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Kumauni & Garhwali Poems by Various Poet-कुमाऊंनी-गढ़वाली कविताएं

Started by एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720, October 05, 2011, 12:00:34 AM

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720


Bhaukhandi Uttarakhandi
February 9 at 4:22pm · Gurgaon
......................"आंख्यों को पाणी"......................
आंख्यों को पाणी बचैकी रखणा
मन की स्याणी समाळी धरणां,
लोक लिहाज की थाती हम्हरी
यीं थाती की समाळ त करणां।
नाता रिश्ता अपणां पर~या सब्बि
यांे रिश्तौं को लाज बि रखणां
अळगा खुटौं की हिटे नि करणीं
अपणौं से अपण्यांस बि रखणां।
अपणीं मन मरजी को नि हूणो
अपणां बड़ौं को मान बि रखणां
खैरि अखरि जन्नि बि होली
सुख की आस म हिटणौं सैंणा।।
बुन्न से पैलि तोली लेणों
कन्न से पैली सोचि ल्हेणौं
बिन समझ~यां कुछ बि नि करणौं
सोच विचार बणैं की रखणां।
आंख्यों को पाणी बचैकी रखणा
मन की स्याणी समाळी धरणां,

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

Kirti Vallabh Shakta
February 8 at 9:16pm
अहो विधाता कस छौ यु तुम्रो
विचित्र संसार सबै निरालो।
न कोइ एको युछ हो सबौको
न ऐकि माया बस में छ कै का।।
बनै छ कैले यु निरालि माया
छ हो बँधी यो ममता कि गाँठ।
मि छूँ तु छै याँ दुसरो न कोई
छ हो यु याँ की बस एक रीति।।
धनै कुटुम्बै बस मेरि शान
सबै यु चैंनान मनै बठै हो।
अघा बढूँ मी मन यो यु कूँछ
अहो सबौ है किछ एकि बात।।
सबै नचाया धन दौलतै ले
न छोडि़ रा याँ जन एक लै हो।
यती हुचै या हुँच या यु जोगी
परानि सबौ कि धनै क् लीजी।।

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

बलबीर राणा 'अडिग'
शुभप्रभात मित्रो
आज अडिग शब्दों के पहरे में ....
जीवन की सच्चाई
-------------//////------------
फूलों से पूछा, मुश्कान कैसे पायी,
सुसजीली देह तुमने कैसी सजाई
मोह लेते मन निष्ठुर का भी तुम
प्रेम की यह कला, तुममे कैसे आयी??

फूल बोले, लाख दर्दों और झंजावातों को झेलकर,
जीवन ज्योति, हम अपनी जगाते हैं,
प्रकृति के थपेड़े खाकर भी मुश्काराते हैं,
दो दिन की, ही सही, जिंदगी हमारी,
फिर भी लाखो दिलों को जीत जाते हैं.

तुम इन्शानो ने धरती क्या, नभ भी जीत लिया,
स्वस्वार्थ के बसीभूत, सबको को अपने बश में किया,
लेकिन जीवन की सच्चाई, तुम जान न सके,
इसलिए मुश्कान तुम पा न सके....


.... बलबीर राणा " अडिग

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

हिटो गैरसैण,
आइये शामिल हो उत्तराखंड को समर्पित इस अभियान में।
जल, जंगल, जमीन बचेगी,
वापसी की राह खुलेगी।
खुशहाली का सपना होगा,
एक-एक चक अपना होगा।।
चकबंदी दिवस
1 मार्च 2016
स्थान-गैरसैण
आयोजक-गरीब क्रांति अभियान
सम्पर्क- garibkranti@gmail.com
Www.garibkranti.in
‪#‎विकास‬ ध्यानी
संयोजक- गरीब क्रांति अभियान।

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720


बलबीर राणा 'अडिग' 
January 28 at 11:38pm ·
रूह तो काँपी थी
उस मंजर को देखने में
लेकिन दृढ़ता ले आयी
मुझे इस भेष में

