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Articles By Bhisma Kukreti - श्री भीष्म कुकरेती जी के लेख

Started by एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720, July 26, 2009, 12:54:53 PM

Bhishma Kukreti

                          Faisla: A Garhwali Story about torturing, harassment of women

(Review of Garhwali Story collection 'Banj Ki Peed' by story writer Mohan Lal Negi)

                                               Bhishma Kukreti

[Notes on story of husband  harassing , torturing his wife; Garhwali story of husband harassing , torturing his wife; Uttarakhandi story of husband harassing ,torturing his wife; Mid Himalayan story of husband harassing ,torturing his wife; Himalayan story of husband torturing his wife; South Asian story of husband harassing ,torturing his wife; SAARC Countries story of husband harassing ,torturing his wife; Indian subcontinent story of husband harassing ,torturing his wife; Indian story of husband harassing ,torturing his wife; North story of husband harassing ,torturing his wife]
{पत्नी उत्पीडन विषयी कहानी, कथा;पत्नी उत्पीडन विषयी एशियाई कहानी, कथा;पत्नी उत्पीडन विषयी दक्षिण एशियाई कहानी, कथा;पत्नी उत्पीडन विषयी सार्क देशीय कहानी, कथा;पत्नी उत्पीडन विषयी भारतीय भाषा में कहानी, कथा;पत्नी उत्पीडन विषयी उत्तर भारत की कहानी, कथा;पत्नी उत्पीडन विषयी हिमालयी कहानी, कथा;पत्नी उत्पीडन विषयी मध्य हिमालय की कहानी, कथा;पत्नी उत्पीडन विषयी उत्तराखंडी साहित्यिक कहानी, कथा;पत्नी उत्पीडन विषयी गढवाली भाषा में साहित्यिक कहानी, कथा लेखमाला }.

   'Faisla 'is the story of a brother who cannot tolerate the oppressive, harassing, troubling and torturing acts of his brother in law on his sister. He kills his brother in law. The matter goes to court and judge is in confusion as the brother killed his brother in law in emotional state of mind.
  There is terror, panic, fright, fear and torture in the story thought from start to end. The story deals with emotional attachment of brother for his sister and also opens various social aspects of husband's treatment to wife and the worsening status of women in the society.

Reference-
Dr Anil Dabral, 2007 Garhwali Gadya Prampara
Copyright@ Bhishma Kukreti 15/6/20012

Notes on story of husband  harassing , torturing his wife; Garhwali story of husband harassing , torturing his wife; Uttarakhandi story of husband harassing ,torturing his wife; Mid Himalayan story of husband harassing ,torturing his wife; Himalayan story of husband torturing his wife; South Asian story of husband harassing ,torturing his wife; SAARC Countries story of husband harassing ,torturing his wife; Indian subcontinent story of husband harassing ,torturing his wife; Indian story of husband harassing ,torturing his wife; North story of husband harassing ,torturing his wife to be continued...
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Bhishma Kukreti

गढ़वळि भाषौ कवि श्री जगमोहन जयाड़ा "जिज्ञासु" जी क भीष्म कुकरेती  दगड छ्वीं





भीष्म कुकरेती - आप साहित्यौ दुनिया मा कनै ऐन?


जगमोहन जयाड़ा "जिज्ञासु"-कुकरेती जी, पहाड़ मन मा सदानि बस्युं रै मेरा, कसक बोला या प्रवास की पीड़ा का कारण, कलम उठाई अर लिखण लग्यौं मन का ऊमाळ, अपणि प्यारी गढ़वाळि भाषा मा,

यनु सोचिक, भाषा अर संस्कृति कू सम्मान करौं अर सृंगार भी. 



भी.कु- वा क्या मनोविज्ञान छौ कि आप साहित्यौ तरफ ढळकेन ?

जगमोहन जयाड़ा "जिज्ञासु"-गढ़वाळि भाषा मा भौत सुन्दर सृजन कर्युं छ गढ़वाळि कवि अर लेखकु  कू, मन मा कुतग्याळि सी लग्दि जब पढ्दा छौं उंकी रचना अर लेख.  गढ़वाळि साहित्य का प्रति ढळकाव ये कारण सी स्वाभाविक छ.


भी.कु. आपौ साहित्य मा आणो पैथर आपौ बाळोपनs कथगा हाथ च ?

जगमोहन जयाड़ा "जिज्ञासु"-मेरी जिज्ञासा बाळापन बिटि  गढ़वाळि भाषा का प्रति रै, नजीबाबाद रेडियो बिटि पहाड़ का प्यारा गीतू कू प्रसारण होंदु  थौ, सुण्दु  थौ टक्क लगैक.   जब गौं का  मनखि रामलीला देखण जांदा था, मै भी जरूर जांदु अर कलाकारू कू हास्य, करूणादायक अंदाज, गढ़वाळि मा संवाद भौत प्यारू लगदु  थौ.


भी.कु- बाळपन मा क्या वातवरण छौ जु सै त च आप तै साहित्य मा लै ?

जगमोहन जयाड़ा "जिज्ञासु"-बाळापन मा भौत उलार रंदु छ मनखि  का मा हर विषय का प्रति.  दादा-दादी अर जाणकार  मनखि  का मुख सी पुराणि  गढ़वाळि कथा, गीत  सुणिक मन मा  गढ़वाळि साहित्य का प्रति लगाव स्वाभाविक छ.


भी.कु. कुछ घटना जु आप तै लगद की य़ी आप तै साहित्य मा लैन !

जगमोहन जयाड़ा "जिज्ञासु"-मेरा एक प्रिय मित्र छन  श्री जयप्रकाश पंवार "प्रकाश".  एक बार पंवार जिन एक गढ़वाळि कविता "आवा जावा अपणा गौं" मैकु भेजी.  कविता पढिक मेरा मन मा गढ़वाळि कविता लेखन की  ख़ास  जिज्ञासा पैदा ह्वै अर साहित्य सी जुड़ाव भी. 
भी.कु. - क्या दरजा पांच तलक s किताबुं हथ बि च ?

जगमोहन जयाड़ा "जिज्ञासु"-दर्जा पांच तक की किताब मा सुन्दर कविता अर कथा होंदी थै.   महादेवी वर्मा की एक कविता भौत सुन्दर लग्दी थै, "फूल हैं हम सरस कोमल, कंटकों में खिल रहे हम" बाळापन कू अहसास होंदु थौ अर साहित्य का प्रति आकर्षण.


भी.कु. दर्जा छै अर दर्जा बारा तलक की शिक्षा, स्कूल, कौलेज का वातावरण को आपौ साहित्य पर क्या प्रभाव च ?

जगमोहन जयाड़ा "जिज्ञासु"-दर्जा छै अर दर्जा बारा तक की शिक्षा का दौरान कथाकार प्रेमचंद जी की कहानी पढ़ण कू मौका मिली.  प्रेमचंद जी कू भारत का ग्रामीण परिवेश कू सुन्दर चित्रण कर्युं छ अपणि कहानियों मा, ये कारण सी कुछ न कुछ  प्रभाव हिंदी साहित्य कू भी छ.


