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Idioms Of Uttarakhand - उत्तराखण्डी (कुमाऊँनी एवं गढ़वाली) मुहावरे

Started by एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720, October 25, 2007, 05:14:02 PM

Sunil Pandey

"अपुन हाथ जगतनाथ "
मतलब अगर आपके हाथ मै की काम को करने का हुनर है तो वो आप के लिए जगत नाथ मतलब भगवान के सामान है

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720



खेती नि बाड़ी, बड़ गो गौ पधान

यानी

पास में कुछ ना होना, झूटी शान दिखाना

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720


सौंण मरी सास, भादों में आय आशु


यानी

लम्बे समय बाद बेदना प्रकट करना

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720



ताल मल पेट क पाणी ना हिलूंण

यानी

किसी बात की चिंता ना करना

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720


गुड आनियार में ले मीठ, उजाव में ले मीठ

यानी

गुड अँधेरे में भी मीठा, उजाले में भी मीठा

(इंसान के अच्छे गुण हर जगह दिखाई देते है)

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720


कौतिके कि आँखी घर नि जानी
गियु कि खापड़ी मडुव नि खानी

हिंदी : कौतिक (मेला) देख कर घर लौटना नहीं चाहती, गेहू मिले तो बाजरे कि रोटी अच्छी नहीं लगती

मतलब : सुविधाभोगी होना

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720


यह कहावत :

"पानी में लाकडी मारी भे जै पानी क द्वी हुनी"

पानी में लठ चलाकर पानी में द्वो टुकड़े नहीं होते

यानी : फूट पड़ने के बाद आत्मियाता का आभाव होना

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720



दस दसे, बीस बग्वाल
कुमु बिस, फुल भग्वाल

दस दिन नवरात्री के उसके बाद बीस दिन बाद दीपावली

(दिन को गिनती करना)

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720




पौण रिसो तो रिसो, खांण तो बचो
( अतिथि नाराज हो तो होने दो, भोजन की बचत हो गयी)

यानी

प्रतिष्ठा जाय पर बचत की सोचना!

Lalit Mohan Pandey