• Welcome to MeraPahad Community Of Uttarakhand Lovers.
 

Articles By Bhisma Kukreti - श्री भीष्म कुकरेती जी के लेख

Started by एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720, July 26, 2009, 12:54:53 PM

Bhishma Kukreti

गढ़वाली हास्य व्यंग्य
हौंसि हौंस मा, चबोड़ इ चबोड़ मा                 



                                                    अबौ जड्डू अर तबौ जड्डू



                                                       चबोड्या : भीष्म कुकरेती



              तबारि थर्मामीटर हूंदा होला पण तबारि सरकारम गढ़वाळो कुण इथगा बजट नि छौ बल हम तै पता चौल जावो बल गढ़वालम औसतन कथगा तापमान च त जलवायु इतियासौ खुजनेर बि नि बतै सकणा छन बल तबौ तापमान अर  आजौ तापमानम क्या अंतर छौ . मेरि ददि बुल्दि छे बल ये सालौ जड्डू इनि च जन जै साल फलण मोरि छौ या अलणौ ब्यौ ह्वे छौ या वैकि -तैकि जनानी मैत भागि छे . जलवायु इतियासौ खुजनेर अबि गढ़वाळम कथगा ठंड  पड़दि छे  बान हमर लोक साहित्य पर जादा आधारित छन .

                 हमर टैम याने जब हम छ्वटा छया (अब गीतेश नेगी जन कवि  बुल्दन मि दानो हवे ग्यों ) पर बि  सुबर सुबर आजौ तरां सिलड़ रस्तोंम   खारो कांच जन जम्युं रौंद छौ अर तब हम आज्ञाकारी श्रवण हूंदा  था त सुबर सुबर पाणि लाणो जाण पड़द छौ पण तबार्यौ कांच जन खारो बड़ो दयावान , दयालु , करुण हूंद छौ . वो खारो इथगा दयालु हूंद छौ बल हम तै पता इ नि चल्दो छौ बल ठंड बि क्वी चीज हूंद . हम सुबेर सुबेर  कर्च  कर्च खारोम हिटदा छा पण मजाल च खारो हमर कुछ बिगाड़ी द्याओ धौं .वै खारो तै बि पता छौ बल हम वीर पुत्र पुत्री छंवां अर नंगा खुटुन जाण हमारि शान छे त वै जमानो खारु बि हम लोगुं नुक्सान नि करदो छौ। अचकालौ खारु ! हे मेरि ब्वे बडो निगरू , करुड , निर्दयि ह्वे गे .  उन त अचकाल बच्चा लोग श्रवण कुमार बणनम शर्मान्दा छन पण कबि कबि कबार कै बच्चा पर श्रवण कुमारो भूत लगि गे अर वु सुबेर सुबेर पाणिम ग्यायि अर कांच जन खारोम हिटो त खारु रूसे जांदू . कांच जन खारु चप्पल वाळ तै रडै दींदु , रबर शु वळो रबर शू भिजै दींदु या चमडा जुतुं भितर बि छीरि जांदो .इनमा श्रवण कुमारो भूत लगण पर बि बचा लोग सुबेर सुबेर पाणिम नि जांदन बल कु रावु ये निर्दयी , निगरू खारो दगड़ भारत लीणु. हमर टैम पर जड्डूम सुबेर सुबेरो ठंडी , कुरकुरी हवा बि बड़ी मयेळि हूंदी छे , करुणामयी हूंदि छे। हम जंग्याम सुबेर सुबेर पाणिम जांद छा पण मजाल च कुरकुरी बर्फीली हवा हमर कुछ बिगाड़ी द्यायो धौं ! हमर टैमौ कुरकुरी हवा जाणदी छे बल हमम एकी सुलार च जैन सरा साल चलण अर हम वै सुलार पैरिक रोज स्कूल बि जांदा त हमर टैमौ कुरकुरी हवा जाणदी छे सुलार खारोम भीजि जांदो  अर कखि  बल जु हम सुलार पैरिक सुबेर सुबेर पाणि लौला त सुलारन भीजि ग्याई त हम स्कूल जाण लैक नि रै जौलां . इनमा  सुबेरक कुरकुरी हवा हम पर दया दिखांदी छे अर हमारो कुछ नि बिगाड़दि छे .अबै सुबेरक हवा ग्लोबल माइंडेड ह्वे ग्याइ अर जु तुम गरम कपड़ा नि पैरिल्या त या नई जमानै ठंडी हवा तुम पर निमोनिया जन रोग सरै दॆन्दि , फैले दींदी . हवा को रुख बदले ग्याइ त अचकाल नौन्याळ गरम कोट, पैंट , स्वेटर , टाइ पैरिक पाणि लाणो जांदन . पचीस सालम जड्डू हवाम इथगा बदलाव ऐ ग्याइ .

            तबारि जब हम जड्डूम  सुबेर सुबेर पाणि लाणो जांदा छा त पाणि लांदा लांदा हम पर अग्नि प्रेम को बयाळ चौढ़ी जांद छौ अर हम घौर ऐका अपण हाथ चुल जोग करि दीन्दा छा . खुट बि अग्नि प्रेम का खातिर चुल पुटुक जाणों आतुर्दि रौंद छा पण  हमर खुट सांस्कृतिक नियमों पालन करणों खातिर चुल पुटुक नि जांदा छा बस चुल्लो भैर बिटेन अग्नि दिबता पुजाई करदा छा . वै बगत खुट बि समाज अर संस्कृति नियमो पालन करणम घमंड महसूस करदा छा। अचकाल त खुट बि मनिख जन ह्वे गेन ब्वे बुबों तै बि लते दींदन।

                  हमर जमानोम जड्डूम गुड़ऐ बड़ी इज्जत हूंदी छे अर हम जड्डूम गुडै चा पींदा छा या गुडै कुटकी दगड़ चा पींदा छा . अब त लौबीइंगौ जमानो च . जख जावो तख लौबीइंग . शक्कर लौबी हरेक राज्यम इथगा ताकतवर ह्वे ग्याइ बल गुड़ लौबी इ खतम ह्वे ग्याइ अर अब त गुड़ - गिन्दोड़ा इतियासो पन्नो मा इ मिल्दन . गुड़ -गिन्दोड़ा बणानो बड़ी बड़ी चासणी -लखड़ो कैंचा पुरात्व विभागों म्युजियमम दिखणो मिल्दन .

