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Kumauni & Garhwali Poems by Various Poet-कुमाऊंनी-गढ़वाली कविताएं

Started by एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720, October 05, 2011, 12:00:34 AM

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

शेर दा का जवाब नहीं - अनपढ़ होने के बाद भी उनकी कविताओ का कोई मुकाबला नहीं -

१) तुम भया ग्वाव गुसै
हम भया निगाव गुसै

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720


२) तुम सुख में लोटी रैया
हम दुःख में पोती रैया

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

३) तुम हरी काकड़ जास
हम सुकी लकाड जास

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720


४) तुम आज़ाद छोड़ी जति (भैसा) जास
हम गोठाई बाकर जास
इंटरनेट प्रस्तुति - एम एस मेहता

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720


Mahi Singh Mehta
October 20, 2015
शेर दा का जवाब नहीं - अनपढ़ होने के बाद भी उनकी कविताओ का कोई मुकाबला नहीं -
१) तुम भया ग्वाव गुसै
हम भया निगाव गुसै
२) तुम सुख में लोटी रैया
हम दुःख में पोती रैया
३) तुम हरी काकड़ जास
हम सुकी लकाड जास
४) तुम आज़ाद छोड़ी जति (भैसा) जास
हम गोठाई बाकर जास
इंटरनेट प्रस्तुति - एम एस मेहता

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

कन्न्न लगनु मुछ लगैकि
जुंगा सजैकि
बतौ माँजी क्या लगणु अपणु बुबा जी
लगणी छे च भै का सौ अपणा बुबा सी
मूंछ हुँदा मरदों की शान
क्या मेरी मूंछ माजी
छन क्या मोटि कटीली
अपणा प्यारा बुबा जनु
छे च लाटी छे च भै का सौ
छे च मेरी बेटी तेरी अन्वार
बिलकुल रे अपणा बुबा जनु
जौकी नि हुन्दी मूंछ
वू क्वी मर्दा बच्चा छन
वू चिफ्ला हुँदा जनानो जन
मर्द की शान अभिमान पहचान
माँजी मूंछ ही हुँदा
ठीक बोली छोरी तिन
बिना मूंछ कख भला
हुँदा ज्वान ठीक बोली
माजी आज मि भौत खुस छौ
आज मुछ लगैकि मि बिलकुल
लगणु अपणु बुबा जनु ।.... शैलेन्द्र जोशी

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

नचण वळा खुट्टा,
बजौंण वळा हत
अर गितांगौ गिच्चू खज्यांद।
पर लेख्ण वळै त हति बि
खज्यांद अर ख्वपडि़ बि।
कयि बार कपाळ खज्योंद-खज्योंद
सब्द हर्चि जंदन।
पकड़ण मा एक बि सब्द नि औंद।
कयि बार जनि दुयूं कु घत
औंद त कपाळ दुबारा
खज्योंण लग जांद।
लेख्ण वळै हत्यूं पर सदानि खज्जी
अर कपाळ मा सब्द्वी नचा-नचि मचीं रौंदि।
इना मौका भौत कम औंदन
जब कपाळ पर छपछुपी प्वड़दि। नरेंद्र कठैत

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720


Dinesh Dhyani
February 25 at 3:31pm
पळौण्या
ब्याळि रात स्वीणम पळ्यौंण्य एै
बल
क्या च रै!
तुम त सब्बि बौहड प्वड्यां छां।
मुजफ्फर नगर अर
रामपुर तिराहा कांड का बाद
तुम्हरा जो रमठा अर
दथडा पळ्ययां छाया
वों को क्य ह्वै?
शहीदौं कु ल्वै की सौं
खयीं छै तुमरि
वौं थैं बिसरि किलै ग्यां?
अगर नि बिसरा ता फेर
निचंत ह्वै कि बौंहड
किलै छां सियां?
मिन बोलि
न्यायालय म केस च चलणू
निसाब कु जग्वाळ सब्यों थै च
बल
न्यायालय?केस अर निसाप हैं.....!
कनि छ्वीं कनौं छै तु?
य त तु अपणि कमजोरि
थैं छुपाणौं छै,
य यीं व्यवस्था थैं
नि समझणौं छै।
निरसा कैन कन्न
मुजफ्फर नगरौं निसाब?
कैन दीण तुमथैं रामपुर तिराहौं
इनसाफ?
द्यखणौं नि छै
शहीदौं की ल्वै की सिचीं
राजगद्दी परैं बैठ्यां
अर रामपुर तिराहा अर
मुजफ्फर नगरा कांड करवोण वळा
सफेदपोश एक सि हि भाषा
तु बनां छन।
एक जना लगणां छन।
अगर नि छन सि एकसन्नि त
त्वी बथौ, पन्द्र सालौ राज म
रामपुर तिराहा अर
मुजफ्फर नगरा कांड का
दोषियों थैं सजा दिलौणा खातिर
यों हम्हरा कर्णाधारौं न क्य कै?
इनी सूणी!
अज्यों बग्त चा
सोचि ल्या
समझि ल्या
यां से पैलि कि सि
पळ्यां दथुड़ा-रमठौं परैं
जंक लगि जौ
अपणु न्याय, निसाप अर
हिसाब कनौं खातिर एक दौं
फिर से सब्बि गौं-गौं बिटि
धारौं-धारौं बिटि
नगरौं-सैरौं बिटि
कट्ठा ह्वावा अर
इतिहास म अपणि गवै द्यावा
एक ह्वैकि
अपणु निसाब कारा
अपणु निसाब कारा।।
दिनेश ध्यानी, 25, फरवरी, 2016।

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

क्य बुन्न?
वो देशा बान
अपणि ज्यान खूणा छन
अर
सि देश का
टुकड़ा-टुकड़ा कनौं बान
एक हूणा छन।
दिनेश ध्यानी 24/2/16

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

Dinesh Dhyani
February 23 at 5:34pm
को गालो फागुण की होरी
गीत वंसत का कख बिटि सुणणी
थड्या झुमैला, बौ अर लाली
औण वळौं न क्या जी जणणीं।
रीत बचैकी रखण म्यारौ
गीत बचैकी रखण
तीज त्यौहरा खौला मेळौं
थाती बचैकी रखणा।
ब्गत का अगनै अटगणां हम
दौका फौक्यों म भटकणां
रीत रिवाज, सान संस्कृति
घडि़ म अपणीं छ्वडणां।
यीं थाती की समाळ कारा
भौळ कनक्वैकी ह्यरणां,
सख्यों की रीत पुरख्यों की
हम्हरि थाती पछ्याण या च।
अपणां जलडौं कबी नि छ्वडणौं
अपणी माटी समाळ कारणां
रीत बचैकी रखण म्यारौं
गीत समाळी रखणा।।
दिनेश ध्यानी. 23 फरवरी. 2016