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Superstition In Uttarakhand Culture - उत्तराखंड के समाज मे फैले अंधविश्वास

Started by एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720, July 03, 2008, 03:54:23 PM

हेम पन्त

घर के अन्दर मुंह से सीटी बजाना अच्छा नहीं माना जाता है, कहा जाता है कि ऐसा करने से घर के अन्दर सांप या कोई अन्य विषैला कीड़ा आ सकता है..

इसी तरह हाथ-पैर के नाखून घर के अन्दर काटना वर्जित है, ऐसा करने से घर में बाघ गुस सकता है..

मेरी समझ के अनुसार ये सभी मान्यताएं/ अन्धविश्वास छोटे बच्चों को अच्छी आदतें सीखाने के लिये गढी गईं हैं..

हेम पन्त

हमारे इलाके में 'काला महीना' मनाने का अजीब सा रिवाज है- शादी के बाद आने वाले पहले चैत्र मास में पत्नी व पति को अलग रखा जाता है,  (लड़की मायके या किसी अन्य परिजन के घर चली जाती है).  इस रिवाज का कोई ठोस कारण मुझे पता नहीं लेकिन लगता है कि ऐसा लड़की को अपने मायके वालों के साथ रहने का मौका देने के लिये किया जाता होगा.

Rajen

गाँव में बड़े बूढ़े ये भी सिखाते हैं:

कहीं जा रहे हैं तो "अच्छा जाते हैं" मत कहो ये कहो "अच्छा फिर आते हैं"|

Rajen

अगर आप रिश्तेदारी में गए हैं, या रिश्तेदार आपके घर आया है तो नवें दिन वापसी नहीं करना. 
(कहते हैं नवां माने न-आना) अर्थात अनिष्ट की आशंका ????

Rajen

किसी का काम बिगाड़ना हो तो उसके घर से निकलते समय या तो खाली बर्तन दिखा दो या छींक दो.  ???? :-[

Rajen

दही खाके घर से शुभ काम के लिए निकालो, कार्य पूरण होगा.????

Rajen

 किसी से ये पूछ कर देखना जरा "चाचा कहाँ जा रहे हो"? >:(  >:(
ऐसे पूछो चाचा कितनी दूर तक? 8)

Rajen

ऐसे कितने ही अंध-बिस्वास हैं जो गाँव में रोजमर्रा की जिन्दगी का हिस्सा बन गए हैं.

Rajen

लोग ऐसे अंध-बिस्वास को पूरी तरह अंगीकार कर चुके हैं .

पंकज सिंह महर

Quote from: Rajen on March 30, 2010, 03:34:07 PM
गाँव में बड़े बूढ़े ये भी सिखाते हैं:

कहीं जा रहे हैं तो "अच्छा जाते हैं" मत कहो ये कहो "अच्छा फिर आते हैं"|

ऐसा भी कहा जाता है, चलते समय कि बैठो फिर हां। (भैटो फिर हां, फिर ऊंला)