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Kumauni & Garhwali Poems by Various Poet-कुमाऊंनी-गढ़वाली कविताएं

Started by एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720, October 05, 2011, 12:00:34 AM

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

अरे ओ
भुमियाल देप्ता
सीमेट लो अपने निशाण
और दो पैसे वाली
अपनी पीतल की घंटियां

उठा लो
शौकारों के चढ़ाए खिरीज
बांध लो पोटली
अपने आण-बाण-बयालों के साथ
जाओ भाग जाओ पहाड़ से.

नहीं तो तुम्हें बुरी तरह खदेड़ आयेंगे
तुम्हारे ही शौकार
घाट पार
धार पार

और उठा लायेंगे
आशाराम, शांतिकुंज, साईं
राम, हनुमान के सुन्दर फोटक
हर गली, हर चौराहे में खड़े कर देंगे
आलिशान मंदिर

बुरी तरह बेदख़ल कर दिए जाओगे
भ्यार के देप्ताओं के सामने
भुताषण गए पुरखो
क्या सह पाओगे
सदैव-सदैव के लिए मृत्य ??

(अनिल कार्की)
एक नई लिखी जा रही कविता का अंश

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720


Anil Karki added 2 new photos.
December 31, 2015 at 7:30pm ·
ए मेरे
हौंसिया मुलुक
खेत के हलिया
आँगन के हुड़किया
आँफर के ल्वार
गाड़ के मछलिया
ढोल के ढोलियार
होली के होलियार
रतैली की भौजी
फतोई के औजी
एहो
मेरेे सोकारो
खेतों के कामदारो
पहाड़ के देवदारो
हिमाल के दावेदारो
धिनाली के दुधघरो
अरे जागो तो रे इक्की बार ।

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

म्यार गौं मुलुक मा
कन डर हुंयी च
मार मार कैकी बाग लग्युं
गोर बछरु पर मिस्युं च
रोज अखबारों मा द्याखो
यमकेस्वर ही छयुं च
जु दिखंण छन ख्वाब 17 क
ऊंकी गीची पर ताली लगीं च
ना त कुई बडु नेता
ना छुट बुगल्या आई
पीडित परिवारु क प्रति कैन
जरा दुख बी नी जताई
चार गोरु क जगाम अगर
चार भोट मिलण की बात हुवांद
नेता जी हमर भग्यान
रतखुल्दी यै जांद
जु बी छ्या तुम हे बाघ देवता
चुनौ क बगत परकट ह्वैन
यन स्वार्थी नेतों तै
धरों धार गाडों गाड दौडेन
अरे किले छ्या लग्यां द्वास
गरीब अर गुरबों पर
रात करना छ्या तुम अटैक
छान्युं की पटल्युं पर
म्यार गौं मुलुक मा
कन डर हुंयीं......
सर्वाधिकार@सुदेश भटट(दगडया)

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

न छ्या तुम दीदी भूली
म्यार पहाड की नारी
त्यार मन की पीडा
कभी कैन नी जांणी
बरखा मा बत्वाणी मा
पुंगड्युं मा छै जांणी
त्यार मन की पीडा
कभी कैन नी जांणी
रुजद भिगद डाल भ्याल
घास कुन छै जांणी
अफु दिनभर भुख तीस
गोरु कुन हरी घास छै लांणी
रुड्युं क घाम मा
हींयुदु क जडु मा
कन खैरी खंदा तुम
जब जंदा जुगंल्या पांणी मा
कुटुमदरी यखुली घर
दुध्यारु नौन छुड्युं च
घास कुन बंणु बंणु मा
खैरी कन खांणी च
धन छ्या तुम दीदी भुली
म्यार पहाड की.......

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

कन निर्मोही ह्वे तु
हे बिधाता आज
राही जी तै लीगी तु
रुवाणा छन साज बाज
अब सौली जगजगा
कनमा घुराली
कौथिग क बाना बौ
सतपुली कनमा आली
अब देखेन लुणन दुण
कनमा भर्याल
भागा बे पंचमी भागा
गीत कु सुणालु
ठंडु मठु कैकी अब
चदरी कु हिरालु
पारभीड की बसंती तै
छोरी कु बतालु
भाना तै बांज कटण
दुर कु बुलाल
रुप की खज्यनी तै
भग्यनी कु बतालु
नथुली घंघाल कु
गीत कु लगालु
माया कु जंजाल तै
अब बुरु कु बतालु
देवी दयवतों तै हुडकी मा
अब कु नचालु
नौ खोली क सीयुं नाग
अब कनमा बिजले जालु
तिलै धारु बोला गीत
अब कु लगालु
समदंण्यु तै रीक अब
खुजणा ही रै जालु
त्यार बाना भाना
जोगी भेष कु धरालु
छुमा बौ बसंती छुमा
गीत कु लगालु
ईमारतु क जंगल मा
आदीम कु हर्चालु
प्रदुषण बढी ब्वाली तुमन
बसंत कनमा आलु
कन निर्मोही ह्वे तु
हे बिधाता.......
सर्वाधिकार सुरक्षित@सुदेश भटट(दगडया)सुर सम्राट चंद्र सिंह राही जी तै समर्पित श्रद्धांजली

