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Kumauni & Garhwali Poems by Various Poet-कुमाऊंनी-गढ़वाली कविताएं

Started by एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720, October 05, 2011, 12:00:34 AM

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

कविता----------------- शैलेन्द्र जोशी
भै नरु
हरु करियु भारु करियु त्वेन गढ़ गीतों तय भै नरु
हे त्वे जनि गितैर नि ह्वे सक दू फेर
गढ़ कवी गढ़ रफ़ी गढ़ कविन्द्र हे नरेन्द्र सिंह नेगी
सब्दो कु कोठार चा गढ़वाली भासा खुनी मौलियार चा
भै नेगी महान छाया गढ़ गीतों की जान छ्या
गीतों की गंगा सदनी तयरा मुख बीटी बग दी
हैसदी हैसदी गा दी गीत मुड मा टोपला हाथ मा बाज़ा
बहुत स्वाणु लग दू जब गांदी जब कुई पहाड़ी गाना
जब तू ढौल मा ऐकी ढौलैर हुवीकी
यु गीतों की छालार बैकी डैरो डैरो पौंच जादी
उत्तराखंड की समस्या मा रचय बस्य तयारा गीत
त्यरा नयु कैसीट जब बाज़ार मा अन्दु ता धरा धडी बिक जादू
त्यरा नया गीतों की जग्वाल मा लूग रैदन
जनि गीत बाज़ार मा अदन ता समलोणीया ह्वे जादन
कालजय गीतों कु रचनाकार गढ़वाली गीतों कु सिंगार
मखमली भोंन कु जादूगर भै नेगी
हिवाले संसकिरती तय हिवाला ऊँचे देंन वाला अपणु तोर कु कलाकार
गढ़ गीतों कु हीरा भी तू छे नवरतन छे तू गढ़ कु गढ़ रतन छे तू
बात बोदू गढ़ की मन की गढ़ गौरव छे तू
नौसुरिया मुरली जनि सुरीली गौली छा तेरी
गंगा जनि शीतलता चा तेरा गीतों मा
मायालु गीत तेरा मायालु भोंण चा
गीतों कु बाट की लेंन पकड़ी की गीतों का बटोई बणी की
गीतों का बाट ही बणी ग्या
ये मुलुक का सुर सम्राट बनी ग्या
गीतों कु पियूष जुगराज रया सदनी संसकिरती पुरुष

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

अगर व्यंगकार नरेन्द्र कठैत मायादारो और माया क्वी रचना रच्दा स्या इन्न होंदी
परिकल्पना ...................शैलेन्द्र जोशी
तुमरी उ मसल सुणी च भैजी
कु मसल भै कि माया कु मुंडारु
कोरी कोरी खांदू
अब तुमबता भै अब कोरी खौ
या चाट पूछी
पर कु च इन्न
बिना माया छाया रै पांदू
बिलकुल बिलकुल
पर यि छुची लोली माया
बड़ी नखरी चीज च भैजी
बड़ा बड़ा जोगी संत यि माया बौल
कखी का नि रैया
पर पिरेम माया दुनी टिकी च
जब दुनिया माया मा मायादार जोड़ा ऐ होला
तभी दुनिया बड़ी होली
निथर ब्रह्मानंद औलाद सब्बी छिना
पर माया और मायादारो कु भि रोल च
दुनिया तै झपन्याला करना मा
बिलकुल बिलकुल भैजी...............................शैलेन्द्र जोशी

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

क्याजि देखी होलू विन इन्न मैमा
बंद कमरा मा ऐना देखी सरमाणु
हवेगी हाल इन्ना वि छोरा का बाना
भरी ज्वानी मा घैल हवेगी तनबदन
विकी चोर नजरन लुछयाली मेरु चैन
क्या देखी होलू विन इन्न मैमा
कन्नी कन्नी रंगली पिंगली
घुमणी फैसनमा सज धजी
विन मैमा क्याजी देखी होलू इन्न
पलंग मा निंद नि रातयो मा
दिन मा कामधाण हाथ नि लगणु
कन्नू बोल्या हवेगी पराण वि छोरा का बाना
क्याजि देखी होलू विन इन्न मैमा
कन्नू मुंडारु करि वि छोरन
सुधि मुधि को रोग लगेयाली मैमम
द्वै वि छोरे माया मा खोजु
या बिसरी जौ दुंडू इलाज विकू
हे जी क्या करू मेरी हैसदी खेलदी
गैल गैल्यानी जिंदगी का बिच
कखन ऐ स्या छट्यु बदमास
बेमान छोरा ज्यू लिगी मेरु चोरी चित्त
क्याजि देखी होलू विन इन्न मैमा
बंद कमरा मा ऐना देखी सरमाणु
हवेगी हाल इन्ना वि छोरा का बाना......................शैलेन्द्र जोशी

