखंडी

बालकृष्ण डी ध्यानी
देवभूमि बद्री-केदारनाथ
मेरा ब्लोग्स
http:// balkrishna_dhyani.blogspot.com
में पूर्व प्रकाशित -सर्वाधिकार सुरक्षित

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

बालकृष्ण डी ध्यानी
July 6
गिराये थे हमने दो आने उस ने चुपके से उठा दिये
वंहा गिरा दिखा जब मैं वो मुझसे नजरें चुरा गया

ध्यानी

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

बालकृष्ण डी ध्यानी
July 6 · Edited
कुछ भी नही है

दो दिन दिन हैं दो दिन रातें
कुछ भी नही है
हाथों में हमारे तुम्हरे
आज से अब से ये दिल मेरा
कहने लगा है
और सुनने लगा है

बिन तेरे कुछ वो बातें
बीती वो अपनी सारी मुलकातें
जब से तुम याद आने लगे
एक पल जब तुम मुझ से दूर जाने लगे हो

सुनो ना यूँ दूर जाने वालों
क्या ये सितम है

दो दिन दिन हैं दो दिन रातें
कुछ भी नही है
हाथों में हमारे तुम्हरे

देखों मै सपने तेरे
सपने में तुम हो के मेरे
दिन रातों से आकर कहने लगे हो
हरपल मुझे तुम अब छेड़ने लगे हो

सुनो ना प्रियतम प्यारे
चलें हम तुम्हरे नक्शे कदम के सहारे

दो दिन दिन हैं दो दिन रातें
कुछ भी नही है
हाथों में हमारे तुम्हरे
आज से अब से ये दिल मेरा
कहने लगा है
और सुनने लगा है

दो दिन दिन हैं दो दिन रातें
कुछ भी नही है

एक उत्तराखंडी

बालकृष्ण डी ध्यानी
देवभूमि बद्री-केदारनाथ
मेरा ब्लोग्स
http:// balkrishna_dhyani.blogspot.com
में पूर्व प्रकाशित -सर्वाधिकार सुरक्षित

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

बालकृष्ण डी ध्यानी
July 4
कुछ नही चाहिये मुझको

कुछ नही चाहिये मुझको कुछ नही हाँ कुछ नही
जो मिल गयी
जो मिल गयी माँ के हाथों की बनी दो रोटियाँ
मुझे जन्नत मिल गयी अब क्या चाहिये मुझको
कुछ नही चाहिये मुझको कुछ नही
जो मिल गयी

बचपन की वो लोरियाँ दूध भात की कटोरियाँ
सारे दिन थक कर भी माँ सुनाती थी कहानीयां
और क्या चाहिये था मुझको और क्या
दो मीठे बोल दो माँ की वो प्यारे हाथों की थपकियाँ
कुछ नही चाहिये मुझको कुछ नही
जो मिल गयी

बचपन छूटा लड़कपन छूटा
जवानी अपने ही रंग घर गृहस्थी संग बिता
अब भी याद आती हो तुम मेरा साथ दे जाती हो तुम
माँ उस कोने में जब उदास बन झूठा झूठा मै जब रूठा
कुछ नही चाहिये मुझको कुछ नही
जो मिल गयी

कुछ नही चाहिये मुझको कुछ नही हाँ कुछ नही
जो मिल गयी
जो मिल गयी माँ के हाथों की बनी दो रोटियाँ
मुझे जन्नत मिल गयी अब क्या चाहिये मुझको
कुछ नही चाहिये मुझको कुछ नही
जो मिल गयी

एक उत्तराखंडी

बालकृष्ण डी ध्यानी
देवभूमि बद्री-केदारनाथ
मेरा ब्लोग्स
http:// balkrishna_dhyani.blogspot.com
में पूर्व प्रकाशित -सर्वाधिकार सुरक्षित

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

बालकृष्ण डी ध्यानी
Yesterday · Edited
एक अच्छी बात हो गई

एक अच्छी बात हो गई
ज़िंदगी में;
तुम से जो मुलकात हो गई
ज़िंदगी में;
एक अच्छी बात हो गई
ज़िंदगी में;

बोलों क्या ,क्या सुन रहा
ये खुला नीला आसमान और ये जमीन
देखो दूर वंहा
उनकी भी आज यंहा मुलकात होने लगी है
एक अच्छी बात हो गई
ज़िंदगी में;

मिलते ही मिलने लगे सब
उन के हँसते ही कली सब खिलने लगी
भौंरों फूलों की उस डाल पर
देखो मुलकात होने लगी है
एक अच्छी बात हो गई
ज़िंदगी में;

एक अच्छी बात हो गई
ज़िंदगी में;
तुम से जो मुलकात हो गई
ज़िंदगी में;
एक अच्छी बात हो गई
ज़िंदगी में;

एक उत्तराखंडी

बालकृष्ण डी ध्यानी
देवभूमि बद्री-केदारनाथ
मेरा ब्लोग्स
http:// balkrishna_dhyani.blogspot.com
में पूर्व प्रकाशित -सर्वाधिकार सुरक्षित

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

बालकृष्ण डी ध्यानी
July 8
मगर ये कोशिश थी वो जोड़ा रहे ना रह सका वो पास
मेरे
वो जो दिल मेरा टूटा फिर मैंने उसे जोड़ना चाह आज
एक बार टूटा गया वो जोड़ेगा क्या ये मैं भूल गया था