    गां मा ह्यूं पोडि गे त त्यौहार जन माहौल ह्वे जांदो छौ . हरेक ब्वे बुखण (खाजा ) भुजदी छे जन कि भट्ट, मर्सू , भंगुल , मुन्गरि -जुंडळु खील आदि .अर बैक लोग अंगेठी चारो तरफ बैठिक तमाखू पींदा पींदा इतिहास विमर्श करदा छा याने लोक कथाओं आदान प्रदान करदा छया या अन्ताक्षरी खिल्दा छा  . अब  भट्ट, मर्सू , भंगुल , मुन्गरि -जुंडळु हूंदा नी छन त पैकेटोम भर्याँ नमकीन पर जोर रौंद अर अचकाल बैठकुंम तमाखु जगा दारु -शराबन ले आल, अन्ताक्षरी जगा जुवाक ताश बिराजमान ह्वे गेन .इतिहास विमर्श या लोक साहित्य चर्चा जरूर हूंद च पण कै ग्राम परधानन कथगा गोलमाल कार या जवाहर रोजगार योजनाम कै कैक नकली बैक खाता खोल्यां छन  जन आधुनिक लोक साहित्य पर चर्चा होंदी। 

             जलवायु या हवा परिवर्तन से अब हवाम कुछ हौरि हवा च।  अब रूम हीटरो आण से लोग बाग़ जड्डू मजा नी लींदन . पैल हम जड्डूम रात्यु खंतड्यु से प्रेमिका से जादा प्रेम करदा छा . अब त रूम हीटरो आण से खंतड्यु महत्व इ बिसरि गेवां .अब हम हवा- बदलणो(एयर -कंडीसनर)  लै गेवां त हम तै पता इ नि चलद  कि हवा कनै बगणी च . अब द्याखो ना हमर प्रधान मंत्री तै अमेरिकाम वित्तीय स्तिथि बाराम पूरो पता  रौंद पण प्रधानमंत्री तै इथगा सालोम पता इ नि लग  कि लोगम  स्त्री प्रातीडन से कथगा  आक्रोश च . 

                             







Copyright@ Bhishma Kukreti 25/12/2012

Bhishma Kukreti


                           जा !   बलात्कार्युं जंगड़ सौड़ि  जैन           


                                               भीष्म कुकरेती



   आज  एकान बीच दुफराम गुस्साम एक नौनि पर बलात्कार कार। बलात्कारी नौनी पर रुस्युं छौ

काण्ड लगि जैन तै मानसिकता पर जो सम्भोग तै गुस्सा उतारणों माध्यम मन्दन . अरे इथगा इ गुस्सा छौ त अपण मुंड ढून्गु पर मारदो ना !


    एक भूतपूर्व जमींदारन  समाजम अपण हैसियत , शक्यात , नियंत्रण  दिखाणो, दहसत फैलाणों  बान अपणी गौं की  ब्वारी पर खुलेआम बलात्कार कार .

अरे मरजात ! हे कुजातिक ! हे न्यळतो (नपुंसक )! धौंस जमाणो त्वे तै जनानि दिखेन?.धौंस इ जमाण छे त कै पहलवान मरद पर दिखांदो त हम मानि लीन्दा तू छक्का नि छे मरद छे।


आज  एक सैडिस्टन (जै तै  दुसरो दुःख दिखणम रौंस आन्द ) एक नौनि पर बलात्कार कार

हे बहसी दरिंदा ! हे रागस ! इनि दुःख से मजा आंदो त अपण अंग प्रत्यंगुं तै ल्वाड़ोन थिंचांदी त तब पता चलदो त्वे बेशरम तै कि डा क्या हूंद . अर जु नियम होंदा कि बलात्कार्युं तै कुठारे जाल  त ये सुंगर हिकमत होंदी तेरी ?     



ब्याळि अपण दगड्यो बीचम मरदागनी दिखाणो बान उखम गैंग रेप ह्वे

एकान जनान्यु तै सबक सिखाणो बान रेप कार

हे डंडलि सजेन तुमारि , तडम लगि जैन तुमारि स्या  मानसिकता . अर इनि, जु  तुमर अंग -भंग करे जालो   त फिर दिखाण लैक रैल्या  तुम अपण  स्या मरदानगी ?


एकान अफु तै महान मरद  साबित करणों बान बलात्कार कार

अरे असुर ! फंड धुऴया!  महान मरद इ बणनाइ त क्वी महान काम करदो मोरि गे  छौ  तु  जु  महानता सिद्ध करणों बान त्वे जनानी प्रताड़ना की सूझी ?


शराबौ नशाम एक बुड्यान बलात्कार करि .

ये निर्भागी , हे कोढ़ी ! शराबौ नशाम तीन गू किलै नि खायि ? ये पापि ! शराबौ नशाम तीन फांस किलै नि खायि ?


एक बलात्कारी तै पुछे गे बल तीन दलित नौनि पर बलात्कार किलै कौर ? त बुलण बिस्यायि बल यु त हमर अधिकार च .

या अमानवीय , अमानुषिक , सामाजिक  मानसिकता कब बंद ह्वेलि ज्वा दलितों अर  कमजोर वर्ग पर तरां तरां क अमानवीय अत्याचार करवांदी ?


आज , बीस साल बाद, बलात्कारो केसम एक बलात्कारी  तै ठोस गवाह नि मिलण पर निर्दोष साबित कार

ये राजनैतिक अर कार्यपालिका का ठेकेदारों कब तुम पवित्र संविधान की रक्षा बान समय पर न्याय दिलाणो  इंतजाम करिल्या ?


