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Kumauni & Garhwali Poems by Various Poet-कुमाऊंनी-गढ़वाली कविताएं

Started by एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720, October 05, 2011, 12:00:34 AM

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

माटु मा खत्यां दिन
कुई लौटे द्या म्यार
बौडी बौडी की जौं दिनु की
याद आंणी आज
खंदवार कुडी भीतर दबेगेन
द्याखो पाटी बुखल्या
कख गे ह्वाल कम्यडु क
उ बिंटा वाल डुखल्या
हरके फरके की छौं खुजणु
फांग्यु मा खत्युं बचपन
आंख्युं मा छुवाया सी आज
उदसी अयीं गिचपन
खुजणु छौं माटु मा
अपण कांच की गोली
पतनी कैं छानी दब्यां छन
दुवी गल्यों की दौंली
माटु मा खत्यां दिन
कुई लौटे .......
सर्वाधिकार सुरक्षित@सुदेश भटट(दगडया)

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

एक बार फिर शैलेन्द्र जोशी की नई रचना पढे .... ..........
गैनो का बिच दमकणी
जून यखुली सी बांद दिपुली
वी देख बजदी दिल मा
मेरा छुणमुण थकुली सि''
''निंद मा सुपन्यो सि बांद दिपुली
वि देख मन हवे जांदू बौल्या सी
आसमान मा उड़दू पराण चखुली सी
दे दे अपणु माया कु घोल बांद दिपुली''
'' बाला लायी पैरायी झगुली सि बांद दिपुली
फूलमा चित्तचनचल तितली सि बांद दिपुली
वि देख मन नचदु चांठो चांठो घ्वीड सि
'' आंखी क्या बुन नैनकौंल छन
सुरै सि सांकी दमकदी मुखड़ी क्या बुन
इन्न च बांद स्वाणी बांद दिपुली "
कु भगी बत्लू होलू ज्यू बटी
जगलू गात संग बांद दिपुली.....................शैलेन्द्र जोशी

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

बस लग्या रा विकी माया मा .............................शैलेन्द्र जोशी
ठेकेदारो की गैल सि वा
मिनिस्टर होली
जरूर एक दिन वा
विका धाण मा हाथ बटा
विका बेलचा फावड़ा उठा
कबि विका टैमपास करा
घाम मा ताश खेला वि दगड़ी
कबि दारू मुर्गा उड़ा विका साथ
विका हर सुख दुःख मा भागीदार बना
तुमरी पिरेम मा क्वी कमी भौ न औ
लग्या रा माया विका मायादार बणी
जै दिन विकी ठेकादारी फलली
इन्नी उन्नी लेणी देणी मा
विकू कै पार्टी टिकट मिलगी
अर वा जितगी त समझा तुमरि पौबार चा
विका मिनिस्टर बणदा ही सैरु राजपाठ तुमरू च
ठेकेदारी हैकु लंबर तुमरू ही चा
विका प्यार पुरूस्कार श्री विभुसण रतन विका ही क्या
सैरा देस का ही छा फिर तुम
बस लग्या रा विकी माया मा .............................शैलेन्द्र जोशी

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

स्वाणी बांद .................शैलेन्द्र जोशी
कालू औडल बादल से घिरुयु आसमान
तू ऐ अचणचक सर्ग कु मुड बि इन्न बदली
वू बि हवेगे त्वे देख खरांयु
सुख्यु डाला ठंगरा सि
तू ऐ अचणचक डाला फिर ज्वनी ऐ बौडी
वू बि हवेगे त्वे देख झपन्यालू हरु
सुखु गदेरा बारामासी
तू ऐ अचणचक फुट गिनी छोया
बगण लगगिन धार नयार
बांजा पुंगडा कुहाल
तू ऐ अचणचक हिटि मेडो मा
खेतों मा त्वे देख उगगी अणाज
मुख फरक्याँ ओडा भिटोन
तू ऐ अचणचक सब्बी कठठा
हवेनि चौक मा छुयाल
तेरा मयाल्दु सुभोऊ मा
दुन्या तस्बीर बदलिनि
तू ऐ अचणचक बुढया हवेगिन
सब परेसान इत्गा लेट किल्हे बने
स्या बांद या हम तै सदनी कु जवान किल्हे नि बने
ज्यू हम भि हुंदा तै स्वाणी बांद का मायादार .................शैलेन्द्र जोशी

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

बस लग्या रा विकी माया मा .............................शैलेन्द्र जोशी
ठेकेदारो की गैल सि वा
मिनिस्टर होली
जरूर एक दिन वा
विका धाण मा हाथ बटा
विका बेलचा फावड़ा उठा
कबि विका टैमपास करा
घाम मा ताश खेला वि दगड़ी
कबि दारू मुर्गा उड़ा विका साथ
विका हर सुख दुःख मा भागीदार बना
तुमरी पिरेम मा क्वी कमी भौ न औ
लग्या रा माया विका मायादार बणी
जै दिन विकी ठेकादारी फलली
इन्नी उन्नी लेणी देणी मा
विकू कै पार्टी टिकट मिलगी
अर वा जितगी त समझा तुमरि पौबार चा
विका मिनिस्टर बणदा ही सैरु राजपाठ तुमरू च
ठेकेदारी हैकु लंबर तुमरू ही चा
विका प्यार पुरूस्कार श्री विभुसण रतन विका ही क्या
सैरा देस का ही छा फिर तुम
बस लग्या रा विकी माया मा .............................शैलेन्द्र जोशी