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

आज फिर खैरी
पहाड की लगोणा छौंऊ
खुद लगीं गौं की
ब्यथा सुणाणा छौंऊ
जनि दस पास कैरी
मी दिल्ली क्या औऊं
नौकरी क्या लगी की
मी गौं कभी नी ग्योंऊ
मैट्रो की सीढीयुं मा मी
रुल्दी खुजणा छौंऊ
बहुमंजिला लिप्टु तै
ग्युड चितांणा छौंऊ
जगजगा प्रदर्शनियुं मा
क्वादु झंग्वरु खुजणा छौंऊ
जख जांदु यी दिल्ली मा
वखी पतड्याणा छौंऊ
गैल्या दगडयों तै ब्हाटसप
फेसबुक मा खुजणा छौंऊ
बांजी तिबारी डिंडयाली रोज
मोबेल मा दिखणा छौंऊ
खंद्वार हुंयीं कुडी तै हम
लाईक करना छ्याऊ
घर जांण क जु नी बुदु
कमेंट मा दुख जतांणा छ्याऊ
आज फिर खैरी
पहाड की.......
सर्वाधिकार सुरक्षित@सुदेश भटट(दगडया)

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

जब बीटी खिंची मिल अपणी सेल्फ़ी .... शैलेन्द्र जोशी
#‪#‎कनु‬ कमाल करियु तेरु सेल्फ़ी
सैरी दुन्या मा बबाल करियु तेरु सेल्फ़ी
#‪#‎जब‬ बीटी खिंची मिल अपणी सेल्फ़ी ##
भोर भोरिक आणा छोरो का कमेन्ट
क्वी बूनु बने दे अपणी ब्योली
क्वी बूनु बने दे अपणी गर्लफ्रेंड ##
#‪#‎हर‬ हाथ मुबेल वाल मा
छपगी छपगी मेरी स्वाणी सेल्फ़ी
जब बीटी खिंची मिल अपणी सेल्फ़ी
भोर भोरिक आणा छोरो का कमेन्ट##
#‪#‎सुबेर‬ शाम बस एक रयु मेरु काम
खीचण बस अपणी सेल्फ़ी
जवान बुड्या सभु तै स्वांदी मेरी सेल्फ़ी##
#‪#‎सभु‬ कि दिल राणी बनयु तिन मैकू सेल्फ़ी
कन कमाल करियु तिन सेल्फ़ी
माया कु जाल फैलायु तिन सेल्फ़ी ##
##सभु तै आंखयु मा बसे तिन सेल्फ़ी
मैकू कनु रोग लगे तिन सेल्फ़ी
जिंदगी भरो मुंडारु करियु तिन सेल्फ़ी ##....शैलेन्द्र जोशी

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

स्वाणी बांद .................शैलेन्द्र जोशी
कालू औडल बादल से घिरुयु आसमान
तू ऐ अचणचक सर्ग कु मुड बि इन्न बदली
वू बि हवेगे त्वे देख खरांयु
सुख्यु डाला ठंगरा सि
तू ऐ अचणचक डाला फिर ज्वनी ऐ बौडी
वू बि हवेगे त्वे देख झपन्यालू हरु
सुखु गदेरा बारामासी
तू ऐ अचणचक फुट गिनी छोया
बगण लगगिन धार नयार
बांजा पुंगडा कुहाल
तू ऐ अचणचक हिटि मेडो मा
खेतों मा त्वे देख उगगी अणाज
मुख फरक्याँ ओडा भिटोन
तू ऐ अचणचक सब्बी कठठा
हवेनि चौक मा छुयाल
तेरा मयाल्दु सुभोऊ मा
दुन्या तस्बीर बदलिनि
तू ऐ अचणचक बुढया हवेगिन
सब परेसान इत्गा लेट किल्हे बने
स्या बांद या हम तै सदनी कु जवान किल्हे नि बने
ज्यू हम भि हुंदा तै स्वाणी बांद का मायादार .................शैलेन्द्र जोशी

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

एक बार फिर शैलेन्द्र जोशी की नई रचना पढे .... ..........
गैनो का बिच दमकणी
जून यखुली सी बांद दिपुली
वी देख बजदी दिल मा
मेरा छुणमुण थकुली सि''
''निंद मा सुपन्यो सि बांद दिपुली
वि देख मन हवे जांदू बौल्या सी
आसमान मा उड़दू पराण चखुली सी
दे दे अपणु माया कु घोल बांद दिपुली''
'' बाला लायी पैरायी झगुली सि बांद दिपुली
फूलमा चित्तचनचल तितली सि बांद दिपुली
वि देख मन नचदु चांठो चांठो घ्वीड सि
'' आंखी क्या बुन नैनकौंल छन
सुरै सि सांकी दमकदी मुखड़ी क्या बुन
इन्न च बांद स्वाणी बांद दिपुली "
कु भगी बत्लू होलू ज्यू बटी
जगलू गात संग बांद दिपुली.....................शैलेन्द्र जोशी

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

बस लग्या रा विकी माया मा .............................शैलेन्द्र जोशी
ठेकेदारो की गैल सि वा
मिनिस्टर होली
जरूर एक दिन वा
विका धाण मा हाथ बटा
विका बेलचा फावड़ा उठा
कबि विका टैमपास करा
घाम मा ताश खेला वि दगड़ी
कबि दारू मुर्गा उड़ा विका साथ
विका हर सुख दुःख मा भागीदार बना
तुमरी पिरेम मा क्वी कमी भौ न औ
लग्या रा माया विका मायादार बणी
जै दिन विकी ठेकादारी फलली
इन्नी उन्नी लेणी देणी मा
विकू कै पार्टी टिकट मिलगी
अर वा जितगी त समझा तुमरि पौबार चा
विका मिनिस्टर बणदा ही सैरु राजपाठ तुमरू च
ठेकेदारी हैकु लंबर तुमरू ही चा
विका प्यार पुरूस्कार श्री विभुसण रतन विका ही क्या
सैरा देस का ही छा फिर तुम
बस लग्या रा विकी माया मा .............................शैलेन्द्र जोशी