भी.कु.- ये बगत आपन शिक्षा से भैराक कु कु पत्रिका, समाचार किताब पढीन जु आपक साहित्य मा काम ऐन ?

जगमोहन जयाड़ा "जिज्ञासु"- गढ़वाळि भाषा की पत्रिकाओं अर समाचार पत्र  सी काफी ज्ञान मिल्दु छ साहित्य का बारा मा. युगवाणी, पर्वतजन, निराला उत्तराखंड का माध्यम सी पहाड़ का बारा मा भौत सुन्दर साहित्यिक  ज्ञान  प्राप्त होंदु छ , जौंकु मैं समय समय फर अवलोकन करदु छौं.


भी.कु- बाळापन से लेकी अर आपकी पैलि रचना छपण तक कौं कौं साहित्यकारुं रचना आप तै प्रभावित करदी गेन?

जगमोहन जयाड़ा "जिज्ञासु"- घनश्याम सैलानी जी, चंद्रकुंवर बर्त्वाल जी, विद्यासागर नौटियाल जी  की रचना मैन पढिन अर भौत सुन्दर लगिन.


भी.कु. आपक न्याड़ ध्वार, परिवार,का कुकु लोग छन जौंक आप तै परोक्ष अर अपरोक्ष रूप मा आप तै साहित्यकार बणान मा हाथ च ?

जगमोहन जयाड़ा "जिज्ञासु"-साहित्यिक बणौण मा मै फर परोक्ष अर अपरोक्ष रूप मा कैकु हाथ निछ.   मैं फर माँ सरस्वती की कृपा  अर  गढ़वाळि भाषा प्रेम कू प्रभाव छ .


भी.कु- आप तै साहित्यकार बणान मा शिक्षकों कथगा मिळवाग च ?

जगमोहन जयाड़ा "जिज्ञासु"-क्वी मिळवाग निछ.
भी .कु. ख़ास दगड्यों क्या हाथ च ?

जगमोहन जयाड़ा "जिज्ञासु"- ख़ास दगड्यों सी वातावरण मिल्दु छ.
भी.कु. कौं साहित्यकारून /सम्पादकु न व्यक्तिगत रूप से आप तै उकसाई की आप साहित्य मा आओ

जगमोहन जयाड़ा "जिज्ञासु"- कै भी साहित्यकार/संपादक सी व्यक्तिगत  सहयोग नि मिली.
भी.कु. साहित्य मा आणों परांत कु कु लोग छन जौन आपौ साहित्य तै निखारण मा मदद दे ?

जगमोहन जयाड़ा "जिज्ञासु"-निखारण मा मदद कै सी नि मिली पर मैन अपणि कलम सी गढ़वाळि कविता सृजन करि अर पछाण अपछाण शुभचिंतक मेरा कविमन मा उत्साह पैदा करदा छन.  मेरु भी प्रयास छ मैं गढ़वाळि भाषा प्रेम पैदा करौं उत्तराखंडी लोगु का मन मा.

Copyright@ Bhishma kukreti 15/6/2012

Bhishma Kukreti

राजनीति विषयक गढवाली कथाएं- ३



                                                पुराणों घी नै  बरोळिउन्द 


                                                      भीष्म कुकरेती


        जब तलक अजय बहुखंडी रानजीति मा सिरफ नेता छया त लमडेर  कुकुर जन  कखी बि घूमी लीन्दा छा, कुछ बि बकबास करी लीन्दा छा. हाँ! एक बात छे कि जन लमडेर कुकुर ह्वेन, खजि वळ कुकुर  ह्वेन, गळि  क कुकुर  ह्वेन या घरपळया कुकुर इ  ह्वेन - राजनीतिग्युं अर कुकुरुं मा एक समानता होंद अर वा च अपणि अपणि 'केर' , अपणि अपणि हद्द. अपणी पार्टी क कै हैंका नेता क टेरिटरी मा नेता लोक दखलअन्दाजी नि करदन , जु एकी पार्टी क एक नेता  हैंक नेता क केर लांघी द्याओ त राजनीतिज्ञ रूपी  मनिखो मा कुकुरखेल ह्व़े जांद या एक हैंको  पर भुकण बिसे जान्दन ,एक हैंक तै कटण मिसे जान्दन.   अर यदि क्वी कुकुर हैंको कुकुर की केर तोड़ी द्याओ त वो बि राजनीतिग्यों  तरां हल्ला मचाण बिसे जान्दन.  तब अजय बहुखंडी मा क्वी जुमेबारी त छे ना. अब  जब प्रदेशौ मुख्यमंत्री बणिन त कबि कबि क्या भौत दै निंद , खाण हराम ह्व़े जांद. आज बि मुख्यमंत्री की हालत खराब छे. ऊंकी   निंद हर्चीं  छे. भूक-तीस मरीं छे. मन मा ख्यळबळाण  (पाणी  जन उबळण ) हुणो छौ, अर पुटुक मा च्यौड़  (अजीब स्यू अण- अभिब्य्क्त पीड़ा) पड़णा छा.

                    .हजारो साल से हम दिखणा छंवां  बल मंत्री अर प्रशासनिक अधिकार्युं समंध कुछ अजीब होन्दन. मंत्री या राजा अर प्रशासनिक अधिकारी एक हैंका खुणि आवश्यक बुराई छन. धृतरास्ट्रो खुणि विदुर एक आवश्यक  परेशानी छे त  विदुरअ कुणि ध्रितराष्ट्र एक आवश्यक बुराई छे.  दुर्योधनो खुणि भीष्म अर द्रोणाचार्य एक आवश्यक मुंडारु   छौ त भीष्म अर द्रोणाचार्य खुणि दुर्योधन एक नेसेसरी  इविल , आवश्यक अनिष्ट, जरूरी बुराई छौ. मुख्यमंत्री- मंत्री अर प्रशासकौ  अधिकारी एक हैंकौ पूर्ण  पूरक हूण  से यि द्वी एक हैकाक जरूरत छन. मुख्यमंत्री अजय बहुगुणा जीन  इ डिल्ली मा जोड़ तोड़ी करीक अतुल ममगाईं जी तै चीफ सेक्रेटरी बणवाई अर मुन्ना लाल बनग्याल  जी तै अपुण प्राइवेट सेक्रेटरी बणवाई. ये हिसाब से यि द्वी मुख्यमंत्री क ख़ास आदिम छन पण जन मुख्यमंत्री सरा राज्यौ क आदिम हूंद अर वैको पैलि आस्था  राज्य हूण चयेंद पण असल मा वैकी प्राथमिक आस्था राजनीति होंद. उनि  ममगाईं जी अर बनग्याल जी अजय जीक ख़ास छन पण असल मा उंकी प्राथमिक आस्था प्रशासन च. अजय बहुखंडी  जी तै ममगाईं जी क याद आई कि यीं परेशानी क हाल यूँ द्वियुं मा इ ह्व़े सकद.

