• Welcome to MeraPahad Community Of Uttarakhand Lovers.
 

उत्तराखंड पर कवितायें : POEMS ON UTTARAKHAND ~!!!

Started by Dinesh Bijalwan, August 05, 2008, 02:18:42 PM

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

कविता उत्तराखंड की बालकृष्ण डी ध्यानी
September 15
देख्णु कया

देख्णु कया च
कया मीथै देके ग्याई
ऐ मेरी गीची
तू किले गप राई

अंडू अंडू बोल्यूं मि
मि किले फुंड ग्याई
ग्यानी ध्यानी मेरी
सब निखण व्हाई

कन बांजा पौड़ी
अक्लि सक्ली मा मेरी
ज़माना कु खुटु दगडी
किले मिल सिक्सरी काई

हरच्यूं छों यख
मि पुरता बिरडी ग्युं
कै बाटा ऐना घार
मि दीदों भूली गयुं

नि रैगै सैर
ये अब मेरा बाना
कै भाना ऐन मुल्क
ऐ मुख सात लुकी गयुं

देख्णु कया च
कया मीथै देके ग्याई
ऐ मेरी गीची
तू किले गप राई

एक उत्तराखंडी

बालकृष्ण डी ध्यानी
देवभूमि बद्री-केदारनाथ
मेरा ब्लोग्स
http:// balkrishna_dhyani.blogspot.com
में पूर्व प्रकाशित -सर्वाधिकार सुरक्षित

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

कविता उत्तराखंड की बालकृष्ण डी ध्यानी
2 hours ago
बटयूँ छों

तुकड्युं बटयूँ छों
कै का बान अटक्यूँ छों
कैल जाणा
कैल उड़े ले जाणा
बटयूँ छों मी
बस जी मी बटयूँ छों

कबी गौं कबी दून मा
कबी लून कबी रुन मा
नि जाणा मिल ये देब्तों
कखक कख मि अटक्यूँ छों
बटयूँ छों मी
बस जी मी बटयूँ छों

जीकोडी कि तुकड़ मा
आंख्युं की रटन मा
बोल्यूं की गिच्न मा
अपरुँ कि रिसण मा किस्क्युँ छों
बटयूँ छों मी
बस जी मी बटयूँ छों

देर मा अबेर मा
बौल्या परित कि फेर मा
टक्कों की रेस मा
खाली किसों की जेब मा रच्यूं छों
बटयूँ छों मी
बस जी मी बटयूँ छों

तुकड्युं बटयूँ छों
कै का बान अटक्यूँ छों
कैल जाणा
कैल उड़े ले जाणा
बटयूँ छों मी
बस जी मी बटयूँ छों

एक उत्तराखंडी

बालकृष्ण डी ध्यानी
देवभूमि बद्री-केदारनाथ
मेरा ब्लोग्स
http:// balkrishna_dhyani.blogspot.com
में पूर्व प्रकाशित -सर्वाधिकार सुरक्षित

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

    Write a comment...

कविता उत्तराखंड की बालकृष्ण डी ध्यानी
2 hrs ·

किले

किले नि जाणा पाई
नि पछाण पाई

कित्गा निर्मल कित्गा सुंदर
पाड़ा हमारू गौं घार हमारू

किले नि जाणा पाई
नि पछाण पाई

पुंगड़ो की माया डालों की साया
हेरालु डंडों कंठों कैन यख बसाया

किले नि जाणा पाई
नि पछाण पाई

बगदी अलकनंद भागीरथी माँ नंदा
बोई गंगा की धारो कैल बग्यू

किले नि जाणा पाई
नि पछाण पाई

आम अखरुट लीची किन्गोड़ा
बुरांस फ्योंली कैल पक्याो कैल फ़ुल्यो

किले नि जाणा पाई
किले नि पछाण पाई

हरी कु द्वारा बद्री केदार को घार
उकलू छोड़ी किले मेरु मन उंदार

किले नि जाणा पाई
नि पछाण पाई

कित्गा निर्मल कित्गा सुंदर
पाड़ा हमारू गौं घार हमारू

एक उत्तराखंडी

बालकृष्ण डी ध्यानी
देवभूमि बद्री-केदारनाथ
मेरा ब्लोग्स
http:// balkrishna_dhyani.blogspot.com
में पूर्व प्रकाशित -सर्वाधिकार सुरक्षित

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

Parashar Gaur
12 hrs ·

तेरि आँख्यूंमा आंसू देखी
हिया मेरु भरी ऐगे छो
टप टप चूँदा आँख्यु बिटि वो
तेरा मनै पीड़ा बतै गे छो !

कॉपी राइट @पराशरगौर
२६ सितमबर २०१४ सुबेर १०. १५

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

"सुरमई आँखों का जादू "
आपकी नजरों ने देखा है
जब से हमको प्यार से
अब क्या कहे सनम
जिंदगी बदल गई है तब से !
भीड़ से कट कर
अब तो रहने लगे
नीड से अब तो
आँखे चुराने लगे
जज्बातों पे अपने
अब तो रहा न असर
उठने लगे है वो ,
अबतो चुपके चुपके होल से !
आप के नाम से
अब तो हम जाने जाने लगे है
असर ये हुआ की अब हम
अपनों में हे बदनाम होने लगे है
धड़कने बे-काबू होती है मेरी
आता है जब जब जिक्र आपका
छुपते छुपाये छुपती नहीं बाते
बात राज के दबाने से ....... !
---पराशर गौर-----

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

न कैर न कैर नखरा, ये मेरी नखरयली
देखीले यूं नख्ररौन तू एक दिन बदनाम कनी !
--- पाराशर गौर-

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

गढ़वाली सेर - 2 देखे ... साथ में दाद भी देना ना भूले।

फुकेगे होलु जिस्मत फुकेगे होलु दिल भी
अब खरवलणी रँगूँण, अब कवि फैदा नी ! ( ग़ालिब साहिब )

--- पाराशर गौर

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

Parashar Gaur
Yesterday at 12:33am ·

सों करार ( हास्य व्यंग )

मेरी श्रीमतील
मी पर गुस्सा ह्वेकि बोली
तुम थै यादच आगि अग्वाडि
फ्यारा फिरदा बचन सो को-करार
निभाणै याद च .......

मीन बोली ,
कैका बचन, कैका सो, कैका को-करार
फंडुफुक यु सब तै
इबरि तुई *निभी जई ई बोत च !

* निभ ना माने दुनियासे कुच करना याने मरना

पाराशर गौर

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

Parashar Gaur
September 25 at 10:03pm ·

"सुरमई आँखों का जादू "

आपकी नजरों ने देखा है
जब से हमको प्यार से
अब क्या कहे सनम
जिंदगी बदल गई है तब से !

भीड़ से कट कर
अब तो रहने लगे
नीड से अब तो
आँखे चुराने लगे
जज्बातों पे अपने
अब तो रहा न असर
उठने लगे है वो ,
अबतो चुपके चुपके होल से !

आप के नाम से
अब तो हम जाने जाने लगे है
असर ये हुआ की अब हम
अपनों में हे बदनाम होने लगे है
धड़कने बे-काबू होती है मेरी
आता है जब जब जिक्र आपका
छुपते छुपाये छुपती नहीं बाते
बात राज के दबाने से ....... !
पराशर गौर

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

गढ़वाली सेर देखे ... साथ में दाद भी देना ना भूले।

न कैर न कैर नखरा, ये मेरी नखरयली
देखीले यूं नख्ररौन तू एक दिन बदनाम कनी !
--- पाराशर गौर