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Uttarayani घुघुतिया उत्तरायणी (मकर संक्रान्ति) उत्तराखण्ड का सबसे बड़ा पर्व

Started by पंकज सिंह महर, January 08, 2008, 12:52:56 PM

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खीमसिंह रावत


खीमसिंह रावत

देहली में भी उत्तरैनी पर नहान का आयोजन पिछले साल से वजीराबाद घाट पर किया जा रहा है इसमे मुख्य भूमिका डॉ. गोविन बल्लभ जोशी (डॉ. गोविन्द्तीर्थ) जी की रही है / श्रीमती कमला रावत का सहयोग प्रसन्सनिय है २१ December २००८ को प्रोग्राम में डॉ. साहब से मुलाकात हुई तो उन्होंने कहा की उत्तराखंडी लोगो में जन जागरण अभियान चला कर इसको वृहत रूप दिया जा सकता है/

राजेश जोशी/rajesh.joshee

It is very disappointing that the rivers are all empty, very less water in the river.  We should collectively think about the metohds for revival of holy rivers of our areas.

हेम पन्त

बागेश्वर में उत्तरायणी के मेले का अत्यधिक पौराणिक, आध्यात्मिक व ऐतिहासिक महत्व है. स्वतन्त्रता संग्राम के दौरान इसी मेले के दौरान इसी संगम में सन 1921 में कुमाऊं केसरी बदरी दत्त पाण्डे के नेतृत्व में आम जनता ने "कुली बेगार" का उन्मूलन करके ब्रिटिश सरकार के मुंह पर करारा तमाचा मारा था. इस आन्दोलन से प्रभावित होकर स्वयं गांधी जी बागेश्वर भ्रमण पर आये थे.

हेम पन्त

सामाजिक व राजनैतिक चेतना की भावना को अमिट रखते हुए आज भी इस ऐतिहासिक बगङ पर राजनैतिन व सामाजिक दलों द्वारा पण्डाल लगाकर शीर्ष नेताओं के सम्बोधन आयोजित किये जाते हैं. इस साल भी उक्रांद, कांग्रेस, भाजपा, बसपा के अलावा बेरोजगार संगठन व प्रशिक्षित गुरिल्लाओं द्वारा जनसभायें आयोजित की गयी थीं.

भाजपा की जनसभा. इस पण्डाल में भगत सिंह कोश्यारी जी और बच्ची सिंह रावत जी मुख्य वक्ता थे.


हेम पन्त

उक्रांद का पण्डाल. मुख्य वक्ता काशी सिंह ऐरी जी, नारायन जंतवाल जी व पुष्पेश त्रिपाठी जी थे.


हेम पन्त

कांग्रेस का पण्डाल. मुख्य वक्ता प्रदेश प्रमुख यशपाल आर्य जी थे.


हेम पन्त

मोहन पाठक की अगुवाई में उत्तराखण्ड के बेरोजगारों की जनसभा