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Kumauni & Garhwali Poems by Various Poet-कुमाऊंनी-गढ़वाली कविताएं

Started by एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720, October 05, 2011, 12:00:34 AM

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720


Bhishma Kukreti
19 hrs
हूर ह्वेगे देरादूण (गढ़वाली कविता )
रचना -- निरंजन सुयाल ( जन्म 1963 , इडियाकोट , पौड़ी गढ़वाल )
Poetry by - Niranjan Suyal
( विभिन्न युग की गढ़वाली कविताएँ श्रृंखला )
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इंटरनेट प्रस्तुति और व्याख्या : भीष्म कुकरेती
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राज ह्वेगे देरादूण , काज ह्वेगे देरादूण
ब्याळी तैं यु डेरा छौ , आज ह्वेगे देरादूण।
देख ह्वेगे देरादूण, लेख ह्वेगे देरादूण
बारा का बरोबर , एक ह्वेगे देरादूण।
हूर ह्वेगे देरादूण, टूर ह्वेगे देरादूण
दिल्ली से बि जादसि , दूर ह्वेगे देरादूण।
हाम ह्वेगे देरादूण , लाम ह्वेगे देरादूण
डाम पड़े टीरी पर , जाम ह्वेगे देरादूण।
औळ ह्वेगे देरादूण , बौळ ह्वेगे देरादूण
देखि लम्बा चौडो छौ , गोळ ह्वेगे देरादूण।
सौत ह्वेगे देरादूण, मौत ह्वेगे देरादूण
हौर क्वी नि मिली क्य , भौत ह्वेगे देरादूण।
( साभार -- अंग्वाळ ,पृष्ठ 205)
Poetry Copyright@ Poet
Copyright @ Bhishma Kukreti interpretation if any

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

Bhishma Kukreti
May 30 at 1:14pm
कंडाळी लगाते छिटगा (गढ़वाली कविता )
रचना -- बी मोहन नेगी ( जन्म -1952, पुंडेरी ,पूर्वी मनयारस्यूं , पौड़ी गढ़वाल )
Poetry by - B. Mohan Negi
( विभिन्न युग की गढ़वाली कविताएँ श्रृंखला )
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इंटरनेट प्रस्तुति और व्याख्या : भीष्म कुकरेती
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छिटगा -१
हमरा अगनै घाम
पिछनै डाम छन भैजी
बिना दारु का नि चल्दू काम यख
हमरा अगनै बी भौत काम छन भैजी
छिटगा -२
हे पार्थ !
देख धौं
सूर्यास्त ह्वेगी
पहाड़ों पुरुषार्थ
कन मस्त ह्वेगी !
छिटगा -३
ब्याळि तैं मिन
पलायन पर
जो बड़ा बड़ा शोधग्रंथ ल्यखदा
अर सेमीनार करदा द्यखिन
आज वी मिन
पांच विश्वा जमीनी बान
कोटद्वार अर द्यारादूण
रिंगदा द्यखिन
( साभार --शैलवाणी , अंग्वाळ )

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

Mahendra Thakurathi

हिमालै का अल्का डाणा, नाँछि सीताहरि।
सम्ज ऊँछी एकै घड़ी, रूँछु दिनै भरि॥
धुरि रियाँज धुरी बाँज, धुरि पड़ साँस।
आरसी को डाबा जसो, मेरो सुवा काँछ॥
धुरा भैंसि क्या लै पालूँ, द्विपत्या कौलि लै।
मेरी इजु नै देखीनी, चौमासी हौलि लै॥ :)

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720


गुणनिधि जोशी
June 4 at 10:48am
कुमाऊँनी शायरी
डांसी ढुंग मेँ घुरी गया मैं, चौकोड़ी के गध्यार में।
परुलि तेरे प्यार मेँ, रड़ गये हम कच्यार में।।
दिल मैं अपना हार गया, परुलि तुझसे प्यार हुआ ।
तू भी अपना घर बना ले दिल के मेरे उड्यार मेँ ।
परुलि तेरे प्यार मेँ रड़ गये हम कच्यार मेँ ।।
तुझे देखकर अलजि गया, भली कै मैं पगलि गया।
तेरा रस्ता देख रहा हूँ बांजांणि के धार मेँ ।
परुलि तेरे प्यार मेँ रड़ गये हम कच्यार मेँ ।।
तेरे घर मेँ आया था, चांण पकौड़ी लाया था।
तेरे बोज्यू ने जांठ दिखाई, छिपना पड़ा भकार मेँ।।
परुलि तेरे प्यार मेँ रड़ गये हम कच्यार मेँ।।

