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Kumauni & Garhwali Poems by Various Poet-कुमाऊंनी-गढ़वाली कविताएं

Started by एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720, October 05, 2011, 12:00:34 AM

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

पहाड़ की नारी.....

करदि छ धाण अपणि,
निभौन्‍दि छ जिम्‍मेदारी,
पहाड़ जनि अडिग,
उठौन्‍दि बोझ भारी.......
हंसी खुशी निब्‍टौन्‍दि धाण,
नि होन्‍दि मन सी ऊदास,
धारौं बिटि पाणी ल्‍हौन्‍दि,
बणु बिटि लाखड़ु घास.....

पहाड़ जनि जिंदगी मा,
खुशी खोजिक ल्‍हौन्‍दि,
दुख लुकैक सुख कू,
सदा अहसास करौन्‍दि.....
होणी खाणी का पिछ्नै,
समर्पित पहाड़ की नारी,
पहाड़ की उन्‍नति मा,
जौंकु सहयोग छ भारी.....
पहाड़ का श्रृंगार मा जौंकी,
जिंदगी खपि जान्‍दि,
भाग्‍य विधाता बणिक,
जीवन सुखी बणौन्‍दि......
समर्पित रैन सदानि,
उठैन सदानि कष्‍ट भारी,
शत शत नमन त्‍वैकु,
हे पहाड़ की नारी..........

दिनांक 30.12.15

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

लुकण्‍यां अर भुकण्‍यां.....

पहाड़ का द्वी बुढ्या,
कुकरया अर बाग सिंह जौंकु नौं,
प्‍यारा पहाड़ मा छ जौंकु,
अपणु प्‍यारु गौं.....

दाना सयाणौं कू नौं नि लेन्‍दि,
वे गौं की ब्‍वारि,
बाग कु लुकण्‍यां कुकर कु भुकण्‍यां,
बोन्‍नु हायिं छ लाचारी.....
एक बोडा कू नौं छ बाग सिंह,
तब बाग कू बोल्‍दन लुकण्‍यां,
कुकरया दादा स्‍वर्गवासी छ,
पर कुकर कु बोल्‍दन भुकण्‍यां.....
नखरी भलि जनि भी होलि,
पहाड़ की परंपरा छ हमारी,
ये कारण सी नौं बर्जदिन,
गौं की सब्‍बि ब्‍वारि......
यीं परंपरा मा सम्‍मान की,
झलक सी छ दिखेणी,
दाना सयाणौं कू नौं तब,
ब्‍वारि निछन लेणी.......
जैं परंपरा मा मान सम्‍मान हो,
सिरोधार्य छ हमारी,
लुकण्‍यां अर भुकण्‍यां बोन्‍नु,
प्‍यारी परंपरा हमारी.........

दिनांक 22.12.15 श्रीनगर गढ़वाल

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

पाड़ की बिजली पाणी.....

दिल्‍ली मा खोज्‍दु ऐगि हम्‍तैं,
पाड़ की बिजली पाणी,
जागा हे मेरा उत्‍तराखण्‍ड्यौं,
तुम्‍न यनु भी जाणी......
अपणौ कू दर्द यनु हि होन्‍दु,
हम्‍न यनु नि जाणी,
हम्‍तैं खोज्‍दु किलै औणि,
पहाड़ की बिजली पाणी......
तीस बुझौणु पाणी हमारी,
बिजली अंधेरु भगौणि,
याद दिलौणा छन ऊ हम्‍तैं,
क्‍या पाड़ की यादि नि औणि.......

मनखि छौं हम उत्‍तराखण्‍ड का,
मन मा कुछ अहसास करा,
उत्‍तराखण्‍ड की धरती खुदेणि,
तुम भी खुदेवा जरा जरा......
बिजली पाणी सी सबक लेवा,
पाड़ सी तुम नातु जोड़ा,
कळकेर धरती उत्‍तराखण्‍ड की,
प्‍यार करा तुम वीं सी थोड़ा.......


दिनांक 6.12.2015

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

एक गौं मा.....