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

कब बसंत अलो बोई
कब बसंत अलो बोई
म्यार पहाड़ा मा बोई ये उजड़ा मा
हिरी हिरी पाखी उड़दा आला
रंग बिरंगी बल तब यख फूल खिलाला
बिरला रंगों तब भूमि सजगे ले हुली
म्यार पहाड़ा मा बोई ये उजाड़ा मा
ब्योलि रूप मा वा रूपमती रुपेनि ऊ हुली
शृंगार रसों दगडी दगड़्यूं दगड सजैनी ऊ हुली
कब कुद्गेली लगेली यूँ नंगी खुठ्यूँ मा
म्यार पहाड़ा मा बोई ये उजाड़ा मा
जख द्याख तख तब मेरी तिस नि बुझेली
मेरी धरती तब मिथे चौदिशा बाटा मा भरमेलि
कन कख ऊ कब मेर यूँ वा नजरि मा समेली
म्यार पहाड़ा मा बोई ये उजाड़ा मा
बालकृष्ण डी ध्यानी
देवभूमि बद्री-केदारनाथ
मेरा ब्लोग्स
http://balkrishna-dhyani.blogspot.in/search/
http://www.merapahadforum.com/
में पूर्व प्रकाशित -सर्वाधिकार

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

देखदा ही ते थे मिथे पियार व्हैग्याई
देखदा ही ते थे मिथे पियार व्हैग्याई
ये जिकोड़ी मेरी मिल तेरो नौ कैर द्याई
हर्ची हर्ची ग्याई मि मेसे हर्ची ग्याई ...... २
तेर आंख्युं न जबै मि थे प्रेम घुटी पिलै द्याई
देखदा ही ते थे मिथे पियार व्हैग्याई ...........
रौतेंली मुखडी तेरी बिगरैली आँखी
कन तेरो ये रूपन मिथे बौल्या बनेई
सुध बुध मेर हर्ची हर्ची ग्याई ...... २
अंदा जांदा मिथे जब तू अद बाटा मां दिखेग्याई
देखदा ही ते थे मिथे पियार व्हैग्याई ...........
मेरो मेरो अब मेरो पास मेरो कुच नि बी राई
कुच बी छ्या मेरो पास ऊ अब तेरो व्हैग्याई
ये मेर गैल्याणी तेर छुईं मां मि हर्ची हर्ची ग्याई ...... २
अब त ऐजा मेर ये जीबन मां देक देर ना व्है जाई
बालकृष्ण डी ध्यानी
देवभूमि बद्री-केदारनाथ
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एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

भै बिमार पड्नु बी अब अपराध चा
हालात भंडया खराब च
जार चङयूं यु सौ को पार च
नकुडी बैहणी मेरी आज च
ये गलोड़ी खैंसनी दिन रात च
बरमंड को बारा बज्यूं चा
सरीर कंपकांपि को थारु लग्युं चा
कन हुंयुँ भुलूँ मेरो ये बुरु हाल च
रजै भीतर लिप्टयूं मि आज च
खैनीपानी छूटगे मेरो आज च
बिस्तर मां सिमटीगे मेरो राज च
दवैपानी को लग्युं दरबार चा
जद्ग गीच उत्गा ऊँका बिचार चा
जार थे जनि मिल ही न्यूत दे बोलैई
अपरा सरीर मां मिन वैथे प्रेवश कराई
लोकों कथा सुनी की मेरो अनुमान चा
भै बिमार पड्नु बी अब अपराध चा
बालकृष्ण डी ध्यानी
देवभूमि बद्री-केदारनाथ
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एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

हपार स्यु गौं बस्युं
दीदों द्याखो धार मा
लोग चलीगेन द्वार ढकी
सडक यैग्या चौक मा
देवी द्ययवता भीतर उगडयां
सुनिंद छन परदेश मा
कुछ दिल्ली बंबई बसगेन
कुछ हपार बिदेश मा
बंठों पर सी जंक लग्या
बिसलरी धरीं सिरंण्यु मा
फ्रिजु की तिबासी भुजी
सवदी हुंणी परदेश मा
मेरी दीदी भुली दीदों
हिटी नी सकदन गांव मा
घस्यर लखड्यल बी जमा अलगसी
ह्वेगेन जैकी परदेश मा
धै लगांण मा हुयीं शरम
रैबार जंदिन फोन मा
गांणा सुणदन अंगरेजी भग्यान
लीड कुचीं च कान मा
हपार स्यु गांव बस्युं
दीदों द्याखो......
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एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

बुड बुडया यखुली घरम
नाती नतणों कुन रगर्यांणा छन
लीडक ब्वारी कुटुमदरी लेकी
सैरबसी बण्यां छन
कांणी ह्वेग्या बुये घरम
फिर भी सार लगीं च
म्वाल पर ककडी जुगयीं
घीय की गुंदकी धरीं च
धारु पंद्यारु मा बुये
लाठी टेकी की जांणी च
ब्वारी बिचरी भग्यानी की
बंबई मा राणी बणी च
बाबा जी भी यखुली यखुली
त्यार सार लग्यां छन
तेरी स्कुल्या डरेश देखी
घुट घुटी दिन कटणा छन
बौडी जा रे कभी त यैजा
तेरी कन मुखडी लुकयीं च
गौं गुठ्यार कन बिसरी
तेरी जिकुडी गल्डी हुयीं च
बुड बुड्या यखुली घरम
नाती नतणो कुन......
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