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

...शैलेन्द्र जोशी
ये जो स्वामी दास प्रथा है दुनिया की मुझे मंजूर नहीं
तुझे कहू अपनी दासी
बनकर तेरा स्वामी ये बात मुझे मंजूर नहीं
स्वामी दास प्रेम नहीं हो सकता जीवन साथ का
ये दुनिया के रीती रिवाज मेरे लिये शूल
ये दुनिया के के रीती रिवाज मेरे लिये फिजूल
तुझे कहू दासी
बनकर तेरा स्वामी
अपने को स्वामी बनकर दू सम्मान
और तुझे दासी बनाकर दू अपमान
ये पाप मुझ से हो सकता नहीं
जिन्होने ये रीती चलायी
इन्होने स्त्रियो के साथ अन्याय की रीत अपनायी
ये रीती रिवाज शूल फिजूल मेरे लिये
जीवनसाथ संगत जीवन की
मै संग तू मेरी संगनी
मै तेरा राघ तू मेरी राघनी
मै तेरा साथ हम दोनों साथी
ये ही असल रीत
रचना शैलेन्द्र जोशी
फोटो क्लिक............शैलेन्द्र जोशी

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

म्येरा सुरों मा बसी
सरसुती भगबती
ज्यू भि रयेकी गयेकी
होली गौला मा म्येरा
गीत गै गैकी
करलू माँ सरसुती
त्येरी इस्तुती
कृपा रखी सरसुती
कंठ गौला मा म्येरा
त्येरी किरपान सुणदा
लुग गीत म्येरा
गौला मा बिराजी रै तू
यी जलम आखिर साँस तक
साधना सुरों बिटी करदु रालु
सरसुती माँ भगबती
गंगा सुरों कि जमुना गीतू कि
बगदी रा समोदर दुन्या मा
बसी रै तू बस म्येरा गौला मा
सरसुती भगबती
ज्यू भि रयेकी गयेकी
होली गौला मा म्येरा
गीत गै गैकी
करलू माँ सरसुती
त्येरी इस्तुती
रचना .........शैलेन्द्र जोशी

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720


Bhaukhandi Uttarakhandi
  .................................
अपड़ी तों सरम्येली आंख्युं,
अपड़ी तों सरम्येली आंख्युं,
अपड़ी तों सरम्येली आंख्युं देखण दया जरा इना ता देखा
देखण दया जरा इना ता देखा
तुमारी समणी सरम च आणि,हम्तै भारी सरम च आणि
पैली तुम जरा उना ता देखा, हो पैली तुम जरा उन ता देखा
कब ताकि सरमाणी लुकणी राली ब्योली
कब ताकि सरमाणी लुकणी राली ब्योली
कभी ता आलू बसंत कभी ता हंसली फ्योली
रुखा डांडा हवे जला हैरा, रुखा डांडा हवे जला हैरा
जरसी तुम यूँ जना ता देखा, हो जरसी तुम यूँ जना ता देखा
तुमारी समणी सरम च आणि पैली तुम जरा उना ता देखा,
हो पैली तुम जरा उन ता देखा
सरम भी तुमारी चा आंख्युं मा तुमि,सरम भी तुमारी चा आंख्युं मा तुमि
जुक्डी मा तुमारी माया कुटी कुटी घुमी
भैर भितर तुमारी मूरत, भैर भितर तुमारी मूरत
क्या जी करा अब कना जी देखा, हो क्या जी करा अब कना जी देखा
अपड़ी तों सरम्येली आंख्युं देखण दया जरा इना ता देखा
हो देखण दया जरा इना ता देखा
छोड़ा देखणा छन लोग हाथ यनु ना खींचा
हमारा गों मा रिवाज सरमाणों कु नीचा
हो छोड़ा देखणा छन लोग हाथ यनु ना खींचा
हमारा गों मा रिवाज सरमाणों कु नीचा
दूर डांडीयूँ का पार लिजावा हमसाणी
चला उड़ी जौला द्वि का द्वि पंछी बणी
पंछी बणी पंछी बणी
डाल्युं का टुख बनौला घोल
सुख ही सुख होलू जाना भी देखा
हो सुख ही सुख होलू जाना भी देखा

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

 कुमाउँनी चाँचरी smile emoticon
रहौटै कि तान गीता, ओ गीता त्वैकें खाण पड़ल।
मडुवा रोटो सिणु को साग, ओ गीता त्वैकें खाण पड़ल॥
देइ में तेरी इज बैठिछ, खिड़कि बाट औंण पड़ल।
झाँवर की घाण गीता, ओ गीता त्वैकें खाण पड़ल।
झाँवर की घाण गीता, ओ गीता त्वैकें खाण पड़ल।
पैंली लैछै घणी माया, खिड़कि बाट औंण पड़ल।
पैं नै औनै चाण गीता, खिड़कि बाट औंण पड़ल॥
रहौटै कि तान...............!
बाकरै कि बसी गीता, ओ गीता त्वैकें खाण पड़ल।
बाकरै कि बसी गीता, ओ गीता त्वैकें खाण पड़ल।
देखि हैछै पार डाना, खिड़कि बाट औंण पड़ल।
ब्याण तारा जसी गीता, खिड़कि बाट औंण पड़ल॥
रहौटै कि तान..

