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Garhwali Poems by Balkrishan D Dhyani-बालकृष्ण डी ध्यानी की कवितायें

Started by एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720, October 03, 2011, 12:06:15 AM

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

बस इतना ही था
इतना जिंदगी का है फलसफां
बस जियो जिंदगी हँसते हँसते
बस यही चीजें मायने रखती है
जब आईना उसे देख के हँसता है
जी भरके जियो यंहा एक एक पल
ना जाने कब निकल जाये ये पल
बस यही बात यंहा पर कीमती है
तेरी हंसी दूसरे में जब हंसती है
बस ये सब कुछ था तेरे अंदर ही
पर उसे तू खोजता रहा कहाँ कहाँ
ना ये तेरी बस्ती है ना मेरी है
छूट जाएगी सब जो तेरी हस्ती है
बालकृष्ण डी ध्यानी
देवभूमि बद्री-केदारनाथ
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में पूर्व प्रकाशित -सर्वाधिकार

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

मैं अपने में ही कहीं ग़ुम हूँ
अपना ना कोई यंहा
सब कुछ है यंहा पर पराया
कोने कोने में बिखरा हुआ
मैंने जब उनमे खुद को है पाया
टूटे सपने टूटे वादे
खुद से उलझे पड़े हुये
रिश्तों की उलझन में उलझे
कोने खुद से अनसुलझे ही लगे हुये हैं
एक ही रास्ता है वो रोज का
एक ही वो आने जाने वाला मंजर है
खिंजा खिंजा सा रहता है ये दिल
खुद से पाला जो मैंने वो समंदर है
रेखायें उभरती है समय समय पर
उन उजालों के अंधेरों में से
दिन डुबता है अब मेरा उन उजालों में
जिस में ना कोई बची अब हलचल है
आक्रोश ही आक्रोश पनप रहा है
चिल्लाता हूँ अब मैं खुद के अंदर हूँ
ना जाने क्या दबा रहा हूँ मैं
क्या मैंने देखा ऐसा जो बाहर है
बालकृष्ण डी ध्यानी
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एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

तारे सभी चले गये
तारे सभी चले गये
खाली ये आसमान हो गया
सहारे सभी छोड़ चले गये
बुढा शरीर अकेला थक के सो गया
तारे सभी चले गये .......
आँखों में ना सकून ना चैन है
हैरान है वो मेरे साथ ऐसा क्यों हो गया
नजारें सभी यंहा से सभी लुप्त हो चले
आँखों को मेरे ये क्या हो गया
तारे सभी चले गये .......
वो ही जाने जिस पर बीतती है
सारा जहाँ बस चैन से सो गया
भूखा है बगल में कोई रो रहा
दुःख ये आँसूं तू ऐसे क्यों खो रहा
तारे सभी चले गये .......
देखा था जो सपना उसने तेरे लिये
उसने चुपचाप उसे पूरा कर वो चला गया
आयी जो बारी जब तेरे कन्धों पर
वो आज इतने कमजोर मजबूर क्यों हो गये
तारे सभी चले गये
खाली ये आसमान हो गया .......
बालकृष्ण डी ध्यानी
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एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

अभी खड़ा वो इंतजार
अभी खड़ा वो इंतजार
अभी बड़ा वो बेकरार
क्यों किया इसने किसी से प्यार
क्यों किया ये आँखें चार
अभी खड़ा वो इंतजार
अभी बड़ा वो बेकरार
आँखों का था कसूर सब
दिल को क्यों मिली सजा
धड़कन के साथ बह रही
देखो आँखों से बहता वो प्यार
अभी खड़ा वो इंतजार
अभी बड़ा वो बेकरार
उम्मीद ये लगी है
आयेगी वो यहीं है
झूठा निकला उसका वो करार
ना आयी यंहा वो एक बार
अभी खड़ा वो इंतजार
अभी बड़ा वो बेकरार
कैसे करूँ यकीन मैं
बेवफ़ा वो बिलकुल नहीं
फिर भी खड़ा मैं यूँ ही रहा
क्योंकि करता हूँ मैं उससे बहुत प्यार
अभी खड़ा वो इंतजार
अभी बड़ा वो बेकरार
बालकृष्ण डी ध्यानी
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सोच ये सोच
सोच ये सोच
बदलनी चाहिये
सब कुछ ये बदल जायेगा
जब ये सोच ही बदल जायेगी
सोच ये सोच
बदलनी चाहिये ये
खोज खुद के भीतर खोज
क्या है वो सोच जो बदलनी चाहिये
आँखें उठकर कर हर ओर देख ले
बिखरा पड़ा समान है वो तेरा समेट ले
सोच ये सोच
बदलनी चाहिये ये
सब कुछ अब बदल रहा है
खुद का प्रतिबिंब तुझ से अब ये कह रहा है
मान ले इस परिवर्तन की सच्चाई को
जान ले तू नहीं तो खुद मिट जायेगा
सोच ये सोच
बदलनी चाहिये ये
पहले खुद पे भरोसा कर
फिर लोगों में जाकर परोसा कर
वो प्रगति की सुबह यंहा पर होगी
वो माटी अपनी तुझ से कहेगी
सोच ये सोच
बदलनी चाहिये ये
बालकृष्ण डी ध्यानी
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बस इतना ही था
इतना जिंदगी का है फलसफां
बस जियो जिंदगी हँसते हँसते
बस यही चीजें मायने रखती है
जब आईना उसे देख के हँसता है
जी भरके जियो यंहा एक एक पल
ना जाने कब निकल जाये ये पल
बस यही बात यंहा पर कीमती है
तेरी हंसी दूसरे में जब हंसती है
बस ये सब कुछ था तेरे अंदर ही
पर उसे तू खोजता रहा कहाँ कहाँ
ना ये तेरी बस्ती है ना मेरी है
छूट जाएगी सब जो तेरी हस्ती है
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एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