जब क्‍वी मुर्दा मरि,
गौं का मनख्‍यौंन,
मुर्दा बांधिक अलग मू धरि,
रिस्‍तेदारी का एक मनखिन,
अजौं क्‍या देर छ चर्चा करि,
गौं का मनखि बतौण लग्‍यन,
साब अजौं जरा टैम लगलु,
एक आदिम हैक्‍का गौं,
पीपा ल्‍हीक जयुं छ,
किलैकि वख बंदबस्‍त करयुं छ.....

जब ऊ आदिम अपणि कांधि मा,
भरयुं पीपा ल्‍हीक आई,
सब्‍बि मड़ेड्यौंन घूंट लगाई,
तब मुर्दा कांधि मा ऊठाई....
बस मा बैठिक जब,
बाटा मा एक बजार मा ऐन,
होटल मा पेट पूजा कू गैन,
घूंट लगैक खूब मुर्गा उड़ैन.....
तब कुछ मनखि बोन्‍न लग्‍यन,
अपणा खुट्टौन समसाण जाणा छौं,
मुर्दा फर अपणि कांध लगाणा छौं....

क्‍ल्‍पना निछ कवि जिज्ञासु की,
एक सज्‍जन कू बतैयुं हाल छ,
बात या हमारा पाड़ किछ,
जख हमारु गढ़वाळ छ,
मनख्‍वात मरिगी आज,
बोल्‍दन सब्‍य ह्वैगि समाज,
किलै होणु छ आज यनु,
नि रैगि सब्‍य हमारु समाज........

दिनांक 15.12.2015

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

पत्‍नी चालीसा......
जय हो ज्‍यु पराण सी प्‍यारी,
गुण की गागर तू हमारी-1
ससुर जी की प्‍यारी बेटी,
टी.बी. देखदि बेड मो लेटी-2
तेरी खुट्टि हम दबौन्‍दा,
जीवन अपणु सुखि बणौन्‍दा-3
हात मा तेरा रन्‍दि थमाळि,
बिट्टौं ऊद तू मारदि फाळि-4
सासू जी की बेटी प्‍यारी,
तेज सुबौं की लग्‍दि न्‍यारी-5
हैंस्‍दि मुखड़ि त्‍वैन  दिखाई,
ब्‍यो का दिन बिटि ज्‍युकड़ि जळाई-6
दुश्‍मन त्‍वैकु मुख लगौन्‍दा,
ज्‍युकड़ि मेरी खूब जळौन्‍दा-7
करदा छन ऊ तेरी बड़ाई,
त्‍वैसी सदानि दुख हि पाई-8
भूत पिचास नजिक नि औन्‍दा,
जब हम तेरु ध्‍यान लगौन्‍दा-9
तीन लोक मा तू छैं न्‍यारी,
किस्‍मत कोणा पड़ीं हमारी-10
घर बार की तू कल्‍याणी,
तेरु भेद हम्‍न नि जाणी-11
सुख दुख त्‍वैसी हम छौं पौणा,
जिंदगी का दिन लगौणा-12
जब बिटि जिंदगी मा आई,
सदानि डरदु डरदु खाई-13
तेरी डौर कू बण्‍या गंगलोड़ा,
त्‍वैकु छौं हम गधा अर घोड़ा-14
धोन्‍दा छौं हम तेरी साड़ी,
चन्‍न लगिं जिंदगी की गाड़ी-15


दिनांक 22.11.2015

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

बुड बुडया यखुली घरम
नाती नतणों कुन रगर्यांणा छन
लीडक ब्वारी कुटुमदरी लेकी
सैरबसी बण्यां छन
कांणी ह्वेग्या बुये घरम
फिर भी सार लगीं च
म्वाल पर ककडी जुगयीं
घीय की गुंदकी धरीं च
धारु पंद्यारु मा बुये
लाठी टेकी की जांणी च
ब्वारी बिचरी भग्यानी की
बंबई मा राणी बणी च
बाबा जी भी यखुली यखुली
त्यार सार लग्यां छन
तेरी स्कुल्या डरेश देखी
घुट घुटी दिन कटणा छन
बौडी जा रे कभी त यैजा
तेरी कन मुखडी लुकयीं च
गौं गुठ्यार कन बिसरी
तेरी जिकुडी गल्डी हुयीं च
बुड बुड्या यखुली घरम
नाती नतणो कुन......
सर्वाधिकार सुरक्षित@सुदेश भटट(दगडया)

