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Kumauni & Garhwali Poems by Various Poet-कुमाऊंनी-गढ़वाली कविताएं

Started by एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720, October 05, 2011, 12:00:34 AM

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

दोस्तो स्कूल जाते हुए हमे एक श्मशान घाट से होकर जाना पड़ता है जिससे शायद वहाँ के प्रेतों की स्वतंत्रता का हनन होता है इस कविता के माध्यम से मैं उनकी व्यथा आप लोगों को सुना रही हूँ!!!!
" गढवाली हास्यव्यँगात्मक कविता"
एक बाँण बोनू ब्यालि
हेका बाँण मां
अब त ज्यू नि लग्दु हमारु
यख रांण मां
अब त ज्यू नि लग्दु हमारु
यख रांण मां
कथगा खंड खेलि छा
हमन केरियर बनान मां
ह्वेगे चौपट सब
यूँ मस्टरों का आंण मां
ह्वेगे चौपट सब
यूँ मास्टरों का आंण
रंगिलि पिन्गिली आन्दनी
जब यु लटुलि छिमनेकि
हकदक्क छाँ हम भी
यूँ तें देखि की
अड़गट कै जानि छ्न ह्म्तें
हमारा ही घार मां
अब त ज्यू नि लगदु हमारु
यख रांण मां
अब त ज्यू नि लग्दु हमारु
यख रांण मां
ढग्ड़यांदि ढूँग्यों मा जब
यु खुटि धरदनि
ह्त्यों मां पर्स यूँका
कन्दुडियों मा मोबाइल रन्दिनी
बाल भी नि बर्कुदु यूँ कु
इने आंण मां
अब त ज्यू नि लग्दु हमारु
यख रांण मां
अब त ज्यू नि लग्दु हमारु
यख रांण मां
गुरूजी लग्यान जब बटि
अनुशासन बनान मां
विदयारथियों का दगड़ दग्डि सैत
हम भि सुधरी ग्यां
अब त यूँ तें देखि कि
डोर हमतें लग्नि चा
जग्तेश्वर मां या कन
उल्टी गंगा बोगणि चा
जग्तेश्वर मा या कन
उल्टी गंगा बोगणि चा
रौला गम्दिरों लुक्दा छा जु
ऊ भि रस्ता लग्या छ्न
साइन्स मैथ का फ़ार्मुला
अब ह्म्तें भि याद हुयां छ्न
छौल छ्बेटो लग्दु कै पर
यु वे तें भि खूब कना छ्न
बिन्गण मां नि औन्दू हमारी
यु कैं डिग्री कै कि अयां छ्न
क्वी कसर नि छोडि यूँन
नाव हमारी डुबाण मां
अब त ज्यू नि लग्दु ह्मरु
यख रांण मां
अब त ज्यू नि लग्दु ह्मारू
यख रांण मां!!!!!!
"शशि पंत"

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

री एक कविता "गढवाली झाँझी" की चंद पंक्तियाँ.......
मवासी लगैलि घाम तिन
कूडि पुंगडि बिकोंणइ छे
धौण मां जु कर्ज हुयों
वे तें किले बढोनी छे!!
बटा मां लगायुँ तमासो तेरो
नागिन डाँस नाच्नु छे
निसिंनि कयिं दिन राते तेरी
अँग्रेजी माँ बबडानि छे
गिच्चो सेरो थींच्यों तेरो
धोण मोण छोडी छे
टल्लि बणकै झाँझ मां
भंगोडा ब्यालि पोडी छे
नोनुं खुने लत्ता नी
खाँण खुँने गफ्फा नी
राति गाड्युँ उर्मुन्डो तेरो
दिन मां घाम ताप्नु छे
राशन लौण कु बोला त्वेमां
मर्गुल्या बल्द सि देख्नु छे.....!!!!!
!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!
"शशि पंत"

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

बाल मिठेई
सफेद मोतियों कि बिंदी ण
सजी नखरेली बिगरेली
मेर बाल मिठेई
भूरा रंग मा रंगी
चॉकलेट जनि दिखेणी
मेर बाल मिठेई
मेरु कुमाऊं उत्तराखंड कि
अल्मोड़ा बाजारा मा नटी
मेर बाल मिठेई
नन्हा दाणा स्याणा ने खैई
इं थे भुने भुने कि बणेई
मेर बाल मिठेई
खैल जै बि यक बारी
वैल खै हर बार बारी
मेर बाल मिठेई
एक उत्तराखंडी
बालकृष्ण डी ध्यानी
देवभूमि बद्री-केदारनाथ
मेरा ब्लोग्स
http:// balkrishna_dhyani.blogspot.com
में पूर्व प्रकाशित -सर्वाधिकार सुरक्षित

