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Kumauni & Garhwali Poems by Various Poet-कुमाऊंनी-गढ़वाली कविताएं

Started by एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720, October 05, 2011, 12:00:34 AM

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

कीडू कि ब्वै ( स्व कन्हैयालाल डंडरियाल की असलियतवादी कविता )
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रचना -- स्वर्गीय कन्हैयालाल डंडरियाल ( जन्म - 1933 , नैली , मवाळस्यूं , पौड़ी गढ़वाल )
Poetry by - Kanhaiyalal Dandriyal
( विभिन्न युग की गढ़वाली कविताएँ श्रृंखला )
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इंटरनेट प्रस्तुति और व्याख्या - भीष्म कुकरेती
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पोरु का साल /ये बसग्याळ/ आजै ब्याळि ,
रकर्याणी छै /ह्यरान्द कीडू कि ब्वै।
भूख अर नांग /मळसा कि मांग ,
काळो कुयेडी /तींदी गतूड़ी /भिजीं /रुझीं
कुछ बरखल /कुछ आँसुल
आंदि छै फजलै ब्यखुनि ह्यरां द कीडू कि ब्वै
घुरप्वळी पंद्यरि पांड /क्वलणो छवाया
उबर कमळी कत्तर /पट तिखंडा भितर
यखुल्या यखुली /बयाणी रैन्दि छै / ह्यरां द कीडू कि ब्वै
डोर्यों कि भिंजकी /भांडों का खपटण
ढकीण डिसाणा अंदड़ा /द्वी चार झुल्ली की ल्वतगी
अर भितर फुंड /बक्कि बातै /हडगौं थुपड़ि
ह्यरां द कीडू कि ब्वै / उनि झंड /उनि तींदो खैड़ /चस्स ऐड़ो /टुट्यूं दैड़ो
एक कूणी पर /जड्डल खुकटाणी
रुणि रैन्दि छै/ ह्यरां द कीडू कि ब्वै।
पोस्टमैन भैजिम /यकनात कै चलि जान्दि छै
आंदो जान्दो मु पुछदि छै
लुखु करौंक देखीइ /प्राण सस्यांदि छै
ह्यरां ! कबि म्यारु बि ब्वारि ल्हेकी /खुचलि पर एकाध
इनि गैणा-गांठा गठ्याणी छै /ह्यरां द कीडू कि ब्वै
दिल्ली का बीच /कीडू बड़ो आदिम चा
ब्वारी बि चीज प्वडीं च /निपल्टु समझा
लोक ब्वदीं /मिल बि सूण /गगळान्दि बाच /कीडू .... कीड़ ...
धै लगांद /वै खंद्वार
बिचरी भलि अदमेण छै /ह्यरां द कीडू कि ब्वै।
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( साभार --शैलवाणी , अंग्वाळ )
Poetry Copyright@ Poet
Copyright @ Bhishma Kukreti interpretation if any

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

चल बेटा घर
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रचना -- शिवानंद पाण्डेय 'प्रेमेश, ( जन्म - 1933 , ग्राम -तोरणु , खास पट्टी , टिहरी ग )
Poem by - Shivanand Pandey 'Premesh '
( विभिन्न युग की गढ़वाली कविताएँ श्रृंखला )
(Modern Garhwali Folk Songs, Poems Series )
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इंटरनेट प्रस्तुति और व्याख्या - भीष्म कुकरेती
-
चल बेटा घर मेरी मांमु जौला
चरणु मा वींका सर झुकौला
सर झुकैक आशीष पाउला
छाती की छाया मा तब वींकी रौला।
त्वे माँमु छोड़िक परदेश औलू
दिन रात तेरी याद मा रौलू
.......
तेरी माँकी आंख्यों मा जब आंसू आला
रोई रोइक वींका कंठ सूखी जाला
थुनमुन थुनमुन तू वींम जैक
तू वींकी आंख्यौं आंगुळी लगैक
भैर की और हाथां दिखैक
बाबा जी आला अब चिजी लेक
ना लो मम्मी ना लो मम्मी तू आन्छु लैक
मी तै भिटै दी तू छाती लैक
-
( साभार --शैलवाणी , अंग्वाळ )
Copyright @ Bhishma Kukreti interpretation if any

