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Kumauni & Garhwali Poems by Various Poet-कुमाऊंनी-गढ़वाली कविताएं

Started by एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720, October 05, 2011, 12:00:34 AM

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

माटी के लाल सियाचिन शहीदों को समर्पित अडिग कलम की श्रधान्जली।
******सैनिक उद्दगीथ*****
कोमल कोंपल राह ड़ाल की दौड़ने जब चला
यौवन नयी उमंग लिए नयी राह की और बड़ा
मधुरिम गीत जीवन के लिखने को सोचा था
नव चित प्रेम व्यंजना को पढ़ने जो लगा था
चातक की प्यास लिखुंगा भंवरे का गुंजन
बाँधूंगा बासंती चपलाहट को अक्षरों के बंधन।
पनघट पर नटखट यौवना का नाटक रचुंगा
अकेली बिहरन के गीतों को सुंदरबन गुंजाऊंगा
अथाह उमंगे थी यौवन की बृन्दाबन नाचने की
नहीं पता था चिंगारी अंदर सुलग रही देशभक्ति की।
सीड़ी से कूद पड़ा यौवन बन्दूक थामने ले लिए
निर्वसन हुयी मधुरिम गीतों की तान अपना मुँह लिए।
मंजुल भाव अंकुरित हुए थे जो रुपहले यौवन में
पनपते ही भेंट चड़ा आया मातृभूमि को दिए वचनो में
अब रुपहली वही स्वेत बर्फ की चोटियां लगती
जहाँ से देखता दिव्य भारत की तस्वीर मन में।
अब कारुण्य कल्पना के चित्र घूमिल हो गए चितवन में
अक्षर संवेदना के संज्ञा रहित, चिर निंद्रा पड़े भाव पलकन में
जिजीविषा की जद्दोजहद में सतरंगी जीवन सपना लगता
खुशहाल रहे वतन मेरा यही कर्मक्षेत्र अब अपना लगता।
रचना:- बलबीर राणा 'अडिग'

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

यीं कुडी क मौ दीदों
दिल्ली बंबई बसीं च
कुडी क यैथर पैथर द्याखो
कन घास जमीं च
जौं उबर्युुं मा हुंदी छे
जंदरीयुं कु गगडाट
आज सुंगरी बियंयी वख
कनी च गगराट
यी मौ की फांगी भी
यनी बांजी हुयीं च
उर्द रयांसु की फांग्यु मा
सुंगरु की लंगार लगीं च
द्यवता भी ईं मौ क
यखुली हुयां छन
थान भौन पर जौंक द्याखो
मकडजल लग्यां छन
फिकर नी च ई मौ तै
बुबा ददौं की कुडी की
डी.डी.ए क फ्लैट मा
चली ग्या पटल बेची की
यीं कुडी क मौ दीदों
दिल्ली बंबई बसीं.....
. सर्वाधिकार सुरक्षित@लेखक सुदेश भट्ट(दगड्या)

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

ऐग्याई मेरो मेरो रैबार अ
ऐग्याई मेरो मेरो रैबार अ
मेरा डंडा कंठों- कंठों को पियार अ ये
तिस्सलू व्हैगे ऐबार मेरो नैनीताल-मसूरी
बरखा नि पौड़ी ना ह्युंद ही बौडी ऐ बार ये
प्रताप बी रैगे ऐबार बी रीता
नि बणी वैंकू डोबरचांटी को पूल ये
देरा ना बणी ना बणी गैर बी अबै तक
रह्ग्याई असमंजस किलै ये सरकार ये
यौजना बणणी भंडया जोर-शोर दगडी
वैकी असर किलै नि देख्णु च मेरो पहाड़ ये
ऐई ऐ मी थै ऐ रैबार अब त ऐजावा अब अपरा घारा
कु बी नि कुछ कनु बस बस एक दूजै मुख थे हेनु ये
बालकृष्ण डी ध्यानी
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मेर छुईं मेरी च
मेर छुईं मेरी च
और्री ना वा कैंकि रे
वैमा ही मि रैंदु रे
वै दगडी ही मि सेंदु रे
मेर छुईं मेर च
ना फिकर च ना कैकि चिंता
ना भीतर ना भैर की चिंता
अपरा ही छुईं मा रेंदु रे
आपरी मा ही बचेन्दु रे
मेर छुईं मेरी च ...................
ना आच ना भोळ ना परबत की चिंता
जबै भी जलैई मिल अपरी छुईं की चिता
वा ही मेर भूक च वा ही मेर तिस रे
वा ही मेरो परण वा ही मेरो जियू रे
मेर छुईं मेरी च ...................
बालकृष्ण डी ध्यानी
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ये म्यारा गुलाब छन
ये म्यारा गुलाब छन
ये म्यारा पहाड़ छन
दे साथ दे बोई दौड़ी ऐजा दीदी भूली
रिंगा रिंगा ये मेरो पहाड़
ये छन म्यारा झुमैला झौड़ा
ये छन म्यारा छपेली न्योली
आँगड़ी घाघरा कनुडि कुण्डल
गलो गलोबन्द पिछौड़ा पाजैब
ये छन म्यारा बाल मिठाई
ये छन म्यारा गैंता की दाल अ
गौचर मेला ये उत्तरायणी
हरेला की ये देख पूर्णागिरि
ये छन म्यारा कामो गढ़वाल
ये छन म्यारा उत्तराखंड
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ऐजा जावा देकि ले ये हमरु पहाड़
ऐजा जावा देकि ले ये हमरु पहाड़
ये मेर नात नातिन ये मेरु कुमो-गढ़वाल
भला भला फूल खिलदिन हैंसदर लोक मिळदींन
ये मेरु पठार ऐजा जावा देकि ले ये मेरु सौंसार
मीठी मीठी खठी खठी यख चीज मिळाली
रोलोँ खौलों मा हिंसोलो किन्गोड़ों तेर जिब जबै चखेली
आवा मेरु देब्तों आवा तुम मेरा घार
चवलों हल्दुं कु टिका करलूं ये हमरु शिष्टचार
सुखी रावा जख भी रवा ये मेरो तुम थे पियारा
फिर तुम दगडी भेंट व्हाली अगली बरस ऐजावा मेरा पहाड़
बालकृष्ण डी ध्यानी
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एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