दिल्लीम गैंग रेप को उपरान्त राजनीति गरमाई

हे बेशरम राजनीतिज्ञों ! कबि त शरम कारो . कबि त स्वाचो कि तुमारि  क्या क्या जुमेवारी च , नियमो मा समयानुसार बदलो त सै ! तुम पर अबि बि जनता भरवस करणि  च अर जैदिन तुमर कुकर्मो , अरनिष्क्रियता से दुखि ह्वेक  कखि जनतान  थमाळि उठाइ दे त ! 







  Copyright@ Bhishma Kukreti 26/12/2012     

Bhishma Kukreti

साहित्यकार  जग्गू नौडियालौ मिरत्यु पर कुछ सवाल



                 भीष्म कुकरेती


                            यु एक सद्यानो सच च बल  जु जनमल तैन मोरण बि च। जब 10 अक्टोबर सन 1940म भीमली गौंम (पैडलस्युं,पौड़ी गढ़वाल , उत्तराखंड ) पंडित चैतराम नौडियालौ ड्यार  जगदीश नौडियालन जनम ले छौ  त भेमातान लेखी दे छौ बल 8  नवोम्बर 2012  कुणि श्याम पुर , रिशिकेषम जगदीश  नौडियालो निर्वाण बि होलु .



                      इखम  खौंऴयाणे बात नी च बल भग्यान  जगदीश नौडियाल भरपूर परिवार ( घरवळी, द्वि नौन्याळ , बिवयिं  नौनी अर  नाति नतिण ) छोड़िक  भगवानो ड़्यार चलि गेन . खौंऴयाणे बात या च बल हम बुलणों गढ़वाळि  साहित्यौ सेवा करदारो तै पता इ नि चौल बल करुण रस से अंसदारी लाण  वळो  गितांग अर कवि चलि गेन . मेरि टेलीफोनम  बात ऊं से सन  2011 बिटेन शुरु ह्वेन . मीन ऊंकी तीन किताबो समीक्षा कुछ बिगळी ब्यूंतम करि छौ त वों बार बार बुल्दा छा बल तुमन मै पछ्याण। अर आखिरें ओक्टोबरम उंको फोन बि ऐ छौ . ऊंन मेखुण 'उदगाथा ' किताब भेजि छौ अर यां पर बात ह्व़े . फिर परसि कनाडा बिटेन पाराशर गौड़ जी दगड बात हुणि छे अर मीन पूछ बल जग्गु दा दगड़ बात बि ह्वेन त वूंन बोलि बल ना भौत दिनों बिटेन नि ह्वे . थ्वडा देरम पाराशर जीक फोन आयि बल नौडियाल जीत 8 नवम्बरो यी दुन्या छोडि चलि गेन। मीन फिर चार पांच गढवाली साहित्यकारों फोन घुमाइ त पाइ बल कै तै कुछ नि पता !



          अब इखमि सवाल खड़ा होंदन कि हम बात त साहित्य सेवा की जरूर करदां पण साहित्य जनमदारो  बाराम उदासीन किलै रौंदवां .  किलै हम दाना सयाणो  साहित्यकारों तै बिसरि जांदा . इनि दिल्लीक साहित्यकारों तै पता इ नी च बल गढ़वळि महान कथाकार अर नाटककार काली प्रसाद घिल्डियाल बच्यां छन त कख छन?  गढ़वळि  साहित्यौ इतिहास लिखणम मजाक मसखरी करण वळु तै पता इ नी च बल जगदीश प्रसाद देवरानी क्वा च अर देवरानी जीन कथा लेखिन  . आखिर या उदासीनता किलै ?



            डा जग्गू नौडियालन वै बगत पर गढ़वळिम गीत अर कविता लेखिन जब गढ़वळि एक ट्रांस्फोर्मेसन की तलासम छे .लोकेश नवानीक बुलण  च बल जब नौडियाल जी ज्वाल्पा देवी जिना मास्टर छ्या त लोग नौडियाल जीक लिख्यां -गयां गीत पुंगड़ो, डाँडो,रस्ता चलदा या गोरम गांदा छा .

        डा  जग्गू नौडियालन गढ़वळिम द्वि  कविताखौळ (कविता संग्रह ) छपैन -गीतुं गाड (1963)अर समळौण (1979). डा पार्थ सारथि बुलण च  बल कविताखौळ 'समळौण'  एक सशक्त अर भावनाऊं से भोर्युं कवितागळ (कविता संग्रह ) च।समळौणम कवि न अभावो तै नया किस्मु भाव दॆन।  32 कवितौं संग्रह -समळौणऐ कवितौंम प्रपंच तै फुंड धोळिक पंच तै थरपे गे . समळौणक कवितौं मा प्रदर्शन की ना दर्शन की उपासना च .जु वीर रसै कविता छन  वो  विध्वंसात्मक ना बल्कणम निर्माणात्मक छन . डा डबरालो बुलण च बल जग्गू क कवितों माँ सर्वकल्याण भावना छन   

   डा जग्गू नौडियालो ब्वेक समळौण्या कविता कळकळो रसौ  (करुण ) बढिया उदाहरण छन . ब्वेक मोरद दै अपण दुधि बच्चा वास्ता सौगंध मंगण वळि कविता  वात्सल्य अर करुण रसौ संगम छ।

  सन साठम ह्युं पोड़न पर रचींजग्गू नौडियालै कविता प्रतीक से  बिम्ब  दर्शाणो उदाहरण त छें इ च दगडम इतिहास दर्शांदी कविता बि च .

बकी बातों ह्यूं
कवि : जग्गू नौडियाल

कवितौ रचना समौ :खैडा, गाँव २४ जनवरी १९६०



ये दिन याद राला ,

ह्यूं पड़ी अबा साला .

