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उत्तराखंड पर कवितायें : POEMS ON UTTARAKHAND ~!!!

Started by Dinesh Bijalwan, August 05, 2008, 02:18:42 PM

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

Shailendra Joshi
June 11 at 12:22am · Edited ·

घमया कपड़ा
रंग बि लिगी
उड़ैकी
अफ्फु दगड़ी
घाम रूडी बुडी
घाम मा न जा
छोरी उड़ी
लिजालू रंग तेरु बि
घाम रूडी बुडी.......................शैलेन्द्र जोशी

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

पार्ट टैम जॉब !
-.--.--.--.--.-
हा ! हा !
हे निरबै करा भ्यालुंद लमडुंणु छै उनै !
हैल कांधा मा अर स्वटगी हत् मा हर्बि हर्बि बल्दु कमर फर चटाग लगैक खाडु भुला गौं का बाटा मा मील ग्या !

खाडु भुला थै पिछला नौ साल बटी हैल लगांदा द्यखुंणु छौं !
हमरी द्वी फांगि भि वेकी छीं चलती करीं !
मि अभि उतरु टैक्सी बटै ! आजी औं दिल्ली बटी छै साल मा !

हे भुला खाडु ! हैल लगांणो लागी ? मिल हल्या भुला थै धै लगैं ।

हां भैजी ! तुम सुणावा दिल्ली बटै छौ आंणा ! चांणा ल्हा छौ मैकु ?
हब्बै ! चांणा त चल मि त्वे खवै द्यूंलु पर इन बथा भुला हैल लगांणामै ह्वे जांद त्यारू गुजरू ?

भैजी आप भि क्य बात कना छौ ? हैला कै सारा रैंदु त् कब्यकि छपिंडी खये जांदी मेरी ।
भैजी ! मि बुनाई 'पारटैम' भि करूदु !

हैं ! क्य ब्वाल तिल ? पार्ट टाइम !
हां हां भैजी मीम फुरसत नी च काम भौत छीं मीमा !
द्वी चार त् मीथै छ्वडण भि प्वड़दीं !

लाटा मि ये गढवालै बात कनु छौं !
यख क्य पार्ट टाइम च रै ?

द कतगा गिणौं दादा !
त् सूंणा धौं !
दिन म तीन घंटा हैल ।
द्वी घंटा टैक्सीयूं फर कलेंडरी ! शामद्वौं द्वी घंटा कंट्रोलै दुकनी म् राशन त्वलंणु ।
रात जागिरी दगड़ थकुली बजांणी और ढौल पुजणु ।
बाकी सर्या गौं की सगोड़ी पातीयूं मा सिकोटी गार्ड अलग
सिक्योरिटी गार्ड मतलब ?

मतलब भैजी गूंणी बांदर सुंगर अटगांणो काम ! चोरी का कखड़ा खांण वला त् राया नि छीं इलै चोरू से निजरकी च ।

वैका बाद दादा ब्यो का सीजन मा क्य ब्वलदीं तुमरी दिल्ली मा ह्या 'ईवेंट मैनेजमेंट ' सिनी कुछ , वा सर्विस अलग से दींदु लोग ठ्यका दे जंदी मीथै ब्यवो अरेंजमैंट को ।
जैमा चाँदनी दरी , टैंट खुर्सी तौला भांडा तैका चूल्हों का ढुंगा लखुड़ु बेदी निर्माण से ल्हेकर क्याला आम पता दुबुलु सब मीथै अरेंज करंण प्वड़दीं ।गौदानै बाछी भि मी लांदु । बस इन समझ ल्या कि गौंमा कल्यो बंटण से ल्हेकर दुहराबाटा लड्डू बटंण तक म्यारू ठ्यका रैंद ।

ऊपर से गर्मीयूं की छुट्टयूं मा लोग फोन कैर दींदी कि फलणी तारीक घौर आंणा छौं जरा भितरखंड भैरखंड झाड़ पोछ कैर दे ! सब्या गौंकरों की चाबी मीमै रंदी ।
सो बैंक लौकर वलु काम अलग से ।
भैजी फुरसत नी बिलकुल ना ! द्वी हेलपर भि छीं धर्यां । द्वी हौरी छीं चयेंणा पर लेबरू कमी च यख । काम कनो लोग हि नि मिलदा ।

घौर मा म्यारा द्याखा क्य नी च कलर टीवी ,फिरीज , पंखा ,गैस, मोबाइल , सोफा , डबलब्यड ,बैंक अकौंट , अलमारी, राशन फुल ।
तुमी ब्वाला यांखुंणै ही जंयां छीं लोग भैर नथर पुटुग त् कुकर भि भोरी दींद !
है ना दा !