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

बलबीर राणा 'अडिग'
January 17, 2014 ·
पोंखुडा होंदा उडि जान्दु मुल्क
बिसरिय्युं बाटू खोज्यांदु खोज्यांदु
डंडीयाळी मा बैठी देखणु रैन्दु
डांडू शीलू घाम अच्छयाण
डांडू शीलू घाम अच्चयाण
सुख़ वीं डंडीयाळी मा छुटदा पराण
मन मा रेगी वा आखिर रस्याण
यूँ दानी अंखियों मा दण मण पाणी
आज किले होलू आणु कु जाणी
---------------------
महान कृति और गायकी
गढ़रत्न श्री नेगी जी

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

Dinesh Dhyani
February 4 at 12:11pm
राज्य गीत
राज्य गीत बन गया,
नेताओं के सर ताज सज गया।
अब क्या कमी रहेगी
विकास की राज्य में
बस सत्ता का गुलशन खिल गया।
बोली भाषा और साहित्य
की सुध लेता नहीं कोई
लोक कला और लोक जीवन की
गति भी बस यूं ही।
सत्ता के गलियारों में
पहुंच है जिसकी
विकास भी उसी का और
चमक भी उसी की।
बाकी तो सारा पहाड़
ज्यों का त्यों ही रह गया
लोक पर भारी ये गीत पड़ गया
लो जी राज्य गीत बन गया।
शिक्षा, स्वास्थ्य अरु रोजगार
अब नहीं रहेगा इंतजार
सब दुखों की एक दवा
राज्य गीत बन गया।
पलायन नहीं करेगा कोई
ना कोई रहेगा बेरोजगार
सुना है उजास का दीप जल गया
राज्य गीत बन गया। ... दिनेश ध्यानी। ४/२/१६.

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720


Dinesh Dhyani
January 12
राही जी त अब चलिगैन
राही जी त अब चलिगैन
गीत लगौंदरा गीत लगावा
अपणि अपणि मन की सोच छ
भक्वैरि तुम हैंसि खेलि ल्यावा।
एक तरफ छै चिता सुलगणीं
हैंका तरफ तुम तान सुणौणा
ठुमका लगैकि हत्थ हिलैकी
लोग बाग बी खूब छा नचणां।
राही जी न कबि नि बोलि
मेरा खातिर शोक मनावा
मन उदास छौ जौन बोलि
यीं घडि कनक्वै गीत लगौंणा?
भौत मजबूरी छै तुम्हरि त
राही जी का बि गीत सुणौंदा
यीं सध्यां थैं भलु होंदु जो
राही जी थैं समर्पण करदा।
राही जी को काम समर्पण
जिजीविषा थैं याद त करदा
क्य बिगड़दु जो भयौं जरासी
यीं संध्या म खुटि नि हिलौंदा?
मनख्यों म मनख्यात चयेंदी
भावों मा बि सिजळु पराण
व न त कैल्या ज्या करणाया
जबरदस्ति कै थैं जि मनौण।
राही जी की याद सदानी
हमरा मन मस्तिष्क म राली
सौलि घूरली, जून धार की
सदन्नि राही जी कि याद दिलाली। दिनेश ध्यानी. 12 जनवरी, 2016

