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आवों अपनी भाषा सीखे ! LET US LEARN OUR LANGUAGES !!

Started by Bhawani Aama, October 04, 2007, 03:44:25 PM

पंकज सिंह महर

मान्तर- लेकिन, किन्तु, परन्तु।
खांत- दया।
अणकश- अजीब।
खप्याश- वेवकूफ।
निमखुण- बहुत सारा, बहुतायत।
उणभाट- बैचेनी।
हन्तर- जल रहा कपड़ा, पहाड़ों में इसे मच्छर भगाने में प्रयुक्त किया जाता है।
छांट- तेज काम करने वाला।
भुतड़ा- फटा हुआ कपड़ा।
बारकी- खिड़की, झरोखा।
बज्यूनो- बेकार छोड़ देने योग्य, बांजो- बंजर से बना शब्द।
स्वारा- अपने जाति के लोग, १० दिनी-१२ दिनी।
बिरादर- जिनसे शादी-ब्याह होता हो।
मित्र (मितुर)- बिरादरों का मुखिया व्यक्ति।
अताश- जल्दबाजी।
धन्कौरा- निपुण ।

Mukesh Joshi

यखूली = अकेले
मुच्छ्यालू = मशाल (एक लकड़ी का जलता सिरा )
मनस्वाग = आदम खोर
धुवड़ी  = धुवां फेला हुआ
घोणी = घनी
दोब्दु =  दुबक ता हुवा
अछ्याणी = एक लकड़ी जीस  को बेस बना कर और लकड़ी कटी या फाडी जासके
ग्वेरनी ( ग्वेर)= पालतू जानवरो को चराने वाली महिला (पुरूष )
मंग्दारा= मांगने वाले
वण = वन (जंगल)   
कुयेडी = कोहरा ( होल )
चरघिटी = गले का अग्रिम भाग (ठुडी के नीचे )











खीमसिंह रावत

गैख - gayak, (Singer)


Quote from: mukesh joshi on November 12, 2008, 11:44:38 AM
सर घरजवे फ़िल्म के एक गीत के बोल है

नया जमाना का गैख  छन ये ,====== गैख ---?
बिना जुन्गो का बैख़  छन ये ,======= बैख़ -- पुरूष
य नि घुरको ढोल की ढोलकी घुरा....घुर


अगर किसी को पता हो तो किर्पया बताये

Mukesh Joshi


खीमसिंह रावत

पराव= धान की घास
नहू=मडुवा या झुंगरा की घास
क्यड=पतली पतली लकडी 
दूहार= दरवाजे के पले
सांगो=लोहे की मोटी जंजीर या दरवाजो पर लगाए जाने वाले संगल
मटियार= मिटटी का बर्तन जिसमे दही मथी जाती है 
गव्द=मछली मारने के लिए नदी में बनाया जाता है




खीमसिंह रावत

जोशी जी ये शब्दों का फर्क हो सकता है जैसे :-
बैख को हमारे यहाँ पर पैक = ताकतवर पुरूष



[/quote]
Quote from: mukesh joshi on December 06, 2008, 04:44:51 PM
sir ye,
gaik = singer
lekin ye gaikh hai

bekh =gents (purush )



Mukesh Joshi

रावत जी आप सही कह रहे है मै आप से बिल कुल सहमत हूँ
शब्दों का उचारण अलग -२ हो सकता है
बैख (हमारे यहाँ ) को अल्मोडा ( ताकुला ..भिक्या सैण) ... आदि जगहों में बैग भी कहते है
ये शब्द मैंने फ़िल्म घर जवाई फ़िल्म  के गीत से लिए थे
नया जमाना का गैख  छन ये ,( ये गैख गायक नही होना चाहिए मेरे को भी नही पता )====== गैख ---?
बिना जुन्गो का बैख़  छन ये ,( बिना मुछो के मर्द है ये )======= बैख़ -- पुरूष

खीमसिंह रावत


joshi ji
गैख = ठाकुर (घनशाली टेहरी के एक मित्र ने बताया की हरिजन लोग अपने सवर्णों को कहते हैं )