हां भुला म्यारा आँखा ख्वाला त नि छीं तिल पर तड़तड़ा जरूर कैर दीं ।
जुगराज रै इनी बस्यूं रै यख अब गौंमा आंणौ कु त्यारूवी सारू च ।
.
सुनील थपल्याल घंजीर

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

मान्यताप्राप्त ! पलायन
-.--.--.--.--.--.--.-

थमेदीं नि अज्यूं भि लंग्यार, प्रवासीयूं का देश ,
पंक्ति फर पंक्ति
रूंदी पिड़ा जिकुड़ीयूं कि , कवीयूं कि अभिव्यक्ति !

नब्ज चयेंद पाड़ मा सांगल सि चयेंद जीवट इच्छाशक्ति !
यखुलि नि छौं मि बिना पंखूंणो
'पलायन पंछी'
मुंडमा सब्युं की माटै खैरीयूं की फंची ,
अकलकंठ की बात करद कुमति ।
जग्गा बदलि ,बदली त् गे भक्ति !
निरसू पलायन गीत ह्वे त् जालू बंद ....द्वी एक दिनु मा
प्रवासी भैबंद मान्यताप्राप्त नागरिक छीं बल !
अपंणा अपंणा प्लॉटुमा !
बंणिक पर्यटक आंदा-जांदा छीं अपंणा देश मा !
अर् खौल्ये जंदी बगछट मौलदा डांडौं कु अवारापन देखि अफ्वी ,
चम चलक्वार ऐ जांद मुखड़ीयूं
पहाड़ा सौंर्दयगीत लगंदीं जब आस औलदी प्रवासीयूं कि ।
.
सुनील थपल्याल घंजीर

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

तुम लगा पलायन का गीत
मैं अबेर च होणी
तुम बिचारा दिल्ली बम्बे वाळा
ह्वेगी होली खाणि पेणी
तुम लगा पलायन का गीत
मैं अबेर च होणी

सुबेर उठिक साळी जाण
मुण्ड मां गागर पाणी ल्योंण
झट रोट्टि कल्यो की बणाण
नितर नोनूं न भूखि इस्कूल चलि जाण
फोन मां बि बच्याणे बगत नी च होणी
तुमलगा पलायन का गीत
मैं अबेर च होणी

फोटु डाला रांजी बांझी पुंगड़यूँ की
फोटु डाला रीता पाणि पन्देरों की
फोटु डाला खन्द्वार कुड़ीयों की
मि तें त सोंचणे बि कख बगत
अभि हकौण बाँदर गूणी
तुम लगा पलायन का गीत
मैं अबेर च होणी

मि त तब भि यकुली छौ
आज बि यकुली छौं
सुबेर बिटि रात तक सदानि
मैं अबेरे रै होणी
तुम भगयान् बोलला पलायन पलायन
मैं त द्वि रोट्टी चपोणे बि बगत नी च होणी
तुम लगा पलायन का गीत
जों कि कोठि भैर छन चीणी
जु गैन यख बि बोग मारी
तों पलायने पिड़ा च होणी
थूका आँसू लगे कना सुदी
रोणी धोणी
तुम लगा पलायन का गीत
मैं अबेर च होणी

@उमा भट्ट

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

कविता उत्तराखंड की बालकृष्ण डी ध्यानी
June 12 at 5:58pm ·

ईं भरी दिल्ली मा

ईं भरी दिल्ली मा दिल्ली मा
जख देका वख एक उत्तराखंडी दिक् जालु
देक कि तेथे रे पहाड़ी ऊ बौग व्है जालु
ईं भरी दिल्ली मा

क्वी नि कैदु यख बात कैसे
कब और्री कनकै कि व्हैली अब मुलाक़ात तैसे
बिरनु बिरनु व्हैगे रे मुल्की बल अब तू
ईं भरी दिल्ली मा