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

नरु भैजी ते राज गीत न लगो।
हमते भरी दुख होंदू
भुला पलायन करना छन, भैजी लौटना नीन
बांजी पंडेगेन पुंगड़ी, दून मां सबी धाणी
नरु भैजी तीनी त गै छो
सबी धाणी देहरादून
किलै बणै तिन या धुन ।
नी लगो नी लगो तै राज गीत नी लगो
नरु भैजी हमते बहुत दुख होंदू
चपट ह्वैगी सब कुछ, कुछ नी बच्यो
यू रीता पहाडों में अब नचणा छन बेताल
भैजी कख गै सुर , कख गै ताल
कनमा बचलू अब मेरू नैनीताल
ते गीत नी सुणों , ते गीत नी बजो
हमते बहुत दुख होंदू, भैजी हमते दुख होंदू।
ये गीत मा नी शहीदों की .याद, यामा नीच गंगा कू उछाल
यामा च बस शब्दों कू जाल, उत्तराखंड से अलग हाल
नरु भैजी तीन त गीत बणेक ज्वाला जगै
नरु भैजी तीन त गीत वणैक याद दिले
तेरा गीतों मा छे कन बयार, कन अपणा रीत रिवाज
भैजी फिर किले तिन यू गीत वणै, किले बदली तेरू मिजाज
तू अपणु भैजी, त्वै पर श्रद्धा अपार, तू किले गै वे पार ।
लौट मेरा नरु भैजी, नी कर तौ का बुल्यां मां काटों कू श्रंगार
सब छन बेहाल भैजी, मुल्क का बुरा हाल,
गौं गों पर पड़ी मार, भैजी किले आई तेरो यू गीत बिन सुर ताल
तेमा राग भैरवी, तेमा राग दुर्गा, तेमा शिवंरजनी
भैजी कभी नी ह्वे तू बे - ताल
तेरा गीतों मा पावनता गंगा की, तेरा गीतों मा बांज बुराश
तेरा गीतों मां याद पुंग्ड्यो की , तेरा गीतों मां याद मुरली की
झूमेलो, चौफल्या की उमंग भैजी, ये गीत मा कख रैगी भैजी
तीन हर गीत मन से लिखी भैजी, तेरा सुरों मां हम डूब्या भैजी.
तिन यू गीत किलै बणाई। पहाड देखण मा नी आई।
यू तेरो गीत नी च भैजी, यू तेरू सुर नी च भैजी।
यामा पहाड़ नी भैजी, ..यामा पहाड़ नी च भैजी
यू गीत तनी नी बणी भैजी, या मा च राजनीति भैजी
तू किले भरमै भैजी, तू त अपणू छै भैजी
यू का फेर मा किले ऐ भैजी,
नी लगो नी लगो ये राज गीत नी लगो
नरु भैजी हमते दुख होंदू।
कैकू उत्तराखंड भैजी, 15 सालों की तबाही भैजी
एक नौ छमी नीच भैजी, कई नौ छमी छन भैजी
क्या क्या हमरा नसीब मां भैजी, किले राज मांगी
कख गिर्दा कू हुडका भेजी, कख गोपाल बाबू कू गीत भैजी
कख डोंर थाली भैजी, कख छन ढोल दमो और जागर भैजी
पहाड़ लुटी गै भैजी, पहाड़ लुट गै भैजी
त्वै पर अब भी छ आस भैजी, लौट वापस भैजी
नी लगो नी लगो नरू भैजी
तै गीत नी लगो
हमते दुख होंदू, हमते दुख होंदू।
साभार: ‪#‎वेद‬ उनियाल

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

नमन करदु त्वै मी
हे बीर सिपैयी
देश कु मान बढै
त्वैन बीर सिपैयी
नमन करदु त्वै मी
हे बीर सिपैयी
दब्युं रै तु बर्फ मा
फिर भी चौकस रैयी
अंतिम दम तक भूला
सीमा मा डट्युं रैयी
नमन करदु त्वै मी
हे बीर सिपैयी
जब तक राल जुन अर घाम
सियाचीन मा बरफ रैली
तेरी अमर गाथा हुनुमन
सरा देश मा गये जैली
नमन करदु त्वै मी
हे बीर सिपैयी
आज सरा देश रुवांणा
त्यार बान सिपैयी
बुये दिखंणी च आज भी
त्यारु बाटु सिपैयी
नमन करदु त्वै मी
हे बीर सिपैयी
त्वै जनि बीर हर बुये की
कोक मा पैदा ह्वैन
पाली पोसी क बुये तब
सियाचीन लखैन
नमन करदु त्वै मी
हे बीर सिपैयी
नमन करदु त्वै मी
हे बीर......
बीर शहीद हनुमनथप्पा तैं श्रद्धांजलि क दगड समर्पित पंक्ति @सुदेश भट्ट (दगडया)