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

थडियां चौंफला हरची गेन
डी.जे यैगेन गांव मा
डोली घोडी पलकी हरची
बरात जांणी कार मा
फड मन कु भात हरची
हलवे यैगेन गांव मा
खडाखडी मिस्यां लोग
प्लैट लेकी हाथ मां
थडिया चौंफला हरची गेन
डी.जे यैगेन गांव मा
पैंय्या कुलें कु गेट नी च
कखी दिखेंणा गांव मा
न्युतेरु की हत्युं मा चौंठी
हरची ग्या अब गांव मा
बांमण की हथ मा दैंणी
स्या बी नी दिख्यांणी च
खिडकी मा दीदी भुल्युं की गाली
स्या बी नी सुंण्याणी च
सीरु मुकुट भी कम दिखेंणा
बरजी आंणा पगड्युं मा
बरती क यैथर पैथर झंडा
स्यु बी हरची ग्यायी हां
थडिया चौंफला हरची गेन
डी.जे यैगेन......
सर्वाधिकार सुरक्षित@सुदेश भटट(दगडया)

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720


Dinesh Dhyani
January 12 at 12:37pm
राही जी त अब चलिगैन
राही जी त अब चलिगैन
गीत लगौंदरा गीत लगावा
अपणि अपणि मन की सोच छ
भक्वैरि तुम हैंसि खेलि ल्यावा।
एक तरफ छै चिता सुलगणीं
हैंका तरफ तुम तान सुणौणा
ठुमका लगैकि हत्थ हिलैकी
लोग बाग बी खूब छा नचणां।
राही जी न कबि नि बोलि
मेरा खातिर शोक मनावा
मन उदास छौ जौन बोलि
यीं घडि कनक्वै गीत लगौंणा?
भौत मजबूरी छै तुम्हरि त
राही जी का बि गीत सुणौंदा
यीं सध्यां थैं भलु होंदु जो
राही जी थैं समर्पण करदा।
राही जी को काम समर्पण
जिजीविषा थैं याद त करदा
क्य बिगड़दु जो भयौं जरासी
यीं संध्या म खुटि नि हिलौंदा?
मनख्यों म मनख्यात चयेंदी
भावों मा बि सिजळु पराण
व न त कैल्या ज्या करणाया
जबरदस्ति कै थैं जि मनौण।
राही जी की याद सदानी
हमरा मन मस्तिष्क म राली
सौलि घूरली, जून धार की
सदन्नि राही जी कि याद दिलाली। दिनेश ध्यानी. 12 जनवरी, 2016

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720


Dinesh Dhyani
January 12 at 12:37pm
राही जी त अब चलिगैन
राही जी त अब चलिगैन
गीत लगौंदरा गीत लगावा
अपणि अपणि मन की सोच छ
भक्वैरि तुम हैंसि खेलि ल्यावा।
एक तरफ छै चिता सुलगणीं
हैंका तरफ तुम तान सुणौणा
ठुमका लगैकि हत्थ हिलैकी
लोग बाग बी खूब छा नचणां।
राही जी न कबि नि बोलि
मेरा खातिर शोक मनावा
मन उदास छौ जौन बोलि
यीं घडि कनक्वै गीत लगौंणा?
भौत मजबूरी छै तुम्हरि त
राही जी का बि गीत सुणौंदा
यीं सध्यां थैं भलु होंदु जो
राही जी थैं समर्पण करदा।
राही जी को काम समर्पण
जिजीविषा थैं याद त करदा
क्य बिगड़दु जो भयौं जरासी
यीं संध्या म खुटि नि हिलौंदा?
मनख्यों म मनख्यात चयेंदी
भावों मा बि सिजळु पराण
व न त कैल्या ज्या करणाया
जबरदस्ति कै थैं जि मनौण।
राही जी की याद सदानी
हमरा मन मस्तिष्क म राली
सौलि घूरली, जून धार की
सदन्नि राही जी कि याद दिलाली। दिनेश ध्यानी. 12 जनवरी, 2016