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

इन हुन्दी जिकोड़ी मेरी
इन हुन्दी जिकोड़ी मेरी
जनि मेर पाड़ा ये मेरा हिमाला
जनि बगनि बोई यख गंगा की धारा
ये मेरु कुमौ -गढ़वाल
इन हुन्दी जिकोड़ी मेरी ...............जिकोड़ी मेरी
बुरांस जनि लाल रंग रंगी मेरु देब्तों कु माथा
जनि मेरु कुल देबता नरंकार
फ्योंली का पिंगला रंग जनि पसरी यख
हमरु रीती रिवाज हमरु गौं घारा
इन हुन्दी जिकोड़ी मेरी ...............जिकोड़ी मेरी
ना हुंदु बड़ो कबि ना अंदि ये अकल दाडा
ना छूट द गढ़देश मेरु ना मेरु पुंगड़ू ना ये डंडा कांठा
चकुलु जनि नि बैठ दूँ रान्यूं ये डाला वे छाला
बाल मन जनि जीयु हुँदु मेरु हे मेरा माया देशा
इन हुन्दी जिकोड़ी मेरी ...............जिकोड़ी मेरी
बिछो कु दुःख क्या हूंद सुण रे मेरु उकाला
दणमण नि रुन्दा ये आंसूं कू रेन्दु मेरु पासा
हेर दी ना वा फेर दी दाणी हाती मलस दी ये माथा
इनि नि भाग मेरु बल कया लिक ये मा बिधाता
इन हुन्दी जिकोड़ी मेरी
जनि मेर पाड़ा ये मेरा हिमाला
जनि बगनि बोई यख गंगा की धारा
ये मेरु कुमौ -गढ़वाल
एक उत्तराखंडी
बालकृष्ण डी ध्यानी
देवभूमि बद्री-केदारनाथ
मेरा ब्लोग्स
http:// balkrishna_dhyani.blogspot.com
में पूर्व प्रकाशित -सर्वाधिकार सुरक्षित

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

दिनेश चंद्र भट्ट
3 hrs
बल्द बेचि हल्द
बल्द बेचि हल्द
हल्द बेचि बल्द
बाकार् गोरू भैंस
आब् गलदारि पुजि गै ठुल मैंस में
गाड़ गंङ बलुवा ढुङ
पानि बिजुलि बाॅध
गड़ खेत लिस पेड़ हाॅङ फाॅङ
गलदारि के नि छाड़
हमार गौं गाड़ बठे
ऑगन पटाॅगन बाट घाट चौबाट
गलदारि पुजि गै पवित्तर ठुल घौर
खुल्लो खेल खुल्लि बोलि
जेठ् बैशाख कच्यार कि होलि
हम्माम में सब्बै नंग
कास् कास् मलंग भुतंग
लोकतंत्र कि हैरै जंग
नैं लोक रौ नैं तंत्र
ठुल् मैंस गोठ्याई छन लुकाई छन
कि काला भै कस बज्जर पड़ो भङाल फुल
सब जोड़ जुगत कुरसि खिन

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720


हितेश उपाध्याय
10 hrs
आहा रे कस जमान ऐगो।
पैलाग ज्यूजाग टाटा नेगो।।
मिलन तक कुणी हाई।
जानतक कुणी बाय।।
हाथ जोड़न खुट पढ़न सब हैरेगो।
कुल ड्यूड और बेबी डौल जमान जो आगो।।
ईजा बोज्यू बुलाण में शर्म करनी।
कमर क पेट जाघो में धरनी।।
साड़ी बिलौज जमान नैगो।
आध नगाड़ मनखियों जमान ऐगो।।
इंग्लिश बुलाण में समझनी आपणी शान।
तैक खातिर पहाड़ आज ह्वेगो बिरान।।
नै शर्म नै लाज सब बेची खा हालो।
बोज्यू थे ले डियर कुणी जमान आगो।।
घर में बुढ़ ईजा बोज्यू नानतिनो लिजी बैचैन छन।
चेली च्यालक पछिन और च्यल चेलियां पछिन पागल छन।।
जै उमर में दात टूटछि हो आब दिल टूटन फैगो।
ईज बोज्यू फिकर छोड़ी जान जानू समय आगो।।
पहाड़ छोड़ी आब सब शहर के भागनी।
घर क काम में मन नि लगान।।
होटल में चाहे भान माझनी।
घुघुति हरयाई पंचमी सब हैरान फैगो।।
किस डे हग डे मनौनी जमान जो आगो।।
पहाड़ बचाओ पहाड़ बचाओ बात सब करनी।
ये बात दिल में कोई ना लीन सब बातों का शेर बननी।।
आपणी भाषा संस्कृति विरासत बिना पहाड़ कसी बचल।
जस घर और स्कूल में पाठ पढ़ाई जाल नान उसे सिखल।।
पश्चमी और आधुनिक बननी जमान आगो।
तभे आज पहाड़ विरान ह्वेगो।

