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Kumauni & Garhwali Poems by Various Poet-कुमाऊंनी-गढ़वाली कविताएं

Started by एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720, October 05, 2011, 12:00:34 AM

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

Bhaukhandi Uttarakhandi added 8 new photos.
June 28 at 6:22pm ·
"जय मात्री भूमी, जय बद्री केदार"
कोदे की रोटी, ओर
कंडाली (सिसौंण) कु का साग
बाँजा की लकडी की घुरदी आग,
चौमासा की बरखा, ह्रयून्द की आग
मुंगरी कि चिलोदी(रोटी),
पिन्डालु (पाफड) कू साग
आषाड कि (रोपाई) रोपणी, भादो का घाम
सौण की बरखा, अशूजा कु काम
ह्रयून्द की मैना की लम्बी लम्बी रात
अहा कन च अपणा गौ-गुथियारौ की बात•••
"बल.......................................................सुभ ब्य्खुनी म्यारा सभी मित्रो"

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720


Bhaukhandi Uttarakhandi
June 23 at 4:39pm ·
"ना विका बान बोल्या बनुदु"
"ना फुलू मा गुलाब चुनुदु"
"कांडा ता लगना ही च तब'
"अब केफर बल ढुंगा की मरुदु"

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

उत्तराखंड म रगण-ब्वगंण हुयूं
मुंगरी भूखौणा छन नेता जी
जनता को ज्यूणो-म्वरनु हुयूं च
हैंसी उड़ोणा छन नेता जी।
2013 की आपदा पीड़ितों को
अज्यों तक सुध नि लेणा नेता जी
केदार पुरम तैं लीपी घुसि कि
अपणी जै-जैकार करवाणा नेता जी।
रस्ता टूट्या छन, सड़क टूटी छन
पुल नि बणनवाणा छन नेता जी
आपदा का नौ फर अपरा ल्वखों थैं
ठ्यका दिलोंणा छन नेता जी।
खेती न पाती, पुंगड़ी बांजी छन
सुध नि लेणा छन नेता जी
पाड़ वलों कु सैं न गुसै क्वी
सैर वालों तैं ब्यलमऔणा नेता जी।
कुर्सी बची रा, सत्ता चलणि रा
जतन कना छन नेता जी
बिसात बिछे कि जतन कना छन
नौट कमौणा छन नेता जी।
तौं का भ्वंआ से म्वार, भाज क्वी
फरक नि प्वडदू नेता जी
वोट बैंक पर कुर्सी बची रा
बाकी भाड़ जवा ब्वना नेता जी। . दिनेश ध्यानी। 5/7/16

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

Vishweshwar Prasad Silswal
June 26 at 4:42pm
"घुघुति"
पैली एक गीत लगुदु छये
"ना बास घुघुति चैत आ क़ी,
खुद लगीं मएँ मैयता क़ी" II
अब ता घुघुति ते भी पता लग्यआ कि मैत्म् क्वि छै ही नि छन ,त वा भी घुरूण भूली ग्यई

