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Kumauni & Garhwali Poems by Various Poet-कुमाऊंनी-गढ़वाली कविताएं

Started by एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720, October 05, 2011, 12:00:34 AM

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

( गढ़वाली गीत रचनाओं के क्रम में जीवन की सब से पहली रचना **चल रूपा **)
*-*-*_( प्रिय श्री शैलेन्द्र जोशी जी को आत्मिक स्नेह सहित )*-*-*-
चल- रूपा -बुराँस- क- फूल- -बन्णी- जौला
छमछम हिट छींछाडीयूँ क पाँणी पेई औला |
चमचम चमचम हिमालै को चाँदी सी बरफ,
झिलमिल झिलमिल झिलमिल छाया चौडाडीयूँ तरफ
हीलाँस- की -जोड़ी- बन्णी- उड़ी -उडी जौला || चल रूपा...
धरतिक- ओर -छोर- -कनू-- सजील-- छबील,
रंग रंगीली काया द्याखो,फ्यूंली क फूल पील,
बाँसुरी क स्वर सरगम मा गीत बंन्णी जौला || चल रूपा ...
घसियारियूँ-- क-- मन- मा-- टीस-- उदास-- उदास,
प्यासी प्यासी आँन्ख्यूं.मा बस प्यासी प्यासी प्यास,
ऊँठडीयूँ की तीस बुझौला,आस बंन्णी जौला || चल
छलछल छलछल मन प्राणों की छलकदी सि धार,
कई -जन्मों- की- प्रीत- मेरी -कई- जन्मों क प्यार.
अगास-- क- --बीच--- कखी-- दूर-- छिपि --जौला ||रूपा.....
(रच _ म०न० गौड़ *चंद्रा* १९६२-६३
लैन्सडाउन )

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

Shailendra Joshi with B Mohan Negi and 16 others.
January 27 at 3:14am ·
पाणी काव्य संग्रह एक ऐसी कृति है साहित्यकार नरेंद्र कठैत की जिसमे वो खुद भगीरथ को एक चिठ्ठी लिखते है और कहते है एक धरती एक गंगा और बहा दो इस हाइकु शैली खण्डकाव्य के 11 अंक है ये पुरि एक अर्जी है भगीरथ के नाम जिसमे उत्तराखण्ड की कालजयी समस्या और बिगड़ते सिस्टम पर करारा व्यंग किया गया है बहुत ही रोचक काव्य है
भगीरथ जी :
हमुन सुणी
तुम स्वर्ग बिटि
गंगा लयाँ
इंजीनैर से लेकी
ठयकादार तक
सबि जगामा
तुमी रयाँ।
पर इना सुणा दि
इतनु बडु काम
तुम कनकक्वे
कर गयां
तुमरा न कखी
पैप बिछयां छन
न कखी
पम्प लगयां
हमरा त्
पम्प फुकेणा छन
जंक खयाँ
पैपू पर हमुन
नाला बांध यनि
पम्पू पर
उच्याणा रख्यां।
पुस्तक आखिरी अंक का पद और भाव साथ एक सवाल और शोध भी भगीरथ मुंड रख दिया नरेंद्र कठैत ने
पढ़दी बिथेक
ई चिठ्ठी
तुम झटपट
पैट जयां
यूँ खड़ा डाँडो मा
पाणी कंनक्वे बगौण
जरा ऐक़ी
समझे जयां ।

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

Hem Pant

‪#‎Nainisar‬ पर शंकर दत्त जोशी जी की तात्कालिक प्रतिक्रिया
नजर लागि गे हमर पहाड़ कें
आग लगाओ ते विकास कें
रोड़ोक चक्कर में पहाड़ दरकें हालिन
लिस, लाकड़, ढुंग-पाथर जानि कां पुजे हालिन
विकासक ठेकेदारों लें हिले है हमर बुनियाद कें
नजर लागि गे हमर पहाड़ कें....
हम अपनि जनम भुमि के लुटन नें दयूं
हम आपन पहाड़क स्योंन के टुटन ने दयूं
हाथ है जान नें दयूं "नैनीसार" कें
आग लागो ते विकास कें
नजर लागि गे हमर पहाड़ कें

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720


Sudesh Bhatt 

अपणु क बान दगडया
मरी मिटी जाल
जरुरत पडली त
खुन भी द्याल
दिन रात अफु माटु मा
लपोडयांणा राल
सुख दुख मा दगडया
सदनी यैथर आल
अपणु क बान.....

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

जिकुडी मा च खैरी मेरी
छौं मी दुर परदेश मा
यखुली छौं मी हौर क्वी नी
दीदों म्यार गैल मा
जिकुडी मा च खैरी मेरी
गौं गैलों की याद मीतै
आंदी रोज बड्युल्युं मां
जिकुडी रैंदी यख उदास
खुद लगीं च सांकी मा
जिकुडी मा च खैरी मेरी
दगडया गैल्यों तै मी अपण
खुजदु छौं मौबेल मा
लाईक कमेंट करदु तौंकु
फेसबुक की चैट मा
जिकुडी मा च खैरी मेरी
माटी कु च कर्ज दगडयों
कभी चुके नी सकदु मी
पौंछी जौं चै जुनी पर भी
गौं नी भूली सकदु मी
जिकुडी मा च खैरी मेरी
पट्टी उदयपुर मा मेरु
वाया भृगुखाल च
रौंत्यालु उलारु म्यारु
प्यारु गांव ब्वांग च
जिकुडी मा च खैरी मेरी
सर्वाधिकार सुरक्षित@सुदेश भट्ट (दगडया)