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

हपार स्यु गौं बस्युं
दीदों द्याखो धार मा
लोग चलीगेन द्वार ढकी
सडक यैग्या चौक मा
देवी द्ययवता भीतर उगडयां
सुनिंद छन परदेश मा
कुछ दिल्ली बंबई बसगेन
कुछ हपार बिदेश मा
बंठों पर सी जंक लग्या
बिसलरी धरीं सिरंण्यु मा
फ्रिजु की तिबासी भुजी
सवदी हुंणी परदेश मा
मेरी दीदी भुली दीदों
हिटी नी सकदन गांव मा
घस्यर लखड्यल बी जमा अलगसी
ह्वेगेन जैकी परदेश मा
धै लगांण मा हुयीं शरम
रैबार जंदिन फोन मा
गांणा सुणदन अंगरेजी भग्यान
लीड कुचीं च कान मा
हपार स्यु गांव बस्युं
दीदों द्याखो......
सर्वाधिकार सुरक्षित@सुदेश भटट(दगडया)

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

यैजा दीदों दौडी दौडी
त्याडों की रौडी मा
पुरणी याद आली तुमतै
त्याडों की रौडी मा
जलेब्युं की दुकनी
सरा सजीं रैली
चुडी कांडी चुंटी बिंदी
मेरी दीदी भुली मुलेली
कखी रस्साकसी की
खिंचमखींच मचीं राल
चुगलेर बगोट जी हैंसै हैंसै की
अंदड पलटांणा राल
बडु दा बी कबी ना कबी
बौ तै लेकी आल
पंजाब बिटी दा न बौ कुन
फोन भी कैर्याल
ख्याल म्यालों क पुरण दिन
फिर बौडी क यै जाल
जब दगड्या ब्योंली दिखंण
ख्याल म्यालों मा जाल
मेरी कबेलदारी की भी
राड घलीं दिन रात मा
पापा हमें भी जाना है
त्याडों गिंदी क म्याल मा
यैजा दीदों दौडी दौडी
त्याडों की रौडी मा
पुरणी याद......
सर्वाधिकार@सुदेश भटट(दगडया)

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

हपार स्यु गौं बस्युं
दीदों द्याखो धार मा
लोग चलीगेन द्वार ढकी
सडक यैग्या चौक मा
देवी द्ययवता भीतर उगडयां
सुनिंद छन परदेश मा
कुछ दिल्ली बंबई बसगेन
कुछ हपार बिदेश मा
बंठों पर सी जंक लग्या
बिसलरी धरीं सिरंण्यु मा
फ्रिजु की तिबासी भुजी
सवदी हुंणी परदेश मा
मेरी दीदी भुली दीदों
हिटी नी सकदन गांव मा
घस्यर लखड्यल बी जमा अलगसी
ह्वेगेन जैकी परदेश मा
धै लगांण मा हुयीं शरम
रैबार जंदिन फोन मा
गांणा सुणदन अंगरेजी भग्यान
लीड कुचीं च कान मा
हपार स्यु गांव बस्युं
दीदों द्याखो......
सर्वाधिकार सुरक्षित@सुदेश भटट(दगडया)

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

बुड बुडया यखुली घरम
नाती नतणों कुन रगर्यांणा छन
लीडक ब्वारी कुटुमदरी लेकी
सैरबसी बण्यां छन
कांणी ह्वेग्या बुये घरम
फिर भी सार लगीं च
म्वाल पर ककडी जुगयीं
घीय की गुंदकी धरीं च
धारु पंद्यारु मा बुये
लाठी टेकी की जांणी च
ब्वारी बिचरी भग्यानी की
बंबई मा राणी बणी च
बाबा जी भी यखुली यखुली
त्यार सार लग्यां छन
तेरी स्कुल्या डरेश देखी
घुट घुटी दिन कटणा छन
बौडी जा रे कभी त यैजा
तेरी कन मुखडी लुकयीं च
गौं गुठ्यार कन बिसरी
तेरी जिकुडी गल्डी हुयीं च
बुड बुड्या यखुली घरम
नाती नतणो कुन......
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