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Kumauni & Garhwali Poems by Various Poet-कुमाऊंनी-गढ़वाली कविताएं

Started by एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720, October 05, 2011, 12:00:34 AM

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

सबी कुच हुँदु च यख रे
सबी कुच हुँदु च यख रे
तू किलै की रुंदु च यख
तेरो कया गाई तेन कया लाई
सबी कुच हुँदु च यख ......
रैगे तू बस अपरा दुःख मा
रैगे तू बस अपरा सुख मा
आंसूं हैंसी को भेद फंसी बीच मां
सबी कुच हुँदु च यख ......
देखणाकुन आँखा दिया छन
सोचणाकुन खोज्नाकुन को बुधि रे
कया देखणा सोचणा कया खोज्ना छन तुम
सबी कुच हुँदु च यख ......
सुदी सुदी ग्याई सुदी बोल द्याई
बोल्ण पैल तिल तीळ मात्र बिचारा ना काई
तेरो मनु जन्म इनि ही सुदी ग्याई
सबी कुच हुँदु च यख ......
बालकृष्ण डी ध्यानी
देवभूमि बद्री-केदारनाथ
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एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

कुच रैग्याई
कुच रैग्याई मेरो दगडी
कुच रैग्याई हुलू तेरो दगडी
तेरो मेरो करदा करदा
कुच बी नि राई दगडी मेरो तेरो
कुच रैग्याई ................
बथों दगडी बहणी रे वा
गद्नि दगडी सरणी रे वा
कैल समै पाई हुलू वैथे
सब कुच गमैकि तबै समझ आई मिथे
कुच रैग्याई ................
ना अपरा दगड मा राई वा
ना गैर दगड मा बी राई वा
सब कुच छै बल मेरो भितर ई
मेरो जिबान गै गैर को भितर देकिक़ी
कुच रैग्याई ................
मि बी ना बदली तू बी ना बदली
बदल गै सारो जग परी जग ना बदली
देखणा को बस फर्क च मेरो तेरो
माया ने माया दगडी बांधिले रे तेथे मिथे
कुच रैग्याई ................
बालकृष्ण डी ध्यानी
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एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

बद्रीनारायण राधेनारायण
बद्री धाम हरी का लेकी भाना
राध ऐगे अब हरी को बाना यख
बद्रीनारायण राधेनारायण
अलकनंदा बोई मां ऐजा स्नान कैरी की जा
भक्तों का बान यख बैठ्याँ छन हरी
बद्रीनारायण राधेनारायण
सिद्ध ऋषि, मुनि यख का प्रथम अर्चक छन
तब अपरा पूर्वजों न यख पूजा अर्चना कैरी
बद्रीनारायण राधेनारायण
चतुर्भुज ध्यानमुद्रा मां बैठ्याँ छन हरी
नारदकुण्ड भ्तेक शंकराचार्य निकालि कि स्थापित करी
बद्रीनारायण राधेनारायण
रामानुजाचार्य का छन म्यारा हरी
चल दोईया नरनारायण पहाड़े मा जैकी पूजा कारोंला
बद्रीनारायण राधेनारायण
गंगा माँ ऐ ये धरती मां १२ धारों मा बंटे
अलकनंदा बोई की एक धारा यख मां बोगी
बद्रीनारायण राधेनारायण
बालकृष्ण डी ध्यानी
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बालपन मेरो मिथे तू बथा .....
बालपन मेरो मिथे तू बथा
बतै दे तू कख अब मिललू
दे दे मिथे तू अब अपरो पता
तेरो ठौर थिकणो कख च मिथे बथा
बालपन मेरो मिथे तू बथा.....
हैराण छों मि परेशांन छों
बगत तैर मार से मि घैल छों
निंदी नि आनि छ नि आंदु अब चैन
कख हर्ची गे हुलु मेर हैंस्दी मुखडी को गैंन
बालपन मेरो मिथे तू बथा .....
गुमसुम व्हैग्युं मि अपरा अपरी मां
यखुलो वैकि मि फिरदु अब सारो रैन
जल्दी ऐजा यक्लोप्न की दवैई तू दे जा
मेरो बालपन मिथे ऐकि तू जिंदगी सिखै जा
बालपन मेरो मिथे तू बथा ...
बालकृष्ण डी ध्यानी
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ऐ जावा जनि ऐगे ये घाम
ऐ जावा जनि ऐगे ये घाम
तुम बी ऐजावा अपरा अपरा धाम
बथा टाक्कों कमै की कया पाई बल
शांति ना मिली अब बी तपरणु दिल
बद्री भी यखी छन केदार बी यखी छन
तुम बी त अब यखी ऐजावा
बैठी छा अब भी वा हेरी माँ तेरी
ऐ बारी त तुम विंका बान मार दे फेरी
फिरि ना जाणे कबै बारी आली तेरी
घाम बी सैलु जालु ऊ बगत झणि कबै आलो
ऐ जावा जनि ऐगे ये घाम
तुम बी ऐजावा अपरा अपरा धाम
बालकृष्ण डी ध्यानी
देवभूमि बद्री-केदारनाथ
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एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