हालांकि मुख्यमंत्री अर चीफ सेक्रेटरी ममगाईं जीक बीच हॉट लाइन च पण ममगाईं जी न पैलि दिन अजय जी तै अड़ाइ बल  कबि बि द्वी बड़ा बड़ा आदिम्युं तै डाइरेक्ट कबि बि बात नि करण चयेंद. इख तलक कि जब बि अजय जी तै ममगाईं जी तै क्वी सीक्रेट बात हॉट लाइन से करण तो बि मुख्यमंत्री तै पैल जूनियर सेक्रेटरी द्वारा चीफ सेक्रेटरी तक रैबार पौंचाण चएंद कि मुख्य मंत्री हॉट लाइन पर बात करण चाणा छन.  अजय बहुखंडी जी न ममगाईं जीक अड़यूँ  नियम क हिसाब से पैल अपण प्राइवेट  सेक्रेटरी खुणि ब्वाल कि ममगाईं जी खुणि ब्वालो कि मुख्यमंत्री हॉट लाइन पर बात करण चाणा छन. फिर प्राइवेट सेक्रेटरी न जूनियर सेक्रेटरी न अपण सीनियर मा रैबार भ्याज, सीनियर सेक्रेटरी न ममगाईं जीक जूनियर सेक्रेटरी मा रैबार भ्याज , ममगाईं जीक जूनियर सेक्रेटरी न अपण सीनियर मा मुख्मंत्री क रैबार भ्याज , सीनियर पण असल मा जूनियर सेक्रेटरी ना प्रदेश चीफ सेक्रेटरी ममगाईं जीक चीफ प्राइवेट सेक्रेटरी मा मुख्य मंत्री जीक रैबार  पहुंचाई. स्टेट चीफ सेक्रेटरी क प्राइवेट सेक्रेटरी मातबर सिंग बिष्ट जी न तब जैक स्टेट चीफ सेक्रेटरी तै बताई, " सर!  मुख्यमंत्री हॉट लाइन पर बात कर न चाणा छन?"

ममगाईं जीन अपण प्राइवेट सेक्रेटरी तै पूछ,' मुख्यमंत्री मै  से बात करण चाणा छन या आपसे ?"

प्राइवेट सेक्रेटरी मातबर सिंग बिष्ट जीन  घणघणै   क  जबाब दे ,'सर विद यू."

ममगाईं  जीन  तिराण वळि भौण मा ब्वाल,"" बट यू नेवर  टोल्ड सो इन युवर संटेंस . तुम प्रिवेंसियल सिविल सर्विस वळा कबि नि सुदर सकदवां! प्रशासनिक  सेवा मा एक क्लियर लैंग्वेज हूंद  . पण तीन सौ साल ह्व़े गेन तुम पीसीएस वळा अबि बि क्लियर एडमिनिस्ट्रेटिव लैंग्वेज नि सीखा !"

मातवर सिंग बिष्ट जी उत्तर प्रदेश प्रोविंसियल सिविल सर्विस (पी.सी. एस)  कैडर का छन अर जब लखनौ मा छ्या तब बि ई आई.ए.एस वळा पी.सी. एस. वळो तै इनी हीण भावना वळ बथुं    से घैल  करदा छ्या . इन माने जांद बल जब ब्रिटिश लोगूँ न इम्पीरियल सिविल सर्विस (ICS ) शुरू कर त उखमा सब ब्रिटीशर  इ छ्या अर राज्यों मा भारतीय PCS वळ छ्या त आई.सी.एस वळ पी.सी.एस वळो तै दनकांदा  छ्या अर यू रिवाज आज बि च  . इम्पीरियल सिविल सर्विस (ICS ) अब इन्डियन सिविल सर्विस(IAS )  मा बदल त ग्याये पण जब बि बगत आई ना कि आई.ए.एस वळ   पी.सी.एस. वळो तै दनकाणा इ रौंदन.  कबि कबि त बिष्ट जी क ज्यू बुल्यांद कि नेता बौण जावन अर यूँ आई.ए.एस वळु खूब बेज्जती कौरन पण नेतागिरी मा स्टेबिलिटी नी च त   पी.सी.एस. कि नौकरी मा पूरो स्थायित्व च पेंसन  च अर फिर रिटायर हूणो बाद  प्राइवेट कंपन्यूँ  अच्छो  पद मीली जांद.

ममगाईं जीन फिर बोल," बिष्ट जी ! रैबार पंचाई द्याव बल मी बस थ्वड़ा  देर मा बचळयांदो छौ. '

उन ममगाईं जी बि बिष्ट जी क सौकारी इतियास से परेशान छन. बिष्ट जीक बूड खूड ममगाईं जीक पट्टी का बड़ा थोकदार छ्या अर बिष्ट थोकदारूं न इ ममगाईं जीक पड़ददा पंडिताई बान  कुछ  पुंगड़ देकी बसाई छौ.ममगाईं जी नि चांदा छ्या कि जख मातवर सिंग बिष्ट जी ह्वावन उख उंकी पोस्टिंग ह्वाऊ, पण बिष्ट जी पैलि चीफ सक्रेटरी क प्राइवेट  सेक्रेटरी बणि गे छ्या. . ममंगाई जी जाणदा छन कि आम गढवळि मन से हैंको गढवळि तै बॉस नि माणदो उल्टा  औफ़िस का दगड्यो  तै बथाणु रौंद बल इक त यू बॉस च पण उख गां मा त एको ददा म्यार ददा क सिरतान छौ. या इक त यू बौसगिरी  झड़दो  पण उख म्यार गाँ मा म्यार त तिभित्या अर तिमन्ज्युळया तिबारिदार कूड च त एको एक भितर्या उबर इ च.

   मुख्यमन्त्री जीक पुटुकुन्द त परेशानी से च्याळ पड़णा छ्या. ऊन प्रशासनिक नियमु ऐसी तैसी कार अर ममगाईं जी कुणि फोन कार," क्या बात ममगाईं जी भौति बिज़ी छंवां?"

ममगाई जीन ब्वाल,' यस  चीफ मिनिस्टर , नो सर !"

मुख्यमंत्री जीन पूछ," मतबल? यस अर फिर नो "

ममंगाई जीन बोली," एस माने आप तै सम्बोधन अर नो माने आपौ  खुणि बिजि नि छौं पन असल मा भौत इ बिजि छौं"

मुख्यमंत्री जीन चीफ सेक्रेटरी जी तै अपण कैबिन का भैर कौनफेरेंस  रूम  मा चौड़  बुलाई अर दगड मा ब्वाल बल बिष्ट जी अर पोलिटिकल सेक्रेटरी तै बि लै येन . अब ममगाईं  जी झसकी गेन  कि कुछ त बात च .

कोन्फेरेंस रूम मा स्टेट चीफ सेक्रेटरी, बिष्ट जी, अर मुख्यमंत्री क प्राइवेट सेक्रेटरी ऐ गे छ्या अर हाइयरआर्की क हिसाब से बैठया छ्या. ममगाईं जीन चीफ मिनिस्टर कु पोलिटिकल सेक्रेटरी कुणि ब्वाल,' टम्टा  जी ! यूँ मंत्र्युं तै सिखाओ कि अर्जेंट, मोस्ट अर्जेंट, नॉन- इम्पोर्टेंट बट अर्जेंट, वेरी इम्पोर्टेंट अर नॉन-अर्जेंट, वेरी इम्पोर्टेंट एंड अर्जेंट ' कामू क बारा मा सोची लयवान.

