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उत्तराखंड पर कवितायें : POEMS ON UTTARAKHAND ~!!!

Started by Dinesh Bijalwan, August 05, 2008, 02:18:42 PM

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

प्रदीप सिंह रावत खुदेड़
20 hrs · Edited ·

सुदूर पहाड़ की थाती पर है मेरा गाँव
सुदूर गगवाड़स्यूं घाटी पर है मेरा गाँव

कुंजेठा गुमाई पड़ता है इसके पश्चिम में
गंगोटी पड़ता है मेरे गाँव के दक्षिण में
पूर्व दिशा में पड़ती है पाबै की धार
उत्तर दिशा मे पड़ती है पुन्डोरी की सार
सुदूर पहाड़ की थाती पर है मेरा गाँव
सुदूर गगवाड़स्यूं घाटी पर है मेरा गाँव

हर बारह वर्ष में मौरी का मेला यहाँ लगता है
छः महीने तक संस्कृति का पर्व यहाँ चलता है
छोटी सी एक नदी कुछ दूरी पर बहती है
कभी इसमें अति पानी था अब खाली खाली रहती है
सुदूर पहाड़ की थाती पर है मेरा गाँव
सुदूर गगवाड़स्यूं घाटी पर है मेरा गाँव

आधुनिकता की दौड़ में मेरा गाँव सरपट दौड़ रहा है
ईंट के मकान बनाता पत्थर के मकान तोड़ रहा है
गाँव के ऊपर स्कूल में शिक्षा का स्तर नहीं पहले जैसा
गुरु अब गुरु नहीं रहा, अब तो उसे चये बस पैंसा
सुदूर पहाड़ की थाती पर है मेरा गाँव
सुदूर गगवाड़स्यूं घाटी पर है मेरा गाँव

न अब गाय है न भैंस, न हल जोतते अब बैल से
अन्न अनाज अब दुकान से, दूध भी आता अब शहर से
प्यार मोहब्बत तो है पर अपनापन नहीं है
बच्चे तो है पर उनमे अब बचपन नहीं है
सुदूर पहाड़ की थाती पर है मेरा गाँव
सुदूर गगवाड़स्यूं घाटी पर है मेरा गाँव

इसी गाँव में मेरा भी छोटा सा रैन बसेरा है
यही कोने पर मैंने अपने बचपन को उकेरा है
मुझे नहीं मालूम अब यहाँ कब लौट पाउँगा
क्या अपनी ज़िन्दगी के बचे लम्हे यहाँ काट पाउँगा ?
सुदूर पहाड़ की थाती पर है मेरा गाँव
सुदूर गगवाड़स्यूं घाटी पर है मेरा गाँव

प्रदीप सिंह रावत ''खुदेड़''
तारीख १३.११.२०१४

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

जगमोहन सिंह जयाड़ा जिज्ञासु
19 hrs ·

जब होश आई...

भारी शर्म सी लगि,
किलैकि काम हि,
यनु करयालि थाै,
मिलिगे थौ दगड़या एक,
वेन बोलि प्‍यार सी,
चला भैजि धार ऐंच,
आज वखि मू,
रंगमता ह्वैक,
भ्‍वीं मा लठगि जौला...

होण क्‍या थौ,
वनि ह्वै, होश भी नि रै,
कल्‍पना छ या मेरी,
मन बोन्‍नु हात तै,
कलम पकड़ि लिख दौं,
जब होश आई...
-जगमोहन सिंह जयाड़ा "जिज्ञासु"
स्‍वरचित रचना, सर्वाधिकार सुरक्षित,
दिनांक: 14.11.2014

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

जगमोहन सिंह जयाड़ा जिज्ञासु
November 11 at 5:37pm ·

मेरा लाल.....

उत्‍तराखण्‍ड की,
धरती बोन्‍नि छ,
ह्वैग्‍यन मेरा कुहाल,
नि लेन्‍दा जल्‍म तुम,
मेरी सजीली गोद मा,
नि होन्‍दा मेरा यना हाल,
निराशेक बणि छ बिकराळ,
बांदर सुगंर कन्‍ना छन राज,
बांजी पुंगड़ि टूट्यां कूड़ा,
यू हि रैग्‍यन अब यख,
बंजेणु छ कुमाऊं गढ़वाळ,
कुछ त सोचा,
हे मेरा लाल.....

-जगमोहन सिंह जयाड़ा जिज्ञासु
रचना स्‍वरचित एवं ब्‍लाग पर प्रकाशित
दिनांक 11.11.14

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

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    जगमोहन सिंह जयाड़ा जिज्ञासु
    17 hrs ·
    जगमोहन सिंह जयाड़ा जिज्ञासु's photo.
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        You, Asha Negi, Savitri Saklani Uniyal, Manoj Tiwari and 24 others like this.
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        Jot Singh Chand bahut sunderSee Translation
        12 hrs · Like
        Dayal Negi ati sunder bhai ji dil ko chune..waali....Piyoli....
        11 hrs · Like
        Soban Singh नमस्कार दीदा जी बहुत खूब कविता जी ,कबारी लिखी होली . आज अब्बी देखि ,नमस्कार.See Translation
        10 hrs · Like
        Dharmendra Negi बहुत सुन्दर भैजीSee Translation
        8 hrs · Like
        Mahi Singh Mehta
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    जगमोहन सिंह जयाड़ा जिज्ञासु
    19 hrs ·

    जब होश आई...

    भारी शर्म सी लगि,
    किलैकि काम हि,
    यनु करयालि थाै,
    मिलिगे थौ दगड़या एक,
    वेन बोलि प्‍यार सी,
    चला भैजि धार ऐंच,
    आज वखि मू,
    रंगमता ह्वैक,
    भ्‍वीं मा लठगि जौला...

