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Started by Bhawani Aama, October 04, 2007, 03:44:25 PM

खीमसिंह रावत

खेङि= फेंकना या फेंका हुवा
जांतर=चक्की


Quote from: H.Pant on November 04, 2008, 01:25:16 PM
इन शब्दों के मतलब बताइये?

फट्यालो-
खेङि-
मुसोल या मुसौव-
जांतर-
पुंगङि-






Rajen

                 इन शब्दों के मतलब बताइये?

फट्यालो- चादर को दो जाने पकड़ कर जोर-२ से हिलाते है जिसकी हवा से फसल में से कूड़ा उड़ जाता है.
खेङि - गाँव के सब लोग मिल कर किसी एक निवासी के लिए किसी चीज को लाते हैं या कोई कार्य करते हैं.
मुसोल या मुसौव - ओखल में धान वगेरह कूटने के लिए 'मुसली'
जांतर - घरेलु चक्की (पहाड़ में पहले लगभग सब के घर में होती थी अब शनैः -२ लुप्त हो रही है).
पुंगङि-   ?     

हेम पन्त

एक शब्द बच गया है, वो मैं बता देता हूं...

पुंगङि- खेत...


Rajen


मेरे को नहीं आया    :(    :(

Quote from: H.Pant on November 04, 2008, 03:19:43 PM
एक शब्द बच गया है, वो मैं बता देता हूं...

पुंगङि- खेत...



Rajen

दिनेश बिजल्वान जी कृपया इसका अर्थ बता दें:


Quote from: mukesh joshi on August 08, 2008, 04:05:49 PM
"ओटुवा बिलेणा"=  ?


खीमसिंह रावत

पराव=
नहू=
क्यड=
दूहार=
सांगो=
मटियार=
गव्द=

पंकज सिंह महर

Quote from: H.Pant on November 04, 2008, 01:32:48 PM
मुकेश भाई इस वाक्य का अर्थ आप ही बता दीजिये..

Quote from: mukesh joshi on August 08, 2008, 04:05:49 PM
"ओटुवा बिलेणा"=  ?


अभी नेगी जी से बात हुई, उनका स्वास्थ्य भी कुछ खराब था, उन्होंने बताया कि यह शब्द समूह मूलतः रवांई क्षेत्र का है। ऊन को एक कांटेदार बेलन से ओटा (ऊन को अलग-अलग करना) जाता है, उससे ही यह बना "ओटुवा-बिलेणा"। उस गीत में भी यही बताया जा रहा है कि अभी मैं ऊन को ओट रहा हूं।

Mukesh Joshi

Quote from: पंकज सिंह महर on November 04, 2008, 04:29:37 PM
Quote from: H.Pant on November 04, 2008, 01:32:48 PM
मुकेश भाई इस वाक्य का अर्थ आप ही बता दीजिये..

Quote from: mukesh joshi on August 08, 2008, 04:05:49 PM
"ओटुवा बिलेणा"=  ?


अभी नेगी जी से बात हुई, उनका स्वास्थ्य भी कुछ खराब था, उन्होंने बताया कि यह शब्द समूह मूलतः रवांई क्षेत्र का है। ऊन को एक कांटेदार बेलन से ओटा (ऊन को अलग-अलग करना) जाता है, उससे ही यह बना "ओटुवा-बिलेणा"। उस गीत में भी यही बताया जा रहा है कि अभी मैं ऊन को ओट रहा हूं।


धन्यवाद महर जी

Mukesh Joshi

धाद,धात ,धवड़ी, धैइ  लगना = आवाज देना 

Mukesh Joshi

सर घरजवे फ़िल्म के एक गीत के बोल है

नया जमाना का गैख  छन ये ,====== गैख ---?
बिना जुन्गो का बैख़  छन ये ,======= बैख़ -- पुरूष
य नि घुरको ढोल की ढोलकी घुरा....घुर


अगर किसी को पता हो तो किर्पया बताये