अलाइड आई.ए.एस. काडर का सुबोध टम्टा जीन पूछ, " सर! ऐनी थिंग इरेपटेड रौंग ?"

चीफ सक्रेटरी जीन बताई," सबि कुछ गलत हूणु च. हरेक मंत्री जीन हरेक फाइल मा वेरी वेरी अर्जेंट अरमोस्ट  इम्पोर्टेंट लेखिक डे द्याई." ममगाईं जीन रुकिक सब्यू तरफ नजर घुमैक अगनै ब्वाल," एक मंत्री जीक फाइल च जखमा काम को ठेका दियी जालो दस मैना बाद अर वै कामो फाइल मा बि वेरी  अर्जंट अर मोस्ट  इम्पोर्टेंट च . एक फाइल च जखमा अच्काल पिथौरागढ़ मा बच्चों पर क्वी अजीब सी रोग सौर्यु च , फैल्यु च वीं फाइल मा मंत्री जी क नॉट च 'नॉन-इम्पोर्टेंट एंड नॉन-अर्जंट. इनी सब मंत्रालय मा च हूणु ."

बिष्ट जीन हाँ मा हाँ मिलाई," जी ममगाईं जी ठीक बुलणा छन. कुम्भो मयाळा न आण अब दस साल बाद पण  ट्वाइलेट  अर बाथरूमु फाइल मा मंत्री जीक रिमार्क छन - वेरी वेरी अर्जेंट एंड मोस्ट इम्पोर्टेंट  लिख्यु च कि सी मी अर्जेंट."

टम्टा जी न बोली,"  क्या इ निशंक जीक च्याला छन?"

सबि मूल मूल बक्रोक्ति से इ हंसिन , ऐडमिनिस्टरेसन को एक नियम च कि इन बातू पर जोर से सुपिन मा बि नि हंसण चयेंद.

ममगाईं जीन ब्वाल," अर यि मंत्र्युं सेक्रेटरी बि ना !  इंडियन सिविल सर्विस की नाक कटवाणा छन जन मंत्री लोक बुल्दन उनि लेखी दीन्दन सही होंद - वेरी इम्पोर्टेंट एंड मोस्ट अर्जेंट पण ...खैर   . टमटा जी अबि क्या ख़ास च ? "

    टमटा जी  न ब्वाल,' कुछ नई योजना अर पुराणि योजनाओं क मूल्यांकन कि बात च सैत "

बिष्ट जी न ममगाईं जीक ज़िना द्याख मतलब बुलणो आज्ञा मांग अर ब्वाल, "मतलब , पुराणि सरकारौ योजनाओं तै खतम कारो अर नई योजना बणाओ. फिर सबि रूणा रौंदन कि प्रदेशाऊ विकास नी होणु च . जब हरेक योजना मा इनी पोलिटिकल रुकावट आली त ..एक योजना पर कुछ काम होंदु नी कि वीं योजना तै पोलिटिकल राईवलरी क वजै से स्क्रैप करे जांद ...."

टमटा जीन ब्वाल," पण सचेकी हम ऐडमिनिस्ट्रेसन  वळ इनी करदवां  क्या ?"

ममगाईं जीन बताई बल," बिष्ट जी! हम इंडियन सिविल सर्वेंटूं  काम च भारतीय संविधान अर ऐडमिनिस्ट्रेटिव नियमु पालन करण  अर मंत्री लोगूँ काम दिखण. म्यार  एक्स बॉस देशमुख जी जु इंडिया क चीफ सेक्रेटरी छ्या को बुलण छौ बल हम तै मंत्र्युं बुल्यु काम दिखण  चयेंद पण वी अर नॉट बाउंड टु  ओबे देम एज देयर विश एंड ह्विम्स."

इथगा मा मुन्ना लाल बुनग्याल जी ऐ गेन अर बुलण मिसेन," आज सुबेर बिटेन सी.एम्. जीक मूड औफ़ च. बस आणा इ छन ." मुन्ना लाल बुनग्याल जी बि उत्तर प्रदेश पी.सी.एस. काडर का औफ़िसर छन. अर या इ बात च कि देहरादून मा उत्तरप्रदेश अर दिल्ले कि सभ्यता पनपणि च .

मुख्यमंत्री जी क प्राइवेट सेक्रेटरी मुन्ना लाल बुनग्याल जीन बोली," कुछ प्रदेश विकास की बात होली. अर बुलणा छ्या कि वूं तै विकास का मामला मा सचाई चयेणि च."

मंगाई जीन ब्वाल, "मतलब मुख्यमंत्री जी तै सचाई नि चयेणि  च बल्कण मा ओ सकारात्मक प्वाइंट चयाणा छन जो ओ विधान सभा तै  , अर पत्रकारों द्वारा जनता तै  बथै साकन."

मुन्ना लाल बुनग्याल जी न  बोली , ' यू आर अबस्युलीटली राईट सर! सी.एम् वांट्स दोज   फैक्ट्स एंड फीगर्स , स्टोरी टु टेल." 

थ्वड़ा  देर मा मुख्यमंत्री जी कैबिनेट  सेक्रेटरी मिश्री लाल कौशिक दगड कौनफेरेन्स रूम मा ऐन, मिस्री लाल जी छन त हरिद्वार्क पण  राजस्थान काडर का आई.ए.एस. छन अर ममगाईं जीक क जूनियर छन.

सब्यूँ न खड़ो ह्वेक अभिवादन कार अर मीटिंग कि शुरुवात मुख्य मंत्री जीन इन कार,' द्याखो मेरी लोकप्रिय सरकार तै चार दिन बाद या पांच दिन बाद एक महीना हूण वळ च अर जनता चांदी बल सरकार वूकुण कुछ कार. फिर सीक्रेट रिपोर्ट या च बल पुराणि सरकार का बारा तेरा योजना जनता विरोधी छन. जनता चांदी बल यी योजना स्क्रैप करे जावन अर यूंक जगा जनता लैक नई योजना आवन ."

सबि कुछ देर तलक चुपी रैन त अजय बहुखंडी जीन ममगाईं जी तै पूछ ,' आपकी क्या राय च ?"

ममगाईं  जी अर हौर औफ़िसरू तै इथगा सालू अनुभव छौ ओ समजी गेन कि पुराणी सरकार की योजनाओं से पुराणा मुख्यमंत्री क नाम प्रसिद्ध ह्व़े अर अबि बि लोक पुराणा मुख्यमंत्री  क गीत गाणा छन अर या बात  कै बि वर्तमान मुख्य मंत्री तै  बर्दास्त नि होंद कि भूतपूर्व  मुख्यमंत्री का नाम प्रसिद्ध होणु रौ चाहे भूतपूर्व मुख्यमंत्री वर्तमान मुख्यमंत्री क बुबा किलै नि ह्वाओ.