    होण क्‍या थौ,
    वनि ह्वै, होश भी नि रै,
    कल्‍पना छ या मेरी,
    मन बोन्‍नु हात तै,
    कलम पकड़ि लिख दौं,
    जब होश आई...
    -जगमोहन सिंह जयाड़ा "जिज्ञासु"
    स्‍वरचित रचना, सर्वाधिकार सुरक्षित,
    दिनांक: 14.11.2014
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        पंकज सिंह महर, Jagdish Rawat J D, बलबीर राणा and 34 others like this.
        राजेन्द्र ढैला 'दआदि' wa g wa
        14 hrs · Like
        Jot Singh Chand wah ji wah
        12 hrs · Like
        Gajendra Singh Jayara hahahhahah nice
        12 hrs · Like
        बलबीर राणा खूब दिदाSee Translation
        11 hrs · Like
        Mahi Singh Mehta
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    Rajendra Bahuguna‎जगमोहन सिंह जयाड़ा जिज्ञासु
    21 hrs ·

    बाल- दिवस
    क्या चाचा नेहरू आयेंगे इन्साफ करेंगे
    क्या आंगन बाडी के बच्चे अब साफ करेंगे
    अब उंची नस्लो के ही तो बच्चे पढते है
    लावारिस तो आंगन बाडी में सढते है
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    बाल- दिवस क्या चाचा नेहरू आयेंगे इन्साफ करेंगे क्या आंगन बाडी के बच्चे अब साफ करेंगे अब उंची नस्लो के ही तो बच्चे पढते है लावारिस तो आंगन बाडी में सढते है बस,गेंहू ,चावल,चीनी, भूखे चाट रहे है सरकारी खैरात सियासी बांट रहे है भविष्य देश का आंगनबाडी चला रही है राजनीति नादान शिशू को गला रही है चपरासी ,सरकारी शिक्षा से बनते हैं कानवेण्ट तो अधिकारी को ही जनते हैं बाबू, माली, चालक, चौकीदार खिलेंगें ये फटे लिबास,सरकारी स्कूल सिलेंगे अच्छा होता पाठ्यक्रम सब एक बनाते बालदिवस पर चमत्कार कुछ कर दिखलाते पट जाती खाई, निर्धन और धनवानो की एक ही शिक्षा होती,शौकत और शानो की हमने देखो शिक्षा को भी व्यवसाय बनाया के. जी. में क्यों तीन वर्ष का ,बच्चा आया कमर में बस्ता पांच शेर का ,कैसे ढोता क्यों कोमल कलियों का कलरव कलुसित होता क्या गुनाह किया है बच्चों ने,जो कष्ट उठाते सपने, मात पिता के ,क्यों बच्चों को खाते व्यवसायी तो , शिक्षा का , पैसा पाता है स्कूल मदरसों से , कोमल मन मुरझाता है बच्चों की कोमल बुद्वि में भी मल भरता है भविश्य देष का शिक्षा से कैसे मरता है रट्टू तोता बच्चा कैसे बन जाता है दिल , दिमाग की दुनिया में ही खो जाता है मासूम कलि को निर्दयता से अब मत तोडो पांच साल तक बच्चों को बच्चों पर छोडो सुकुमार कलि से चमन भी सुन्दर बन जायेगा यौवनता के गीत वतन फिर से गायेगा ।। राजेन्द्र प्रसाद बहुगुणा(आग) 9897399815 rajendrakikalam.blogspot.com
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    जगमोहन सिंह जयाड़ा जिज्ञासु
    21 hrs ·
    जगमोहन सिंह जयाड़ा जिज्ञासु's photo.
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        Asha Negi, Bhagwan Rawat, Amit Gusain and 34 others like this.
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        जगमोहन सिंह जयाड़ा जिज्ञासु कैंतुरा जी गढवाळ की जातियों फर किताब छन अर मिलि भी जालि।See Translation
        20 hrs · Edited · Like · 3
        Harish Patwal Singer Writter aap uttrakhnd ki shan chun bhaij iSee Translation
        19 hrs · Like
        Vinod Singh Kaintura कख भैजीSee Translation
        19 hrs · Like
        Rajbeer Rawat Gigyasu Bhaiji bal diwas ki Shubhakamna....
        11 hrs · Like
        Mahi Singh Mehta
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    जगमोहन सिंह जयाड़ा जिज्ञासु
    22 hrs ·
    जगमोहन सिंह जयाड़ा जिज्ञासु's photo.
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        Mahi Singh Mehta
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    Pãñkâj Räwát was with केदार जोशी एक भारतीय and 73 others.
    Yesterday at 8:02am ·
    Pãñkâj Räwát's photo.
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        Beer Singh Uttrakhandi Same to dear
        22 hrs · Like
        Vidya Joshi Same 2u
        22 hrs · Like
        Bisht Bageshwar Uttrakhand Thanks Bro & Sameness ha
        13 hrs · Like · 1
        Mahi Singh Mehta
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    Rajendra Bahuguna‎जगमोहन सिंह जयाड़ा जिज्ञासु
    November 13 at 6:28pm ·

