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Kumauni & Garhwali Poems by Various Poet-कुमाऊंनी-गढ़वाली कविताएं

Started by एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720, October 05, 2011, 12:00:34 AM

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720


प्रदीप सिंह रावत खुदेड़
January 30 at 10:15am ·

अल्मोड़ा के नैनिसार में गुप चुप तरीके से 353 नाली जमीन जिंदल को देने पर सरकार के नुमाइंदो के लिए है ये कविता,
बेच दी है मातृ भूमि तुमने,
तुम्हे जहनुम भी नसीब नहीं होगा।
जब दफना रहे होंगे तुम्हे,
तब कोई अपना तुम्हारे करीब नहीं होगा।
कोई अपना ही बेच दे इस धरा को,
ऐसा तो तेरे अपनों का ख्वाब नहीं होगा।
उनकी आँखों में आँसू होंगे,
तब तेरे पास कोई जवाब नहीं होगा।
प्रदीप सिंह रावत ''खुदेड़''

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

प्रदीप सिंह रावत खुदेड़
January 29 at 4:24pm ·
अब तो उठना पड़ेगा
=============
नैनीसार बेच दिया है,
अब तेरी जमीन की बारी आयेगी।
क्यों सो रहा है तू ?
किसी दिन तेरे घर के ऊपर भी,
हैलीक्पटर की सवारी आयेगी।
तब जागेगा तू
जब तेरी चादर कोई उठा ले जागेगा ।
तब भागेगा तू,
जब तेरी हस्ती कोई मिठा ले जागेगा ।
मातृ भूमि बिक रही तेरी,
तू कहाँ अपने सपने सच कर रहा है।
सब कुछ जानकर तू ,
अपनी जबान चुप कर रहा है।
उठ,जाग, शेर की तरह अब दहाड़,
सोया रहा अगर तू, तो बिक जागेगा पहाड़।
प्रदीप सिंह रावत खुदेड़

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720


प्रदीप सिंह रावत खुदेड़
January 27 at 12:43pm ·
अब तो उठना पड़ेगा
=============
नैनीसार बेच दिया है,
अब तेरी जमीन की बारी आयेगी।
क्यों सो रहा है तू ?
किसी दिन तेरे घर के ऊपर भी,
हैलीक्पटर| की सवारी आयेगी।
तब जागेगा तू
जब तेरी चादर कोई उठा ले जागेगा ।
तब भागेगा तू,
जब तेरी हस्ती कोई मिठा ले जागेगा ।
मातृ भूमि बिक रही तेरी,
तू कहाँ अपने सपने सच कर रहा है।
सब कुछ जानकर तू ,
अपनी जबान चुप कर रहा है।
उठ,जाग, शेर की तरह अब दहाड़,
सोया रहा अगर तू, तो बिक जागेगा पहाड़।
प्रदीप सिंह रावत खुदेड़

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

कन ह्वैग्या हमरी दीदों
संस्कृति कु खात्मा
रीति रीवाज हरची गेन
पुटग बैठीं बिदेशीयुं की आत्मा
सेवा सौंली कुई नी कनु
दिन बार कु पता नी
कै पर रोज डे त कै पर
परपोज डे की हंत्या अयीं
यु नरबै जयुं बित्युं रिवाज
फैली ग्या पहाड मा
जब बिटी भै बंद म्यार
गे छन बिदेश मा
बग्वाल सी चितांणा छन
बल बैलेंटाईन डे च
रोज खयांणा छन लैंचुस
फिर कन अपचकरी चाकलेट डे च
कुणक्या कुणक्या डे दीदों
सुंण मा आंणा छन
ब्हाटसप मा द्याखो कन
बन बन क फुल आंणा छन
धै लगे की भटे भटे की
थकी ग्या सुदेश भट्ट
जतका जल्दी ह्वा समालो दीदों
अपंण रीति रिवाजों तै झट
नीथर येक दिन आंख तुमन
कताडी क रै जांण
जब गौं मा येकी तुमन
खुज बी नी पांण
कन ह्वैग्या दीदों हमरी
संस्कृति कु......
सर्वाधिकार सुरक्षित@सुदेश भट्ट (दगडया)