ममगाईं जीन ब्वाल,' सर ! हूणो त  सब कुछ ह्व़े सकुद पण इख मा द्वी बातु ख्याल करण इ  पोडल."

अजय जीन पूछ,' क्या क्या ?"

ममंगाई जीन ब्वाल,' एक त पुराणी योजनाओं तै स्क्रैप करण से भौत सा पोलिटिकल अर सैत च ऐडमिनिस्ट्रेटिव प्रोब्लम खड़ी ह्व़े जावन! ' हालांकि ममंगाई जी अर मुख्यमंत्री समेत सबि जाणदा छन कि पुराणि योजनाओं तै स्क्रैप करण से समस्या पोलिटिकल नि ह्व़े सकदन बल्कण मा प्रशासनिक समस्या इ आली.

अजय बहुखंडी जीन ब्वाल,' राजनैतिक समस्या मी देखी ल्योलू आप ऐडमिनिस्ट्रेटिव समस्याओं  तै सुळझाओ . आज कबिनेट कि मीटिंग च अर उखमा पुराणि योजनाऊ तै स्क्रैप करणो निर्णय लिए जालो अर नई योजनाओं लागू करणो निर्णय लिए जालो आप द्याखो कि ..."

ममगाई जीन कौशिको तरफ द्याख  कि कैबिनेट मीटिंग क अजेंडा मी तै किलै नि बताई.  कौशिक जी ममगाई जीक मन्तव्य समजी गेन ऊन सफाई अर सूचना क हिसाब से ब्वाल,' मुख्यमंत्री जीन और मन्त्र्युं से बात कौरिक कैबिनेट मीटिंगो एजेंडा मी तै अबि इख आन्द  आन्द  बथाइ  .." 

ममगाईं जीन ब्वाल,' बट सर इट्स अ ह्यूज  एक्सरसाइज . पैल त योजानो तै स्क्राप कारो अर फिर प्लानिंग कमीसन योजना बणाल, फिर फिनेस्नियल वाईबीलिटी  आदि आदि  फिर वूं  योजनाऊँ  नापतोल ह्वालू . दुई काम मा द्वी साल त लगी जालो."

अजय बहुखंडी जीन ब्वाल,' ममगाई जी आज स्याम तलक हमारि पार्टी क निर्णय च कि पुराणी पोपुलर योजना स्क्रैप हुणि चएंदन अर हमारि पार्टी क सरकार का तीस दिनों खुसी मा जन कल्याणकारी योजना लागू हूण चएंदन. "

इथगा मा मुख्यमं त्री जीक सेल फोन पर क्वी फोन आई , ऊन ब्वाल,' ओके टेल मैडम आई  शेल काल हर विदिन वन  मिनट "

मुख्यमंत्री जीन आदेस इ द्याई, बस आज पुराणि योजना स्क्रैप  हुणि चएंदन अर परस्यूं नई योजना. आप योजना तैयार करो प्लानिंग कमीसन ओके दे दयालो." अर मुख्यमंत्री, कैबिनेट  सेक्रेटरी अर ऊंको प्राइवेट सेक्रेटरी चलि गेन.

ममगाईं जी क बुलण पर सबि ममगाईं जीक कैबिन मा ऐ गेन अर गहन चर्चा करण लगी गेन

बिष्ट जीन पूछ ,' सर आपन हाँ किलै ब्वाल कि ह्व़े जाल?"

ममगाईं जीन पूछ , "मीन कख हाँ ब्वाल ?'

बिष्ट जी न पूछ," पण  इन्डियन सिविल सर्विस मा एक या बात बि च कि कुच्छ नि ब्वालो त वांको मतलब हां हूंद . छ कि ना?"

ममगाईं जीन ब्वाल,' पण कुछ नि बुलणो अर्थ इन बि होंद कि सर आई नेवर सबस्क्राईब्ड  युवर थियोरी ."

बिष्ट जीन पूछ, " त इखम ?"

सुबोध टमटा  जीन ब्वाल,' ममगाईं जी !मेरी फजीत ह्व़े जाली जु .."

ममगाई जी , ; ओके . फिर त फेस लिफ्टिंग ,  वर्ड्स एंड फ्रेज  रिप्लेसमेंट का काम  इ करण पोडल."

टमटा जीन ब्वाल,' मतलब ?"

बिष्ट जीन ब्वाल,' जु आप तै याद ह्वाऊ त पांच साल पैली बि य़ी सरकार से पैल्याकी  सरकारन अंदो आन्द अफु से पैल्याकी सरकारक योजना स्क्रैप करी छौ अर नई नई योजना कि घोषणा करी छौ, अर वां से पैल्याक  सरकारन    बि अंदो आन्द अफु से पैल्याकी  सरकारौ  योजनाऊ तै स्क्रैप करी थौ अर अपणी योजना लागू करी छौ '

टमटा जीन ब्वाल," हां !  पुराणी योजनाओं कि   क्रिया अर सम्बोधन कारक शब्द छोड़िक अर जख तक ह्व़े साको  बाकि शब्दू  पर्यायवाची शब्द नई योजना क पोथी मा डाळी दे छौ.  अर व्यक्तिवाचक संज्ञाओं मा नया नाम बदली दे छौ जु नाम सरकारी राजनैतिक दल तै मंजूर ह्वाओ.'

ममगाई जीन ब्वाल,' वेल त बिष्ट जी ! सबि विभागुं क सेक्रेटरयुं   कुणि मुजवानी बोली द्याओ कि एकै पुराणी योजनाओं तै स्क्रैप कारो अर पुराणी योजनाओं का  शब्द बदली  द्याओ अर  बिल्कूक नया शब्द डाळि  द्याओ  ।"

बिष्त जीन ब्वाल्,' सर ! इन बी किलै करणाइ  . हमम जो बि उत्तर प्रदेशौ टैमक  योजना छन ऊँ तै नया रंग अर नया पुट्ठों से  सजैक पेश करी लींदवां. हमन त एक दै मुलायम सिंग जीक टैम पर  चन्द्र भानु गुप्ता जीक  बगतौ योजनाओं तै पेश करी छौ. "

ममगाईं जीन ब्वाल, " पण इखम हम नि चाँदवां असल मा सचेक इ पुराणि योजना स्क्रैप  ह्वाओ. बस जु बि योजना स्क्रैप करण ह्वाओ वीं योजना क शब्द बदली क नै योजना क नाम दे द्याओ. "

बिष्ट जीन ब्वाल," हां त ठीक च बस टाइपिंग मा टैम लगल .'

ममगाईं जी न पूछ," टमटा जी !  आप स्याम तलक बथै द्याओ कि योजनाऊ नाम क्या हूण चयेंद परस्यूं स्याम तक सी.एम् जी तै चौदा   नई योजना मीलि जाली'

टमटा जीन पूछ, ' त मी जौं ?"

ममगाई जीन ब्वाल," हाँ आप मुख्य मंत्री जी तै बथाई द्याओ बल आज स्याम पत्रकार समेलन मा पुराणी सरकारो बारा  योजना स्क्रैप करणै घोषणा करी सकदन"

सुबोध टमटा जीन धन्यवाद दे , ' जुगराज रयां ! '

ममगाई जीन ब्वाल, " अर पर्स्यु चौदा नई योजनौ घोषणा बि होली."