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

आज फिर खैरी दगडयों
दिल्ली की सुणाता हुं
म्यार गौं मे छिंच्वडु खत्या रहा
यहां द्वी रुप्या गिलास खुज्याता हुं
म्यार मुल्क मे पांणी खत्या रहा
जवानी दिल्ली बस गई
पानी जवानी म्यार पहाड की
दिल्ली जुगत हो गई
डब डब डबख रहा हुं
ईस नरबै दिल्ली में मै
चकोरु सी घांण की भीड में
कन पतड्या रहा हुं मै
गौं की खोली नही दिख्या रही
यैकी नरबै दिल्ली में
रीबड रहा हुं फजल बिटीकन
जमनापार की गलियों में
आज फिर खैरी दगड्यों
दिल्ली की सुणाता......
सर्वाधिकार सुरक्षित@सुदेश भट्ट (दगडया)

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

‪#‎Nainisar‬ पर शंकर दत्त जोशी जी की तात्कालिक प्रतिक्रिया
नजर लागि गे हमर पहाड़ कें
आग लगाओ ते विकास कें
रोड़ोक चक्कर में पहाड़ दरकें हालिन
लिस, लाकड़, ढुंग-पाथर जानि कां पुजे हालिन
विकासक ठेकेदारों लें हिले है हमर बुनियाद कें
नजर लागि गे हमर पहाड़ कें....
हम अपनि जनम भुमि के लुटन नें दयूं
हम आपन पहाड़क स्योंन के टुटन ने दयूं
हाथ है जान नें दयूं "नैनीसार" कें
आग लागो ते विकास कें
नजर लागि गे हमर पहाड़ कें

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

Sudesh Bhatt with Sunita Kandwal and 21 others.
Yesterday at 7:52am ·
अपणु क बान दगडया
मरी मिटी जाल
जरुरत पडली त
खुन भी द्याल
दिन रात अफु माटु मा
लपोडयांणा राल
सुख दुख मा दगडया
सदनी यैथर आल
अपणु क बान.....

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720


Dinesh Dhyani
January 25 at 10:41am
पलायन एक चिंतन!
पलायन पहाड़ो से
होना नहीं चाहिए
लोगों को अपने पुस्तैनी
गाऊँ में ही रहना चाहिए।
क्यों भाग रहे हैं लोग
पहाड़ छोड़कर देश बिदेश
क्यों हो रहा है पलायन?
सरकारों को कुछ करना चाहिए।
रोजगार, स्वास्थ्य, शिक्षा पर
ध्यान देना चाहिए
घर गावं की सुध भी लेनी चाहिए।
कभी न कभी हमें भी अपने
गावं जाना चाहिए।
चलो अगली बार
गर्मियों में छुट्टी मानाने
कुछ दिनों पहाड़ चलते हैं
और फिर वहां से आकर
शहर में शामियाने तले
वातानुकूलित कमरो में
बैठकर पहाड़ की बात करंगे
पलायन, बेरोजगारी, स्वास्थ्य
आदि बिषयों पर गंभीर चिंता
और चिंतन करेंगे
पहाड़ के बहाने, चलो पहाड़ की बात करेंगे। दिनेश ध्यानी. २५/१/१६

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

Darshan Singh
November 20, 2015
शुभ संध्या दगड्यो। भोळ सुबेर, गांव की ओर
"हिटो हो भैजी चलो रै भुला "
हिटो हो भैजी चलो रै भुला, उत्तराखंड देखि औंला।
म्यारु पहाड़, देव भूमि, पित्र भूमि कू शीश नवौंला।।

उत्तराखंड पौंछण से पैलि, रामपुर तिराया मा जौंला। जौं कि ज्यान से मीली राज,बवूं भै भैण्यूं याद ल्योंला।।
हिटो हो भैजी चलो रै भुला..........

घार बूण राजि रखी,भौन देवी मा घांडि बजौंला।
कुलदेवों का थान मा छ्वारो द्यू धुपणु कैरि औंला।।
हिटो हो भैजी चलो रै भुला..........

चकबंदी कू जोर चलणू, गणेशु काका थैं सारु द्यूंला।
नै क्यारि सजीं काका की, क्यार्यूं मा पाणी चारि औंला
हिटो हो भैजी चलो रै भुला..........

क्यार्यूं मा हर्यालि आली, फुंगडी सबि अवाद ह्वैली।
ग्वीणि बांदर सुगंर भाजला, सैरि सारि खैंदि ह्वैली।
हिटो हो भैजी चलो रै भुला.........

बांजि फुंगडि यख वख, वाडा मींडा देखि औंला।
सरक्यां वाडा सै कैरिक, रळक्यां भीड़ा धैरि औंला।।
हिटो हो भैजी चलो रै भुला......

तिबरी डंडेळि कूड़ि तेरी,छनुडी बांजि समाळि औंला
हे भैजी! ब्वाडा का टैम जनि,वूं थै ई सजैक औंला।।
हिटो हो भैजी चलो रै भुला.........

वगत कु क्य बुन रै भुला, वां से पैलि समळि जौंला।
आणु जाणु लग्यूं रालु, गौं गळ्या पछ्याणि ल्योंला।
हिटो हो भैजी चलो रै भुला..........
नै क्यारि -नई पौध, new generation.
सर्वाधिकार सुरक्षित @दर्शनसिंह रावत "पडखंडाई "
दिनांक 20/11/2015