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Kumauni & Garhwali Poems by Various Poet-कुमाऊंनी-गढ़वाली कविताएं

Started by एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720, October 05, 2011, 12:00:34 AM

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

मंगत्या (करुण रसयुक्त गढ़वाली कविता )
रचना -- अनसूया प्रसाद उपाध्याय ( जन्म -नवन , सितौन स्यूं , पौड़ी गढ़वाल )
Poetry by - Ansuya Prasad Upadhyaya
( विभिन्न युग की गढ़वाली कविताएँ श्रृंखला )
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इंटरनेट प्रस्तुति और व्याख्या : भीष्म कुकरेती
-
पिंगळी मुखड़ि
खरस्यां बाळ
गल्वड्यों कि हडगि
आँखा उड़्यार
कंपदो गात
फैलायूं हात
बण्यु कंगाल
लाठि टेक्यि -टेक्यी सरकणू
ह्य राम मंगत्या
न भूत
न खबेस
न द्यबता
( साभार --शैलवाणी , अंग्वाळ )
Poetry Copyright@ Poet
Copyright @ Bhishma Kukreti interpretation if any
-
-
स्वच्छ भारत , सफल भारत , गढ़वाली भाषा युक्त गढ़वाल

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

बाटो ना बिरड़ी (सिखन्दरि गढ़वाली कविता )
रचना -- सतेश्वर आजाद ( जन्म - गौचर , चमोली गढ़वाल )
Poetry by - Sateshwar Azad
( विभिन्न युग की गढ़वाली कविताएँ श्रृंखला )
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इंटरनेट प्रस्तुति और व्याख्या : भीष्म कुकरेती
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जिंदगी का चौड़ा चाकळा मा , अक्लि का रौंखा मौऴयाण मा
नौन्याळि का कुछ सुपिना होला , मम्ताणा सि यौवन होला
ज्वनि का रगर्याट मा बाटो ना बिरड़ी बट्वै कखि ?
बाटा मा कांडा त होला ही , झाड़ पात गाड़ गड़हरा भी होला
स्वाणा स्वाणा डांडा होला छळ छळ करदा छौड़ा होला
रूप की मृग तृष्णा मा बाटो ना बिरड़ी बट्वै कखि ?
ज्वनि का जबळयाट मा अक्लि का कबलाट मा
उबखण्या सी जीवन होलो ज्वन्नि छबळाणि देखिकी
छण भरै तुच्छ माया , मा बाटो ना बिरड़ी बट्वै कखि ?
बिरही भैर -भीतर मा सौणोs बादळ बरखणा होला
अब अपड़ा मन की जग्वाळि मा दिल हाथ आँखा फड़कणा होला
अब पैला मिलन का उलार मा बाटो ना बिरड़ी बट्वै कखि ?
जब सुपिना सब मिटि जाला कर्म को बाटो समिणी होला
दुनियादारी का चक्रचाळ मा दगड्यों की छिरमिंडाळी होली
तब खुसैक वूं टुकार्योंन बाटो ना बिरड़ी बट्वै कखि।
( साभार --शैलवाणी , अंग्वाळ )
Poetry Copyright@ Poet
Copyright @ Bhishma Kukreti interpretation if any

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

Bhishma Kukreti
16 hrs
क्वन्ना पेट (गढ़वाली कविता )
रचना -- सैन सिंह रावत ( जन्म - इडवाल स्यूं , पौड़ी गढ़वाल )
Poetry by - Sain Singh Rawat
( विभिन्न युग की गढ़वाली कविताएँ श्रृंखला )
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इंटरनेट प्रस्तुति और व्याख्या : भीष्म कुकरेती
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एक दिन
मिन अपणो छ्वटो
खूब मारी
पैली चपत
फेर मुक्का
फेर घपक
वो दिख्यो त चम्पत
जख लुकि हो
ढूंढा ढूंढ
वबरा पांडा
खोळा खोळा
डांडा -डांडा
कैको खाणू
कैको पेणू
द्वफरा घाम
अर मैना जेठ
भितर देख त
वो क्वन्ना पेट
( साभार --शैलवाणी , अंग्वाळ )
Poetry Copyright@ Poet
Copyright @ Bhishma Kukreti interpretation if any