    (14 नवम्बर के उपलक्ष में)
    गुलाब में जुलाब
    चाचा नेहरू,मामा मोदी,दादा गांधी,क्या आंधी है
    देश की जनता प्रजातन्त्र में सब नेताओं की बांदी है
    जो चाहे बुलवालो भैया,बोट डालना मजबूरी है...
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    (14 नवम्बर के उपलक्ष में) गुलाब में जुलाब चाचा नेहरू,मामा मोदी,दादा गांधी,क्या आंधी है देश की जनता प्रजातन्त्र में सब नेताओं की बांदी है जो चाहे बुलवालो भैया,बोट डालना मजबूरी है खादी कुर्ता,धोती और लंगोटा, लोटा ही धूरी है प्रजातन्त्र का हानीमून है कब किसकी किस से शादी हेै चाचा नेहरू,मामा मोदी,दादा गांधी,क्या आंधी है फूल गुलाब का हाथ में पकडा,नीचे कांटे ही कांटे थे चाचा ने गुलकन्द हमेशा अपने चेलो में बांटे थे फूल कमल का हाथ में लेकर मामा मोदी झूम रहे हैं चाचा का त्यौहार देश मे,परदेषो में घूम रहे हैं नेहरू,गांधी छीन लिया अब कांग्रेस बिल्कुल आधी है चाचा नेहरू,मामा मोदी,दादा गांधी,क्या आंधी है वरूण,मेनका दोनो गांधी बी0जे0पी ने छीन लिये हैं बचे खुचे दो हल्के गांधी,अपनो ने ही दीन किये हैं चाचा तेरे नाती,पोते,जनता पचा नही पायी है घोटालो में फंसे पडे इन चेलो से आफत आयी है सूत कात कर गांधी मर गये,बदनामी में अब खादी है चाचा नेहरू,मामा मोदी,दादा गांधी,क्या आधी है स्वीसबैंक में काला धन है,देश मे झाडू मार रहे हैं खातों से सब पैसे गायब, सूची में दो-चार रहे हैं घर मे ढूंढो काले-धन का बे-सूमार अम्बार लगा है चाचा काले धन वाला ही राजनीति में आज सगा है चाहे कान किधर से पकडो नेता की चांदी-चांदी है चाचा नेहरू,मामा मोदी,दादा गांधी,क्या आंधी है प्रतिष्प्रधा में सारे नेता आर्दशों को मार रहे है शीतल शब्दो के अन्दर भी,शोले और अंगार रहे हेैं भगतसिह शेखर,सूभाष,को जंजीरो से जकड रहे हैं नेहऱू,गांधी और पटेल को अपने ढंग से पकड रहे हैं ये दीवार भी कवि आग ने कविता लिख कर ही फांदी है चाचा नेहरू,मामा मोदी,दादा गांधी,क्या आंधी है।। राजेन्द्र प्रसाद बहुगुणा(आग) 9897399815 rajendrakikalam.blogspot.com
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    जगमोहन सिंह जयाड़ा जिज्ञासु
    November 13 at 1:42pm ·
    जगमोहन सिंह जयाड़ा जिज्ञासु's photo.
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        Gokul Negi, Bhagwan Rawat, Amit Gusain and 35 others like this.
        गोपाल सिंह रावत मैं भी पहाड़ कु मनखियुं छौं
        मेरा भैजी।
        गौं पट्टी फैगुल टिरी मा बनचुरी जैकु नौं।
        November 13 at 2:17pm · Like
        बलबीर राणा क्या बात च दिदा वास्तविक मानचित्र दगडी थाती कु चित्रणSee Translation
        November 13 at 2:41pm · Like
        Jot Singh Chand kya bat bhai jiSee Translation
        November 13 at 8:43pm · Like
        Vijay Jayara Bahut accha persentation chacha ji .
        Yesterday at 7:53am · Like
        Mahi Singh Mehta
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    Rajendra Bahuguna‎जगमोहन सिंह जयाड़ा जिज्ञासु
    November 13 at 8:45am ·

    इन्जीनियर
    इन्जीनियर निर्माण की बुनियाद बनता जा रहा है
    देश का निर्माण ही सीमेन्ट सरिया खा रहा है
    हर जगह निर्माण मेजर-मेन्ट पुस्तक कर रही है
    निर्माण की पत्रावली हस्ताक्षरों से भर रही है
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    इन्जीनियर इन्जीनियर निर्माण की बुनियाद बनता जा रहा है देश का निर्माण ही सीमेन्ट सरिया खा रहा है हर जगह निर्माण मेजर-मेन्ट पुस्तक कर रही है निर्माण की पत्रावली हस्ताक्षरों से भर रही है हर विभागों को यहाॅं आधा कमीशन चाहिये निर्माण स्थल है कहाॅं पत्रावली में पाइये आज तो इन्जिनियर का भाव बढता जा रहा है मस्ट्रोल का निर्माण हिन्दुस्तान को ही खा रहा है हर वर्ष बनती है सडक बस टूटती ही जा रही है निर्माण की सारी व्यवस्था देश का धन खा रही है हर सडक अपना नमूना फड फडा कर बोलती है मौन होकर ये सडक औखात सबकी खोलती है कुछ खास ठेकेदार हैं जो मंत्रीयो के पूत हैं बस विश्वकर्मा बन गये ये , सियासी भूत हैं हर भ्रष्ट अभियन्ता,नियन्ता मंत्रीयों के ज्ञान में निर्माण खण्डहर हो रहा है आज हिन्दुस्तान में मिल बाॅंट कर टेन्डर यहाॅं बख्से में सारे डल रहे हैं सिफारिसी कुछ खास ठेकेदार ही तो पल रहे हैं मुर्गा कटा बोतल खुली सूरज ढला ज्यों साॅंझ में मुख्य अभियन्ता निरीक्षण कर रहा है झांझ में देश में भी पोल से पुल बन रहे बे - भाव से पुस्ते भी देखो बह गये ,वर्षात के बहाव से मेठ अभियन्ता वतन की हर सडक को काटता है निर्माण की पत्रावली से माल मिलकर बाॅटता है बनने से पहले पुल सरिता में समाते जा रहे है निर्माण के विभाग नेताओ को हरदम भा रहे है तकनीक का ये दौर भी घटना करम् का दौर है आज तो निर्माण ही इस देश मे सिरमोैर है इन्जिनियर ,ओवरसियर निर्माण के आधार हैं बस ये नमूना लाभ का सबसे बडा हथियार है हर नदी पुस्तों की हालत देखकर क्यों रो रही है अब बोलती हैं फाइलें बरसात कितनी हो रही है यहाॅं के ताज को देखो ,बयाॅं करता है फनकारी उस तकनीक से सीखो, ये गारे की कलाकारी डिप्लोमा नहीं था बस,लगन से काम होता था कमीशन भी नही था ,ना ही ठेकेदार रोता था यहाॅं तो काम से पहले ही ,बन्दर बाॅंट होती है सारी ओपचारिकता , फाइल में छाॅंट होती है फिर पेमेंन्ट होता है सियासत के इसारे से दिखाते हैं यहाॅं सीमेंट नदी नालों के गारे से अभियन्ता ,नियन्ता भी यहाॅं पर मेेट होता है यहाॅं मजदूर भी अपनी ध्याडी रोज खोता है यहाॅं फीता भी कटता हैे सियासी सरगनाओं से कविता आग लिखता है भ्रष्टों की अदाओं से राजेन्द्र प्रसाद बहुगुणा (आग) मो0 9897399815 rajendrakikalam.blogspot.com
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    Rajendra Bahuguna‎जगमोहन सिंह जयाड़ा जिज्ञासु
    November 12 at 12:01pm ·