.टमटा जीक जाणो बाद ममगाई जीन बिष्ट जी तै जरूरी  हिदायत देन . अर ब्वाल बल वार फूटिंग बेसिस  पर काम हूण चयेंद मतबल युद्ध स्तर पर टाइपिंग हूण चयेंद.

अर इख्मा बथाणै  जरुरात नी च कि मुख्यमंत्री न पैल क दिन पत्रकार सम्मलेन मा पुराणि सरकार  की योजनाओं तै गाळी देन अर बारा योजनाओं तै स्क्रैप करणै घोषणा करी

फिर अपणि सर्कारौ  की एक मैना हुणो उपलक्ष मा चौदा नै योजनाओं घोषणा कार , बारा योजना  त पैलाक सरकारौ योजनाओं बिलकुल नया शब्दों अर नया नामो से से भर्याँ रूप छ्या अर द्वी योजना चन्द्र भानु गुप्ता जीक टैम पर पर्वतीय मंत्रालय मा बणी योजना छे.

मुख्यमंत्री बहुखंडी  जी खुश छ्या कि अब पुराणो मुख्यमंत्री कि प्रसिधी रुक जाली अर चौदा नयी योजनाओं क विज्ञापनों से अजय बहुखंडी अब  'द  टाल मैन  फॉर उत्तराखंड डेवेलपमेंट' का नाम से जाणे जाला. अब उंकी निंद आर भूक वापस ऐ गे छे. .

प्रशासनिक सेवा का लोग खुश छन कि सिरफ़  टाइपिंग करण पोड़ अर कुछ नि करण पोड़.

योजना रुपी पुराणों घी बि खुस च कि पुराणों घी तै नई बरोळि  मीली गे .

मातबर सिंग बिष्ट जी नया नया ट्रेंड हुंयाँ  पी.सी.यस. अधिकारी तै समझाणा छ्या कि ये इ तरां से पुराणि योजनाओं क  फेस लिफ्टिंग करे जांद





copyright@ Bhishma Kukreti 15/6/2012

Bhishma Kukreti

Ghat: Sad Garhwali story about Death of a Son

                                                       Bhishma Kukreti

           Ghat is one of the stories of story collection 'Burans ka peed' by f Mohan Lal Negi published in 1987.
   The story is about sadness by death of son. The son is ill and father does everything to save the life of son. The person is poor and there are no medical facilities in the village. The man blames for his son death to other person that he performed 'Ghat (a ritual to harm others).
  The story deals the struggle of poor person for saving his ailing son and many beliefs of village life.

Copyright@ Bhishma Kukreti 16/6/2012

Bhishma Kukreti

गढ़वळी  कवि, कथाकार श्री   ब्रिजेन्द्र  नेगी  जी क भीष्म कुकरेती क दगड  छ्वीं



भीष्म कुकरेती - आप साहित्यौ दुनिया मा कनै ऐन?

- आँखों एथर घटन वली घटनो जोंकू मि समिणी विरोध नि कैर साकु 



भी.कु- वा क्या मनोविज्ञान छौ कि आप साहित्यौ  तरफ ढळकेन ?

- घटना घटनी रै और वेकु खुल कई विरोध नि कैर सकण कि टीस मन का एक कूण पर इकठा हूणी रै और मौका मिल्दी साहित्य का रूप मा वव्गाण  बैठ गी



भी.कु. आपौ  साहित्य मा आणो पैथर आपौ बाळोपनs     कथगा हाथ च ?

- बलोपन बटी स्कूल का संस्कृतक कार्यक्र्मु मा भाग लीण कु  शौक छा.



भी.कु- बाळपन मा क्या वातवरण छौ जु सै त च आप तै साहित्य मा लै ?

- बालपन मा क्वी ख़ास वातावरण नि छा पर फिर्भी स्कूल या गौं मा कै भी काय्रक्रम मा अपणी उपस्थिति दर्ज कराण कु शौक छा.



भी.कु. कुछ घटना जु आप तै लगद की य़ी आप तै साहित्य मा लैन !


- पांचवी दर्जा कु बाद मि स्कूल-कॉलेज कु हर संस्कृतक कार्यक्र्मु मा भाग लींदु छा और स्कूल-कॉलेज पत्रिका  खुण लेख ल्याखुदु छा.





भी.कु. - क्या दरजा पांच तलक s  किताबुं हथ बि च ?

- दर्जा पांच कि किताब्यु कु ता क्वी हाथ नि छा पर दर्जा पांच कु खास महत्वा छा. सबसे पैलि दर्जा पाच मा २६ जनवरी कु कार्यक्रम मा मीथे हेड मास्टर जिल "माँ कि सीख" कहानी सुनाणु कु द्या. मिल कहानी थै अछी तरैयाद काई ताकि मि धारा प्रवाह सुना साकु परन्तु राति पिताजी व्वन बैठी पैल मीते सुणा. मि डौर कु सुणा नि साकू अर फिर मेरी दरवाजा बंद कनवाली "घोलण" से जो पिटे ह्वाई मि आज तक नि भूलू. सुबेर तारो-तजा ह्वेकि मिल कहानी सुणा जैक खूब तारीफ ह्वै. बस वे दिन बटी एथर बड़ना कि ललक हवेग्या.



भी.कु. दर्जा छै अर दर्जा बारा तलक की शिक्षा, स्कूल, कौलेज का वातावरण को आपौ  साहित्य पर क्या प्रभाव च ?

- पांचवी दर्जा कु बाद मिल स्कूल-कॉलेज कु हर संस्किर्तिक कार्यक्र्मु मा भाग लीण शुरू कैर द्या. स्कूल-कॉलेज कि हर पत्रिका मा म्यारा लेख जरूर चफ्दा छाई.



भी.कु.- ये बगत आपन शिक्षा  से भैराक कु कु  पत्रिका, समाचार किताब पढीन जु आपक साहित्य मा काम ऐन ?

- वे बग्त नोबल पड़नाकु भौत शौक छा जैसे ल्यखना कु तरीका कु पता लगदु छाई. फिर पोस्ट ग्रेजुएट कनकु बाद मिल राजस्थान विश्वविध्यालय बटी पत्रकारिता मा पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा काई ज्यांसे म्यारू लेखन मा सुधार ह्वाई.



भी.कु- बाळापन से लेकी अर आपकी पैलि रचना छपण तक कौं कौं साहित्यकारुं रचना आप तै प्रभावित करदी गेन?

- अछा साहित्याकरू कि किताब प्रभावित करदी छाई. जादा तर कोर्स का साहित्यकार ही पड़ना कु मिलदा छाई.





भी.कु. आपक न्याड़ ध्वार, परिवार,का कुकु  लोग छन जौंक आप तै परोक्ष अर अपरोक्ष  रूप मा  आप तै साहित्यकार बणान मा हाथ च ?

- क्वी ना



भी.कु- आप तै साहित्यकार बणान मा शिक्षकों कथगा मिळवाग च ?

