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Kumauni & Garhwali Poems by Various Poet-कुमाऊंनी-गढ़वाली कविताएं

Started by एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720, October 05, 2011, 12:00:34 AM

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

जखि म्यारा स्वामी वखि मि जी
जखि म्यारा स्वामी वखि मि जी
देश हो या हो अब भैरदेशा जी
जखि म्यारा स्वामी वखि मि जी
लुन रोटी अब मिल नि खाणु जी
बर्गर पिज्जा जब म्यारा स्वामी लाणु जी
जखि म्यारा स्वामी वखि मि जी
रामी नि बनने ना मीथै बहूरानी जी
पैल टिकिट कटै जब स्वामी मुंबई दिखाणु जी
जखि म्यारा स्वामी वखि मि जी
ये उकाला का बाटा अब व्हैजा टाटा
दोई मैन की छुट्टी मा स्वामी स्विजरलैंड घुमाणु जी
जखि म्यारा स्वामी वखि मि जी
हीटे हीटे ये पहाड़ किले अब कमरी पटणु जी
हवाई जहाज मा जब म्यारा स्वामी मि थे उढणु जी
जखि म्यारा स्वामी वखि मि जी
बालकृष्ण डी ध्यानी
देवभूमि बद्री-केदारनाथ
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में पूर्व प्रकाशित -सर्वाधिकार

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

आज की बात कुछ और्री च
आज की बात कुछ और्री च
तुमरो साथ कुछ और्र च
तुम बोल्दिना, मुख खोल्दिना
ये मुलकात कुछ और्र च
आज की बात कुछ और्री च
बैठी रयां दगडी म्यारा तुम
तुमरो पियार कुछ और्र च
आज की बात कुछ और्री च
बिंग नि सकदु बोल नि सकदु
ये जीयु की बात कुछ और्र च
आज की बात कुछ और्री च
ढुंगा गारों को मेरो संसार
मयाल्दु मेरु पहाड़ कुछ और्र च
आज की बात कुछ और्री च
आज की बात कुछ और्री च
तुमरो साथ कुछ और्र च
बालकृष्ण डी ध्यानी
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मुल्क बणाई
कैका बणा मुल्क बणाई कै बणा
छोड़िकि जाणा छन किलै सब भाई कै बणा
कैका बणा गोली मिल यख खाई कै बणा
तेरा आंख्युं ल बल आंसूं चुलैई कै बणा
कैका बणा मेरो रौंतेलों मुल्का कै बणा
अप्रि ब्यथा वैल खुद किलै लगैई कै बणा
कैका बणा मिन भाणा बनेई कै बणा
कैथे सुणाण मिल यकुली हे राई कै बणा
बालकृष्ण डी ध्यानी
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तुम थे देखि
तुम थे देखि त ये बिचार ऐई
जिंदगी घाम , तुम घणेर सौली
आच फिर जियु नि एक आस बंधी
आच जियु थे फिर हमुन समझेई
तुम जबै हर्ची जला तब सोचला
हमुल कया खोई कया पाई
.
हम जैथे गुनगुना नि सक्दा
बगता न इन गीत किलै गाई
बालकृष्ण डी ध्यानी
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एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

किलै बोला ना सकी ना
ते बिन मेरो जी रैं ना सकी ना
माया बिना एक दिस बी मि रैं ना सकी ना
पियार मा क्या आखर हूंद बोला ना सकी ना
यूँ आँखी की भसा बी मि पैड़ ना सकी ना
ते बिन मेरो जी रैं ना सकी ना
मि तै पियार करदु मि तै पर मरदु किलै बोला ना सकी ना
ते बिन मेरो जी रैं ना सकी ना
माया बिना एक दिस बी मि रैं ना सकी ना ......
हाथ मा फूल लेकि मि विन्थे दे ना सकी ना
तिना आखर पियार विन्से किलै बोला ना सकी ना
आंदा जांदा बाटा बैठी विंकी कि मि अड़ै ना सकी ना
मेरो जीकोडी की कथा किलै विं मि सुनै ना सकी ना
ते बिन मेरो जी रैं ना सकी ना
मि तै पियार करदु मि तै पर मरदु किलै बोला ना सकी ना
ते बिन मेरो जी रैं ना सकी ना
माया बिना एक दिस बी मि रैं ना सकी ना ......
मेरो जियो की धक धक विं किलै धके सकी ना
दूर बैठी मेरो ये हाल पास ऐकि विं थे बथे सकी ना
कन खलबलहट मच्यु च यु कैल बिंगै सकी ना
बोगी गै सुर पाणी आँखा कू कैल यख मैटी सकी ना
मि तै पियार करदु मि तै पर मरदु किलै बोला ना सकी ना
ते बिन मेरो जी रैं ना सकी ना
माया बिना एक दिस बी मि रैं ना सकी ना ......
बालकृष्ण डी ध्यानी
देवभूमि बद्री-केदारनाथ
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एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

कैल जादू कै हुली
कैल जादू कै हुली
ऐ ब्योलि कैल सजै हुली
नखर्याली नाक की ये नथुली
सोना मा कैल गढ़े हुली
कैल जादू कै हुली ..................
पसरयाली बिखर्याली ये
ल्जयाली लोक्यंली धोप्यली ये
ये गैणा ढुंगा और्री गारे का
कैल इन टिप टिप्या हुला
कैल जादू कै हुली ..................
अन्ख्युं को ऊ मेरो रगरयाट
जीकोडी को मेरो ऊ झकझायट
ये मेरो भूमि को रे भूम्याला
ये जगमग- २ रे बोग्यला
कैल जादू कै हुली ..................
बालकृष्ण डी ध्यानी
देवभूमि बद्री-केदारनाथ
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एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

Khyali Ram Joshi
November 29 at 10:07am
मील जिंदगी में हमेसा जितणक सौक धराखछी
पर दोस्तो तुमु हैंबै हारणकि लै क्वे मजबूरी छी
शरत हौंछी तो सबकुछ बेचिबेर लै जिति लिछि
पर तुमार जितणाक लिजि म्यर हारण जरुरी छी

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

Khyali Ram Joshi
November 22 at 2:18pm ·
भुलियन न्हें पहाड़,चाहे पंजाब ऐबेर बसि गोयों
सार दिन सोचनें रौनुं, य कां ऐबेर फसि गोयों

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

Khyali Ram Joshi
November 17 at 8:31pm ·

रंग झन बदइ लिया दोस्तो, कें दुनियाक रंग देखि बेर
हाथ झन खैंचि लिया दोस्तो, हाथ म्यर तंग देखि बेर

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720


Khyali Ram Joshi
November 20 at 1:33pm ·

दोस्ती लागौणक लै एक अंताज हों,क्वे खिलि जां क्वे मुरझै जां
क्वे फूलों दगाड़ लै हसीं नि सकन, क्वे कानों दगाड़ लै निभै जां