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

पहाड़ै जिंदगी---
.
आहा मेरि पहाड़ै जिंदगीकि पहाड़ जसि पीङ
कभै बादल फाटियो दर्द तो कभै बारिशै शीर,
आहा मेरि पहाड़ै......।
.
कभै शराबल निखाण दी कभै महंगाईक मार
म्यार मुलुक पाणिक तूफान ऐरौ,कतू करि हाली शिकार,
कभै भूकंपै हलचल कभै भूस्खलनै की चीर
आहा मेरि पहाड़ै......।
.
कतू नान् अनाथ हैगी,कतू घरोंक् चुल बुझिगो
कतू डङा-डाङ हैरै, सबों कें आपणनकि फिकर हैरै,
आब कस चला बिधाताल यो आपदा नामक तीर
आहा मेरि पहाड़ै......।
.
किलै दियो पातक् आब यतुक बौयाट हैगो
किलै म्यार पहाड़ में यतुक तौयाट हैगो,
स्वर्ग जसी भूमि छी मेरि,
किलै आज वांकी खबर सुणबेर,कलेजी ऊनै चीर
आहा मेरि पहाड़ै......।
.
जाँ घस्यारोंकि छम्म दातुलि बाजेंछि
और कैं दूर जंगोव में ग्वावोंकि मुरूलि बाजेंछि,
आज वी पहाड़ में कास् हाल हैरी
आपदा डरल् लोगोंकी बदई चाल हैरी,
कब थामेलि ? मेरि पहाड़कि यो न कई पीङ
आहा मेरि पहाड़ै......।
.
कसी नान्-नान् नानतिन इस्कूल पढाल्
कसी लोगबाग आपणि गुजर बसर कराल्,
सोची-सोची बेर कोठि में पङनै लकीर
आहा मेरि पहाड़ै......।
.
केदारनाथ भूमि जो विरान हैगै
पूजा स्थल छी कब्रिस्तान हैगै,
क्वे कुनई मनखी आपुंकें जादे हुश्यार समझना
प्रकृति दगङी खूब छेड़छाड़ करना
तबत यस हुना,
पैं को निकालल् म्यर पहाड़ कैं यो दुख बटी भ्यैर,
को होल् ऊ दियाप्त डांगरी या बाबा पीर
आहा मेरि पहाड़ै.......।
.
हे विधाता आब थामी दे तौ अङहोती कैं पहाड़ बटी
हात जोङी,कान पकङी विनती करनु तूहूँ यो तली भाबर बटी,
त्यरै रचाई संसार छ यो,त्यारै बणाई सब तस्वीर
आहा मेरि पहाड़ै जिंदगीकि पहाड़ जसि पीङ।
ओहो मेरि पहाड़ै जिंदगीकि पहाड़ जसि पीङ।।।
.
---राजेंद्र ढैला

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

Mahi Singh Mehta
July 4 at 12:16am ·
एक मार्मिक कविता उत्तराखण्ड के वर्तमान हालात पर। लेखक अज्ञात पर हकीकत उजागर की है इस कविता में लेखक ने।
"यूं बिगड़े हालात में,अबकी बरसात में
गाँव न आना बेटा,तू आके जज्बात में.
खेत खलिहान गए,पुरखों के मकान गए.
जिन्दा लोगों के साथ,युगों के श्मशान गए.
राजा भी रंक हो गए,पंछी बिन पंख हो गए.
विधाता ने लंगड़ी दी,धावक अपंग हो गए.
हम तो कुछ भी नहीं,सब ईश्वर के हाथ में.
यूं बिगड़े हालात में, अबकी बरसात में
गाँव न आना बेटा, तू आके जज़्बात में..
भूले नहीं वो तारीखें, हर ओर से थी चीखें,
मांग रहे थे ईश्वर से,लोग जिन्दगी की भीखें.
हम बच गए जैसे तैसे,मत पूछना मगर कैसे.
दुआ करते हैं कोई न देखे मौत का तांडव ऐसे.
आसमान चेता गया, रहो अपनी औकात में
यूं बिगड़े हालात में, अबकी बरसात में
गाँव न आना बेटा, तू आके जज्बात में.......................
यहाँ जिन्दगी गौण है,मौत जरा भी न मौन है.
सब खुसुर पुसुर कर रहे,बोलो जिम्मेदार कौन है.
देख लिया होगा मंजर,तूने बैठे घर के अन्दर.
हम न रह सके चैन से,ऐसा मचा था बवंडर.
पर अब आदत हो गई रे,डरते थे बहुत शुरुआत में.
यूं बिगड़े हालात में, अबकी बरसात में
गाँव न आना बेटा, तू आके जज्बात में..................
बुरे पल निकल जायेंगे, नए रंग में ढल जायेंगे.
तुम उम्मीद रखना,वक्त के संग हालात बदल जायेंगे.
दूर रहे, नजदीक रहे, बेटा तू सदा ठीक रहे.
दुःख हमारे हिस्से आयें,तू खुशियों में शरीक रहे.
चिट्ठी भेज रहे हैं तुझको लाखों दुआओं के साथ में.
यूं बिगड़े हालात में, अबकी बरसात में
गाँव न आना बेटा, तू आके जज़्बात में।।"