    अधुनिक डाक्टर
    अब तो बूढे हो गये आयी अकल
    डाक्टर बनते तो जीवन था सफल
    हाथ रोगी का पकड. पैसे कमाते
    हास्पिटल भी कहीं अपना बनाते
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    अधुनिक डाक्टर अब तो बूढे हो गये आयी अकल डाक्टर बनते तो जीवन था सफल हाथ रोगी का पकड. पैसे कमाते हास्पिटल भी कहीं अपना बनाते बिमारियां नई नई निकलती जा रही हैं डाक्टरों में मौज मस्ती छा रही है कुछ तो कहते हैं कि सीजन आ गया है रोगियों को डाक्टर ही खा गया है कैसी चिकित्सा आदमी की हो रही है टैस्ट के खर्चे से जनता रो रही है एक बिमारी के कितने टेस्ट हैं आज की दुनिया में डाक्टर बैस्ट है मेडिकल स्टोर से भी है कमीशन मेडिकल शिक्षा में ये कैसा नया पन नसेडियों का खून सस्ता मिल रहा है ब्लडबैंक देखो बस्तियों में खुल रहा है अब तो परमानेन्ट शूगर हो गया है औषधी से जिस्म सारा खेा गया है उपचार के कितने तरीके चल पडे हैं धन पास हो तो डाक्टर सीधे खडे. हैं डीग्रीयों में वैध डाक्टर हो रहे हैं सर पटकते देख सर्जन रो रहें हैं कम्पाउण्डर भी डाक्टर है गांव में मजधार में मौतें पडी हैं नाव में मेडिकल तो स्वास्थ के कारण खडा है अनभिज्ञ है स्वास्थ से अचरज बडा है बिमारियों की किस्म डाक्टर जानता है अवशेष को ही स्वास्थ कैसे मानता है मेडिकल को स्वास्थ का ज्ञान होना चाहिये कौन सा है रोग तन में ध्यान होना चाहिये अज्ञान में स्वास्थ की कैसी चिकित्सा हो रही है हर जगह पर डाक्टरों की मांग उंची हो रही है लाखों रुपये तो मेडिकल के दाखिले में चाहियें प्रमाण दे लाखों रुपये उस काफिले काे चाहिये जिस जगह कइ लाख खो कर एक डाक्टर आयेगा डाक्टर तो खुद ब खुद वी. आइ. पी. हो जायेगा हर तरह के रोग को अब योग भी संभालता है हर सियासी रूग्ण तन में,सल्तनत खंगालता है हर बिमारी की चिकित्सा योग से ही हो रही है ये लंगोटी खादीयों के रोग को ही धो रही है ना जाने कितने रोग हैं,इस देश के संस्कार में उपचार होता है यंहा कंही प्यार में व्यभिचार में अस्वस्थ है मेरा वतन अब हर तरह के रोग से ये शब्द ही अब बोलते है आग के विनियोग से।। राजेन्द्र प्रसाद बहुगुणा(आग) 9897399815 rajendrakikalam.blogspot.com
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    जगमोहन सिंह जयाड़ा जिज्ञासु
    November 11 at 5:37pm ·

    मेरा लाल.....

    उत्‍तराखण्‍ड की,
    धरती बोन्‍नि छ,
    ह्वैग्‍यन मेरा कुहाल,
    नि लेन्‍दा जल्‍म तुम,
    मेरी सजीली गोद मा,
    नि होन्‍दा मेरा यना हाल,
    निराशेक बणि छ बिकराळ,
    बांदर सुगंर कन्‍ना छन राज,
    बांजी पुंगड़ि टूट्यां कूड़ा,
    यू हि रैग्‍यन अब यख,
    बंजेणु छ कुमाऊं गढ़वाळ,
    कुछ त सोचा,
    हे मेरा लाल.....

    -जगमोहन सिंह जयाड़ा जिज्ञासु
    रचना स्‍वरचित एवं ब्‍लाग पर प्रकाशित
    दिनांक 11.11.14
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        Asha Negi, Savitri Saklani Uniyal, Bhagwan Rawat and 40 others like this.
        Pandit Satish Bhatt dard .....
        November 11 at 9:46pm · Like
        Matbar Sajwan I like this poetry
        November 12 at 4:16pm · Like
        पं. राजीव बेलवाल sachai likhi chaSee Translation
        November 13 at 12:42pm · Like
        Mahi Singh Mehta
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    Matbar Sajwan shared a photo to जगमोहन सिंह जयाड़ा जिज्ञासु's timeline.
    November 11 at 2:55pm ·