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

यीं कुडी क मौ दीदों
दिल्ली बंबई बसीं च
कुडी क यैथर पैथर द्याखो
कन घास जमीं च
जौं उबर्युुं मा हुंदी छे
जंदरीयुं कु गगडाट
आज सुंगरी बियंयी वख
कनी च गगराट
यी मौ की फांगी भी
यनी बांजी हुयीं च
उर्द रयांसु की फांग्यु मा
सुंगरु की लंगार लगीं च
द्यवता भी ईं मौ क
यखुली हुयां छन
थान भौन पर जौंक द्याखो
मकडजल लग्यां छन
फिकर नी च ई मौ तै
बुबा ददौं की कुडी की
डी.डी.ए क फ्लैट मा
चली ग्या पटल बेची की
यीं कुडी क मौ दीदों
दिल्ली बंबई बसीं.....
सर्वाधिकार सुरक्षित@लेखक सुदेश भट्ट (दगड्या)
Sudesh Bhatt

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

जै उत्तराखण्ड का बाना करियू छाई आन्दोलन
जरा सोचो भैयू क्या यू ही च वू उत्तराखण्ड
जो रैनी राज्य विरोधी वू ही राज कना छन
जो दियाई बलिदान उथै कू पुछाणा भी नी छन
जै उत्तराखण्ड का................वू उत्तराखण्ड
सोची छाई अपडू हक अपडू ही राज राल
ये पिछडियू पहाड कू विकास हुवाल
पहाडू मा भी अब सुख सुविधा मिलल
पर सब सुपन्या हुव्ये गैनी खण्ड खण्ड
जै उत्तराखण्ड ..........वू उत्तराखण्ड
जनता त्रस्त हुई चा नेता जी हुया मस्त
धरातल पर विकास नी घोषाणाओ मा हुणा बस
जख दियाखा सब वक हुणू सब खण्ड खण्ड
जै उत्तराखण्ड का ..............वू उत्तराखण्ड
पहाड का घरू मा देखो ताल पड्या छन
सभी जवान नौनू नौकरी कुणी परदेश जैया छन
बौडी आल नौनू दान बुऐ बाप सार लगया छन
जै उत्तराखण्ड का................ वू उत्तराखण्ड
स्कूलियू मा भी कन मा हुण पढै
कखि नौनियाल नी कखि गुरू जी नी छन
जख छन द्वि का द्वि वक स्कूल हुया खण्ड खण्ड
जै उत्तराखण्ड का ..................वू उत्तराखण्ड
सरकारी हास्पिटलू का भी हाल बुरू हुया छन
कखी दवेई त कखी डाक्टर ही गायब हुया छन
त कखी हास्पिलटू मा झाडी त कखी कुकर पडया छन
जै उत्तराखण्ड का..............वू उत्तराखण्ड
उत्तराखण्ड की खेल प्रतिभा भी दम तोडनी चा
यक बिटी पलायन कर हैक राज्य कू रूख करणी चा
वैक जैकी वूअपडी चमक बिखेरणा लगया छन
जै उत्तराखण्ड का................ वू उत्तराखण्ड
भैयू यदि वू ही सुपन्यू कू उत्तराखण्ड चयेणू चा
त फिर अपडी कमर कसी लियाऊ
पहाड छोडी परदेश नी जाण भैयू
परदेश बिटी पहाडू का रूख करी लियाऊ
इतगा च विनती मेरी विनती सुणी लियाऊ
परदेश बिटिकी पहाडू मा बौडी आवा
आवा अपडू सुपन्यू कू उत्तराखण्ड बणावा
जै उत्तराखण्ड का बाना करियू छाई आन्दोलन
जरा सोचो भैयू क्या यू ही च वू उत्तराखण्ड ।
रचना - दीपक नेगी गढप्रेमी