सात गती मौ का मैना ,

ह्यूं का पाड़ बंदे गेना ,

भवरेगैनी छाला . ह्यूं पड़ी अबा साला

आंदा जांदा लोक बन्द ,

म्वरणो कू आया छंद

गोरु क्या जी खाला . ह्यूं पड़ी अबा साला

ह्यूं को पाणी तातु कैक

गौड़ी भैंसी वे पिलैक

लगै द्यावा ताल़ा . ह्यूं पड़ी अबा साला

 

   हिन्दीम ऊंकी 6 किताब छपीं छन पण 'उत्तराखंड की सांस्कृतिक धरोहर : रवांइ क्षेत्र के लोक साहित्य का सांस्कृतिक अध्ययन ' मा रवांई क्षेत्रक लोक साहित्य की खोज च . ईं किताबो महत्व ऊनि च जन अबोध बन्धु बहुगुणा , डा गोविन्द चातक, डा मोहन बाबुलकर , डा शिवा नन्द नौटियाल अर डा भट्टो गढ़वाली लोक साहित्य पर खोज की च। 



     डा जग्गू नौडियाल क पांच छै किताब अणछप्यां छन , जां मादे एक कविता पोथी गढ़वळिम  बि च 

भगवान से उन्कि आत्मा तै शान्ति की प्रार्थना ! 



Bhishma Kukreti

Purushkar kail Kai tai De?: Satire on Desire by writers or poets  for Award and Political favors
Critical review of Garhwali (Indian regional language) burlesque, parody, skit, spoof, ridicule, lampoon, satire, satirical prose- 124
Garhwali Satire, burlesque, parody, skit, spoof, ridicule, lampoon, Prose by famous Nonresident Indian satirist Parashar Gaud --25
'Purushkar kail Kai tai De?  '(30, May , 2010) Garhwali burlesque, parody, skit, spoof, ridicule, lampoon, Satire Prose by famous Non Resident Indian satirist Parashar Gaud
                                          Review by Bhishma Kukreti
[Notes on Satire by famous Non Resident Indian satirist on Desire by writers or poets for Award and Political favors; Garhwali Satire by famous Non Resident Indian satirist on Desire by writers or poets for Award and Political favors; Uttarakhand Satire by famous Non Resident Indian satirist on Desire by writers or poets for Award and Political favors; Mid Himalayan Satire by famous Non Resident Indian satirist on Desire by writers or poets for Award and Political favors; Himalayan Satire by famous Non Resident Indian satirist on Desire by writers or poets for Award and Political favors; North Indian Satire by famous Non Resident Indian satirist on Desire by writers or poets for Award and Political favors; Indian regional language Satire by famous Non Resident Indian satirist on Desire by writers or poets for Award and Political favors; Asian regional language Satire by famous Non Resident Indian satirist on Desire by writers or poets for Award and Political favors; Oriental regional language Satire by famous Non Resident Indian satirist on Desire by writers or poets for Award and Political favors]
             The satirical article Purushkar kail Kai Tai De by famous nonresident Indian Satirist Parashar Gaur is about the desire, ambition, wish,  aim, longing, , aspiration, hope, , dream, wish for award and political favors. The writers rush to an award functions for meeting the political leaders but there happened unexpected.
  The satire is sharp attack on desire of writers.
Copyright@ Bhishma Kukreti 26/12/2012
Critical review of Garhwali (Indian regional language) burlesque, parody, skit, spoof, ridicule, lampoon, satire, satirical prose to be continued....126
Garhwali burlesque, parody, skit, spoof, ridicule, lampoon, Satirical Prose by famous Non Resident Indian satirist Parashar Gaud ...26
Comments  on Satire by famous Non Resident Indian satirist on Desire by writers or poets for Award and Political favors; Garhwali Satire by famous Non Resident Indian satirist on Desire by writers or poets for Award and Political favors; Uttarakhand Satire by famous Non Resident Indian satirist on Desire by writers or poets for Award and Political favors; Mid Himalayan Satire by famous Non Resident Indian satirist on Desire by writers or poets for Award and Political favors; Himalayan Satire by famous Non Resident Indian satirist on Desire by writers or poets for Award and Political favors; North Indian Satire by famous Non Resident Indian satirist on Desire by writers or poets for Award and Political favors; Indian regional language Satire by famous Non Resident Indian satirist on Desire by writers or poets for Award and Political favors; Asian regional language Satire by famous Non Resident Indian satirist on Desire by writers or poets for Award and Political favors; Oriental regional language Satire by famous Non Resident Indian satirist on Desire by writers or poets for Award and Political favors to be continued...