    Please read completely
    रेलवे स्टेशन पर चाय बेचने वाले लड़के की नजरें अचानक एक बुजुर्ग दंपति पर पड़ी। उसने देखा कि वो बुजुर्ग पति अपनी पत्नी का हाथ पकड़कर उसे सहारा देते हुए चल रहा था । . थोड़ी दूर जाकर वो दंपति एक खाली जगह देखकर बैठ गए । कपड़ो के पहनावे से वो गरीब ही लग रहे थे । . तभी ट्रेन के आने के संकेत हुए और वो चाय वाला अपने काम में लग गया। शाम में जब वो चाय वाला वापिस स्टेशन पर आया तो देखाकि वो बुजुर्ग दंपति अभी भी उसी जगह बैठे हुए है । . वो उन्हें देखकर कुछ सोच में पड़ गया । देर रात तक जब चाय वाले ने उन बुजुर्ग दंपति को उसी जगह पर देखा तो वो उनके पास गया और उनसे पूछने लगा: बाबा आप सुबह से यहाँ क्या कर रहे है ? आपको जाना कहाँ है ? . बुजुर्ग पति ने अपना जेब से कागज का एक टुकड़ा निकालकर चाय वाले को दिया और कहा: बेटा हम दोनों में से किसी को पढ़ना नहीं आता,इस कागज में मेरे बड़े बेटे का पता लिखा हुआ है ।मेरे छोटे बेटे ने कहा था कि अगर भैया आपको लेने ना आ पाये तो किसी को भी ये पता बता देना, आपको सही जगह पहुँचा देगा । . चाय वाले ने उत्सुकतावश जब वो कागज खोला तो उसके होश उड़ गये । उसकी आँखों से एकाएक आंसूओं की धारा बहने लगी । . उस कागज में लिखा था कि......... "कृपया इन दोनों को आपके शहर के किसी वृध्दाश्रम में भर्ती करा दीजिए, बहुत बहुत मेहरबानी होगी..." दोस्तों ! धिक्कार है ऐसी संतान पर, इसके बजाय तो बाँझ रह जाना अच्छा होता है ! इसको इतना शेयर करो कि कोई औलाद यह पढ़े तो जाग जाये ! यह पोस्ट मेरे दिल को छू गईj है & आपके दिल की मैं कह नहीं सकता! अगर आपके दिल छुई है तो इस पोस्ट को शेयर कर.....
    Ashish Raj Vishwakarma‎चुटकुले

    रेलवे स्टेशन पर चाय बेचने वाले लड़के की नजरें
    अचानक एक बुजुर्ग दंपति पर पड़ी। उसने
    देखा कि वो बुजुर्ग पति अपनी पत्नी का हाथ
    पकड़कर उसे सहारा देते हुए चल रहा था ...
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    जगमोहन सिंह जयाड़ा जिज्ञासु
    November 11 at 2:34pm ·
    जगमोहन सिंह जयाड़ा जिज्ञासु's photo.
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        Savitri Saklani Uniyal, Sudarshan Rawat, Bhagwan Rawat and 74 others like this.
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        भगवान सिंह जयाड़ा bahut sundar bhai sahab,,,,See Translation
        November 11 at 4:32pm · Like
        Yogambar Rawat सुन्दर.See Translation
        November 11 at 4:59pm · Like
        Pramod Sati kya batchi bhaji
        November 11 at 5:10pm · Like
        Jot Singh Chand wah bahut sunder bada ji parnamSee Translation
        November 11 at 8:59pm · Like
        Mahi Singh Mehta
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    जगमोहन सिंह जयाड़ा जिज्ञासु
    November 11 at 11:52am · Edited ·

    "कुमगढ़ पत्रिका" के जून, जुलाई.2014 अंक में प्रकाशित मेरी कविता, देव्‍तौं का धाम मा। श्री राजन्‍द्र ढैला "दआदि" जी ने मुझे सूचित किया और यह तस्‍वीर भी भेजी। दिनांक: 11.11.14
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    "कुमगढ़ पत्रिका" के जून, जुलाई.2014 अंक में प्रकाशित मेरी कविता, देव्‍तौं का धाम मा। श्री राजन्‍द्र ढैला "दआदि" जी ने मुझे सूचित किया और यह तस्‍वीर भी भेजी। दिनांक: 11.11.14
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        बलबीर राणा and चन्द्रशेखर चौधरी like this.
        Mahi Singh Mehta
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    जगमोहन सिंह जयाड़ा जिज्ञासु
    November 11 at 11:52am · Edited ·

    "कुमगढ़ पत्रिका" के मई-2014 के अंक में प्रकाशित मेरी कविता, बाटु देखणु छौं। श्री राजन्‍द्र ढैला "दआदि" जी ने मुझे सूचित किया और यह तस्‍वीर भी भेजी। दिनांक: 11.11.14
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    "कुमगढ़ पत्रिका" के मई-2014 के अंक में प्रकाशित मेरी कविता, बाटु देखणु छौं। श्री राजन्‍द्र ढैला "दआदि" जी ने मुझे सूचित किया और यह तस्‍वीर भी भेजी। दिनांक: 11.11.14
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        Asha Negi, पंकज सिंह महर, Amit Gusain and 6 others like this.
        बलबीर राणा बधाई दिदाSee Translation
        November 11 at 12:55pm · Like
        राजेन्द्र ढैला 'दआदि' शानदार प्रस्तुति आदरणीय......See Translation
        November 11 at 4:33pm · Like
        Govind Charan Bhut bndas bhai ji
        November 11 at 6:49pm · Like
        Bijay Nand Dobhal gm
        November 12 at 6:54am · Like
        Mahi Singh Mehta
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    Rajendra Bahuguna‎जगमोहन सिंह जयाड़ा जिज्ञासु
    November 11 at 10:30am ·

