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Kumauni & Garhwali Poems by Various Poet-कुमाऊंनी-गढ़वाली कविताएं

Started by एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720, October 05, 2011, 12:00:34 AM

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

"चिठ्ठी वींका नौं"
(जगमोहन सिंह जयाड़ा "जिज्ञासु")
मैं यख राजि ख़ुशी छौं,
तू तख होलि,
मेरा नौना नौनी का दगड़ा,
यानि प्यारा बाल बच्चों दगड़ि...

तू लिखणी छैं, सैडा गौं की ब्वारी,
बाल बच्चों समेत प्रदेश चलिग्यन,
गौं छोड़िक, अपणा ऊं दगड़ि,
अबरी दां जब मैं घौर औलु,
त्वे भी ल्ह्यौलु अपणा दगड़ा,
तू जग्वाळ मा रै, निराश न ह्वै....

प्यारी ब्वै कू क्या होलु?
ब्वैन त बोन्न,
मैं नि औन्दु तुमारा दगड़ा,
मेरु त ज्यू नि लगदु,
परदेश मा, भक्कु भी भौत लगदु,
अपणा ज्युन्दा ज्यू,
नि छोड़ी सकदु घर बार,
प्यारू मुल्क, प्यारा मैत जनु....

तू निराश न ह्वै, जग्वाळ मा रै,
मेरु भी मन नि लगदु यख,
अब घर गौं त छोडण ही पड़लु,
या बग्त की बात छ......
(सर्वाधिकार सुरक्षित एवं प्रकाशित २३.१२.२०११)

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

"कथगा दिनु मा मिल्यौं आज"
(जगमोहन सिंह जयाड़ा "जिज्ञासु")
मेरु बचपन कू एक दगड्या,
अपणा प्यारा मुल्क पहाड़ मा,
चन्द्रबदनी मंदिर का मेळा मा,
ऊँचि धार ऐंच मैकु मिलि.

ऊ अर मैं,
शहर की जिंदगी सी दूर,
बेखबर खड़ा था होयां था,
ओडा का डांडा बिटि,
ठण्डु बथौं फर फर औणु थौ,
कखि दूर हैन्स्दु हिमालय,
दूध जनु सफ़ेद अर प्यारू,
बांज बुरांश कू मुल्क हमारू,
हमारा मन मा ऊलार पैदा कन्नु थौ.

बचपन की छ्वीं बात लगिन,
कख कख छन दगड्या प्यारा,
घर अर परिवार की बात,
कुतग्याळि सी लग्यन मन मा,
बित्याँ दिनु की बात याद करिक,
समय कू पता नि लगि,
कथगा देर बैठ्याँ रैग्यौं,
समय सामणि खड़ु थौ,
वैन बोलि, जवा अब घौर जवा,
मिन्न कू अब बगत ख़त्म ह्वैगी,
दगड्या अर मैं अपणा बाटा हिट्यौं,
हमारा मुख सी छुटि,
"कथगा दिनु मा मिल्यौं आज".
(सर्वाधिकार सुरक्षित एवं प्रकाशित २१.१२.२०११)
www.pahariforum.net
http://jagmohansinghjayarajigyansu.blogspot.com/

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

क्याजि देखी होलू विन इन्न मैमा
बंद कमरा मा ऐना देखी सरमाणु
हवेगी हाल इन्ना वि छोरा का बाना
भरी ज्वानी मा घैल हवेगी तनबदन
विकी चोर नजरन लुछयाली मेरु चैन
क्या देखी होलू विन इन्न मैमा
कन्नी कन्नी रंगली पिंगली
घुमणी फैसनमा सज धजी
विन मैमा क्याजी देखी होलू इन्न
पलंग मा निंद नि रातयो मा
दिन मा कामधाण हाथ नि लगणु
कन्नू बोल्या हवेगी पराण वि छोरा का बाना
क्याजि देखी होलू विन इन्न मैमा
कन्नू मुंडारु करि वि छोरन
सुधि मुधि को रोग लगेयाली मैमम
द्वै वि छोरे माया मा खोजु
या बिसरी जौ दुंडू इलाज विकू
हे जी क्या करू मेरी हैसदी खेलदी
गैल गैल्यानी जिंदगी का बिच
कखन ऐ स्या छट्यु बदमास
बेमान छोरा ज्यू लिगी मेरु चोरी चित्त
क्याजि देखी होलू विन इन्न मैमा
बंद कमरा मा ऐना देखी सरमाणु
हवेगी हाल इन्ना वि छोरा का बाना......................शैलेन्द्र जोशी

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

बहुत दिन बाद एक सृंगार रस मा पिरोयी रचना लिखी है जिसका शीर्षक है ....बांद दीपुली
"गैनो का बिच दमकणी
जून यखुली सी बांद दिपुली
वी देख बजदी दिल मा
मेरा छुणमुण थकुली सि''
''निंद मा सुपन्यो सि बांद दिपुली
वि देख मन हवे जांदू बौल्या सी
आसमान मा उड़दू पराण चखुली सी
दे दे अपणु माया कु घोल बांद दिपुली''
'' बाला लायी पैरायी झगुली सि बांद दिपुली
फूलमा चित्तचनचल तितली सि बांद दिपुली
वि देख मन नचदु चांठो चांठो घ्वीड सि
'' आंखी क्या बुन नैनकौंल छन
सुरै सि सांकी दमकदी मुखड़ी क्या बुन
इन्न च बांद स्वाणी बांद दिपुली "
कु भगी बत्लू होलू ज्यू बटी
जगलू गात संग बांद दिपुली.....................शैलेन्द्र जोशी

