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उत्तराखंड पर कवितायें : POEMS ON UTTARAKHAND ~!!!

Started by Dinesh Bijalwan, August 05, 2008, 02:18:42 PM

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

उत्तराखंड का चौदा साल

कवि : मदन डुकलाण

लड़ै -लडि छै जौन ब्याळि , उंका मुंड मा गाज।
मुसदुळयूँ जो लुक्यां रैन , राज कना छन आज।। .
हमारा शहीदुं सुपन्यों को , यो राज त नी च ।
ऊंन मांगी छै राजधानी , अपणा गौंका बीच।। .
मिन क्या गढ़ी क्या स्वाच।
तिन क्या पढ़ी क्या बांच।
xx xx
जय केदार जय बदरी
चौदा साल आठ मुख्यमंत्री ।
राहु केतु हमरा ग्रह मा
कैन बणै या जन्मपत्री ।
कख गैन तेरा आंदोलन
कन बिसरी तू ल्वे खत्तरी।
शहीदुं शादत सीण नि दींदी
हंत्या नचै सूण भै जगरी ।
भ्रष्टाचार गौळा - गौळा तक
काटा गाळा गाड़ा खुंकरी।
copyright@ Madan Duklan

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

ह्यून्द समोण च

साल -पाल सरू कमायुं खाण अर खवोण च
सेरा बरस जु कमायी ह्यून्द अब समोण च
थौ नि टेकि रूड़ी भूड़ी घाम छैल करि गोड़ी
खड़ पात न डूबीं पुंग ड़ी कबि नि मांग परें छोड़ी
तलबला तलो पड़ीक डाळी-डा ळी करी रोपी
दुदयाळ बाळ घौर छोड़ी कबि नि रयुं वे कि छोपि

सचि नि आला अब त घौर सरील स्सयोणु च
सेरा बरस जु कमाई ह्यूंद अब समोण च

छुट्टी ल्येक घौर आवा बस अब त जग्वाळ च
तुमारु सरेल कति निठूर , लोगु भग्यानों बग्वाळ च
पाँजा पर आया घौर बिंडी दिनों बट्वाल च
यपुने सड़कियोंंकी क्य लाण सरकारों कपाळ च
भुला तुमारु फोने पर च
सु बी अफ्वी मां कमाल च

मौ कु मैना औण वाळ ब्यो कु दिन सुदयोण च
सेरा बरस जु कमायी ह्यून्द अब समो ण च
चित्र जयवर्धन कांडपाल
@ उमा भट्ट @

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

नेगी दा का जन्म दिवस मा मिल भी मने प्रेरणा दिवस डाला लगैकी...................शैलेन्द्र जोशी

तिन लगे डाली गीतू की
तिन लगे डाली बिचारो की
तिन लगे डाली संस्कीर्ति की
तिन लगे डाली लोकभासा की
आन बान शान की
ऐशू लगाला जलमदिबस मा
त्येरा नौकी डाली नेगी दा हम भि

रचना .........शैलेन्द्र जोशी

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

ल्या आप सभी कु प्यारु राहुल गांधी पर विकास बडथ्वाल की द्वि पंक्तिया

सम्भाल की रख्या रे अपड़ा बाल बच्चो थे आज कल जमाना खरभ च

ज़माना खारभ करण मा हर बारी केजरीवाल कु ही हाथ राहुल गांधी कु भी हाथ च

दिन धहड़े चलदा फिरता बलात्कार छ हुणा
अर दोषी खटलो मा पोड़ी की हुक्का फुक्णा

अब फिर तुम बुलन ये मा भी राहुल गाँधी कु हाथ च
मिन झापड़ी ल्गनि किले छ भुलणा वे की बोय और पगड़ी वालू सरदार भी साथ च

राहुल हर बारी देश की युवा शक्ति की छवि नि खराभ कोरा...
हड्गा नि बिकदा बाजारी मा,जू एक रट लगी च नोटों दगड़ी आम जनता का हड्गा भी बोरियु मा भोरा