बल अब लाट साहब व्हैगे तू
सूटबूट टै कु बल अब रखवालदार व्हैगे तू
पछाण कि बी मीथै अब अजाण व्हैगे तू
ईं भरी दिल्ली मा

कन तेर जामा अब मोरीगे
कन तैसे अपरू पहाड़ बल अब छूटिगे
पास रैकी बल अब तू दूर व्हैगे
ईं भरी दिल्ली मा ईं भरी दिल्ली मा

बालकृष्ण डी ध्यानी
देवभूमि बद्री-केदारनाथ
मेरा ब्लोग्स

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

कविता उत्तराखंड की बालकृष्ण डी ध्यानी
June 11 at 5:39pm · Edited ·

बीत ही जाला दिन

बीत ही जाला दिन ये बी
बीत ही जाला दिन
कब तक राला इन ये बी
कब तक राला इन
बीत ही जाला दिन
हो ....बीत ही जाला दिन

ये बी ना राला
सब फुर्र उडी जाला
ये बी ना राला
सब फुर्र उडी जाला
ये जिबान कु चखुल
दाना चुगै की तीन
बीत ही जाला दिन
हो ....बीत ही जाला दिन

आणु व्हालु ऊ ऐ बी जालु
नि आणु वहालु ऊ क्ख भत्ते आलू
आणु व्हालु ऊ ऐ बी जालु
नि आणु वहालु ऊ क्ख भत्ते आलू
फिर इन रास्ता देकि की
बल बोल दे तिल कया कन
बीत ही जाला दिन
हो ....बीत ही जाला दिन

बालकृष्ण डी ध्यानी
देवभूमि बद्री-केदारनाथ
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एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

Shailendra Joshi
June 17 at 3:04am · Edited ·

चोर नौ ही जोड़ सकदु
रचना दगड़ी
क्या माया ममता च
रचनाकार की रचना साथ
स्यु चोर नि समझ सकदु कबि न.................शैलेन्द्रजोशी

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

Shailendra Joshi
June 17 at 8:27pm ·

तेरी रेत
पत्थर पानी
जवानी
नेता
माफिया ठेकेदार
के हाथ गंगा माई.......................शैलेन्द्र जोशी

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

झाली माली देवी जागर या कैंतुरा पूजा वार्ता

इंटरनेट प्रस्तुति - भीष्म कुकरेती

( रणवीर सिंह चौहान , चौरस की धुंयाल से साभार जिन्होंने द्युसी , मन्यार्स्युं केजागरी से यह जागर प्राप्त किया )
झाली माली देवी
पहली ओंकार पैदा होइहुंकार से फुंकार
जै से धौं धौं कार -धौं धों कार से जलंकार
जलंकारम शक्ति पैदा होइ
अष्ट भुजा चार नेत्र हातमा शक चक्र अर गज शक्ति
हल -हल नुस्ल खटक खपर -हे भगवती कुमाऊं
माँ झाली कुण्ड पर ये देवी पैदा ह्वाया हे मेरी माता
ये झाली कुण्ड मा चमोलों का वंश मा पैदा ह्वाया
हे देवी कैंतुरा की झाली माली जैका साथ में
अष्ट भैरों चौसठ काली और नौ बीर नारसिंग
खैकदास -उदास गुरु शाकम्बरी युकु जमाण चलद
सोलह भाई सौड़ बारह भाई पड़ियारी ई झाली
माली की डोली चलदना

स्वच्छ भारत ! स्वच्छ भारत ! बुद्धिमान भारत !

Internet Presentation by Bhishm Kukreti.

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

बेगाना उड़ चला

उड़ चला उड़ चला
आज कहाँ पंछी आज कहाँ
छोड़ अपने पहाड़ों को
वो उड़ चला है कहाँ

बेगाना बेगाना कर के
कर के इस को वीराना यंहा
इस सुंदर जंहा को
अब उजाड़ कर
वो उड़ चला है कहाँ

सजाने सजाने
अब सजाने किस का जंहा
किस का जंहा
पराया कर अपने अपनों को
वो उड़ चला है कहाँ

छुपा रखा छुपा रखा है क्या
छुपा रखा है यंहा
इस तन मन के घेरे में
किस के यादों को दबा कर
वो उड़ चला है कहाँ

बालकृष्ण डी ध्यानी
देवभूमि बद्री-केदारनाथ
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