• Welcome to MeraPahad Community Of Uttarakhand Lovers.
 

Kumauni & Garhwali Poems by Various Poet-कुमाऊंनी-गढ़वाली कविताएं

Started by एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720, October 05, 2011, 12:00:34 AM

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720


Khyali Ram Joshi

मील जिंदगी में हमेसा जितणक सौक धराखछी
पर दोस्तो तुमु हैंबै हारणकि लै क्वे मजबूरी छी
शरत हौंछी तो सबकुछ बेचिबेर लै जिति लिछि
पर तुमार जितणाक लिजि म्यर हारण जरुरी छी

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720


Khyali Ram Joshi
November 22 at 2:18pm ·
भुलियन न्हें पहाड़,चाहे पंजाब ऐबेर बसि गोयों
सार दिन सोचनें रौनुं, य कां ऐबेर फसि गोयों

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720


Khyali Ram Joshi
November 20 at 1:33pm ·
दोस्ती लागौणक लै एक अंताज हों,क्वे खिलि जां क्वे मुरझै जां
क्वे फूलों दगाड़ लै हसीं नि सकन, क्वे कानों दगाड़ लै निभै जां

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720


Khyali Ram Joshi
November 12 at 12:17pm ·
हैं आरती, बाजनी शंख, पूजा में सब माती रौनी
मन्दिरक भ्यार देखो भुख नानतिन सिती रौनी
एक गास यनुं कें लै दिदिया प्रसाद मीकेँ चढ़ जाल
मिहैं मागणी वालो बिन मांगिये तुमु कें मिलजाल

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720


Khyali Ram Joshi
November 6 at 11:12am ·
तुमरि ख़ुशी है ठुलि म्यार लिजि और क्वे सुख न्हें
मिलनैं रओ प्यार तुमर और के चीजकि भुख न्हें

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720


Prakash Chander Tiwari with Khyali Ram Joshi.

November 6 at 10:35am ·

बखत छू बखतैकि तेज चाल छू, जो नि हिटणय वी गुनाहगार छू।
बखत कें काटण क्वे मजाक न्हें, बखत तो आफी एक तलवार छू॥

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720


Prakash Chander Tiwari with Khyali Ram Joshi.
November 6 at 10:33am ·
खुद हसणकि आदत पाड़ो, यां रोऊणीयांकि के कमी न्हें
माथि उठणकि आदत पाड़ो,टाग खैचणीयांकि के कमी न्हें

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720


Khyali Ram Joshi
November 3 at 10:01am ·
खुद हसणकि आदत पाड़ो, यां रोऊणीयांकि के कमी न्हें
माथि उठणकि आदत पाड़ो,टाग खैचणीयांकि के कमी न्हें