भोरा रे भोरा पगड़ी वाला चाचा तेज़ चलो हाथ सिंन्कोली भोरा

धन्यवाद
विकास बडथ्वाल
२ बजी की ४६ मिनट ५१ सेकंड
नई दिल्ली द्वारका
Vikasbarthwal.blogspot.com

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

म्यारी भाषा

बल म्यारी भाषा लुप्त हुणी,क्या तुम लुग्न भी या बात सुणी।।
बल म्यारा सेरा पुंगणी भी लुप्त हुणी,बुअला कखी दिखणा तुम्थे लाल बांदर और कालू मुख कु गुणी।।


क्या बतो चूचो म्यारी भाषा लुप्त हुनी।।


ढोल दमोऊ,हुक्का,बीड़ी माचिस,काफल,बेडू,लुप्त हुणा और हुनी लुप्त मिलो दूर चल्णी वालू पाथिक,पाणी चल्न वाली चक्की।।

जे की देखा एक बार घौर अपड़ा अपड़ा रह जाण तुम्न हक्की बक्की।।


लुप्त हुना पंदेरा,नौला,घाट,गदेरा फुंड मारी जाणि वाला माछा।।
जे की देखा एक बार घौर अपड़ा अपड़ा बाघ,भलु की डौर ख़त्म
मनखि बुखानु मनखि थे कच्चा कच्ची।।


आधो थे बात या लगनी होली ये सुद्धी।।
कुछ बुलना होला "बडथ्वाल" न पि च आज कच्ची।।

देखि आ एक बार घौर अपड़ा अपड़ा
बात बुल्णु छो एक दम सच्ची।।

म्यारी भाषा,म्यारी संस्कृती लुप्त हुणी।।
क्या चूचो तुम्न भी सुणी।।
क्या चूचो तुम्न भी सुणी।।


धन्यवाद्
विकास बडथ्वाल
सायं ७ बजी की १९ मिनट ४३ सेकंड
द्वारका नई दिल्ली
Vikasbarthwal.blogspot.com

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

Saturday, 26 April 2014
ल्या आप सभी कु प्यारु राहुल गांधी पर विकास बडथ्वाल की द्वि पंक्तिया


सम्भाल की रख्या रे अपड़ा बाल बच्चो थे आज कल जमाना खरभ च

ज़माना खारभ करण मा हर बारी केजरीवाल कु ही हाथ राहुल गांधी कु भी हाथ च


दिन धहड़े चलदा फिरता बलात्कार छ हुणा
अर दोषी खटलो मा पोड़ी की हुक्का फुक्णा


अब फिर तुम बुलन ये मा भी राहुल गाँधी कु हाथ च
मिन झापड़ी ल्गनि किले छ भुलणा वे की बोय और पगड़ी वालू सरदार भी साथ च

राहुल हर बारी देश की युवा शक्ति की छवि नि खराभ कोरा...
हड्गा नि बिकदा बाजारी मा,जू एक रत लगी च नोटों दगड़ी आम जनता का हड्गा भी बोरियु मा भोरा

भोरा रे भोरा पगड़ी वाला चाचा तेज़ चलो हाथ सिंन्कोली भोरा


धन्यवाद
विकास बडथ्वाल
२ बजी की ४६ मिनट ५१ सेकंड
नई दिल्ली द्वारका
Vikasbarthwal.blogspot.com

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

बल कख हर्ची,कख हर्ची

बल कख छन कोदा रुट्टी,उर्खाली और पिस्णु वालू जांदर(जन्दरु)
बल वू झंगोरा का बिज,मुंगरी की खेती उजाड़ जाँदा गौर,नारंगी खांदा गुणि बांदर

