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Kumauni & Garhwali Poems by Various Poet-कुमाऊंनी-गढ़वाली कविताएं

Started by एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720, October 05, 2011, 12:00:34 AM

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

भोर दूर हिमगिरी श्रृंखला की अनुपम छटा देख,
मन मुग्द होकर पूछ बैठा
क्या कभी मेरा धीर तेरे धीर जैसा रह पायेगा,
ईमान मेरा तेरे जैसे अडिग रह पायेगा,
हिमगिरि बोला
इस प्रश्न का उत्तर मेरे संग बारह मास तठ्स्त सैनिक के पास है
विषम परिस्थिति पर भी जिसका राज है
तभी हिमगिरी का एक खंड भरभरा विखंडित हो जाता है
वह अडिग सैनिक स्वेत खंडो में समा जाता है।
फिर उस हिमगिरि से सवाल करता हूँ
यह अकाल मृत्यु इस लाल को अभिशाप में मिली
या माँ - माटी के कर्ज के लिए फर्ज में मिली
वह गिरिवर मूक मंद मुश्कान से सहमति जताता है
मेरा निष्कर्ष कर्मबीर के कर्म को नियति मान आगे बढ़ता है
जीवन के अनगिनित यक्ष प्रश्नो को तन्हाई में खोजता हूँ
फिर गिरिराज जैसे युधिष्ठारों की ढूंढ में निकलता हूँ
मैं अक्सर तन्हायी को बुलाता हूँ।
क्रमश: .....
रचना : बलबीर राणा 'अडिग'
बैरासकुण्ड चमोली उत्तराखंड

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720


Dinesh Dhyani
February 16 at 5:31pm
गंडेळ
गंडेळ ड्यारादूण गै
मुख्यमंत्री थैं मीलिकि वैन
आरजू कै,
माराज! राज्य का बान
वर्षों तक मिन बि आन्दोलन काई,
भूख-तीस सै अर
अपणि ज्वानि खपाई,
पण अमणि आन्दोलनकार्यों कि लिस्ट म
म्यारू नौ किलै नि आई?
मुख्यमत्री न बोलि,
बल! भै जिलौं बिटेकि जौं-जौं कु
नौ हमरू पास आई,
तौं थैं हमुन झट से
आन्दोलनकारि घोषित काई,
त्यरू नौ जब कैन नि ल्याई
त त्वी बथौं, त्वैथैं हमुन
आन्दोलनकारी कनम मनणु छाई?
मुख्यमत्री बात सूणी
गंडेळ सन्न रैग्याई,
वै कु बरमण्ड चकरै ग्याई,
खैरि खयांकु सी परिणाम ह्वाई?
वो सोचम पोड्ग्यिाई,
राज्य क बान खैरि हमुन खै
ज्यान अपणि वों शहीदौं न खपै
अर
अमणि न त शहीदौं का
सुपिन्या पूरा ह्वाई,
न हम जनौं कु क्वी पुछदरू राई।
गंडैळ समझि ग्याई,
कि, ये राज्य म बि भाई-भतीजावाद अर
भ्रष्टाचार नेतौं अर अफसरौं कि
नस-नस म भ्वरे ग्याई,
सैद च, तौं कु ल्वै कु पाणि बणि ग्याई
तबी त, कैकु त्याग अर बलिदान
तौं थैं दिखेण नि मराई।
वो सोचम पोडि़गे कि
हे! भगवान
जब राज्य बणणा का बाद
बि तन्नि भाई -भतीजावाद अर
भ्रष्टाचार ही होणु छाई
त,हमुन उत्तराखण्ड क्यां खुणि बणाई?
दिनेश ध्यानी। कवि/ साहित्यकार.16, फरवरी, 2016।