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

अब की बरसात में
बस अपने थे वो
जो सपने थे वो
देख ना पाये हम उन्हें साथ में
अब की बरसात में
क्या बात हुयी
ये भी ना जान पाये हम
अपनों के हाथों की अग्नि को भी
ना पार पाये हम
अब की बरसात में
क्या रात थी वो
क्या दिन था वो
ना जाने क्या वो बात थी
वो भी बोल ना पाये हम
अब की बरसात में
रोना ना ना कुछ खोना
जीवन तो एक सपन सलोना
उस सपन सलोने में
इस बार ना झूल पाये हम
अब की बरसात में
जागे हैं या सोये हम
हलचल हुयी सब खोये हम
अब ना हम मिल पाएंगे तुम से
इस अगली बरसात में
अब की बरसात में
बालकृष्ण डी ध्यानी
देवभूमि बद्री-केदारनाथ
मेरा ब्लोग्स
http://balkrishna-dhyani.blogspot.in/search/
http://www.merapahadforum.com/
में पूर्व प्रकाशित -सर्वाधिकार सुरक्षित

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

कुछ गढ़वाली मुहावरों का मजा आप भी लीजिये । किसी ने वाकई बहुत मेहनत की है।

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

-पहाड़ै जिंदगी---
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आहा मेरि पहाड़ै जिंदगीकि पहाड़ जसि पीङ
कभै बादल फाटियो दर्द तो कभै बारिशै शीर,
आहा मेरि पहाड़ै......।
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कभै शराबल निखाण दी कभै महंगाईक मार
म्यार मुलुक पाणिक तूफान ऐरौ,कतू करि हाली शिकार,
कभै भूकंपै हलचल कभै भूस्खलनै की चीर
आहा मेरि पहाड़ै......।
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कतू नान् अनाथ हैगी,कतू घरोंक् चुल बुझिगो
कतू डङा-डाङ हैरै, सबों कें आपणनकि फिकर हैरै,
आब कस चला बिधाताल यो आपदा नामक तीर
आहा मेरि पहाड़ै......।
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किलै दियो पातक् आब यतुक बौयाट हैगो
किलै म्यार पहाड़ में यतुक तौयाट हैगो,
स्वर्ग जसी भूमि छी मेरि,
किलै आज वांकी खबर सुणबेर,कलेजी ऊनै चीर
आहा मेरि पहाड़ै......।
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जाँ घस्यारोंकि छम्म दातुलि बाजेंछि
और कैं दूर जंगोव में ग्वावोंकि मुरूलि बाजेंछि,
आज वी पहाड़ में कास् हाल हैरी
आपदा डरल् लोगोंकी बदई चाल हैरी,
कब थामेलि ? मेरि पहाड़कि यो न कई पीङ
आहा मेरि पहाड़ै......।
.
कसी नान्-नान् नानतिन इस्कूल पढाल्
कसी लोगबाग आपणि गुजर बसर कराल्,
सोची-सोची बेर कोठि में पङनै लकीर
आहा मेरि पहाड़ै......।
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केदारनाथ भूमि जो विरान हैगै
पूजा स्थल छी कब्रिस्तान हैगै,
क्वे कुनई मनखी आपुंकें जादे हुश्यार समझना
प्रकृति दगङी खूब छेड़छाड़ करना
तबत यस हुना,
पैं को निकालल् म्यर पहाड़ कैं यो दुख बटी भ्यैर,
को होल् ऊ दियाप्त डांगरी या बाबा पीर
आहा मेरि पहाड़ै.......।
.
हे विधाता आब थामी दे तौ अङहोती कैं पहाड़ बटी
हात जोङी,कान पकङी विनती करनु तूहूँ यो तली भाबर बटी,
त्यरै रचाई संसार छ यो,त्यारै बणाई सब तस्वीर
आहा मेरि पहाड़ै जिंदगीकि पहाड़ जसि पीङ।
ओहो मेरि पहाड़ै जिंदगीकि पहाड़ जसि पीङ।।।
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---राजेंद्र ढैला---

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

नाव...
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चुनाव आने वाले हैं हिंदू मुस्लिम होगा
कुमाऊ गढवाल होगा
जात पात पंथ रिवाज होगा
गांव गांव पडोस भाई भतीजा वाद होगा
ठाकुर बामण बनिया शिल्पकार होगा
चुनाव आने वाले हैं दंगा फसाद लङाई झगड़ा होगा
सुर शराब बात खराब कीचड़ उछालना
बात बिगाङना चप्पल गोबर फेंकना होगा
चुनाव आने वाले हैं फेसबुक व्हटस ऐप में भी तना तनी होगी
बचके रहना रे बाबा चुनाव आने वाले हैं।।---