स्वच्छ भारत , सफल भारत , गढ़वाली भाषा युक्त गढ़वाल

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720


Bhishma Kukreti
April 30 at 12:03pm
मंगत्या (करुण रसयुक्त गढ़वाली कविता )
रचना -- अनसूया प्रसाद उपाध्याय ( जन्म -नवन , सितौन स्यूं , पौड़ी गढ़वाल )
Poetry by - Ansuya Prasad Upadhyaya
( विभिन्न युग की गढ़वाली कविताएँ श्रृंखला )
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इंटरनेट प्रस्तुति और व्याख्या : भीष्म कुकरेती
-
पिंगळी मुखड़ि
खरस्यां बाळ
गल्वड्यों कि हडगि
आँखा उड़्यार
कंपदो गात
फैलायूं हात
बण्यु कंगाल
लाठि टेक्यि -टेक्यी सरकणू
ह्य राम मंगत्या
न भूत
न खबेस
न द्यबता
( साभार --शैलवाणी , अंग्वाळ )
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स्वच्छ भारत , सफल भारत , गढ़वाली भाषा युक्त गढ़वाल

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

तै देख्द .......
तै देख्द
जिकुड़ी मेर लूछी गे
अग्ने-पिछने दौड़ी भागी
वा त्वैमा जै लूकिगे
तेर मुखडी से
मेर माया इन जुडी गे
झणी सोँण भोंदों बरखा
आच झम झम बरसी गे
तै लिपटी की
ऊं बरखा धार मेसै कैगे
ज्वानी को पियार मा
तू बी पौड़ी गे
तै देख्द .......
बालकृष्ण डी ध्यानी
देवभूमि बद्री-केदारनाथ
मेरा ब्लोग्स
http://balkrishna-dhyani.blogspot.in/search/
http://www.merapahadforum.com/
में पूर्व प्रकाशित -सर्वाधिकार

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

तै देख्द .......
तै देख्द
जिकुड़ी मेर लूछी गे
अग्ने-पिछने दौड़ी भागी
वा त्वैमा जै लूकिगे
तेर मुखडी से
मेर माया इन जुडी गे
झणी सोँण भोंदों बरखा
आच झम झम बरसी गे
तै लिपटी की
ऊं बरखा धार मेसै कैगे
ज्वानी को पियार मा
तू बी पौड़ी गे
तै देख्द .......
बालकृष्ण डी ध्यानी
देवभूमि बद्री-केदारनाथ
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एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

तेरु बकी बात रूप कमयु च ...

तेरु बकी बात रूप कमयु च ...
ओ तेरु बकी बात रूप कमयु च ...
ओ त्वे मा सेरु गढ़वाल समयु च .
ओ त्वे मा सेरु गढ़वाल समयु च
तेरु बकी बात रूप कमयु च ...

पौड़ी की रौनक तेरी गलोड़यु मा ..
जोंसार जादू तेरी लटल्यु मा ...
पौड़ी की रौनक तेरी गलोड़यु मा ..
जोंसार जादू तेरी लटल्यु मा ...
श्रीनगर की गंगा तेरी आंख्यु मा ।
फूलो की घाटी तेरी उट्ठरयु मा ।
ओ दन्तर्यु मा ..दन्तर्यु में हिमालय बसयु च ..
तेरु बकी बात रूप कमयु च ...
ओ तेरु बकी बात रूप कमयु च ...

गौचर गोपेश्वर भी कन्द्र्यु मा ..
उत्तरकाशी तेरी उन्गाल्यु मा ...
डिब्रागढे की बोली तेरी कवलि मा ..
देहरादून बस्यु तेरी खुचली मा ...
पीठ मा ..पीठ मा चमोली अड्युंचा.

कमर मा टिरी की लसक ..
छुयु मा सालाणी मजाक ..
कमर मा टिरी की लसक ..
छुयु मा सालणी मजाक ..
सतपुली सी तेरी लपाक ..
चाल मा भाबर सी ठसाक ..
चंबा जनू ओ चंबा जनु सुरंग क्या पयु च

ओ तेरु ..बाकि बाक रूप कमयु च ...

लैंसडोन सी तेरी नकोडि
केदरनाथ सी तेरी जिकुड़ी
चौंदकोट तेरी ज्वानी
बद्रीनाथ सैनी मुखोडि
खुट्यूं मा खुट्यूं मा ऋशिकेष बसयुंचा
ओ तेरु ..बाकि बाक रूप कमयु च ...

