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Idioms Of Uttarakhand - उत्तराखण्डी (कुमाऊँनी एवं गढ़वाली) मुहावरे

Started by एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720, October 25, 2007, 05:14:02 PM

Dinesh Bijalwan

भाडू भरेक नि ह्वै त खप्पर चाटिक क्या होण

(बर्तन भर के पेट नही भरा तो खप्पर चाट्के क्या भरेगा

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720


नौल ब्वारी क नौ पुवा घास.. 

इसका सही हिन्दी " चार दिन की चांदनी = कुछ दिनों की चमक दमक

Lalit Mohan Pandey

खाली छे ब्वारी, बल्दकी पीठ कनियो
(Means बेमतलब के कम मै लगाये रखना) 

हेम पन्त

कुछ ऐसे वाक्य होते हैं जिन्हें शायद मुहावरे न कहा जाये लेकिन आम बोल-चाल में इनका काफी प्रयोग होता है.

चक ज्यू कां छन? वायुमण्डल- किसी वार्ता के बीच में विषय से हट कर बात करना.

और न और, पदिया को सौर - किसी अकर्मण्य आदमी से व्यर्थ में ही बङी उम्मीद रखना.

पंकज सिंह महर

चक ज्यू कां छन-वायुमंडल- अपने आप में खोये रहने वाले व्यक्ति भी को कहा जाता है।

जामनो भटे कामनो- पूत के पांव पालने में ही दिख जाते हैं का कुमाऊनी मुहावरा है।

हेम पन्त

अक्कल नै भै, तनखा बङा..

अर्थात- योग्यता कम होने के बावजूद बङे ख्वाब देखना..

Quote from: हेम पन्त on February 26, 2009, 10:35:17 AM
कुछ ऐसे वाक्य होते हैं जिन्हें शायद मुहावरे न कहा जाये लेकिन आम बोल-चाल में इनका काफी प्रयोग होता है.

चक ज्यू कां छन? वायुमण्डल- किसी वार्ता के बीच में विषय से हट कर बात करना.

और न और, पदिया को सौर - किसी अकर्मण्य आदमी से व्यर्थ में ही बङी उम्मीद रखना.

हेम पन्त

खाना हुणि कै नै, लासन में जोर.

अर्थात- अभाव छुपाते हुए बाहरी दिखावा करना

हेम पन्त

नै पान्या लै पायो, चबा-चबै खायो

अर्थात -  कोई दुर्लभ वस्तु पा जाने पर आदमी उस वस्तु की बहुत कद्र करता है.

हेम पन्त

पेट लागि आग! त कि चाइंछ साग?

अर्थात - भूखा आदमी खाने में मीनमेख नही निकालता. (भूखे आदमी को जैसा भी खाना मिले उसके लिये वो ही अच्छा)

हेम पन्त

तात्तो खूं, जली मरी ज्यूँ

शब्दार्थ - गरम- गरम ही खाऊंगा, भले ही जल कर मर जाऊं...

अर्थात - किसी चीज को पाने के लिए अत्यधिक आतुरता प्रदर्शित करना..