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

अगर व्यंगकार नरेन्द्र कठैत मायादारो और माया क्वी रचना रच्दा स्या इन्न होंदी
परिकल्पना ...................शैलेन्द्र जोशी
तुमरी उ मसल सुणी च भैजी
कु मसल भै कि माया कु मुंडारु
कोरी कोरी खांदू
अब तुमबता भै अब कोरी खौ
या चाट पूछी
पर कु च इन्न
बिना माया छाया रै पांदू
बिलकुल बिलकुल
पर यि छुची लोली माया
बड़ी नखरी चीज च भैजी
बड़ा बड़ा जोगी संत यि माया बौल
कखी का नि रैया
पर पिरेम माया दुनी टिकी च
जब दुनिया माया मा मायादार जोड़ा ऐ होला
तभी दुनिया बड़ी होली
निथर ब्रह्मानंद औलाद सब्बी छिना
पर माया और मायादारो कु भि रोल च
दुनिया तै झपन्याला करना मा
बिलकुल बिलकुल भैजी...............................शैलेन्द्र जोशी

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

यु गढ़ कु गौरव होलू एक दिन
स्यु गढ़ रत्न होलू
उत्तराखण्ड मा एक दिन
ये स्वाणु इस्कुलल्या नोनू
पढ़ी लिखी एगी घौर
स्यु आँखा दिखाणु चा
उथे जौ का बाना गौका हुया
इन्न हाल
पर युकी तरंग उमंग क्वी कमी न
पर स्यु मन मा गीत गुनगुणानु होलू
इखि खत्यु च बचपन मेरु
पर मिल भि उकरि
एक दिन देस चल जाण।.........शैलेन्द्र जोशी

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

जनवरी सी नई नई नवेली वो हसीना
चलती है वो फ़रवरी सी फरफराती
मार्च रंगीली होली जैसी वो
अप्रैल का बसंत फुल वो हसीना
मई जून सी गरमी उसमे
जुलाई अगस्त सी भीगी बरसात वो
सितम्बर अक्टूबर की खिली धुप वो
नवंबर दिसम्बर की सर्दी ठण्ड वो हसीना...................शैलेन्द्र जोशी

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

यैजा दीदों दौडी दौडी
त्याडों की रौडी मा
पुरणी याद आली तुमतै
त्याडों की रौडी मा
जलेब्युं की दुकनी
सरा सजीं रैली
चुडी कांडी चुंटी बिंदी
मेरी दीदी भुली मुलेली
कखी रस्साकसी की
खिंचमखींच मचीं राल
चुगलेर बगोट जी हैंसै हैंसै की
अंदड पलटांणा राल
बडु दा बी कबी ना कबी
बौ तै लेकी आल
पंजाब बिटी दा न बौ कुन
फोन भी कैर्याल
ख्याल म्यालों क पुरण दिन
फिर बौडी क यै जाल
जब दगड्या ब्योंली दिखंण
ख्याल म्यालों मा जाल
मेरी कबेलदारी की भी
राड घलीं दिन रात मा
पापा हमें भी जाना है
त्याडों गिंदी क म्याल मा
यैजा दीदों दौडी दौडी
त्याडों की रौडी मा
पुरणी याद......
सर्वाधिकार@सुदेश भटट(दगडया)

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720


Dharampal Rawat 
December 31, 2015 at 1:39pm ·
_/\_ शुभ दोफरा जी..
त ल्या भै प्रस्तुत च आप सबका समिणी 2015 कि मेरी अंतिम रचना...
भै आप लोगों कि दुआ अर् आशीर्वाद से जन-तन्न कै, मोरदा-मोरदा फ़िफ़्टी भि ह्वै हि ग्याई तभा....
आशा करदु कि आप अग्नै भि मिथैं इन्नी झेलणा रैला....
_/\_धन्यखाल अर् आभार आप सबकु भकार भोर के...
आप सब्बथैं सपरिवार नैं साल की भौत-2 बधै हो जी...

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

हपार स्यु गौं बस्युं
दीदों द्याखो धार मा
लोग चलीगेन द्वार ढकी
सडक यैग्या चौक मा
देवी द्ययवता भीतर उगडयां
सुनिंद छन परदेश मा
कुछ दिल्ली बंबई बसगेन
कुछ हपार बिदेश मा
बंठों पर सी जंक लग्या
बिसलरी धरीं सिरंण्यु मा
फ्रिजु की तिबासी भुजी
सवदी हुंणी परदेश मा
मेरी दीदी भुली दीदों
हिटी नी सकदन गांव मा
घस्यर लखड्यल बी जमा अलगसी
ह्वेगेन जैकी परदेश मा
धै लगांण मा हुयीं शरम
रैबार जंदिन फोन मा
गांणा सुणदन अंगरेजी भग्यान
लीड कुचीं च कान मा
हपार स्यु गांव बस्युं
दीदों द्याखो......
सर्वाधिकार सुरक्षित@सुदेश भटट(दगडया)