Bhishma Kukreti

Ghantakarn or Ghandyal Divta: The powerful deity for prosperity
[Notes on Garhwali culture and religion; Kumauni culture and religion; culture and religion of Uttarakhand; culture and religion of Hardwar; culture and religion of Dehradun, Uttarakhand; culture and religion of Jaunsar Uttarakhand; culture and religion of Ravain, Uttarakhand; culture and religion of Uttarkashi, Uttarakhand; culture and religion of Gangotri-Yamnotri , Uttarakhand; culture and religion of Tihri Garhwal, Uttarakhand; culture and religion of Pauri Garhwal,  Uttarakhand; culture and religion of Udham Singh Nagar, Uttarakhand; culture and religion of Haldwani, Uttarakhand; culture and religion of Ranikhet, Uttarakhand; culture and religion of Nainital, Uttarakhand; culture and religion of Almora, Uttarakhand; culture and religion of Bageshwar, Uttarakhand; culture and religion of Champawat, Uttarakhand; culture and religion of Dwarhat, Uttarakhand; culture and religion of Pithoragarh, Uttarakhand; culture and religion of Uttarakhand, Mid Himalaya; culture and religion of Uttarakhand, Himalaya; culture and religion of Uttarakhand, India; culture and religion of Uttarakhand, Asia; Oriental culture and religion of Uttarakhand]
                                         Bhishma Kukreti
  Ghantakarn or Ghandyal deity is famous deity of Garhwal. The deity Ghandyal or Ghantakarn is very powerful and prosperity provider. There are temples of Ghantkarn or Ghandyal in Garhwali villages. There is Ghantakarn temple in Badrinath. The place 'Dev dekhani or Dev Darshani is atemple of Ghantakarn or Ghandyal. Before worshiping Badrinath shri, the devotees worship Ghandyal or Ghantakarn deity.
   In the Doodhatoli shrine, there is a village Bhamsar (there is government horticulture garden). In this horticulture park, there is very beautiful temple of Ghandyal or Ghantkarn just near to Panjikkhal. This deity Ghatkarn or Ghandyal is also the Khetrpal deity of Bali Kandarsyun, Kandarsyun, Chopdakot and Dhaijyuli Pattis. Ghantkarn is family deity of Kaproli village (Chopdakot) and Ghulet village (Bali Kandarsyun).  There is tour of Ghandyal divta (Jat) as there is tour of Raj Rajeshwari Nanda Devi. The village people of this region take flags (Dhwaj or Nisan) to all villages in the Ghandyal tour (jat). There are figures of flag, colorful flags,coconiut, various figures, and ornaments on the main Dhwaj. The hight of Dhwaj varies from twenty one feet to fifty one feet. At the top of flag or Dhwaj, there is Chanvar.
   The deity Ghandyal is famous for blessing (parchari divta) to devotees with ease. The deity Ghandyal or Ghantakarn is the deity of protecting to the region. That is why all the people of the said region participate in the Ghandyal Jat and provide gifts for the deity. The people with Dhwaj go to each village and sing the song of Ghandyal. The Pashwa dances with the Jat and blesses to people on behalf of deity Ghandyal.
       The Ghandyal jat or Deity March is celebrated for a month. On the last day, the people dance and sing whole night. People provide gifts to deity. There are jagars of Ghandyal divta or Ghantakarn deity .
The Ghandyal divta is prior to Kantyura era and it means the deity was worshipped at the time of Khas era and Kanait era (before 3000 years back). There is full mention of Yaksh deity in mahabharat and Harivansh Puran.
  In every deity worshipping, the Jagri first worships or calls the Khestrapal or Ghantkarn. Historian Dr. Dabral mentions that in past, in most of the village, villagers used to have Ghadyal temple (symbolic) on top of village hill to protect them.
Copyright@ Bhishma Kukreti, 26/12/2012
References:  books of Dr Shiva nand Nautiyal and Dr Shiv Prasad Dabral
Commentary  on Garhwali culture and religion; Kumauni culture and religion; culture and religion of Uttarakhand; culture and religion of Hardwar; culture and religion of Dehradun, Uttarakhand; culture and religion of Jaunsar Uttarakhand; culture and religion of Ravain, Uttarakhand; culture and religion of Uttarkashi, Uttarakhand; culture and religion of Gangotri-Yamnotri , Uttarakhand; culture and religion of Tihri Garhwal, Uttarakhand; culture and religion of Pauri Garhwal,  Uttarakhand; culture and religion of Udham Singh Nagar, Uttarakhand; culture and religion of Haldwani, Uttarakhand; culture and religion of Ranikhet, Uttarakhand; culture and religion of Nainital, Uttarakhand; culture and religion of Almora, Uttarakhand; culture and religion of Bageshwar, Uttarakhand; culture and religion of Champawat, Uttarakhand; culture and religion of Dwarhat, Uttarakhand; culture and religion of Pithoragarh, Uttarakhand; culture and religion of Uttarakhand, Mid Himalaya; culture and religion of Uttarakhand, Himalaya; culture and religion of Uttarakhand, India; culture and religion of Uttarakhand, Asia; Oriental culture and religion of Uttarakhand to be continued...

Bhishma Kukreti

गढ़वळिs  केंडोकरण (मानकीकरण )



              भीष्म कुकरेती



अचकाल  गढ़वळि चित्वळ (सचेत) लिख्वार  संदीप रावत  जी गढ़वळि केंडोकरण (मानकीकरण ) जणगरा लिख्वारो दगड छवीं बथ करी एक कामै बहस करणा छन बल गढ़वळि केंडोकरण  हूण चयेंद बल या ना अर गढ़वळि केंडोकरण हूण चयेन्द त कनै हूण चयेन्द ?
स्टैंडर्ड भाषा वा हॊन्दि जैंक  बोलीम  गातम  /सरैलम /स्वरूपम इकसनिपन /एकरूपता ह्वाओ .



कै बि भाषा तै स्टैंडर्ड बणानो बान तौळै  बात जरुरी होंदन -

1- एक शब्दकोष  हूण चयेन्द जै तै सबि  मानन

2- इन व्याकरण हूण चयेंद जै तै सबि बुलेंदर या लिखनेर मानन

3-बुलणम एकसनिपन ह्वाओ

4-क्वी  ख़ास सर्वमान्य संस्थान ईं भाषा तै मान्यता द्याओ जन की कोर्ट , सरकार , शिक्षा  संस्थान

5- लोग ईं भाषा तै मन्यता दयावान अर बचळयाणम सौंग ह्वाओ

6- समाजमा  या भाषा प्रचलित ह्वे जाओ   

7- कामै लिपि

त अब सवाल च बल गढ़वळि केंडोकरण (मानकीकरण ) बान क्या क्या उपाय करे जावन ?

                                केंडोकरण/मानकीकरण कैकुणि कन ?


मानकीकरणा धड़वैयुं  तै यु जबाब पैल  दीण चएंद बल गढ़वळिs  यु मानकीकरण कैकुण करण ?

लिख्वारो खुणी ?

आम जनता कुण ?

अर जब केंडोकरण/मानकीकरण ह्वे  बि ग्याइ त यीं भाषा तै आम जनता बीच प्रचार प्रसारो बान  हमम क्या क्या ब्यूंत /साधन छन ?