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

चन्द्र सिंह राही थे नमन
जर ठंडु चला द्या जरा मठु चला दी
जर ठंडु चला द्या जरा मठु चला दी
जर ठंडु चला द्या जरा मठु चला दी
मेरी चदरी छूटगे पिछने जरा मठु चला दी
मेरी चदरी छूटगे पिछने जरा मठु चला दी
कोरस : जर ठंडु चला द्या जरा मठु चला दी
मेरी चदरी छूटगे पिछने जरा मठु चला दी
मेरी चदरी छूटगे पिछने जरा मठु चला दी
खणो छ पपीता हो खणो छ पपीता
खणो छ पपीता हो खणो छ पपीता
पिछने छूटगे दगड्या साड़ी कू लपेटा
हाँ पिछने छूटगे दगड्या साड़ी कू लपेटा
जर ठंडु चला द्या जरा मठु चला दी
जर ठंडु चला द्या जरा मठु चला दी
मेरी चदरी छूटगे पिछने जरा मठु चला दी
कोरस: मेरी चदरी छूटगे पिछने जरा मठु चला जी
मेरी चदरी छूटगे पिछने जरा मठु चला जी
मि बिमार छों नगिना लि जादी
मि बिमार छों नगिना लि जादी
अर नगिना हॉस्पिटल मा एक्सरे करा दि
अ हाँ नगिना हॉस्पिटल मा एक्सरे करा दि
जर ठंडु चला दी जरा मठु चला दी
जर ठंडु चला द्या जरा मठु चला दी
मेरी चदरी छूटगे पिछने जरा मठु चला दी
कोरस: मेरी चदरी छूटगे पिछने जरा मठु चला दी
मेरी चदरी छूटगे पिछने जरा मठु चला दी
मेरी खून सुखी ग्याई बंबई ले जादी
मेरी खून सुखी ग्याई बंबई ले जादी
अरे अप्डी बंबई ले जैकी नाच कैरे दि
हाँ अप्डी बंबई ले जैकी नाच कैरे दि
जर ठंडु चला द्या जरा मठु चला दी
जर ठंडु चला द्या जरा मठु चला दी
मेरी चदरी छूटगे पिछने जरा मठु चला दी
कोरस: मेरी चदरी छूटगे पिछने जरा मठु चला दी
मेरी चदरी छूटगे पिछने जरा मठु चला दी
कलसरी आंख्युं को काजल मंगे दया
कलसरी आंख्युं को काजल मंगे दया
अरे गोरी मुखडी को पावडर मंगे दया
सच गोरी मुखडी को पावडर मंगे दया
जर ठंडु चला दी जरा मठु चला दी
जर ठंडु चला द्या जरा मठु चला दी
मेरी चदरी छूटगे पिछने जरा मठु चला दी
कोरस: मेरी चदरी छूटगे पिछने जरा मठु चला दी
मेरी चदरी छूटगे पिछने जरा मठु चला दी
जर ठंडु चला द्या जरा मठु चला दी
जर ठंडु चला द्या जरा मठु चला दी
मेरी चदरी छूटगे पिछने जरा मठु चला दी
मेरी चदरी छूटगे पिछने जरा मठु चला दी
कोरस: मेरी चदरी छूटगे पिछने जरा मठु चला दी
मेरी चदरी छूटगे पिछने जरा मठु चला दी
री चदरी छूटगे पिछने जरा मठु चला दी
री चदरी छूटगे पिछने जरा मठु चला दी
री चदरी छूटगे पिछने जरा मठु चला दी
चन्द्र सिंह राही जी थे नमन
जर ठंडु चला द्या जरा मठु चला दी
उत्तराखंडी भाषा को बढ़वा देने के लिये
उत्तराखंड मनोरंजन
बालकृष्ण डी ध्यानी
-देवभूमि बद्री-केदारनाथ
अब भोळ भेंट हुली जी

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

ऐ बी जा
(ऐ बी जा ऐ बी जा ऐ गैल्या ऐ बी जा - २
सैर थे कैर अलबिदा अपरो पहाड़े मा ऐ बी जा ) -२
ऐ बी जा ऐ बी जा ऐ गैल्या ऐ बी जा
कद्ग समझैई ते थे ना कैर इन सिकैसेरी
ना ऐ लोको बोल्यूं मा बात मेरी तू समझी जैई
ये मेरो तेरो पहाड़ ये ढुंगों गारों को संसार छोड़ी ना जैई
सैर थे कैर अलबिदा अपरो पहाड़े मा ऐ बी जा
ऐ बी जा ऐ बी जा ऐ गैल्या ऐ बी जा - २
जों बी लूंण रोटा खोंला मिलिकी ही हम खोंला
रूखा सुखा खैकी हैंसी रुवैकि दगडी यख दिस बिंतोला
अब त बात मेरी मानले ऐ गैल्या मेरा हाक सुणी ले
सैर थे कैर अलबिदा अपरो पहाड़े मा ऐ बी जा
ऐ बी जा ऐ बी जा ऐ गैल्या ऐ बी जा - २
बालकृष्ण डी ध्यानी
देवभूमि बद्री-केदारनाथ
मेरा ब्लोग्स
http://balkrishna-dhyani.blogspot.in/search/
http://www.merapahadforum.com/
में पूर्व प्रकाशित -सर्वाधिकार