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

एक गाँव का आत्म कथन
____________________
आहा !भोर होगयी
और रवि की किरणों के चूमने से
होने लगा हूँ ऊष्मासित मैं
और मेरे जागते ही जागने लगे हैं -
बाँज बुराँस के बण /गाँव पार का गदेरा
गों की कोदयाड़ि /स्ट्याड़ि सार
गों मूडी का धारा /गों ऐंच का बाटा
पनघट और ऊखल भी
सब तो है मेरे पास
तुम्हारी विरासत संरक्षित
नहीं है तो बस -
पनघट की गोरी
दिलवरि हळ्या
अट्ठारह घण्टे अपनी कीली पर घूमती गुस्याण
पर मैं उतना दुखी भी नहीं हूँ जितना तुम यहाँ से भागते ही
पलायन पलायन चिल्लल्लाने लगते हो *
नगरों महानगरों कस्बों बाजारों में बैठ कर
क्यों पलायन पलायन चिल्लाते हो ???
क्या कर लोगे यहां आकर
न तुम अब खेत जोत पाओगे और न तुम्हारे बेटे हल पहचान पाएंगे
फिर खाओगे क्या ? हाँ ! चाय और दारु की दूकान जरूर चलाओगे
अरे छोड़ो ये पलायन पर भाषण देने का फैशन और
कभी कभी अपनी यादें ताजा करने आया करो यहां ।
और आया करो ं अपने बच्चों के लिए नए अनुभव बटोरने और पुराने सम्बन्ध सहेजने ,
गाँव जानने ,पहचानने ,समझने ,बूझने के लिए
ताकि मैं भी सुन सकूं उन्हें बतियाते हुए
उन्हें बात करते हुए ups की /माउस की /विंडोज की
एप्पल 6 s /ई बुक /गीगा /मेगा/नैनो /कार नहीं नैनो टेक्नालॉजी की हा !हा !हा !क्यों ?
मुझे इस बात से भी ख़ुशी मिलती है कि -
दिल्ली ,मुम्बई ,दुबई की सड़कों पर दौड़ते हुए भी तुम
गीत तो नरेंद्र सिंह नेगी के ही सुनते हो
और मैं खुश होता हूँ ये देख कर भी
कि - फाँस खाने वाली ,गाड पड़ने वाली
मेरी कई बहू बेटियाँ
फर्राटे भरने लगी हैं अपनी -अपनी कारों में
कि -दिलबरी हल्या का बेटा आज डी .एम् . बन कर
बाप की उन कही अनकही पीड़ाओं को
मिटाने की कोशिस कर रहा है
कि - रो - रो कर बेसुरे बेसुध गू - मूत में लिपटे मेरे बच्चे
भी आज देसियों के बच्चों की बराबरी कर की बोर्ड से लगे हैं खेलने
और तो और अरे !जिस बाप को अपने अपने बचपन में ही
पहाड़ से आयात किया जाता था होटल में भांडे बर्तन माँजने के लिए
सुना है आज उसने उन्हीं को नौकर रख लिया है अपने यहाँ
हा हा हा हा हा हा हा मैं खुश हूँ
B positive yaar
तुम्हारे इन्तजार में
पर्वतों की गोद में बसा मैं हूँ
@ तुम्हारा गाँव @
(उमा भट्ट)

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

क्द्गा सौली दगडी ऊ अप्डी छुईं बोल देन्दु
क्द्गा सौली दगडी ऊ अप्डी छुईं बोल देन्दु
नानू सो छोरो अप्डू जियू की कथा कन लगे देन्दु
बल इत्गा सी सीख हमरा समझ मा नि राई
नानू सो छोरो हम से बी अब काद्गा बड़ो व्हैग्याई
सुप्निया वैका बल जी बस वैक्या ही छ्या राई
एक बात मा झट रुसै दूजे मा ऊ झट मनेगे भाई
कन हुँदो बालपन को यु जियू बिसरी जांदा अब सब
किले कि ऊ बाटा ज्वानि मा दगडी हीटे की नि आंदा
सब थे पता चल जांदी वैकि मंजिल ऊ क्या च
परी नानू जियू थे फ़िक्र कैकि ऊ त उड़ दू रैंदु सदा
बालकृष्ण डी ध्यानी
देवभूमि बद्री-केदारनाथ
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एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

कैल जादू कै हुली
कैल जादू कै हुली
ऐ ब्योलि कैल सजै हुली
नखर्याली नाक की ये नथुली
सोना मा कैल गढ़े हुली
कैल जादू कै हुली ..................
पसरयाली बिखर्याली ये
ल्जयाली लोक्यंली धोप्यली ये
ये गैणा ढुंगा और्री गारे का
कैल इन टिप टिप्या हुला
कैल जादू कै हुली ..................
अन्ख्युं को ऊ मेरो रगरयाट
जीकोडी को मेरो ऊ झकझायट
ये मेरो भूमि को रे भूम्याला
ये जगमग- २ रे बोग्यला
कैल जादू कै हुली ..................
बालकृष्ण डी ध्यानी
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एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