                                    शब्दकोश



अब तलक हमम मास्टर जय राम वर्मा , मॉल चन्द रमोला अर रमाकांत बेंजवालो गढ़वाली हिंदी शब्द कोश छप्यां  छन . डा अचलानंद जखमोलौ शब्द कोश (गढ़वळि-हिंदी अंग्रेजी ) छपणो तयारीम च . कन्हयालाल  डंडरियालो शब्द कोश (गढ़वळि-हिंदी ) शैलवाणी , कोटद्वार बटि सतवाडाम  (साप्ताहिक )  छप्याणु च

भीष्म कुकरेतीs अंग्रेजी -गढ़वळि शब्दकोश जल्दी शैलवाणी कोटद्वार बटिन छपेण  वाळ च

जख तलक वर्मा जी अर  रमोला जीक शब्द कोशुं सवाल च यी कोष छ्वटा छन . रमाकांत जीक शब्द कोशम  मथि मुलक्या (उत्तर गढ़वाल ) बोलि प्रभाव जादा च

डा . अचलानंदो शब्द कोष जब बजारम आलो तबि छ्वीं लगि सकदन   

कन्हयालाल डंडरियालो शब्द कोशो कमी च इखमा डंडरियाल जीन हिंदी , संस्कृत अर अंग्रेजी शब्द बि डऴयां   छन .

भीष्म कुकरेतीs शब्द कोशो  भाषा टुप मल्ला ढांगू बामणु गौं बोलिम च।

त सबसे पेल यांक छांट निराळ करण पोड़ बल कै शब्द कोश तै सर्वमान्य माने जावु -रमाकांत जीको या डा जखमोला जीक ?

फिर सबि  शब्द कोशुम एक कमि च बल शब्दु ब्वे बाबु बाराम क्वी खबर /जानकारी नी च

गढ़वळि भाषाs खाशियत च ध्वनि प्रबलता ये मामलाम मै नि लगद क्वी बि शब्द कोष पूरो च

                   व्याकरण



अबि तलक तीन चार जणगरू काम समणि च

1- अबोध बंधू बहुगुणाs - गढ़वाली व्याकरण की रूप रेखा

2- रजनी कुकरेतीs - गढ़वाली व्याकरण

3-गढ़वाल सभा देहरादूनs -गढ़वाली व्याकरण

4- भीष्म कुकरेतीs -कुमाउनी -गढ़वाली -नेपाली व्याकरण का तुलनात्मक अध्ययन (इंटरनेटम  )

अब विद्वानु तै छाण निराळ करण पोड़ल बल कै पोथि तै सर्वमान्य माने जावु



                    संस्थान



अब इखम बि निरासपंत च बल ना त  सरकार ना इ कै कामौ संस्थानन यु काम करण जांन सर्वमान्य भाषा लोगुंम प्रचलित ह्वाओ



              कामै लिपि



एक बडो सवाल च बल ध्वनियुं तै लिखणों बान कुछ नया आखर /चिन्हों तै कनै जोड़े जावु

त मानकीकरणै छ्वीं ईनि फोकटम नि लगण चयेंदन  बल्कणम मथ्या सवालुं जबाबो दगड इ छ्वीं लगण चयेंदन

म्यरि   हथजुडै  च मानकीकरण बथ करण त गम्भीर रूपम सबि सवालों जबाब बि ढुंढयावों /खुज्याओ   

Bhishma Kukreti

गढ़वाली हास्य व्यंग्य
हौंसि हौंस मा, चबोड़ इ चबोड़ मा





                                    मंत्री जीको डेलिगेसनो दगड़  उन्नादेस (विदेस ) जाण



                                 चबोड्या : भीष्म कुकरेती



उन मंत्री जी उत्तराखंड क्या देसम कखि बि नि दिखेंदन .वैदिन  मंत्री जी परदेस बिटेन  एक हवाई जाज बिटेन  भैर ऐन अर फिर दुसर जाज से डेलिगेसनो दगड हैंको देस चली गेन . इखमा मंत्री जीक क्या दोष ?अब जब पैत धर्युं ह्वाओ, वीसा बण्यु होउ त मंत्री जी तै भ्युं उतरदा इ दुसर देसै जात्राम जाणि पोड़द। आज कुज्याण कनै मंत्री जी ड्याराडूणम दिखे गेन।

मीन पूछ बल मंत्री जी आज क्या बात ड्याराडूण पर इथगा मेरबानी किलै ? तुम इख देसम किलै?

ऊंन बोलि बल मुख्यमंत्री जीक साडु भायौ  भैजिक साडु भायिक बड़ो नौनौ  ब्यो च त विदेस जात्रा बिचिम छोड़िक आयुं छौं . डेलिगेसन उखि विदेसम इ च .

-अच्छा त डेलीगेसन उखि विदेस जात्रौ मजा लीणु च .

- चुप  ! मजा ना !डेलीगेसन उख उत्तराखंडम कनों विकास हूण चयेंद  जन विषयुं अध्ययन करणु च .

- माफ़ कर्याँ मंत्री जी , जीब रौडि गे .  उख विदेसम रैक आपौ डेलीगेसन विकासौ बान क्या क्या अध्ययन करणों च  ?         

-अब कुछ समौ पैल मि अर म्यरो डेलीगेसन उन्नादेसु ( विदेस ) जात्राम गे छा त मीन अर म्यार दगड़ो डेलीगेसनन कथगा बात सीखिन अर फिर मुख्यमंत्री तै अध्ययन की ख़ास खास बात बतैन .

-जन कि ?

-जन कि म्यरो डेलीगेसन को अध्ययनों बदौलत उत्तराखंडम नयो मूल निवासी क़ानून बौणि।

-पण यांक बान उन्नादेसु (विदेस) जात्रौ जरूरत क्या च ? इलाहाबादम जनम ल्याओ , सरा जिन्दगी भैर रावो अर रिटायरमेंटो मजा लीणो उत्तराखंडौ  मुख्यमंत्री बौणि जावो त अफिक गैर उत्तराखंड्यु तै मूल निवासी बणानो तरकीब ऐ ई जांद .