‪#‎हिमालय‬ बचेगा तो
जीवन बचेगा
मानव का जीवन
फूलों सा खिलेगा
धडकन है तेरी
हिमालय हे मानव
धडकन को रुकने से
बचा ले तु मानव
हिमालय रहेगा तो
खुशहाली होगी
नदियां बहेंगी तो
हरियाली होगी
चारों ओर आलम
खुशियों का होगा
श्वेत चादर ओढे
जब हिमालय होगा
बचा ले तु मानव
हिमालय को अपने
स्वर्ग यैसा फिर
कहीं ना मिलेगा
हिमालय बचेगा तो
जीवन........
सर्वाधिकार सुरक्षित @लेख..सुदेश भट्ट(दगडया)

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

Dinesh Dhyani
March 4 at 10:40am
ह्यूंद अक्वे
बरखा नि ह्वै,
रूड़ी छक्वे
पाणी नि पै।
खेती म नाज
जामु नी च
मळसु जम्यू
पुंगड्यू बीच।
ह्युंद - ह्युवाळ
साग न पात
अन्ना दाणी
काण न मास।
दिनेश ध्यानी ४/३/१६

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720


Dinesh Dhyani
March 1 at 5:36pm
पहाड़ को दर्द
विकास की गाथा
खाली होन्दा गौं
तिसाली मौ।
संवासिनियों की पिड़ा
मि तैं नि सुणेदी
नैनिसार की बात
रेता, बजरी अर भू माफ़िया
क्या होंदा
समझ नि औंदी।
मि त बस
यतना जणदू
कि अबरी दौऊ
मि बि बैतरणी
तरेण चांदु।
सत्ता का खुचिल
बैठी कि मि बि
रड्डा घुस्सी
ख्यलण चांदु।
स्वचणौ छौ
एक द्वी सम्मान
तगमा अर स्मृति पत्र
मी बि मिली जैं
ता मि बि
धन्य ह्वै जौं।
मिन क्य कन्न
अब क्या बन्न ?
सत्ता से दूर
सम्मान से बिलग
अब नि रयेंदु
सम्मान को बियोग
अब नई सयेन्दु।
तबी बवनू छौं
क्वी मेरि पीड़ा
बि बींगा
मेरा खातिर बि
इनै - उनै
रींगा
अरे जरसी
सम्मान कि
ही ता बात चा,
औणी द्यावा
अबरी जरसी
एक तराक
मेरा तरपा बि
सम्मान कि
मान कि
द्वी बूँद पेकी
मी बि तरेण द्यावा
मी बि तरेण द्यावा। दिनेश ध्यानी। १/३/१६

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720


Dinesh Dhyani
February 25 at 3:31pm
पळौण्या
ब्याळि रात स्वीणम पळ्यौंण्य एै
बल
क्या च रै!
तुम त सब्बि बौहड प्वड्यां छां।
मुजफ्फर नगर अर
रामपुर तिराहा कांड का बाद
तुम्हरा जो रमठा अर
दथडा पळ्ययां छाया
वों को क्य ह्वै?
शहीदौं कु ल्वै की सौं
खयीं छै तुमरि
वौं थैं बिसरि किलै ग्यां?
अगर नि बिसरा ता फेर
निचंत ह्वै कि बौंहड
किलै छां सियां?
मिन बोलि
न्यायालय म केस च चलणू
निसाब कु जग्वाळ सब्यों थै च
बल
न्यायालय?केस अर निसाप हैं.....!
कनि छ्वीं कनौं छै तु?
य त तु अपणि कमजोरि
थैं छुपाणौं छै,
य यीं व्यवस्था थैं
नि समझणौं छै।
निरसा कैन कन्न
मुजफ्फर नगरौं निसाब?
कैन दीण तुमथैं रामपुर तिराहौं
इनसाफ?
द्यखणौं नि छै
शहीदौं की ल्वै की सिचीं
राजगद्दी परैं बैठ्यां
अर रामपुर तिराहा अर
मुजफ्फर नगरा कांड करवोण वळा
सफेदपोश एक सि हि भाषा
तु बनां छन।
एक जना लगणां छन।
अगर नि छन सि एकसन्नि त
त्वी बथौ, पन्द्र सालौ राज म
रामपुर तिराहा अर
मुजफ्फर नगरा कांड का
दोषियों थैं सजा दिलौणा खातिर
यों हम्हरा कर्णाधारौं न क्य कै?
इनी सूणी!
अज्यों बग्त चा
सोचि ल्या
समझि ल्या
यां से पैलि कि सि
पळ्यां दथुड़ा-रमठौं परैं
जंक लगि जौ
अपणु न्याय, निसाप अर
हिसाब कनौं खातिर एक दौं
फिर से सब्बि गौं-गौं बिटि
धारौं-धारौं बिटि
नगरौं-सैरौं बिटि
कट्ठा ह्वावा अर
इतिहास म अपणि गवै द्यावा
एक ह्वैकि
अपणु निसाब कारा
अपणु निसाब कारा।।
दिनेश ध्यानी, 25, फरवरी, 2016।

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720


Dinesh Dhyani
February 24 at 10:26am
क्य बुन्न?
वो देशा बान
अपणि ज्यान खूणा छन
अर
सि देश का
टुकड़ा-टुकड़ा कनौं बान
एक हूणा छन।
दिनेश ध्यानी 24/2/16