हर वक्त मुझे तेरा साथ मिला
हर वक्त मुझे तेरा साथ मिला
हर वक्त मुझे तू मेरे पास मिला
जब भी जरुरत थी मुझे तेरी सबसे
(तू मेरे साथ पास मिला) .. २
वो रे खुदा मेरे खुदा .. २
अहसास तेरा वो साथ तेरा
वो रहना तेरा यूँ पास पास मेरा
एक जादू तेरे वहां आने में
(मेरा साथ उस वक्त को बिताने में ) .. २
वो रे खुदा मेरे खुदा .. २
रहमत रहे तेरी तेरी नेमत रहे
इन आँखों को सदा तेरी ही जरूरत रहे
आसूं गिरे तेरे चरणों में वो मोती बने
(इस दिल में सदा तेरी सच्चाई की ज्योति जले ) ... २
वो रे खुदा मेरे खुदा .. २
मांगों क्या तुझ से सब तू ने दिया
मेरा क्या यंहा पर कुछ नहीं ये तू ने कह दिया
तुझ से मिल ने की चाह सदा यूँ ही बढ़ती रहे
(तेरे पैरों की माटी से हजारों फूल यूँ ही खिलते रहे ) .... २
वो रे खुदा मेरे खुदा .. २
बालकृष्ण डी ध्यानी
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एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

कभी तो आजा तू अपने उत्तराखंड में
कभी तो आजा तू अपने उत्तराखंड में
अपने घर अपने द्वार अपने गाँव में
प्रवासी बन कब तक तू भटकेगा
बाँकपन तेरा बचपन से कब तक अटकेगा
पुकारता तो होगा वो तुझे कभी अकेले में
इस दिल की बातों से तू कब तक मुकरेगा
छल ना तू ऐसे ना तू अपने को ऐसे दुःख दे
ये तेरी प्यारी सी सूरत कभी तो मेरी ओर तू कर दे
इतिहास के पन्नों को समझना तेरा अब भी बाकी है
अपने पुरखों को परखना तेरा अब भी बाकी है
तुतली बोली में तेरे गाये गढ़वाली गीत अब भी बाकी है
उन यादों की दीवारों खींची तूने वो रेखा अब भी बाकी है
चल मुझे नहीं तो अपने को देखने को आजा
खोया है तू कब से अपने में उसे खोजने तो अपने पहाड़ आजा
कभी तो आजा तू अपने उत्तराखंड में
अपने घर अपने द्वार अपने गाँव में
बालकृष्ण डी ध्यानी
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एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

आती है जब भी मुश्किलें
आती है जब भी मुश्किलें
तुम बहोत याद आते हो दोस्तों
कुछ ग़म कुछ अल्फाज़ वही
कुछ अनकही नज्म जो हमने मिलके गढ़ी
उन्हें फुर्सत में हम फिर गुनगुना लेते हैं दोस्तों
वो छूटे चौराहे खड़े तुम्हे फिर याद कर लेते हैं दोस्तों
बीत समय जो बीता वो तुम्हारे संग
फिर आँखों में छा जाता है दोस्तों
कहीं कुछ भी वो कह देना अपना
सीना तानकर देख लेना मिलके वो सपना
कुछ इस तरहा से सौदा कीया था हमने उस वक़्त से दोस्तों
देकर तजुर्बे वो हमे हम से नादानियाँ ले गया दोस्तों
अब भी हंसने के दो चार पल
उन यादों में तुम दे जाते हो दोस्तों
अब भी यक़ीन होता है दोस्ती वो ऐसा नायाब तोहफा
बंधी जो डोर दिल ने दिल से थी एक बार कभी
आ जाती है वो डोर तुम्हारी दौड़कर मुश्किलों में मेरे पास दोस्तों
ऐसे हल्का कर जाती है मुश्किलों से वो तुम्हारी याद मुझे दोस्तों
बालकृष्ण डी ध्यानी
देवभूमि बद्री-केदारनाथ
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एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

टूटे टूटे से जोड़े
टूटे टूटे से जोड़े
वो सारे रिश्ते नजर आते हैं
हम तो अब उन रिश्तों में
खुद से बिके नजर आते हैं
टूटे टूटे से जोड़े .....
लालच ने ओढ़ा मुझे
अहम ने कुछ ऐसा निचोड़ा है
दिख रहा साफ़ पतन का रास्ता
फिर भी कदम मैंने वहीँ पर मोड़ा है
टूटे टूटे से जोड़े .....
दिल ने समझया था मुझे
क़दमों ने आगे बढ़ने से रोका भी था
एक आवाज आयी थी ना जाने कहाँ से
पर अनसुना कर मै आगे बढ़ ही गया
टूटे टूटे से जोड़े .....
सोचा मैंने बस अपने ही बारे में
ना फ़िक्र की किसी की किसी बहने से
जीवन का अंत समीप है अब सब याद आ रहा है
क्या खोया मैंने साफ़ सा अब मुझे नजर आ रहा है
टूटे टूटे से जोड़े .....
बालकृष्ण डी ध्यानी
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