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720


Darshan Singh
May 5
मौज हुईं छन
मौज हुईं छन मौज हुईं छन, नेतौं की यख मौज हुई छन।
जै थै देखो नेता बण्यां छन,
वोटर कू उ खोज करणा छन।।

वोटर कू अकाळ प्वड्ंयूच,
कख बटि मीलला गणवाणा छन।
अपणा बाना भयों भयों थै,
बखै बखै की लडवाणा छन।।

जौं कु यख कभि जलम नि ह्वाई,
आज तलक जू घार नि आई।
डांड गाड ऊ जै नी सकदा,
क्षेत्र विकास की बात करणा छन।।

ठुलठुला नेता जुगार लग्यां छन,
बुंगडा नेता जुगाड़ करणा छन।
मुलक की मुश्किल सब मिटि जाली,
म्यारु दगड रौ सब बुलणा छन।।

बुंगडा नेता भी कुछ कम नी छन,
एक छनीं मा दस मिलणा छन।
जौंल जमण्या कू गळ्या नि लांघू,
उ जापान कि बात करणा छन।।

ठुलठुला नेता बिवरि बण्यां छन,
बुंगडा नेता बिकण लग्यां छन।
रामनगर कु बैल पड़ाव जनु,
लैन लगै क खड़ा हुयां छन।।

ना क्वी रीति ना क्वी नीति,
मतलब अपणू सीदु कना छन।
सौ साठ पैल्या साल बीकि गैं,
बाकि बिकणा कू तैयार बैठ्यां छन।।

मौज हुईं छन मौज हुईं छन,
नेतौं की यख मौज हुईं छन।।
जमण्या -जगा कु नाम। जुगार -जुगाली
सर्वाधिकार सुरक्षित @:-
दर्शनसिंह रावत " पडखंडांई "
दिनांक :-05/05/2016

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

Dinesh Dhyani
May 18 at 10:18am
शक्तिमानों स्मारक
चला भल्लु ह्वे
शक्तिमानों स्मारक बणी गे
नेतों तैं उत्तराखंड म
यु सबसे बडु काम दिखे,
बाकि ता बल सब
पूरु ह्वेगे।
अब क्वी नि बोल्यां
हमारा नेता
दूरदृष्टि वळा नि छन,
देखि ल्यावा तौं न
२०१७ की बिसात बिछानी
अबि बिटि शुरू कैरी यालि।
वे राज्य म विकास, रोजगार
शिक्षा अर स्वास्थ्य कि
छ्वीं किलै कना ह्वाला
जै मुल्का का नेता ख्वाटा
सिक्कों जना बिकणा ह्वाला।
वोट बैंक देखि बिसात
बिछौना छन नेता
कुर्सी सलामत रावन
बस यनु जतन कना छन नेता। दिनेश ध्यानी। १८/५/१६

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720


Darshan Singh
April 30
बणौं मा आग
ऐंसु का साल म्यारु पाड़ फुके ग्याई।
चौछडि बणौं मा ऐंसु आग लगी ग्याई।।

ऐंसु का साल म्यारु पाड़ फुके ग्याई।
निरभगि कैल कनु आग लगै द्याई।।

बणौं मा डांगर पंछी भटगण ह्वाला।
आगि का पुटग वखी तडफण ह्वाला।।

बणौं मा वै हैरि डाळी कनि रूणि ह्वैली।
धरती डुंडरी मारी धै लगाणि ह्वैली।।

जल मा भी आग ह्वैली वायु मा भी आग।
कनुक्वै बचिलु तब त्वैन फ्वडी भाग।।

धरती की छाती जब धधकैणि रैली।
पाणी का सुरोत सभी वै सुखाणि रैली।।

जौं बणौं का डाळ्यूं छैल तू बैठणु रैई।
ऊं डाळ्यूं का जैड्युं आज आग लगै गेई।।

जल थैं ख्वजणु जगा जगा जाणु रैलू।
जख जख जैलु वख आग ई आग पैलू।।

अफु थैं बचाणू तू भी यख वख जैलू।
हवा पाणी का बान क्या तू आग खैलू?