-हाँ तुमर बात सै च पण म्यार डेलीगेसनन मुख्यमंत्री तै ढाढस दे बल एक दै क़ानून बणै द्याओ त फिर क्वी घंटा बि नि उखाड़ सकदु .

-पण मंत्री जी ! बेशरमी, बिलन्चपन,  सिखणो बान आप तै डेलीगेसन लेकि उन्ना देस जाणै क्या जरूरत ? इखि डा रमेश निशंक से सीखि लींदा बल धुर्या, खुट्या , दुराचारी , बेदर्द , शराबौ दलाल , शराबो ठेकेदारौ  गुलाम,हत्या करणों जन मानसिकता वळो नामधारी तै उत्तराखंडो अल्पसंख्यक आयोगौ अध्यक्ष कनै अर किलै बणये जांद।

- हाँ ! हम कोंग्रेसी बि डा निशंक से भौत सा ऊलजलूली बात सिखणा इ रौंदा पण याँखुंण बि डेलिगेसनो दगड़ उन्नादेसौ जात्रा जरूरी च .

-अछा ! उन्नादेसौ जात्रा से हौर क्या क्या सीख आपन अर आपक डेलीगेसनन ?

- अब सि उर्दू तै उत्तराखंडम अग्वड़ि बढाणो बान उर्दू अकादमी की सिफारस बि मीन अर म्यरो डेलीगेसनन इ दे छौ

-हाँ ! अपुण मड़घट जोग हुयां बीमार ब्वे बाबु तै छोड़िक दुसरो ब्वे बाबु सेवा करण सिखणो बान उन्नादेसू जात्रा बि जरूरी च . द्वी हजार साल पुराणि कुमाउनी, गढ़वळि   भाषा मोरणि छन वांक कै तै चिंता नी पण उर्दू अकादमीs  बड़ी चिंता च .

-आप बुद्धिजीवी हर बात की काट करदां। अरे म्यर अर म्यरो डेलीगेसनन उर्दू अकादमीक कनै खुलणो बान कुज्याण कथगा देसूं सैर कार धौं अर तुम छंवां बल कुमाउनी, गढ़वळि रुण रूणा !

- पण मंत्री जी यो सिखणो बान उन्नादेसौ जात्रा जरूरी नि छे . यी त तुम डा। रमेश निशंक का कुउदेस्यों से सीखि सकदा छा कि जौंन कुमाउनी, गढ़वळि छोड़िक संस्कृत तै उत्तराखंडौ राजभाषा घोषित कौर .

-हां ! हां ! हम डा निशंक का सौब कुकर्मी, कुउदेस्यी  ब्यूंत/तकनीक  त सिखणा इ छंवां पण यूं ब्यूंतो तै कनैक  कार्यावनित करण सिखणो बान मि तै मय ड़ेलेगेसन उन्नादेस जाणि पोड़द।

-एक बात बथाओ तुमर ड़ेलेगेसनौ सदस्य कु कु छन ?

-इखमा क्या च ? जन सरा भारतम हूंद तनी च  . म्यरो सरकारी विदेसी जात्राक डेलीगेसन मा मि छौं, मेरि कज्याण च, परिवार च , ससुरालौ भौत सा लोग छन . और क्या ?

-औ! इखम आप पूरो विशुद्ध भारतीय नेता छंवां जु अपण परिवार तै सरकारी डेलिगेसनो नाम पर विदेश भ्रमण करांद                                       







Copyright@ Bhishma Kukreti 7/01/2013

Bhishma Kukreti

Om Mahi Khanam: Hard Hitting Satire as hammer on Corrupt Administration, political system
   Critical review of Garhwali satirical prose- 125
Critical Garhwali review of Satire by Great Satirist Harish Juyal -1
Om Mahi Khanam (2012) Garhwali Satire Prose by Great Garhwali satirist Harish Juyal (A review)
                            Review by Bhishma Kukreti
    [Notes on Hard Hitting Satire as hammer on Corrupt Administration, political system by Great Garhwali, Indian Satirist; Hard Hitting Garhwali Satire as hammer on Corrupt Administration, political system by Great Garhwali, Indian Satirist; Hard Hitting Uttarakhandi Satire as hammer on Corrupt Administration, political system by Great Garhwali, Indian Satirist; Hard Hitting Mid Himalayan Satire as hammer on Corrupt Administration, political system by Great Garhwali, Indian Satirist; Hard Hitting Himalayan Satire as hammer on Corrupt Administration, political system by Great Garhwali, Indian Satirist; Hard Hitting North Indian Satire as hammer on Corrupt Administration, political system by Great Garhwali, Indian Satirist; Hard Hitting Indian Satire as hammer on Corrupt Administration, political system by Great Garhwali, Indian Satirist; Hard Hitting Asian Satire as hammer on Corrupt Administration, political system by Great Garhwali, Indian Satirist; Hard Hitting Oriental Satire as hammer on Corrupt Administration, political system by Great Garhwali, Indian Satirist]

                Harish Juyal is one of the great poetic satirists of Garhwali literature.  His poetries are Kanhyalal Dandarilaic satirical verses. Harish also writes satirical articles and these satirical articles are gems for Garhwali literature. The difference between the satirical prose by famous satirists of Garhwali Parashar Gaur, Puran Pant 'Pathik', Bhishma Kukreti, Tribhuwan Uniyal and Harish Juyal is that the satirical prose by Harish Juyal has more humor than others.  Using humors prose is specialty of great Garhwali satirist Harish Juyal.
  'Om Mahi Khanam 'hits hard on corrupt administration and political system
      ज्यंदु रैणा खुणैकि सबसे पेल खाणकु चयेंद . चोरिक खाओ , मांगिक खाओ य त मेनत को खाओ .
एक बात मी बतै द्यूं कि चोरिक खाणु इज्जतदारो काम हूंद
The satire discusses about different corrupt methodologies at every arena of life in Garhwal, India. Harish uses Garhwali symbols for creating satire with lot of laughter too.   

