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Idioms Of Uttarakhand - उत्तराखण्डी (कुमाऊँनी एवं गढ़वाली) मुहावरे

Started by एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720, October 25, 2007, 05:14:02 PM

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720


जब तक ल्वे, तब तक सब क्वे,

यानी,

जब तक शरीर में लहू है, तब तक सब अपने साथ है
(सुख के सभी साथी दुःख ने ना कोई)

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720


टक छान त टकटका
नितर झकझाका

पैसे है तो ठीक है, पैसे नहीं है तो भिखारी

यानी

जिसके पास पैसे नही है, उसकी इज्जत नहीं 

Rajen

कपड़ा न लत्ता,
चला कलकत्ता |

अर्थात:  बिना तैयारी के किसी काम को शुरू करना.

Rajen

ध्वे ध्वे गोरा, घुस घुस सोरा.

अर्थात: जैसे धो-धो कर गोरा नहीं बनते वैसे ही जबरदस्ती घुस कर संबंधी नहीं बन सकते.

हेम पन्त

लादो ले भर्यो, गादो ले भर्यो

भावार्थ - अनैतिक तरीके से धन इकट्ठा करना / लूट खसोट करना

Lalit Mohan Pandey

कान अंगुली हालीबेरी पड़ी रूनो
मतलब : दींन दुनिया की चिंता न करता.

Rajen

चार गौकू सयानो, अठार गौकू रौ,
मेरा काम नि आयोत ऐसी तैसी में जौ.

अर्थात: चार गाँव का मुखिया, अठार गाँव का मालिक, मेरे काम नहीं आया तो ऐसी तैसी में जाए.

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720



रात बियान का भाल -२ स्वीण

(हिंदी) - रात खुलने वक्त के अछे -२ समपने

मतलब :

सपने जी वास्तविक नहीं है! ख्याली सपने

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720



भोलि, भोलि, दिन गया सोल

कल कल करते दिने बीत गए सोलह

(टाल टाल करते दिन बीत गए सोलह)

यानी
टाल मटोल कर समय वर्वाद करना 

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

बनि खाणों जोगी हवे
पैला वासा भूखो रै

ज्यादे खाने को साधू बना, पहले पहर को भूखा रहा

(जाड़े खाने की चाह में कुछ ना मिलना)