बल कख हर्च्नी ,हिसुर,किन्गोड़ बेडु और काफल,कन सेल पोड़दी छे जे की घौर जन वो जुग भी छो कृष्णा कु द्वापर,सेरो फुंडे बैलो गोला घंट्टी ब्ज्न्दी ब्ज्न्दी लगाणा हुंदा छ लोग हौल,बल अब ता खाद जन पकेटो माँ कालू कालू कुछ आनु लग गी,भुल्गेनी खेतो मा डालना गोरो को मोल

कख हर्ची संख ध्वनि,कख हर्ची दमोऊ और ढोल,कख हर्ची मेरा नागराजा,नर्सिंग,देवता बोल ब्क्या बोल,कख हर्ची लाल बुरांश और फ्योली का फूल,कख हर्ची माटो मा भर्या हाथ,आँखों मा पुड़ दी धुल,

हर्ची गी हर्ची गी हरु वन,चट्टान सा पहाड़,और बाघों दहाड़,जू पहली लाल माटो मा छ रेह्न्दा अब चल गनी देश उ हरा पहाड़ो का पार सांस अब वू वखि लेनदा....

भारी परिवर्तन देखि की विकास किले छे परेशान हुनी,यु कुई तेरु अकेलु कु पहाड़ थोड़ी च जू लाखो का भीड़ मा तू अकेली छे रूणी,सभी तेरा भय भ्णु कु क्र्यू धरयु च,जू सब चीज़ लुप्त हुई जाणि,जो कल तक बाड़ी और झंगोरू छे खांदी,आज मिल कु आटु और होटलों मा खाणी .....

कख हर्ची रे
कख हर्ची

धन्यवाद्
विकास बडथ्वाल
सायं ७ बजी की ३५ मिनट २९ सेकंड
द्वारका नई दिल्ली
Vikasbarthwal.blogspot.com

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

 स्कूल बुला रहा है

स्कूल बुला रहा है याद दिला  रहा है
हो गया हु बड़ा मै ,बार बार एहसास दिला  रहा है


आठ से दो का समय बता रहा है
मन ललचा रहा है,नई जा सकता वापिस चिढ़ा रहा है
अब हर घंटे की घंटी सवेरेबिस्तरे  की घंटी बन के रह गयी है
हर नीली वर्दी स्कूल की बन के रह गयी है


गुरु जी बुला रहे है,मैडम बुला रही है
डाटें सुनने की चाह ,फिर से सता  रही है
लकड़ी चिल्ला रही है ,ब्लैक बॉर्ड वाली काली दिवार चिल्ला रही है
परिणाम आने वाली इकत्तीस तारिक ,एक साल पहले से डरा  रही है


स्कूल बुला रहा है याद दिला  रहा है
हो गया हु बड़ा मै ,बार बार एहसास दिला  रहा है

अब मेरी आँखे खुलने में देर सी लग रही है
हर समय ज़िंदगी अंधेर सी लग रही है
पहले कैसे ठीक ६ बजे आँख खुल् जाती थी
बिन बताये किसी को वर्दी शरीर पर चढ़ जाती थी

आओ न मुझे वापिस वो दिन दिलवाओ न
४० की भीड़ मै ,गद गद  कर के हसने वाले दिन याद दिलवाओ न
भूख  लगने पर ४० तरह के पकवान सामने रखवाओ न
बिना कीसी डर के  खुले आसमान में फिर से घूमना सिखाओ न


उस समय तो मन मै बस एक चीज़ चलती थी
जल्दी से निकले यहां से कहानिया कॉलेज की अच्छी लगती थी
जा के देख लिया कॉलज भी एहसास होने लगे सब बेकार है
मेरा स्वर्ग तो वही था जहां से ४० की भीड़ एक वर्दी में एक साथ है


दुखी मन लिए अब दर दर डोल रहा हु
जीविका चलाने के लिए जी हजुरी कर रहा हु
क्या ऐसा नही हो सकता पूरी जिंदगी
हम एक ही वर्दी पहने एक हे जगह जाते रहे
उन्ही के साथ पढ़े,बढ़े,कमाए और खाते रहे

क्यूँ  ढूंढ  रहा है दिल उन दिनों को,हाँ क्यूँ  ढूंढ  रहा है दिल उन दिनों को
किसी को अब कैसे हम बताये
एक ही आवाज  दिल से निकलती हुई विकास
सारी  कमाई ले लो बस,स्कूल के दिन वापिस मिल जाये
बस स्कूल के दिन वापिस मिल जाये विकास
बस स्कूल के दिन वापिस मिल जाये !!!