जब जल अर वायु यख रूठि जाला।
सोचि लेदि त्यारा तब कना हाल ह्वाला।।

सोच सोच तू भी तब कनै कनै जैलू।
बेजुबान डाळ्यूं जनु धधकण रैलू।।

जरा काम इनु कैरी, धरती सजादी।
डाळ्यूं थैं लगादी अर बणौं थैं बचादी।।

ऐंसु का साल म्यारु पाड़ फुके ग्याई।
निरभगि कैल कनु आग लगै द्याई।।
सर्वाधिकार सुरक्षित @:-
दर्शनसिंह रावत "पडखंडाई"
दिनांक :-30/4/2016

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

Darshan Singh
April 18
निरभै दरोल्या
दुन्या छोडि की आज चली गे निरभै दरोल्या रै।
जब तक दुन्या मा छाई दरोल्या रैई घपरोल्या रै।

चल भलु ह्वैगे आज चली गे निरभै दरोल्या रै।
जब तक दुन्या मा छाई दरोल्या रैई घपरोल्या रै।

निरभै दरोल्या त्वैकु कतै भी शरम नि आई रै।
घटकांद घटकांद तेरि दरोल्या कनि मति मरी रै।।

जौं ब्वै बाबुल जलम त्वै द्याई उंथै धमकाणु रै।
नना तिन नौंना सैणि अपणि कनु चटकाणु रै।।

छै भै भैणा त्यारा दरोल्या यकुलु तू मतगुणु रै।
दारु नशा मा निरभै दरोल्या उंथै तू बिटमणु रै।।

ब्यो कारिज मा आंखा दरोल्या चाड़ तू लगणू रै।
पतळकु खाणु छोडि दरोल्या माटु तू बुखाणू रै।।

कुकर्या बरांड ग्वर्ख्या बरांड कनु कनु तू पीणू रै।
सिविल बटेक आर्मी वळों का खुटौं मा प्वडणू रै।

फुंगडी पटळि बेचि दरोल्या करज मा तू डुबणू रै
दारु पेकी भगवान दुन्या कु अफू थैं समझणु रै।।

द्वी सौकि बोतल निरभै दरोल्या सात मा ल्याणू रै
काकि बोडि्यूं का द्वार दरोल्या तू कनु भटकाणु रै।।

मवसी अपणि फूक दरोल्या तमशु तू द्यखणू रै।
भै बंधौं अर गौं कु नौं भि बदनाम तु करणू रै।।

जैं दारू का बान दरोल्या दिन-रात्यूं भटकणू रै।
पला मा पैंसा हाथ जोड़िकि भीख सि मंगणू रै।।

वीं दारू घतोलि दरोल्या लमसठ अब पोडि गै।
ननतिना सैंणी ब्वै बाब अपणा रूंदा यख छोडि गै।।

चल भलु ह्वैगे आज चली गे निरभै दरोल्या रै।
जब तक दुन्या मा छाई दरोल्या रैई घपरोल्या रै।
सर्वाधिकारसुरक्षित@:-
दर्शनसिंह रावत "पडखंडाई" दिनांक:-18/04/2016

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

म्यार गौं गुठ्यार मा
अब कुछ नी राई
ना त छांतु टाट पल
अर ना पाथु राई
बांजी कुडी हुंयी च
भीतरी डाली जमीं च
ताली लगीं भैर बटै
मौ दिल्ली जयीं च
अंणो गुरों की जंदर्युं पर
कन अंग्वाल भटीं च
चुलख्यंदों मा पुंछडी धरीं
सील्वटों मा सीयीं च
बारा नाजु की दबली बुये की
कन ट्वटकां हुयीं च
मेरी पाटी बुखल्या कुजंणी
कै क्वांण पडीं च
दीदी भूल्युं तै गंज्यली
उरख्यली धै लगांणी च
ताम की पींड की तौली
दुधाल गौडी खुज्यांणी च
म्यार गौं गुठ्यार मा
अब कुछ नी राई
ना त छांतु टाट पल
अर ना पाथु......
सर्वाधिकार सुरक्षित @लेख सुदेश भट्ट "दगडया"

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

खुद्यांणु छौं खुज्यांणु छौं
यैकी मी ये माटु मा
बचपन खत्युं म्यारु
दीदों ये माटु मा
दिख्यांणा नी छन गैल्या म्यार
बचपन क स्कूल्या
समलोंण खुज्यांणु छौं मी
धार गाड डाल्यूं मा
खुज्यांणु छौं गल्यों की दौंली
यैकी अपणी छान्युं मा
हल जूवा नीसुड गैल्यों
सब दब्यां छन माट मा
बुये की मेरी कुटी दाथी
जंक लगीं च धरीं पस्युंणों मा
छील्लु की बिठकी धरीं च
सुखांण चुलख्यांदों मा
भ्यूंल की डाली मा बैठीं
घुघती यखुली घुरांणी
भौल जांण ड्यूटी दगड्यों
जिकुडी झुर झुर झुरांणी
खुज्यांणु छौं खुद्यांणु छौं
यैकी मी ये माटु....
सर्वाधिकार सुरक्षित@सुदेश भट्ट दगड्या