ओ तेरु ..बाकि बाक रूप कमयु च ...
उत्तराखंड मनोरंजन तुम थै कंण लग जी?
उत्तराखंडी गीत है
उत्तराखंडी भाषा को बढ़वा देने के लिये
चलचित्र के नीचे गीत लिखा है बस
बालकृष्ण डी ध्यानी
देवभूमि बद्री-केदारनाथ

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

धूं धूं कैकि जळणी च
धूं धूं कैकि जळणी च
मेरी दंडी कंठी किलै कि ये बारी
कया हुनु कया हुलु जी
मेरो देबता तू मै थे बता
किलै की तू इन नारज व्हैगे
किलै तिन इन भस्मत मचै दे
रोँतैलो मेरो जंगलात बणो थे
अग्नि देबता को किलै भेंट चढ़े दे
ख़ाक हुनि लगिंच तेर ये डाली बोटी
दिन रति जळणी तेर ये स्वणी घाटी
मुका जिबों न तेरो कया च बिगाड़ी
किलै तिन ये भूमि मां जोलपोल मचे दे
ना ना कैर अब बुझै दे तिन जो रच्युं च
तेरो नौको उचांडो निकली मिन धरयुंचा
नारज ना व्है भांड्या मेरो वन देबता
मानी जा शांत व्हैजा अब ना जरा बी कैर अब देर
धूं धूं कैकि जळणी च ........
बालकृष्ण डी ध्यानी
देवभूमि बद्री-केदारनाथ
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एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

कया भुल व्हैगे मैसे
कया भुल व्हैगे मैसे
तू में दगडी किलै बोल्दि ना
कया भुल व्हैगे मैसे
ये माया को बुखार चडैकि
किलै वैथे अब दवाई पिलैदी ना
कया भुल व्हैगे मैसे
ये आँखा आँखा से मिलैकी
किलै अब ऊंथे चोरैन्दी तू
कया भुल व्हैगे मैसे
उजालों दिन दिखेकि मिथे
यखुलि अंधरों बाटा किलै छोड़ देंदी तू
कया भुल व्हैगे मैसे
बालकृष्ण डी ध्यानी
देवभूमि बद्री-केदारनाथ
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एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

तेरु बकी बात रूप कमयु च ...

तेरु बकी बात रूप कमयु च ...
ओ तेरु बकी बात रूप कमयु च ...
ओ त्वे मा सेरु गढ़वाल समयु च .
ओ त्वे मा सेरु गढ़वाल समयु च
तेरु बकी बात रूप कमयु च ...

पौड़ी की रौनक तेरी गलोड़यु मा ..
जोंसार जादू तेरी लटल्यु मा ...
पौड़ी की रौनक तेरी गलोड़यु मा ..
जोंसार जादू तेरी लटल्यु मा ...
श्रीनगर की गंगा तेरी आंख्यु मा ।
फूलो की घाटी तेरी उट्ठरयु मा ।
ओ दन्तर्यु मा ..दन्तर्यु में हिमालय बसयु च ..
तेरु बकी बात रूप कमयु च ...
ओ तेरु बकी बात रूप कमयु च ...

गौचर गोपेश्वर भी कन्द्र्यु मा ..
उत्तरकाशी तेरी उन्गाल्यु मा ...
डिब्रागढे की बोली तेरी कवलि मा ..
देहरादून बस्यु तेरी खुचली मा ...
पीठ मा ..पीठ मा चमोली अड्युंचा.

कमर मा टिरी की लसक ..
छुयु मा सालाणी मजाक ..
कमर मा टिरी की लसक ..
छुयु मा सालणी मजाक ..
सतपुली सी तेरी लपाक ..
चाल मा भाबर सी ठसाक ..
चंबा जनू ओ चंबा जनु सुरंग क्या पयु च

ओ तेरु ..बाकि बाक रूप कमयु च ...

लैंसडोन सी तेरी नकोडि
केदरनाथ सी तेरी जिकुड़ी
चौंदकोट तेरी ज्वानी
बद्रीनाथ सैनी मुखोडि
खुट्यूं मा खुट्यूं मा ऋशिकेष बसयुंचा
ओ तेरु ..बाकि बाक रूप कमयु च ...

ओ तेरु ..बाकि बाक रूप कमयु च ...
उत्तराखंड मनोरंजन तुम थै कंण लग जी?
उत्तराखंडी गीत है
उत्तराखंडी भाषा को बढ़वा देने के लिये
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