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720


Dinesh Dhyani
February 4 at 12:12pm
राज्य गीत
राज्य गीत बन गया,
नेताओं के सर ताज सज गया।
अब क्या कमी रहेगी
विकास की राज्य में
बस सत्ता का गुलशन खिल गया।
बोली भाषा और साहित्य
की सुध लेता नहीं कोई
लोक कला और लोक जीवन की
गति भी बस यूं ही।
सत्ता के गलियारों में
पहुंच है जिसकी
विकास भी उसी का और
चमक भी उसी की।
बाकी तो सारा पहाड़
ज्यों का त्यों ही रह गया
लोक पर भारी ये गीत पड़ गया
लो जी राज्य गीत बन गया।
शिक्षा, स्वास्थ्य अरु रोजगार
अब नहीं रहेगा इंतजार
सब दुखों की एक दवा
राज्य गीत बन गया।
पलायन नहीं करेगा कोई
ना कोई रहेगा बेरोजगार
सुना है उजास का दीप जल गया
राज्य गीत बन गया। ... दिनेश ध्यानी। ४/२/१६.

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720


Dinesh Dhyani
January 25 at 10:41am
पलायन एक चिंतन!
पलायन पहाड़ो से
होना नहीं चाहिए
लोगों को अपने पुस्तैनी
गाऊँ में ही रहना चाहिए।
क्यों भाग रहे हैं लोग
पहाड़ छोड़कर देश बिदेश
क्यों हो रहा है पलायन?
सरकारों को कुछ करना चाहिए।
रोजगार, स्वास्थ्य, शिक्षा पर
ध्यान देना चाहिए
घर गावं की सुध भी लेनी चाहिए।
कभी न कभी हमें भी अपने
गावं जाना चाहिए।
चलो अगली बार
गर्मियों में छुट्टी मानाने
कुछ दिनों पहाड़ चलते हैं
और फिर वहां से आकर
शहर में शामियाने तले
वातानुकूलित कमरो में
बैठकर पहाड़ की बात करंगे
पलायन, बेरोजगारी, स्वास्थ्य
आदि बिषयों पर गंभीर चिंता
और चिंतन करेंगे

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720


Dinesh Dhyani
7 hrs
पळौण्या
ब्याळि रात स्वीणम पळ्यौंण्य एै
बल
क्या च रै!
तुम त सब्बि बौहड प्वड्यां छां।
मुजफ्फर नगर अर
रामपुर तिराहा कांड का बाद
तुम्हरा जो रमठा अर
दथडा पळ्ययां छाया
वों को क्य ह्वै?
शहीदौं कु ल्वै की सौं
खयीं छै तुमरि
वौं थैं बिसरि किलै ग्यां?
अगर नि बिसरा ता फेर
निचंत ह्वै कि बौंहड
किलै छां सियां?
मिन बोलि
न्यायालय म केस च चलणू
निसाब कु जग्वाळ सब्यों थै च
बल
न्यायालय?केस अर निसाप हैं.....!
कनि छ्वीं कनौं छै तु?
य त तु अपणि कमजोरि
थैं छुपाणौं छै,
य यीं व्यवस्था थैं
नि समझणौं छै।
निरसा कैन कन्न
मुजफ्फर नगरौं निसाब?
कैन दीण तुमथैं रामपुर तिराहौं
इनसाफ?
द्यखणौं नि छै
शहीदौं की ल्वै की सिचीं
राजगद्दी परैं बैठ्यां
अर रामपुर तिराहा अर
मुजफ्फर नगरा कांड करवोण वळा
सफेदपोश एक सि हि भाषा
तु बनां छन।
एक जना लगणां छन।
अगर नि छन सि एकसन्नि त
त्वी बथौ, पन्द्र सालौ राज म
रामपुर तिराहा अर
मुजफ्फर नगरा कांड का
दोषियों थैं सजा दिलौणा खातिर
यों हम्हरा कर्णाधारौं न क्य कै?
इनी सूणी!
अज्यों बग्त चा
सोचि ल्या
समझि ल्या
यां से पैलि कि सि
पळ्यां दथुड़ा-रमठौं परैं
जंक लगि जौ
अपणु न्याय, निसाप अर
हिसाब कनौं खातिर एक दौं
फिर से सब्बि गौं-गौं बिटि
धारौं-धारौं बिटि
नगरौं-सैरौं बिटि
कट्ठा ह्वावा अर
इतिहास म अपणि गवै द्यावा
एक ह्वैकि
अपणु निसाब कारा
अपणु निसाब कारा।।
दिनेश ध्यानी, 25, फरवरी, 2016।