- कुछ ना 



भी .कु. ख़ास दगड्यों क्या हाथ च /

- ना 



भी.कु. कौं साहित्यकारून /सम्पादकु न व्यक्तिगत रूप से आप तै उकसाई की आप साहित्य मा आओ

- मि हिंदी मा लेख ल्याख्दु छाई. फिर मिल सहारनपुर बटी २-३ साल तक "अन्ज्वाल" गढ़वाली मासिक पत्रिका भी निकाल. ऐ बीच मेरी मुलाकात रमेश पोखिरियल "निशंक" जी से ह्वाई. उल मि तै  विशेषकर गढ़वाली मा ल्याखनाकु  उकसाई.





भी.कु. साहित्य मा आणों परांत कु कु लोग छन जौन आपौ साहित्य तै निखारण मा मदद दे ?

डा- प्रेमलाल शास्त्री (ग्व़ाड़ी) और शैलान्चली जी 


Bhishma Kukreti

Sunpat: an Ironic and Witty Short Garhwali Drama

(Review of Very short Garhwali Drama 'Sunpat' (2002) written by Playwright Kula Nand Ghansala)


                                                                Bhishma Kukreti
                Dr. Gauniyal, Bhishma Kukreti, Om Prakash Semwal wrote short dramas those are useful as fillers in a cultural program or any other functions. However, Kula Nand Ghansala and Om Prakash Semwal dramas wrote and staged more short dramas in Garhwali than all. 
          'Sunpat' is very entertaining short drama s filler. An old man (bada) is semi deaf and postman brings money order for him. Postman asks the old man question g but old man answers differently and each answer of the old man has two meanings. Both the meanings are humorous and ironical .The answers create satire and laughter together. The questions and comments of post man also create laughter.
   The drama is very entertaining and definitely humorous.

Reference- Sunpat, 2002 souvenir of Akhil Gadhwal Sabha , Dehradun, page 150-152
Copyright@ Bhishma Kukreti, 16.6.2012

Bhishma Kukreti

Tandi geet: A Tandi folk Song of Ravain tribe, Uttarkashi Area

                                         Bhishma Kukreti


[Notes on bravery Folk Songs about encounters between two tribal groups; bravery Folk Songs of Asia about encounters between two tribal groups; Bravery Folk Songs of South Asia about encounters between two tribal groups; bravery Folk Songs of SAARC Countries about encounters between two tribal groups; bravery Folk Songs of Indian sub continent about encounters between two tribal groups; bravery Folk Songs India about encounters between two tribal groups; bravery Folk Songs of North India about encounters between two tribal groups; bravery Folk Songs of Himalaya about encounters between two tribal groups; bravery Folk Songs of Mid Himalaya about encounters between two tribal groups; bravery Folk Songs of Uttarakhand about encounters between two tribal groups; bravery Folk Songs of Ravain, Uttarkashi about encounters between two tribal groups; bravery Folk Songs of Garhwal about encounters between two tribal groups]
{आदिवासियों के वीरतापूर्ण लोक गीत; गढ़वाल के आदिवासियों के वीरतापूर्ण लोक गीत;उत्तरकाशी के आदिवासियों के वीरतापूर्ण लोक गीत; उत्तराखंड आदिवासियों के वीरतापूर्ण लोक गीत; हिमालय के आदिवासियों के वीरतापूर्ण लोक गीत;मध्य हिमालय के आदिवासियों के वीरतापूर्ण लोक गीत;उत्तर भारतीय आदिवासियों के वीरतापूर्ण लोक गीत;भारतीय आदिवासियों के वीरतापूर्ण लोक गीत;भारतीय महाद्वीपीय आदिवासियों के वीरतापूर्ण लोक गीत; सार्क देसिय आदिवासियों के वीरतापूर्ण लोक गीत; दक्षिण एशियाई आदिवासियों के वीरतापूर्ण लोक गीत;एशियाई आदिवासियों के वीरतापूर्ण लोक गीत लेखमाला }.


It was common that communities used to fight for land. There are historical accounts about encounters between two tribes for many regions – one for territory. Smith Michael and Govenar (1994) provide details of encounters between African slaves and Red Indians in America in the book' Mardi Gras Indians'.
   There are folk songs and folklores among Miao tribal groups of China about their encounters with other encroachers in Miao lands.
   Dr.Wilhelam Radloff collected and translated folk songs related to fight between two tribes in his research article –Samples of Folk literature from the North Turkik Tribes ( Oral Tradition, 5/1 – 1990, page 73-90
             Tandi geet: A Tandi folk Song of Ravain tribe, Uttarkashi Area

The following song is about winning over to Gujjar (a community who roams in the jungle and takes their animals with them) by Ravain tribal community Fandanu. Usually , young the women come to their mayka(mother's house) sing and dance collectively these Tandi folk songs in Ravain region of Uttarkashi, Uttarakhand, India.

रवांइ क्षेत्र का प्रचलित तांदी लोक गीत

Tandi geet: A Tandi folk Song of Ravain tribe, Uttarkashi Area

फूली जाली जाई ले, फूली जाली जाई ले
बाणजी के थातीर ले , रये गुन्जेरा आई ले.
फूली जाली जाई ले, फूली जाली जाई ले
भेदा छीनी बांकुरी ले, पाछू देणी फिराई ले
चान्द्या लाई खई ले, चान्द्या लाई खई ले
फांदणु- गुजरू कि हई पड़ी लड़ाई ले ..
फेड़ पक बरा ले पक बरा ले,फेड़ पक बरा ले पक बरा ले
परदेसी गुजरू ले , एक न छोडो घर ले ..
बान का बंगला ले, बानक बगसा ले
फंदाणू मांझी के ले चंदराम सकसा ले

Translation-

Gujar community arrived in Banjan area.
The villagers took their sheep and goats at the plains of Banjani but Gujar made villagers run away from that place. Villagers became angry. There was fierce fight between Fandanu ( A community in Ravain), the villagers firmly decide not to allow encroachment of Gujars in their territory  and decided to kill all Gujars. Chandrama from the fandango community showed bravery and Gujars had to flee

Collection and research by Dr Jagdish Naudiyal
संकलन व अन्वेषण : डा.जगदीश नौडियाल , २०११, उत्तराखंड की सांस्कृतिक धरोहर -रवांइ क्षेत्र के लोकसाहित्य का सांस्कृतिक अध्ययन , विनसर पब्लिशिंग कं देहरादून
Bhishma Kukreti could take initiative for Internet medium only due to works of Dr Jagdish Naudiyal. Kudos! Dr Jaggu Naudiyal 