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

Bhaukhandi Uttarakhandi
18 hrs
"न त सरग,न सरकार बरखणी"I
"ज्युन्दा आदिमा कि आत्मा च भटकणी"II
"कले दे होलू भला दीन का चक्कर मा वोट"I
"आज बात दिल मा च खटकणी"II
"मनमोहन का राज मा कंस जन राज देखी"I
"ये राम राज्य मा भी,जिंदगी लटकणी"II
"वाss मैंगे की मार, जिंदगी उदार"I
"जिकुड़ी डौरा कु धक धक धडकणी"II
......"खांदु पिंदु त, भेलउंध जानदु बल"I
"इले की बुना भयो, या कमर भी चस्कानि"II

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720


Rajendra Dhaila
May 8 at 9:13am
मातृ दिवस पर "माँ" को समर्पित एक कुमाउनी रचना "इजा तू भौत याद ऊँछै"---
खुशीक हो मौक, या हो दुख पीङ
मैं इकलै हूँ, या हो मैं दगै भीङ
इजा तू भौत याद ऊँछै।
रत्तै हो या ब्याल
या ऊणी जाणी नई पुराण साल
इजा तू भौत याद ऊँछै।
खुट में कान बुङन
या हातक चसकन
रूङिक घाम हो या हियूनक ठन
इजा तू भौत याद ऊँछै।
तू न्हाँतै मगर तेरि याद
तेरि बताई बात
त्यर दिखाई बाट
मैं दगङी छन
त्यर सिखाई सलीका
तेरि दी शिक्षा
मैं दगङी छन
यौ मैं दगङी रौल
जब तलक मैं रूंन ज्यूंन
तेरि बताई शिक्षा
मैं आपुण नानतिनन कैं लै दियून
मैं त्यर बताई बाट में
सदा हिटनै रूंन
और त्यर आशीरबादल
मैं सदा फलनै फुलनै रूंन
तू मेरि यादों में भै रौली भै रूंछै
इजा तू भौत याद ऊँछै।।राजेंद्र

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720


Mahendra Thakurathi
May 6 at 5:35pm
कतुक भला म्यर पहाड़, देवि द्यप्तों का थान।
याँकि हवा याँक पानी मिल्यो छ वरदान॥
जै-जै हिमाला म्यर कुमाऊँ देवभूमि जै-जै कैलाश!!
heart emoticon जय माँ चंडिका देवी, सबनहुँ दैण हये, रक्षा करिए...!!

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

गाँव के स्कूल मैं छुट्टियों के बाद स्कूल आने पर बच्चे की मन:स्थिति का वर्णन.........(मनोरंजन हेतु)
"(गढवाली) हास्यव्यंगात्मक कविता"
कन ठाठ अयां छा
ड्यार मां
कभी धुर्पला मा लम्लेट त
कभी छन्या गुठ्यार मां
पचास रुपया पोडिनि फ़ाइन जब बटि
तब बटि बुरा हाल हुयाँ छ्न
ब्वे कु पकडियों मुछ्यलु हाथ मा
बुबाजी चौकिदार बन्यां छ्न
लठ्या दींदनि अब त स्कूल
एक सौ चार का बुखार मां
कन ठाठ अयां छा
ड्यार मां
कभी चौका मा लम्लेट त
कभी छ्न्या गुठ्यार मां
घौर मां रंऊँ त
माँ बाब पिछ्ने पोड्यां छन
स्कूल मां जऊँ त
गुरूजी बाग बन्नयां छ्न्न
जिकुडि मा हुयिं
कन मेसी की घंग्तोल चा
इने जऊँ त ग़मदिरो
उने जऊँ त भ्योल चा
अब त सुपिन्यो मां हि सिर्फ
बोगठियों कु मैच देखनु रौन्दु
बखरा की लोत्गी समझि निन्दिमां
अपन्नु हि हाथ चपोंन्नु रौन्दु
भै बेन्ना भी हमारा अब त
जासूस बन्या छन
हाथ ध्वे के यू भि हमारा
पिछ्ने पोड्यां छ्न
स्कूल मां त बस चमडि हमारी
टक त बुराँसी की धार मां
कन ठाठ अयां छा
ड्यार मां
कभी डिन्डला मां लम्लेट त
कभी छन्या गुठ्यार मां
परीक्षा का दिन जन जन
नजदीक आना छ्न्न
बदल्यां सर्ग पर भी हमतें
गेणआ दिखेना छ्न्न
झूरि झूरि के अब त
स्कूल अयां छाँ
मारी बाँधी के तुमरा हम
मैमान बनायां छाँ
घौर मां क्वी
रोण नि देन्दु
रास्ता मां क्वी
छुप्नि नि देंदु
बोर्ड परीक्षा कु नौ लेकि
किले हम डरायां छाँ
लाटा काला जन भि छाँ
गुरूजी तुमारा ही पढायाँ छाँ
गुरूजी तुम्हारा ही पढायाँ छाँ !!!!