    नोट की महिमा

    धन्य है वो आदमी जिसने बनाया नोट है
    आज की दुनिया में धन परमात्मा पर चोट है
    धन धरम है धन करम है धन जमी जागीर है...
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    नोट की महिमा धन्य है वो आदमी जिसने बनाया नोट है आज की दुनिया में धन परमात्मा पर चोट है धन धरम है धन करम है धन जमी जागीर है धन वार है धन पार है धन धर्म की तस्वीर है भगवान का मन्दिर बनाने के लिये धन चाहिये मक्का,मदीना,हज में जाने के लिये धन चाहिये ध्यान करना है प्रभू का ध्यान में धन चाहिये अपमान करना है प्रभू का ज्ञान में धन चाहिये चर्च,मन्दिर मस्जिदें भी आड. में धन के खडी सम्प्रदायों की जमी की नींव भी धन से पडी धन से जो सम्पन्न है वो राष्ट्र बनता जायेगा मेरा वतन तो राष्ट्र में महाराष्ट्र ही कह लायेगा धन के कारण हर मजहब आज आगे बढ. रहा धन के कारण आदमी चांद पर भी चढ. रहा धन धूरी है धाम की परमात्मा बिन चल रही है ब्रह्मांड की पूरी व्यवस्था भी धनिक से पल रही है धन के बिना भगवान मन्दिर में नजर आते नही नंगे मनुष भगवान को भी धर्म में भाते नहीं अब दीनता में भक्त भी भगवान को गाता नहीं घर में गरीबों के कभी भगवान भी जाता नहीं हर जगह गीता गढी है राम की चर्चा बडी है धर्म के इस देश में दीन ही धन की कडी है युग - युगों से धर्म ध्वज व्योम छूता जा रहा है आड.लेकर हर मजहब धन से धरम को खारहा है धन ही सहारा बन गया हर आदमी का देश में लक्ष्य है धन प्राप्ती चाहे किसी भी भेष में ना जाने कितने मर रहे कितनों को अगुवा कर रहे शैतान है हर शख्सियत धन से धरम को चर रहे आज प्रजातन्त्र में चुनाव मंहगा हो रहा है लक्ष्य दिल्ली का बनाकर देख नेता रो रहा है पंच और पंचायतें ,प्रधान बिकते लाख में राजनीति में करोडों रोज मिलते खाक में डाकुओ ने धन भी काला कर दिया हैे देश में धन धवल अब हो रहा है साधुओ के भेष में दान भी लाखो करोडो का लंगोटे खा रहे है पातंजलि के शिष्य, धन काला हमें दिख ला रहे है कालेधन के नाम से, सत्ता सियासी चढ रहे हैं कालेधन के नाम से, नंगे भी आगे बढ रहे हैं राजनीति से तो काला धन भी गायब हो गया देख लो इस देश में धन भी अजायब हो गया काट दे जो भेद को ऐसा गरम हो आदमी शालीनता का हर मजहब,ऐसा नरम हो आदमी राष्ट्र में पैदा करो धन हो , धरम हो आदमी स्वर्ग का हो पथ,पथिक ऐसा करम हो आदमी राजेन्द्र प्रसाद बहुगुणा(आग) 9897399815 rajendrakikalam.blogspot.com
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        बलबीर राणा likes this.
        बलबीर राणा यथार्त के धरातल पर खरी रचना बहुगुणा जीSee Translation
        November 11 at 11:49am · Like
        Rajendra Bahuguna thanks
        November 11 at 6:24pm · Like
        Mahi Singh Mehta
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    जगमोहन सिंह जयाड़ा जिज्ञासु was with जगमोहन 'आज़ाद'.
    November 10 at 11:06am ·
    जगमोहन सिंह जयाड़ा जिज्ञासु's photo.
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        You, Rajiv Nayan Bahuguna Bahuguna, Savitri Saklani Uniyal, Gokul Negi and 64 others like this.
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        Harendra Parihar मन की जिज्ञासा को प्रस्तुत करने हेतु आप हमेशा आजाद है श्रीमान ।।।
        November 10 at 1:24pm · Like
        Puran Pant Pathik वाह चिरजीवी रंयॉ अाजाद- जिग्यांसु.See Translation
        November 11 at 7:40am · Like
        Pramod Chouhan भैजी तुस्सी ग्रेट हो i love you yaar
        November 13 at 5:23pm · Like
        Rajbeer Rawat Hum bhi Garhwali. ......RAnsolidhar ki chadhai humun bhi dekhi...
        10 hrs · Like
        Mahi Singh Mehta
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    Rajendra Bahuguna‎जगमोहन सिंह जयाड़ा जिज्ञासु
    November 9 at 6:47pm ·

    अवस्थापना का दोषी कौन?
    सात माह का बच्चा पैदा करने वाले
    लावारिस जिसको भी चाहे बाप बनाले
    उत्तराखण्ड का भ्रूण गर्भ में चिल्लाता है
    राजनीति,का भूत शिशू को क्यों खाता है...
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    अवस्थापना का दोषी कौन? सात माह का बच्चा पैदा करने वाले लावारिस जिसको भी चाहे बाप बनाले उत्तराखण्ड का भ्रूण गर्भ में चिल्लाता है राजनीति,का भूत शिशू को क्यों खाता है लावारिस के वारिस देखो ,चौराहों पर अधमरे शिशू को सभी,समेटे हैं बाॅहो पर स्वीटजर- लैण्ड बनाने के सपने देखे हैं राजनीति ने ये कैसे पासे फेंके हैं राजनीति में अफरा - तफरी कैसे आयी काट रहे हैं बकरे देखो खटिक कसाई केन्द्र -समर्पित होता तो नेता ही मरते सडक छाप क्यों उत्तराखण्ड मेंआज पसरते फिर कौन खोदता भ्रष्टाचारो की ये खाई लोक-पाल की क्या जरूरत थी मेरे भाई राजनीति विस्तार स्वयं का ही करती है नई पीढी तो बिना मौत के ही मरती है अब तो मरने वाले भी क्या सोच रहे हैं अपने कफन से अपने आॅशू पोंछ रहे हैं चौराहो पर प्रतिमायें भी चिल्लाती हैं असुरों की ,इस देवभूमि में, क्यों ख्याति है जो मरे राज्य के खातिर दर-दर भटक रहे हैं सभी विरोधी सत्ता कैसे सटक रहे हैं बलात्कार की कीमत नेता बाॅंट रहे हैं उत्तराखण्ड की इज्जत घर-घर छाॅंट रहे हैं गाॅंव बसाने से पहले भिखमंगे छाये पिता बडोनी अपने पुत्रों से शर्माये ना समझी के संघर्षों ने राज बनाया देव-भूमि को ,दिल्ली वालों ने ही खाया मूॅंछों का अस्तित्व दाॅंव पर लग जाता है बिना मूॅंछ का आॅंख मूंद कर क्यों खाता है पढे़-लिखे भी धूल सडक की फाॅंक रहे है सेवा से निवृत्त चाकरी झाॅंक रहे हैं उत्तराखण्ड में सन्यासी की ,कैसी मस्ती सभी विरक्ति बसा रहे हैं अपनी बस्ती राजनीति में आने को तैयार खडे हैं देव-भूमि में, काले-धन के अलग धडे़ है नेताओं के फारम हाउस बन जाते है जाॅंच कराओ ,कंहा से ये पैसे आते हैं सारी माया परिवारों में बंटी पढी है नई पीढी क्यों चौराहों पर आज खडी है नेता जी भी वेतन भत्ता मांग रहे हैं सेवाओं की सारी शर्तो को लांघ रहे हैं भीख मांगकर जनता से जनता को खाया उत्तराखण्ड बना कर हमने ये क्या पाया लोकपाल की बात सदन में करने वालों मांस, मदिरा खाओ,उत्तरा-खण्ड पचालो क्या इन सबके बच्चे भी भूखे सोते हैं असुर आज अस्तित्व शिखर का क्यों खोते हैं उत्तराखण्ड में भू-माफिया ही भारी हैं तहसीलों में फर्जी बे - नामा जारी है बाबाओं की लीजें नेता कटवाता है भिखमंगा,भिखमंगो का कैसा भ्राता है यही सार है, नंगा ,उत्तरा-खण्ड खडा है चोर-उचक्का नैतिकवादी , आज बडा है कालीदास ने सदा ही शाखाओं को काटा उत्तराखण्ड को उत्तराखण्ड वालों ने बाॅंटा गंगा का जल झीलों में क्यों रूका हुआ हेै क्यों भारत का भाल,शर्म से झुका हुआ है राजनीति का,क्या इस पर चिन्तन होता है ये शिखर सदा से मुर्देां को ही क्यों ढोता है समय आ गया जागो,उत्तराखण्ड बचाओ पानी और जवानी अब ना और बहाओ नई पीढी क्यों भटक रही दाने-दाने को उत्तराखण्ड मोहताज खडा इज्जत पाने को ।। राजेन्द्र प्रसाद बहुगुणा(आग) 9897399815 rajendrakikalam.blogspot.com
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        Mahi Singh Mehta
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    About
            Worked at Writing
            Past: merapahadforum.com (A social project)
            Studied at Anjanisain, Tehri garhwal
            Class of 1981
            Lives in New Delhi, India
            From Tehri-Garhwal, Uttarakhand, India
            Married
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    जगमोहन सिंह जयाड़ा जिज्ञासु's photo.
       