क्वी नि रुंदो रे
क्वी नि रुंदो रे अब कैका बाना
रीत हैगे ये पहाड़ ईं लदोड़ी का बाना
क्वी नि रुंदो रे ...............
बल इतगा च ये उकाली को रैबार
उन्दरु का बाटा मा बल रौड़ीगे मेर ब्यार
क्वी नि रुंदो रे ...............
कैल देखण तेथे अब पैथर बौड़ी की
छोड़ीगे तेथे तेर ढुंगा गारो मा खेली की
क्वी नि रुंदो रे ...............
धैरी ले आंसूं अब अपरा आंख्युं पाख्युं मा
क्वी नि आलू अब वैथे मैट ना कुन
क्वी नि रुंदो रे ...............
बालकृष्ण डी ध्यानी
देवभूमि बद्री-केदारनाथ
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एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

हा कुच बात च छे भैजी मा
हा कुच बात च छे भैजी मा
इन दौड़ी नि जांदू जी मि कैमा
हा कुच बात च छे भैजी मा
खिंची ले जांदी उंकी वो अदा
बल ऊ कलाकार व्हैकि छन जन्मा
हा कुच बात च छे भैजी मा
टॉपलु पैरी की वो पहड़ी बन
देखणा कु ऊँ को अगलू चलन
हा कुच बात च छे भैजी मा
कबि हैंसदरा छन कबि चुप
कबि गुसैल छन कबि मिसैल
हा कुच बात च छे भैजी मा
माटु छे ऊ मेरो ये पहाड़ा को
वै बाना तपरणु रैंदु सदनी ऊं को मन
हा कुच बात च छे भैजी मा
ओंकार सिंह नेगी भाई जी प्रणाम
बालकृष्ण डी ध्यानी
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एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

बसन्त पंचमी सरस्वती पूजन की शुभकामना मित्रो
बसन्त पंचमी एगी पिंगली रंगली
धार धार खिलदा फुलू की पौ बार
सजियु बसन्त कु रूप हपार
सरसुती पूजन ज्ञान कु भण्डार
धर्ती मा एगी मौल्यार
न ठण्डु न गरम
गुनगुनु सी मौसम एगी
रितु कु राज एगी
पिरेम रितू का गीतू मा बिझी
होली एगी नचदा गांदा
फिर पिंगलु पैरवाग पैनी
बसन्त एगी रंगिळू पिंगलु ।........शैलेन्द्र जोशी

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720


Balam Negi
February 9 at 7:33pm
ब्वारि ऐसी चााहिए जो अंग्रजी के साथ कुमाउनी में भी बात करती हो.
घास काटने के साथ फेसबुक भी चलाती हो.
टीबी पर न चिपकी रहे, गुणी बानर भी भगाती हो..
ब्वारि ऐसी चााहिए , जो सबको भाती हो...
.
ब्वारि ऐसी चााहिए पिज्जा चोमिन के साथ भट के डूबुक भी बनाती हो..
चाइनीज के साथ कडवा तेल का दीया भी जलाती हो..
ब्वारि ऐसी चााहिए जो सबको भाती हो,.
.
ब्वारि ऐसी चााहिए जींस टॉप के साथ बाजू बंद भी लगाती हो...
ननाओ को अंग्रजी के साथ कुमाउनी भी सिखाती हो,
ब्वारि ऐसी चााहिए जो सबको भाती हो.
.
पंजाबी गीतों के साथ कुमाउनी गढवाली गीतों पर सब को नचाती हो..
मुझे देख के न सही पर जेठणा जी को देख कर शरमाती हो,..
हिंदी गीतों के साथ हीरा सिहं राणा जी के गानेभी गुनगुनाती हो,...
थैली के दुध के भरोंसे न रहकर भैस गोरु भी पिवाती हो,
ब्वारि ऐसी चााहिए जो सबको भाती हो,...
.
शैर घुमने का शौक हो पर गाँव मे गाय भैस भी चराती हो,
चटि पटि खाणे के साथ लेसु रोटि भी पकाती हो,
खदर की धोती के साथ धूप चश्मा भीलगाती हो.
ब्वारि ऐसी चााहिए जो सबको भाती हो...