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720


Dinesh Dhyani
Yesterday at 10:26am
क्य बुन्न?
वो देशा बान
अपणि ज्यान खूणा छन
अर
सि देश का
टुकड़ा-टुकड़ा कनौं बान
एक हूणा छन।
दिनेश ध्यानी 24/2/16

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

Darshan Singh
November 20, 2015
शुभ संध्या दगड्यो। भोळ सुबेर, गांव की ओर
"हिटो हो भैजी चलो रै भुला "
हिटो हो भैजी चलो रै भुला, उत्तराखंड देखि औंला।
म्यारु पहाड़, देव भूमि, पित्र भूमि कू शीश नवौंला।।

उत्तराखंड पौंछण से पैलि, रामपुर तिराया मा जौंला। जौं कि ज्यान से मीली राज,बवूं भै भैण्यूं याद ल्योंला।।
हिटो हो भैजी चलो रै भुला..........

घार बूण राजि रखी,भौन देवी मा घांडि बजौंला।
कुलदेवों का थान मा छ्वारो द्यू धुपणु कैरि औंला।।
हिटो हो भैजी चलो रै भुला..........

चकबंदी कू जोर चलणू, गणेशु काका थैं सारु द्यूंला।
नै क्यारि सजीं काका की, क्यार्यूं मा पाणी चारि औंला
हिटो हो भैजी चलो रै भुला..........

क्यार्यूं मा हर्यालि आली, फुंगडी सबि अवाद ह्वैली।
ग्वीणि बांदर सुगंर भाजला, सैरि सारि खैंदि ह्वैली।
हिटो हो भैजी चलो रै भुला.........

बांजि फुंगडि यख वख, वाडा मींडा देखि औंला।
सरक्यां वाडा सै कैरिक, रळक्यां भीड़ा धैरि औंला।।
हिटो हो भैजी चलो रै भुला......

तिबरी डंडेळि कूड़ि तेरी,छनुडी बांजि समाळि औंला
हे भैजी! ब्वाडा का टैम जनि,वूं थै ई सजैक औंला।।
हिटो हो भैजी चलो रै भुला.........

वगत कु क्य बुन रै भुला, वां से पैलि समळि जौंला।
आणु जाणु लग्यूं रालु, गौं गळ्या पछ्याणि ल्योंला।
हिटो हो भैजी चलो रै भुला..........
नै क्यारि -नई पौध, new generation.
सर्वाधिकार सुरक्षित @दर्शनसिंह रावत "पडखंडाई

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720


Darshan Singh
September 16, 2015
उदास घिंडुडु
ए घिंडुडी, इनै सूणिदी।
क्या स्वचणी छै मी बि बतादी।

जणणू छौं मि, जु मि स्वचणू छौं,
तुबी वी स्वचणी छै,
तबी त म्यारु छोड़ नि द्यखणी छै।

हालत देखिक ए गौं का,
त्यारा आंख्यू मा पाणि भ्वर्यूंच।
इनै देखिदी मेरी प्यारी,
म्यारु सरैल बि उदास हुयूंच।।

अहा, कना छज्जा, कनि उरख्यळी।
वूं डंडळ्यूं मा खूब मनखी।
पिसण कु रैंदु छाई, कुटण कु रैंदु छाई,
वूं थाडौं मा खूब बिसगुणा रैंद छाई।
दगड्यो का दगडि हम बि जांदा छाई,
वूं बिसगुणौं मा, वूं उरख्यळौं मा, खूब ख्यल्दा छाई।

अर हाँ, तु बि क्य, फर फर उडांदि छाई,
ड्वलणौं थै नाचिकि कनि बजांदि छाई।
वू डूंडु घिंडुडु, अब त भाजि ग्याई,
पर त्वैफर वु कनु छडेंदु छाई।
मिल बि एक दिन वु कनु भतगै द्याई,
वैदन बटि वैकि टक टुटि ग्याई।