Copyright@ Bhishma Kukreti 16/6/2012

Notes on bravery Folk Songs about encounters between two tribal groups; bravery Folk Songs of Asia about encounters between two tribal groups; Bravery Folk Songs of South Asia about encounters between two tribal groups; bravery Folk Songs of SAARC Countries about encounters between two tribal groups; bravery Folk Songs of Indian sub continent about encounters between two tribal groups; bravery Folk Songs India about encounters between two tribal groups; bravery Folk Songs of North India about encounters between two tribal groups; bravery Folk Songs of Himalaya about encounters between two tribal groups; bravery Folk Songs of Mid Himalaya about encounters between two tribal groups; bravery Folk Songs of Uttarakhand about encounters between two tribal groups; bravery Folk Songs of Ravain, Uttarkashi about encounters between two tribal groups; bravery Folk Songs of Garhwal about encounters between two tribal groups to be continued....
आदिवासियों के वीरतापूर्ण लोक गीत; गढ़वाल के आदिवासियों के वीरतापूर्ण लोक गीत;उत्तरकाशी के आदिवासियों के वीरतापूर्ण लोक गीत; उत्तराखंड आदिवासियों के वीरतापूर्ण लोक गीत; हिमालय के आदिवासियों के वीरतापूर्ण लोक गीत;मध्य हिमालय के आदिवासियों के वीरतापूर्ण लोक गीत;उत्तर भारतीय आदिवासियों के वीरतापूर्ण लोक गीत;भारतीय आदिवासियों के वीरतापूर्ण लोक गीत;भारतीय महाद्वीपीय आदिवासियों के वीरतापूर्ण लोक गीत; सार्क देसिय आदिवासियों के वीरतापूर्ण लोक गीत; दक्षिण एशियाई आदिवासियों के वीरतापूर्ण लोक गीत;एशियाई आदिवासियों के वीरतापूर्ण लोक गीत लेखमाला जारी ....

Bhishma Kukreti

Gaun ki ek Suber: A Garhwali Story about Changing Social Norms


                      Bhishma Kukreti

   'Gaun ki ek Suber' is one of the stories of Garhwali story collection 'Banj Ki Peed' (1987) by famous fiction writer Mohan Lal Negi.
         The story deals with the reasons for disputes. Farms, animals, land-border sign, children are the reasons for disputes among the villagers. However, at the time of happiness, sadness, birth-death, marriages and for other occasions all come together. The villagers help each other when there is natural calamity or other outside problems.
  The story also deals that the cooperative nature in the village has been diminishing with the time.
The story writer is successful in depicting various day to day works in villages and small types of disputes among villagers. The writer creates images of life in village by using Garhwali phrases effectively. The story is simple but certainly is interesting.
Reference- Dr Anil Dabral, 2007, Garhwal ki Gady Parampara

Copyright@ Bhishma Kukreti, 17/6/2012 

Bhishma Kukreti

Amba Bainol: A Garhwali Drama about Brother-Sister love based on Folk Story

(Review of Garhwali drama 'Amba Bainol'  (2008) written by playwright Arvind Negi)

                                 Bhishma Kukreti

[Notes on Dramas about Brother-Sister love based on Folk Story; Garhwali Dramas about Brother-Sister love based on Folk Story; Uttarakhandi Dramas about Brother-Sister love based on Folk Story; Mid Himalayan Dramas about Brother-Sister love based on Folk Story; Himalayan Dramas about Brother-Sister love based on Folk Story; North Indian Dramas about Brother-Sister love based on Folk Story; Indian Dramas about Brother-Sister love based on Folk Story; South Asian Dramas about Brother-Sister love based on Folk Story; Asian Dramas about Brother-Sister love based on Folk Story]
[भाई- बहिन प्रेम की लोक कथा आधारित नाटक; भाई- बहिन प्रेम की लोक कथा आधारित गढ़वाली नाटक;भाई- बहिन प्रेम की लोक कथा आधारित उत्तराखंडी नाटक;भाई- बहिन प्रेम की लोक कथा आधारित मध्य हिमालयी नाटक;भाई- बहिन प्रेम की लोक कथा आधारित हिमालयी नाटक;भाई- बहिन प्रेम की लोक कथा आधारित उत्तर भारतीय नाटक;भाई- बहिन प्रेम की लोक कथा आधारित भारतीय नाटक;भाई- बहिन प्रेम की लोक कथा आधारित दक्सिं एशियाई नाटक;भाई- बहिन प्रेम की लोक कथा आधारित एशियाई नाटक लेखमाला ]


            Arvind Negi wrote and directed a Garhwali drama 'Amba Bainol' in Uttarakhand Mahotsav Kauthig organized by Akhil Garhwal Sabha , Dehradun in 2008.
      Children tease Ummeda that he does not have sister. He comes to know from his father that his elder sister Narena is married to Banshinath of Nagvansh far away. Ummeda wants to see his sister and starts journey forPali  Chithaun by taking blessing of Gorakhnath and his father. He faces various types of hurdles on the way. He reached to Narena gaon the sasural of his sister. Father in law of naena does not like Ummeda and kills him through snake bite. Vanshinath makes him alive. Ummeda takes his sister to Mayka by taking consent of his brother in law.   
  The director presented the love between brother–sister very well and the songs and music of Chandra Datt Suyal added in making drama attractive.
Reference- Kula Nand Ghansala, 2008, souvenir of Akhil Garhwal Sabha, Dehradun 2008.

Copyright@ Bhishma Kukreti, 17/6/2012

Notes on Dramas about Brother-Sister love based on Folk Story; Garhwali Dramas about Brother-Sister love based on Folk Story; Uttarakhandi Dramas about Brother-Sister love based on Folk Story; Mid Himalayan Dramas about Brother-Sister love based on Folk Story; Himalayan Dramas about Brother-Sister love based on Folk Story; North Indian Dramas about Brother-Sister love based on Folk Story; Indian Dramas about Brother-Sister love based on Folk Story; South Asian Dramas about Brother-Sister love based on Folk Story; Asian Dramas about Brother-Sister love based on Folk Story to be continued ...
भाई- बहिन प्रेम की लोक कथा आधारित नाटक; भाई- बहिन प्रेम की लोक कथा आधारित गढ़वाली नाटक;भाई- बहिन प्रेम की लोक कथा आधारित उत्तराखंडी नाटक;भाई- बहिन प्रेम की लोक कथा आधारित मध्य हिमालयी नाटक;भाई- बहिन प्रेम की लोक कथा आधारित हिमालयी नाटक;भाई- बहिन प्रेम की लोक कथा आधारित उत्तर भारतीय नाटक;भाई- बहिन प्रेम की लोक कथा आधारित भारतीय नाटक;भाई- बहिन प्रेम की लोक कथा आधारित दक्सिं एशियाई नाटक;भाई- बहिन प्रेम की लोक कथा आधारित एशियाई नाटक लेखमाला जारी ....

Bhishma Kukreti

Sanjog: A Garhwali Story about Marriage are Made in heaven

(Review of Garhwali story collection 'Banj ki Peed' (1987) by Mohan Lal Negi)

                                     Bhishma Kukreti

                 'Sanjog' story of story collection 'Banj ki Peed' by Negi is written on the style of folk style where myth is part and partial of the story.
             Chand and Tara love each other. They are getting married but an devilish person of village does not like the idea and makes hurdle for the marriage. Now the conflict starts for the readers whether Chand and Tara would get married or not or devil would win over.
   The story is in narration style and the writer effectively plays with words.

Copyright@ Bhishma Kukreti, 18/6/2012