Dinesh Bijalwan shared Adrian Bain's photo.
22 hrs ·
बोत्ल्यो माँ बंद बळ बारुनी की बेटी ,
गिलासू माँ दगडयो बळ ढलकणी होली,
हुस्की हो या रम बळ, बोतल्या बम बळ,
द्वी घूंट भित्तर, हे मनखी बणदो तितर
हे ...........
बोरबोल हुस्की जाग
कोर्न हुस्की जाग
माल्ट हुस्की जाग,
व्हीट हुस्की जाग, स्वीट हुस्की जाग
लडबडी हुस्की जाग दडबड़ी हुस्की जाग
ठुस्का ठुसकी जाग , उसका उसकी जाग,
क्ल्बू माँ स्कॉच जाग ,
आम आदमी की वाच जाग
छानयो मा कच्ची जाग,
झूटी नि सच्ची जाग ,
बोतल नि ता –
बोतल की बच्ची (मिनिएचर) जाग
सर्वहारा वोट्का जाग,
बुर्जुआ सिवास रीगल जाग
मार्क्स अर हीगल जाग,
अमीरों को लक जाग, गरीबो की टक जाग,
जब बर्मंड बैठो किटाणु, दि्युर हो के जिठाणु
फिर हो अपनों ही बैख रे , लैक हो या नालैक रे .
सबबी हवे जान्दीन
मस्त रे .. हो चाहे सुर्ज अस्त रे ...
प्रिय डाक्टर पुरोहित जी को सप्रेम .

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

क्द्गा सौली दगडी
क्द्गा सौली दगडी
वि अप्डी कथा लगे देंदी
नानू सु जियू मेरो
कैकि बी छूईयों मा झट ऐजांदू
क्द्गा सौली दगडी ......
बल इत्गा ई सीख मिल
बल इत्गा मिथे समझ मा आई
फिर बी विंकी मुखडी
मेरा सुप्निया मा किलै की ऐ जांदी
क्द्गा सौली दगडी ......
झट रुसै झट मने मि जांदू
चट विंकी बगलि मा जा की बैस बी जांदू
फिर बी बालपण परित वा किले बिसरी जांद
ज्वानि का बाटा मा वा किले हीटे नि आंदु
क्द्गा सौली दगडी ......
सब थे पता चल जांदी
वींकी ठौर कख और्री क्या च
परी नानू जियू सी जियू मेरो
फ़िक्र कैकि तू इनि उड़दी रैंदु
क्द्गा सौली दगडी ...... २
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कैल जादू कै हुली
कैल जादू कै हुली
ऐ ब्योलि कैल सजै हुली
नखर्याली नाक की ये नथुली
सोना मा कैल गढ़े हुली
कैल जादू कै हुली ..................
पसरयाली बिखर्याली ये
ल्जयाली लोक्यंली धोप्यली ये
ये गैणा ढुंगा और्री गारे का
कैल इन टिप टिप्या हुला
कैल जादू कै हुली ..................
अन्ख्युं को ऊ मेरो रगरयाट
जीकोडी को मेरो ऊ झकझायट
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एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

मेरो मेरो नि रैगे
मेरो मेरो नि रैगे
अब कुच बी यख मेरो
अरे ये कैल पैल ब्वाली हुली
हट चल छड़ वैथे फुंड सैरु
मेरो मेरो नि रैगे ......
हिट हिट दी हिटदा रैगयुं
अब मि बणीग्युं रे छेडू
कैल हिट वै बाटा मा पैल
खोजी थे दा वै थे मेर पास लिव
मेरो मेरो नि रैगे ......
इन चढ़ी च ये दारू में पै
घर बार -बोई बच्चा सा भुल्यो
कैल बनै व्हैली कैल पैल पि व्हैले
वै थे पैल मेर समण कैरू
मेरो मेरो नि रैगे ......
अरे कुछ नि हुलु
अब सब यख झांजी छन पोड्यां
कै कु गत मोरी हुली कैल पैल ये बात
अपरी खत्याँ मुख बोलि वैथे ना छोडो
मेरो मेरो नि रैगे ......
बालकृष्ण डी ध्यानी
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मेर मन दशा
कैल नि जाणि
कैल नि बिंगी मि थे
मेर बात मै मा ही राई
ऊ में भ्तेक कैमा नि ग्याई
ना कैर घै मेर बोई
मेर बात मै मा ही राई .... २
बोल्दु नि आन्दु मिथे
नि आन्दु मिथे रे बचाणु
जिभ मेरी लप-लपेटी सी
कैथे जी मि छों समझाणु
ना कैर चिंता मेर बोई
मेर बात मै मा ही राई .... २
मेरो दोष कते नि छे
देब्तों ना बाळपणा भ्तेक दी छे
अब तक बी मि छों लबड़लणु
अपरी से अप छों अब घबराणु
ना धैर ध्यान मेर बोई
मेर बात मै मा ही राई .... २
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