ध्यानी

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

बालकृष्ण डी ध्यानी
9 hours ago
तू आयेगी जरूर

दो सांसें हैं बस पास बची मेरे
एक मेरी थी वो और एक वो तेरी थी

ऐ जिंदगी दे दे मुझे एक और दिन
मौत की आगोश में हर दिन हर पल तो रहना है

गुजर जाना तो है सब को एक वक्त
बस समय आयेगा ले के एक नया बहाना है

आना तू आना हँसते सामने से
देख लूं तुझे ठीक ठाक जिस के साथ मुझे जाना है

ऐसे तो धोखे खाये मैंने बहुत इस शरीर से
पर आखिर वक्त इसे मुझे धोखा ना दे जाना है

बात मान ले मेरी आऊंगा साथ तेरे साथ मै
कुछ वादे बाकी हैं बस उसको निभा जाना है

इतनी घड़ी तो मुझे तू देगी जरूर
बाकी सब तेरी मर्जी है तुझ को जैसे आना है

तू आयेगी जरूर
मैं भी तेरे इंतजार आ में बैठा हूँ

एक उत्तराखंडी

बालकृष्ण डी ध्यानी
देवभूमि बद्री-केदारनाथ
मेरा ब्लोग्स
http:// balkrishna_dhyani.blogspot.com
में पूर्व प्रकाशित -सर्वाधिकार सुरक्षित

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

बालकृष्ण डी ध्यानी
July 13
ऐ चाँद तुम भी देख रही होगी

ऐ चाँद तुम भी देख रही होगी
ऐ चाँद मैं भी निहार रहा हूँ
तुम कुछ तो बोल रही होगी
मैं भी चुप कंहा रह पा रहा हूँ
ऐ चाँद तुम भी देख रही होगी

बस दूरियां कर रही हैं बाते अपनी
नजदीकियां अब भी वो हम से रुसवा है
रफ़्तार की यूँ होड़ मची हुयी मुझ में
दिल है की वो अब भी नादां है
ऐ चाँद तुम भी देख रही होगी

बादलों में छुपकर निकल रहा है
फिर बादलों में जा छिप रहा है चंदा
तू ग़म ना कर ना तन्हाई से डर
ना घबराना ये दिल मेरे बस तू याद आ रहा है
ऐ चाँद तुम भी देख रही होगी

ये रात गुजर जायेगी ये सहर
कतरा कतरा जिंदगी की गुजर
मिलेंगे हम ये आस रखना मेरे हमदम
बचा लेना थोड़ी मेरे लिये साँसों का सफर
ऐ चाँद तुम भी देख रही होगी

ऐ चाँद तुम भी देख रही होगी
ऐ चाँद मैं भी निहार रहा हूँ
तुम कुछ तो बोल रही होगी
मैं भी चुप कंहा रह पा रहा हूँ
ऐ चाँद तुम भी देख रही होगी

एक उत्तराखंडी

बालकृष्ण डी ध्यानी
देवभूमि बद्री-केदारनाथ
मेरा ब्लोग्स
http:// balkrishna_dhyani.blogspot.com
में पूर्व प्रकाशित -सर्वाधिकार सुरक्षित

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

बालकृष्ण डी ध्यानी
July 12 · Edited
सपने मेरे तेरे

सपने मेरे जो ना रहे मेरे
सपने तेरे जो ना रहे तेरे
एक पथ पर जब तुम संग चले मेरे
सपने मेरे जो ना रहे मेरे ना तेरे

सपने मेरे कुछ कुछ वो तेरे
अधूरे कुछ कुछ हो गये पुरे
चलो चलें उधर चलें वो जिधर सपने तेरे मेरे
सपने मेरे जो ना रहे मेरे ना तेरे

जुड़ गये साथ साथ सब जब वो
जब लिये साथ सात जन्मों के फेरे
एक धागे में बंध गये सारे वो सपने तेरे मेरे
सपने मेरे जो ना रहे मेरे ना तेरे

सपने मेरे जो ना रहे मेरे
सपने तेरे जो ना रहे तेरे
एक पथ पर जब तुम संग चले मेरे
सपने मेरे जो ना रहे मेरे ना तेरे

एक उत्तराखंडी

बालकृष्ण डी ध्यानी
देवभूमि बद्री-केदारनाथ
मेरा ब्लोग्स
http:// balkrishna_dhyani.blogspot.com
में पूर्व प्रकाशित -सर्वाधिकार सुरक्षित

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

बालकृष्ण डी ध्यानी
July 11 · Edited
वो बैठा अब भी

पर्वतों पे बैठे बैठे
मैं सोच ने लगा हूँ
इतने सुंदर जंहा की कल्पना
किस ने इसे ऐसे सोची होगी
पर्वतों पे बैठे बैठे
मैं सोच ने लगा हूँ

विचार आने लगे मुझे
मैं उन में उलझने लगा हूँ
किसी एक की ना होगी सोच
इसे बनाने और ऐसे सजाने में
पर्वतों पे बैठे बैठे
मैं सोच ने लगा हूँ

रंग अपने मन में
मैं अब खुद रंग ने लगा हूँ
उसे यूँ निहारते निहारते
मैं उसका होने लगा हूँ
पर्वतों पे बैठे बैठे
मैं सोच ने लगा हूँ

कैसे गुजरा समय
ना जाने मन ना जाने ये तन
दूर हूँ उससे अब मैं मीलों
वो बैठा अब भी हर पल मेरे मन
पर्वतों पे बैठे बैठे
मैं सोच ने लगा हूँ

एक उत्तराखंडी

बालकृष्ण डी ध्यानी
देवभूमि बद्री-केदारनाथ
मेरा ब्लोग्स
http:// balkrishna_dhyani.blogspot.com
में पूर्व प्रकाशित -सर्वाधिकार सुरक्षित