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उत्तराखंड पर कवितायें : POEMS ON UTTARAKHAND ~!!!

Started by Dinesh Bijalwan, August 05, 2008, 02:18:42 PM

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

जगमोहन सिंह जयाड़ा जिज्ञासु
17 hrs · Edited ·

आपतैं द्वी हात जाेड़िक मेरी सेवा सौंळि,

प्‍यारा उत्‍तराखण्‍डी भै बंधो।

यनु ना सोचा हे भुलाैं,
अब हम ज्‍वान निछौं,
उत्‍तराखण्‍ड की भूमि मा,
जल्‍म ल्‍हीक महान छौं....

ज्‍युंदा रौला जब तक,
अपणि भाषा बोलला,
यू दुनिया कू काम छ,
कुजाणि क्‍या सोचला.....

तुमारु गढ़वाळि भैजि
-जगमोहन सिंह जयाड़ा जिज्ञासु
दिनांक 25.6.2015

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

जगमोहन सिंह जयाड़ा जिज्ञासु
June 19 at 3:49pm ·

जूं पड़ला,
तेरी लोळी मा लठयाळा,
जु तू प्‍यारा पहाड़ नि जैलि,
बिष्‍ट भुला,
वे दिदा कू बोलि,
जू ऐंसु का काफळ,
ज्‍यु भरिक नि खैलि....

-जगमोहन सिंह जयाड़ा जिज्ञासु
दिनांक 19.6.2015

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

जगमोहन सिंह जयाड़ा जिज्ञासु
June 18 at 11:03am ·

मेरा 4995 फेसबुक दगड़या ह्वैग्‍यन,
भारी घंघतोळ मा छौं,
क्‍या होलु अग्‍वाड़ि,
स्‍वागत छ सब्‍यौं कू,
जग्‍वाळ मा छ,
मेरी फेसबुक रुपी सग्‍वाड़ि.......

-जगमोहन सिंह जयाड़ा जिज्ञासु,
बाटु आपन हि बतौण क्‍या करौं मैं अग्‍वाड़ि,
दिनांक 18.6.2015

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

बात अपनी बताता हूँ मैं

बात अपनी बताता हूँ मैं
चलो तुम्हे अपने पहाड़ों में घूमता हूँ मै
किन्गोड़े काफल का स्वाद चखाता हूँ मै
गदेरे का ठण्डु मिठू पानी पिलाता हूँ मै
बात अपनी बताता हूँ मैं

मेरे बीते बचपन मेरे बाँकपन से मिलाता हूँ मै
मेरे गाँव मेरे अपनों से तुम्हरी भेंट करता हूँ मैं
रोज इस पावन गंगा में डुबकी लगाता हूँ मै
इस माटी को अपने शीश पर सजाता हूँ मै
बात अपनी बताता हूँ मैं

बावन किलों से आज तुमको मिलता हूँ मै
काँटों से कैसे फूल खिलाना तुमको वो मलेथा दिखता हूँ मै
मेरे इस उकाल उंदार में आज तुम्हे खूब दौड़ता हूँ मै
जंगलों में सजे लाल बुरांस पीली फ्योंली तुम्हे दिखता हूँ मै
बात अपनी बताता हूँ मैं

रामी बहुरानी अब हर घर घर में खड़ी तुम्हें दिखता हूँ मै
तिलु रौतेली चन्द्रसिंह गढ़वाली माधव भंड़री की गाथा गाता हूँ मै
डूबे टिहरी गढ़वाल से तुझे आज मिलता हूँ मै
पहाड़ खाली हो रहे हैं अब उस ख़ामोशी को आज सुनाता हूँ मै
बात अपनी बताता हूँ मैं

ढोल दामो के साथ चल आज तुझे नचता हूँ मै
झुमेलो खुदेड़ गीत पांडव नृत्य चंचेरी छपेली लगता हूँ मै
खो रही उत्तराखण्ड के लोक संस्कृति से मिलाता हूँ
अपनापन सादगी भरा जीवन क्या होता तुझे आज दिखता हूँ मै
बात अपनी बताता हूँ मैं

बालकृष्ण डी ध्यानी
देवभूमि बद्री-केदारनाथ
मेरा ब्लोग्स
http://balkrishna-dhyani.blogspot.in/search/
में पूर्व प्रकाशित -सर्वाधिकार सुरक्षित

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

जगमोहन सिंह जयाड़ा जिज्ञासु
June 25 at 3:19pm · Edited ·

आपतैं द्वी हात जाेड़िक मेरी सेवा सौंळि,

प्‍यारा उत्‍तराखण्‍डी भै बंधो।

यनु ना सोचा हे भुलाैं,
अब हम ज्‍वान निछौं,
उत्‍तराखण्‍ड की भूमि मा,
जल्‍म ल्‍हीक महान छौं....

ज्‍युंदा रौला जब तक,
अपणि भाषा बोलला,
यू दुनिया कू काम छ,
कुजाणि क्‍या सोचला.....

तुमारु गढ़वाळि भैजि
-जगमोहन सिंह जयाड़ा जिज्ञासु
दिनांक 25.6.2015

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

यनु ना सोचा हे भुलाैं,
अब हम ज्‍वान निछौं,
उत्‍तराखण्‍ड की भूमि मा,
जल्‍म ल्‍हीक महान छौं....

ज्‍युंदा रौला जब तक,
अपणि भाषा बोलला,
यू दुनिया काम छ,
कुजाणि क्‍या सोचला.....