सुणणी छै न,
म्यारु छोड़ द्यखणी छै न।

एक दिन कनु तु,फर फर भितर चलि गै।
भात कु एक टींडु, टप टीपिक ली ऐ।
वैबत मिल स्वाच, बस तु त गाई,
हाँ पर तुबि तब खूब ज्वान छाई।
जनि सर सर भितर गैई, उनि फर फर तू भैर ऐ गेई।

जब तु फत्यलौं का छोप रैंदि छाई,
मि बि चट चट ग्वाळु ल्यांदु छाई।
सैरि सार्यूं मा खेति हूंदि छाई,
हम जुगा त उरख्यळौं मा ई रैंदु छाई।
खाण पीणकी क्वी कमि नि छाई।

झणि कख अब वू मनखी गैं, झणि किलै गौं छोडिकि गैं।
हमरा दगड्या बी लापता ह्वै गैं,
स्वचणू छौं सबि कख चलि गैं।

मेरि प्यारी,सुणणी छै ई-
स्यूं बुज्यूं हम जाइ नि सकदा,
वूं बांजि कूड्यूं देखि नि सकदा।
हम त मनख्यूं का दगड्या छाई,
मनख्यूं का दगडी रैंदा छाई।

चल अब हम बी चलि जौंला,
मेरी घिंडुडी -
कैकि नि रै या दुन्या सदनी,
इथगि राओल यख अंजल पाणी।

छोड अब जनि खाइ प्याइ पिछनै,
चलि जौंला चल हिट अब अगनै।
वूं मनख्यूं कू सार लग्यां रौंला,
बौडि जाला त हम बि ऐ जौंला।
सर्वाधिकार सुरक्षित @दर्शनसिंह रावत "पडखंडाई "
दिनांक 16/09/2015

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

Navin Dabral
September 10, 2015
लमफसारिक स्यूणो गिजै गयुं मी
मेरा चुफला खैचदारी भग्यान नि रै अब
मेरा कंड्यूड मरोड़दरी दुद्या बोए तै
जमणु व्हेगी सरग सिधारयां
म्यार बूब्बान कबि नि बिजई हमुते
फ़जलेकि गैणा दिख्यांदा
नौनौ तै देर तक स्यूणो
म्यार बूब्बा तै भलो लगदु छाई
सच त याच क़ि चैन क़ि निन्द
बूब्बा जी का जमौनु माँ
जू हमते मिली
उन चैन आज तक नि मिली
बिजण मां अर सेणु मां अब
क्वि फर्ख नि रैगी
सीण क़ि ढब दारु जनि होंदी
ढबै गयां त छुटदि नी छ
लम फसारिक स्यूण मां
जू मज़ा मिल्दु छ
भौत कम का नसीब मां होंद
निस्फ़िकरि क़ि निन्द
लिखरदू ( नवीन डबराल )
१०/ ९/ २०१५/ .....वड़ोदरा

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

‪#‎चुनौ‬ की मार मार कैकी
हंत्या घड्यली लगीं च
फेसबुक ब्हाटसप मा नेतों की
खुब कछेडी लगीं च
चुनौ की मार मार कैकी
जु सुनिंद हुयां छ्या ब्याली तक
अब कुबलांणा छन
च्याला च्यांटों की दगड
द्याखो फिक्वाल बंण्या छन
धार धार गाड गाड
खुब डबखंणा छन
चुलख्यंदु मा पाणी खत्या त
सुर्र पौंछणा छन
हैंस बी आंदी त कबी
खैरी बी आंदी
हमरी खैरी बिपदा मा
खुब भिट्यांणा छन
जब तक रैन सत्ता मा
फून कबी नी उठाई
आज त मिसकाल मा ही
रिप्लाई बी आई
चुनौ की मार मार कैकी
ब्याली तक जु जनता क
तमसु दिखंणा रैन
गगडांद द्योर सी अब
सिंगान सी भोट खुज्यांणा छन
निस्वार्थी नेता कमेंटस करल अवसरवादीयों कु लाईक बी स्वीकार्य नी @लेख..सुदेश भट्ट(दगडया)