धन्यवाद !!
विकास बड़थ्वाल
प्रभात
८ बज कर ५८ मिनट १३ सेकंड
द्वारका,नई दिल्ली

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

इ लोकसभा चुनाव मा कन मचियु च घपरोल...


इ लोकसभा चुनाव मा कन मचियु च घपरोल...
काका कर्नू झूठा वादा,पिछने बटी चुग्नी दे की बुल्नु बोल भय बोल...

साल भर दिखया नि काका तुम क्या च यु झोल....
वादा इत्गा बड़ा बड़ा तुम्हरा,हर चौक ब्ज्वे दिलू ढोल..

इ लोकसभा चुनावी मा कन मचियु च घपरोल...


बोडा पिनु तम्ब्खु निम्दरि मा,बोडी ढुलनी मोल..
सुधि नेता बन्या छन हर घौर बटी
किले नि लगनी यूँ थे डौर...

बोडी बोडा थे,बुबा बेटा थे,नेता जनता थे थम्लो न कच्काणु...
बल हवे चुकी वादा पाँच साली कु गौं कु स्वास्थ्य कु,देश कु युवा अपड़ा घौ मा बीड़ी कागज चिप्काणु...

छुट्ट नौनो थे लैमचुस,दानो थे पव्वा मी पिलालू...
गौं मा नि होली कुई कमी झुठु फंड गौं का नौ मा मी लाहलू..

हे म्यरा चूचो नेता इत्गा वादा देखि की कन मा मिन कुछ बुल्ण...
जू भी मिलणु नेता काका थे मुट्ठी भोरी की आँखा मा डल्णु लूण..


इ लोकसभा चुनाव मा बिंडू मचियु च घपरोल..
वोट दिना वाला पव्वा पि की कोडना पुड्या छन अर वोट बिक्णु मोल...


इ लोकसभा चुनावी मा बिंडू मचियु च घपरोल...



"विकास बडथ्वाल"

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

 आज नजनी किले लगनी मी पुरनी खुद...
लाल माटे की खुशबु,गौड़ी कु दूध...
वु सुबेरी सुबेरी खट्लो मा कड़क चे...
..
वु गौड़ी कु अपड़ी बाछी कुणी धे...
वू ओबरा बटी आन्दु कालु धुआं..
किस्सों बटी निक्ल्नु पेंट कु रुआं...
याद च मिथे भी म्यारा गौ गुनतियार का वे दिन...
स्वर्ग छे वे धरती सभी मूल भूत साधनों का बिन...
केन पलैया छन ढेबरा केन पल्या छन कुकड़ा...
कुई लग्यु च भुजी दगड़ी,के मा बच्या भी नि टुकड़ा
पहाड़ी की हवा वु ठंडी ठंडी,सर सर लगनि रंग बिरंगी...
..
चौक मा हन्दू छो छोटू सी वृक्ष जे मा खिल्दी छे क्विंटल नारंगी
इस्कूलिया लग्या छन बस्ता डालि की पाथो मा अग्नि अग्नि..
बल्ब त सुनी भी नि,पांडो मा जल्दी छे चिमनी..
याद आणा मी वु सारा दिन...
सुच्णु छो कन मा रह सकदु यु सभ्या का बिन..
कन मा रह सकदु यु सभ्या का बिन
"विकास कन मा रह सकदी तू यु सभ्या का बिन"
"विकास बडथ्वाल"