    जगमोहन सिंह जयाड़ा जिज्ञासु's photo.
       
    मित्र श्री समीर रतूड़ी और विनोद नौटियाल के साथ कवि जिज्ञासु
    भाई Rajiv Nayan Bahuguna Bahuguna जी का आन्दोलन की बैठक में संबोधन
       
    मलेथा के पाँच आन्दोलनकारी(दायें से बाएँ ) दिल्ली की बैठक में .
       
    गढ़वाळ का, ढुंगौं मा बैठि, मन खुश होन्‍दु छ भारी, मुल्‍क छुटिगी, पोटगि का बाना, होयिं छ भारी लाचारी.... -कवि जगमोहन सिंह जयाड़ा "जिज्ञासु" की अनुभूति 01.10.2014, दूरभाष: 09654972366
    फरीदाबाद में आयोजित कवि सम्‍मेलन में भाग लिया।
       
    जगमोहन सिंह जयाड़ा जिज्ञासु's photo.
       
    जगमोहन सिंह जयाड़ा जिज्ञासु's photo.
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        हे उत्तराखंडवासी....तेरा उत्तराखंड तुझे मिला.....जो माँगा था मिल गया....अब तेरे सारे दुःख दर्द दूर हो जायेंगे....लेकिन याद रखना....ये सत्य नहीं है.....तू भटकता ही रहेगा....उत्तराखंड से दूर....न घर का.
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    जगमोहन सिंह जयाड़ा जिज्ञासु
    November 7 at 11:57am ·

    मित्र श्री समीर रतूड़ी और विनोद नौटियाल के साथ कवि जिज्ञासु
    — with Vinod Nautiyal and Sameer Raturi.
    See Translation
    मित्र श्री समीर रतूड़ी और विनोद नौटियाल के साथ कवि जिज्ञासु
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        Savitri Saklani Uniyal, Harish Rawat, Manoj Tiwari and 71 others like this.
        View 3 more comments
        दिनेश सिंह राणा गढ़वाली अति सुन्दरSee Translation
        November 7 at 1:02pm · Like · 1
        Puran Singh Bhandari Nic one.
        November 7 at 2:05pm · Like
        Gopal Bhatt Nice pic
        November 7 at 4:24pm · Like
        Radhey Shaym Beautiful
        November 8 at 3:06am · Like
        Mahi Singh Mehta
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    जगमोहन सिंह जयाड़ा जिज्ञासु
    November 5 at 10:56am ·

    पर्वतराज हिमालय...

    जिसे निहारा मैंने,
    बचपन से,
    जब जब गया,
    चन्द्रकूट पर्वत शिखर पर,
    मां चन्द्रबदनी मंदिर में,
    अहसास किया,
    हंसता हैं हिमालय,
    हमें निहार कर....

    आवाज उठ रही है,
    हिमालय बचाओ,
    ऐसा क्या हो गया?
    संवेदनशील हिमालय को,
    जो आज आशंकित हैं,
    हिमालयी क्षेत्र के लोग....

    सुनते हैं,
    कीड़ा जड़ी के लिए,
    लालची लोग,
    ग्लेशियर को जबरदस्ती,
    पिघला रहे हैं,
    कहो तो,
    संवेदनशील हिमालय को,
    सता रहे हैं.....

    हिमालयी क्षेत्र के लोग,
    हिमालय को,
    शिव पार्वती का,
    निवास मानकर,
    जो है भी,
    पूजते हैं,
    पास होते हुए भी,
    नहीं सताते उसको.....

    कौन जाता है,
    हिमालय के पास,
    पर्यटक बनकर,
    मानते हैं,
    सबका है हिमालय,
    कूड़ा घर है क्या ,
    ऐसा क्यों करते हैं?