तुमारु गढ़वाळि भैजि
-जगमोहन सिंह जयाड़ा जिज्ञासु
दिनांक 25.6.2015

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

Garhwali Classes "गढ़वाली छुई"


मैदानुं माँ रैकि पहाडुं की कल्पना हूणि छन
भग्यान विनोद उनियाल (अमाल्डु , डबरालस्यूं , पौड़ी गढ़वाल )

अन्नु दा कि
फटीं कुर्ति
फटीं सुलरि
समाज -वादै खोज मा
पहाड़ छोड़ीइ
मैदानु मा ऐ ग्ये
वे कि
फटीं टुपलि
बदले ग्ये खादिकि
सफेद टोपी मा
कुर्ति
अर सुलरि -चम्म सुलार
बृजु दा अब
पक्को बगुला भगत अनिल उदयपुरी बण्यू च
मैदानु , दिल्ली मा रैकि
पहाडुं की कल्पना हूणि च
ऊंचि ऊंचि डाँड्यूं मा
कागजी कुँआ ख्वदेणा छन
अर
तब ब्याखान दियेणा छन
ऊँ हौरि अन्नुऊँ तैं
जौंका गात पर
फटीं कुर्ति बि नी च
भुलौं टक लगै सुणों
समाजवाद , विकास सुदी नि आंदो
यां का बाना
खांण प्वड़दन
खैरि -सुसगरि
ख्यलण प्वड़दन कतनै खंड
बदलण प्वड़दन -दल का दल
मिथै इ देखल्यावदि

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

बिन दारु बामण पूजा नि करदो

रचना - चन्द्र सिंह राही

भितर नीच अन्न की दाणी
बुरो बिसन ह्वेगे शराब को पाणी
देवतौं की भूमि छौ यु उत्तराखंड
शराब कर गए यख खंड मंड
दारु पेकी ह्वेगे उत्तराखंड
आपस मा फ्वड़दन बरमंड
मनख्यात थैं या रागस बणाणी
बुरो बिसन ह्वेगे शराब को पाणी
गंदी गंदी गाळी बकण लग्यां छीं
रौल्यूं रौल्यूं उतौणा प्वडाँ छीं
झुल्ला चिर्यां छीं बरमंड फुट्यां छीं
कुकुर बी तौं देखि भुकण लग्यां छीं
इंसानियत की कदर नि जाणी
बुरो बिसन ह्वेगे शराब को पाणी
बिन दारु बामण पूजा नि करदो
दारु की झांज मा श्लोक च बुल्दो
बिन घूँट जगरी से डौंरी नि बजदी
बिन दारु क्वी बि पूजा नि हूंदी
धर्म कर्म की जड़ उगटणी
बुरो बिसन ह्वेगे शराब को पाणी
रीति रिवाज ह्वेगीं खराब
मुर्दा फुकणकु बी चैंद शराब
मनिख जोनी की कदर नि जाणी
बुरो बिसन ह्वेगे शराब को पाणी
पर्चण्ड बणगे बोतल राणी
बुरो बिसन ह्वेगे शराब को पाणी
(गीत गंगा से साभार )

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

मेरी एक गढ़वाली हास्य गजल (कणाट)

भैर हम हैंसि हैंसिकि भ्यंटेते रहे।
भितरखण्ड काचा गैथ सि कुटेते रहे।।

कौल किया क्वलण से हमने गर्लफ्रेंड को।
अर उज्यड़्या ढांगु सी हम चुटेते रहे।।

प्यार के उपन बणी घुस गए गात में।
चट पखड़े गये हम मस मिंडेते गये।।

म्याळ फुंड झौड़ू बणी भाजते हम फिरे।
जगदी मुछ्यळी से हम ठुस डमेते रहे ।।

पैग पीके झूमते झूमते हम घर चले।
द्यबता उन पे आ गया हम निछेते रहे ।।

तुमड़ी के भट बने तो तातू तव्वा में गिरे।
तड़बड़ तड़बड़ तीड़ गये अर भुजेते रहे।।

सूखू मुंड्या बणी हम गुठ्यार म थे पडे़।
कबि फडे़ते रहे , कबि फुकते रहे।।

माया कू सळसुळू ज्यूड़ू हो गया "जुयाळ "।
ना उफरते रहे ना ब्वटेते रहे ।।

Harish Juyal Kutaj

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

कविता उत्तराखंड की बालकृष्ण डी ध्यानी with Vikas Dhyani and 103 others
2 hrs ·

फिर देका सुंदर ऐ फजल व्है जालि...।

फिर ऐग्याई हो अ हो अ
फिर ऐग्याई
ऐग्याई ये फजल
म्यारा पहाड़ो मा
म्यारा उकाळि उन्दरु मा
डाँडो को घारू मा
फिर ऐग्याई हो अ हो अ
ऐग्याई ये फजल

कन छै ग्याई हो अ हो अ
कन छै ग्याई
छै ग्याई ये रे फजल
ये सरया अकास मा
भर फाल मार चखुला सरग घर मा
फिर ऐग्याई हो अ हो अ
ऐग्याई ये फजल

उठ गै सरी धरती
कण उजाळु रे छैगे
जियु मेरु ये सरीर मेरु
कन जगी गे रे
फिर ऐग्याई हो अ हो अ
ऐग्याई ये फजल
.
अंधार ये छोड़ि कि
ऐगे ऊ सब दूर गई बाटा मोडिकी
क्वी नि बैठ्यूं अब यख हेर मा
सब बस्या अब अपरा अपरा डेरा मा
फिर ऐग्याई हो अ हो अ
ऐग्याई ये फजल

सुप्निया म्यार देख्या
जन इनि सच व्है जाई
मेरा पहाड़ों राम राज्य ऐ जाई
फिर देका सुंदर ऐ फजल व्है जालि...।

बालकृष्ण डी ध्यानी
देवभूमि बद्री-केदारनाथ
मेरा ब्लोग्स
http://balkrishna-dhyani.blogspot.in/search/
में पूर्व प्रकाशित -सर्वाधिकार सुरक्षित