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

यीं कुडी क मौ दीदों
दिल्ली बंबई बसीं च
कुडी क यैथर पैथर द्याखो
कन घास जमीं च
जौं उबर्युुं मा हुंदी छे
जंदरीयुं कु गगडाट
आज सुंगरी बियंयी वख
कनी च गगराट
यी मौ की फांगी भी
यनी बांजी हुयीं च
उर्द रयांसु की फांग्यु मा
सुंगरु की लंगार लगीं च
द्यवता भी ईं मौ क
यखुली हुयां छन
थान भौन पर जौंक द्याखो
मकडजल लग्यां छन
फिकर नी च ई मौ तै
बुबा ददौं की कुडी की
डी.डी.ए क फ्लैट मा
चली ग्या पटल बेची की
यीं कुडी क मौ दीदों
दिल्ली बंबई बसीं.....
. सर्वाधिकार सुरक्षित@लेखक सुदेश भट्ट(दगड्या)

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720


Sudesh Bhatt with Sunita Kandwal and 20 others.
February 2 at 7:52am ·
अपणु क बान दगडया
मरी मिटी जाल
जरुरत पडली त
खुन भी द्याल
दिन रात अफु माटु मा
लपोडयांणा राल
सुख दुख मा दगडया
सदनी यैथर आल
अपणु क बान.....

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

जिकुडी मा च खैरी मेरी
छौं मी दुर परदेश मा
यखुली छौं मी हौर क्वी नी
दीदों म्यार गैल मा
जिकुडी मा च खैरी मेरी
गौं गैलों की याद मीतै
आंदी रोज बड्युल्युं मां
जिकुडी रैंदी यख उदास
खुद लगीं च सांकी मा
जिकुडी मा च खैरी मेरी
दगडया गैल्यों तै मी अपण
खुजदु छौं मौबेल मा
लाईक कमेंट करदु तौंकु
फेसबुक की चैट मा
जिकुडी मा च खैरी मेरी
माटी कु च कर्ज दगडयों
कभी चुके नी सकदु मी
पौंछी जौं चै जुनी पर भी
गौं नी भूली सकदु मी
जिकुडी मा च खैरी मेरी
पट्टी उदयपुर मा मेरु
वाया भृगुखाल च
रौंत्यालु उलारु म्यारु
प्यारु गांव ब्वांग च
जिकुडी मा च खैरी मेरी
सर्वाधिकार सुरक्षित@सुदेश भट्ट (दगडया)

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720


चन्द्रशेखर करगेती
12 hrs ·
कख लगाणी छुई, कैमा लगाणी छुई,
ये पहाङ की, कुमौं गढ्वाल की,
रीता कूङों की, तीसा भाङों की......
बल ‪#‎हेमन्तदा‬,
कख लगाणा गीत, कैमा लगाणा गीत,
ये पहाङ का, कुमौं गढ्वाल का,
रीता कूङों का, तीसा भाङों का......
बल,
नौछमी नारेणा रे,
कमीशन की मीट भात,
कख हर्ची गैनी रे.....
यो द्व्वि को चार करे...
पूजा पाठ करे....
उत्तराखण्ड मा कुतड़ दण्ड करे....
आ बारीदां तू लम्बी छुट्टी लेके जेई.....
बल ‪#‎हरदा‬,
राज्य आन्दोलन के दौरान की मक्कारियां फिर से नये रूप में शुरू हो गयी हैं,
तब भी चेहरे मोहरे पहाडी थे और अब भी वही.......
तब भी जनता की चेतना को कुंद करने का काम तथाकथित बुद्धिजीवियों और नेताओं ने मिलकर किया था...और अब भी वही लगे हैं......