    चिंतन करें,
    हिमालय के पास,
    एक पेड़ लगाते,
    कूड़ा साथ लाते,
    मूक हैं सभी,
    हिसाब लगता है,
    कितने आए,
    कितने कमाए,
    ये भी तो सोचो,
    हंसने वाला हिमालय,
    आंसू टपका रहा है.....

    पर्वतजन का पहाड़,
    सूना है आज,
    सूने सूने गांव,
    टूटते घर,
    बंजर होते खेत,
    ऐसा हो गया है,
    हिमालयी क्षेत्र में,
    कुछ मित्रों ने,
    सैकड़ों मील पैदल चलकर,
    जानने की कोशिश की,
    हिमालय बचाओ,
    अभियान के तहत,
    पर्वतजन और हिमालय,
    क्यों हैं संकट में?
    भागीदार बनें,
    संदेह न करें......

    माधो सिंह भण्डारी जी के,
    पुरातन गांव,
    मलेथा के लोग,
    सजग हैं,
    और दिखा दिया,
    ऐसे ही तो बचाना है,
    पहाड़ और हिमालय के,
    अस्तित्व को......

    पर्वतराज हिमालय,
    अस्तित्व में रहेगा,
    हंसता रहेगा,
    हमारा भी,
    अस्तित्व रहेगा,
    जागो! जागो!
    कहीं अबेर न हो जाए,
    हिमालय से बहती,
    सदानीरा नदियां,
    कहां से दिखेगीं?
    आने वाली पीढ़ी को......

    -जगमोहन सिंह जयाड़ा "जिज्ञासु"
    "हिमालय बचाओ अभियान" को समर्पित मेरी ये स्वरचित कविता सप्रेम भेंट।
    दिनांक 3.10.2014.

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

Shailendra Joshi
November 12 at 8:15pm ·

दिल का दर्द छुपा के हँसता है
है जोकर भी
दिल खोलकर हंस सके
ऐसा फनकार तो बस
जमाने मे बच्चा है यार
हँसने के बाकी सब
किरदार झूठे है
नकली है
बेकार है
रचना ...........शैलेन्द्र जोशी

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

Shailendra Joshi
November 13 at 3:45pm ·

बोला दी मन की बात
जो लुकायी रै
जिकुड़ा का कोठार
तेरी मायान
छोड़ी न मैकू
बौंण ना घार
बौडी ऐजा
माया की छवी बथा लेकी
म्येरा घर संगसार
हो म्येरी मायादार
रचना .....शैलेन्द्र जोशी

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

Shailendra Joshi
November 13 at 8:12pm · Edited ·

भै चंट
बौ संट रैनी सदानी
तुम गितार भैजी
बौ मा ही गीत बणादा रैनी सदानी
स्या अच्छी बात नि
कबि बौ तुम बने बजरिया
कबि बने लबार
तुम बौ क्या क्या बने
पर गितार दा
तुमन भैजी बने सदानी माफीदार
रचना .....शैलेन्द्र जोशी

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

Shailendra Joshi
November 14 at 1:36pm ·

जब बीटी खिची मिन अपणी सेल्फी
भोर भोरिक आणा छोरों का कमेंट
क्वी बोल्नु बने दे मिथै अपनी गर्ल फ्रेंड
क्वी बोल्नु बने दे अपनी ब्योली
एक अनार चा सौ बिमार छिन
कै कै कु करू दिल कु इलाज
दिल तू ही बता
ज्वान त ज्वान
बुडिया बि लाइक
करदा म्येरी सेल्फी
क्वी शेयर करदा
क्वी करदा डाऊनलोड
कन्न कमाल करियु त्येरु सेल्फी
सैरी दुन्या मा बबाल करयु त्येरु सेल्फी
सब्बयु की जिकुड़ी राणी बानायु
मैकू त्वेंन सेल्फी
फेसबुक मा म्येरी सेल्फी
ट्विटर मा म्येरी सेल्फी
लाइन मा म्येरी सेल्फी
वाटसअप मा म्येरी सेल्फी
वी चैट मा म्येरी सेल्फी
कुजणी कख कख
कै कै सोशल साईट मा म्येरी सेल्फी
पर वू कु भगी होलू
जैका जुकड़ा तक पौचली
म्येरी सेल्फी
रचना ................शैलेन्द्र जोशी

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

"घिंडुड़ी" मेरी एकुलांस दूर कै दे।

घिंडुड़ी घिंडुड़ी फुर्र उडैकि ऐजा ,
ऐकि हमरि डिंडलिम बैजा/ त्वेथै कौणी झुंगरु खलौलूं,
नवळकु ठंडू पाणि पिलौंलू, यखुली छौ मी दगड़म ऐजा,
घिंडुड़ी फुर्र उडै कि ऐजा/ त्वेखुणैकि मि घोळ बणौंलू,
बिगच्यॉ नौनूं थै नि बथौंलू, दगड़म घिंड्वा दा थै भि लैजा,
घिंडुड़ी फुर्र उडैकि ऐजा/ गुणमुण गुणमुण छ्वीं लगौंला,
हैंसला ख्यलला सुख दुख बंटला, म्यारा दगड़म ख्यलणकु ऐजा,
घिंडुड़ी फुर्र उडैकि ऐजा/ अपणा फौंकुड़ मिथै तु दे दे,
मिथै भि दगड्या उडणु सिखै दे, म्यारा सुपिना सच तू कैजा,
घिंडुड़ी फुर्र उडैकि ऐजा, ऐकि हमरा डिंडलिम बैजा/

सर्वाधिकार सुरक्षित .

.......... रचनाकार _धर्मेन्द्र नेगी 'खुदेड़'
केशव डोबरियाल "मैती

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

प्रणाम,सेवा आप सभी स्नेहीजनों थैं।
रंत रैबार,कुशल समाचार यूँ पहाड़ों बटी,
सब कुछ छुटी भैजि पर मेरी अपड़याँस नि छुटी,
भाण्डों फर भी अनवार पाड़ों की................।
फोटो साभार दिनेश राणा गढ़वाली जी
"मैती"