Copyright@ Bhishma Kukreti 7/01/2013
   Critical review of Garhwali satirical prose to be ... 126
Critical Garhwali review of Satire by Great Satirist Harish Juyal to be ...2
Literary commentary on  Hard Hitting Satire as hammer on Corrupt Administration, political system by Great Garhwali, Indian Satirist; Hard Hitting Garhwali Satire as hammer on Corrupt Administration, political system by Great Garhwali, Indian Satirist; Hard Hitting Uttarakhandi Satire as hammer on Corrupt Administration, political system by Great Garhwali, Indian Satirist; Hard Hitting Mid Himalayan Satire as hammer on Corrupt Administration, political system by Great Garhwali, Indian Satirist; Hard Hitting Himalayan Satire as hammer on Corrupt Administration, political system by Great Garhwali, Indian Satirist; Hard Hitting North Indian Satire as hammer on Corrupt Administration, political system by Great Garhwali, Indian Satirist; Hard Hitting Indian Satire as hammer on Corrupt Administration, political system by Great Garhwali, Indian Satirist; Hard Hitting Asian Satire as hammer on Corrupt Administration, political system by Great Garhwali, Indian Satirist; Hard Hitting Oriental Satire as hammer on Corrupt Administration, political system by Great Garhwali, Indian Satirist to be continued....

Bhishma Kukreti

गढ़वाली हास्य व्यंग्य
हौंसि हौंस मा, चबोड़ इ चबोड़ मा



                         सोनिया गाँधी अर मनमोहन जीs अण सुऴज्यां दुःख 



                                            चबोड्या : भीष्म कुकरेती





-सोनिया जी ! मि तै कुछ समजम नि आणु .

-मनमोहन जी ! मेरी बि बिंगणम नि आणु

-सोनिया जी ! मि तै कुछ नि दिख्याणु बल क्या ह्वाल?

-मन जी ! म्यार  अगनै काळो अंध्यर च . राहुलो सौं जु एक बेथ अगनै बि दिखेणु हो .

-मिसेज गांधी ! मै लगद फिर से अन्तराष्ट्रीय छापोंम  (पत्र - पत्रिका) मेरी काट हूण

-सरदार जी ! मै लगद राष्ट्रीय मीडियाम मेरी बड़ी बेज्जती हूण   

-मैडम जी ! म्यार पुटकुंद  त च्याळ पोड़ना छन बल इतियासम म्यार नाम नाकाबिल प्रधानमंत्रीs पतडोंम लिखे जालो

-सिंह साब ! मि तै निंद नि आन्दि बल क्या म्यरो राहुल बगैर प्रधान मंत्री पद पायुं चैन से रै साकल ?

-  सोनिया जी ! मीरो रिफ़ॉर्मs बदौलत अम्बानी , पोंटि चड्ढा , मारन , जन धन्युं मातबरी हजारो गुणि बढ़ पण संयुक्त राष्ट्रे रिपोर्ट बथाणि च बल गरीबी मा कमि नि आणि च। सोनिया जी ! यि गरीब पैदा इ किलै हून्दन  ?

-मनमोहन सिंह  जी ! बिचारो राहुलन चुनावों बगत फर कथगा  फिरड़-फराड़ कार। अर कोंग्रेसौ भितरै रिपोर्ट बथांदी बल वोटर राहुलो भकलौणम कतै नि आन्दन। जख जख राहुल गे उख हम चुनाव हरौं . मनमोहन जी ! इ भारतम गैर-कौंग्रेसी वोटर पैदा इ किलै होंदन?

-सोनिया जी अब द्याखो ना ! मेरी म्यरों आर्थिक नीति  से अम्बानी , पोंटि चड्ढा , ए राजा जन लोग अब महलोंम  रौण बिसे गेन अर यूएनओ रिपोर्ट  बथाणि च बल तेतीस टका भारतीयोंम दस बाइ  दस फीटो  ड़्यार बि नी च। सोनिया जी !यूं गरीबोंम जब रौणै जगा नी च त यी गरीब-हीण लोग बच्चा पैदा इ किलै करदन ! यूं गरीबुं वजै से में सरीखा प्रकांड, विद्वान्, अर्थशास्त्रीs दुन्या -थौळ ( इंटरनेशनल फोरम) मा कथगा बेज्जती हूंद ?     

-मन जी अब द्याखो ना ! नेहरु परिवारों वजै भारतम प्रजातंत्रम कथगा उन्नति ह्वे। अर यि भारतीय छन बल हमर राजकुमार राहुल गांधी छोड़िक  नरेंद्र मोदी तै प्रधान मंत्री बणान चाणा छन . यी गैर कोंग्रेसी पार्टी भारत जन देसुम पैदा इ किलै हॊन्दन ? यूं गैर कोंग्रेसी नेतौं वजै से हमर राजकुमार सीधो प्रधान मंत्री नि बौण सकुद .

-सोनिया जी ! तुम त गवा छंवां बल म्यरी आर्थिक नीति से भारतम मतबरो कुण सैकड़ो  अस्पताल खुलि गेन . दुन्याs बड़ा बड़ा पत्रकार यां पर मेरि बडे-प्रशंसा करदा नि अघान्दन . अर यु यूएनओ च बल मि तै दनकान्दु  बल भारतम बाल मृत्यु दर बंगलादेस से बि जादा च अर भारत बाल मृत्यु दर कम करणम अबि भौत पैथर च . मेरि समजम इ नि आंदो जब यूं गरीब लोगुम खाणों नी च , पैरणो लारा नी च , रौणो कूड़ नी च त इ  ब्या इ किलै करदन ? यूं गरीबों  वजै से हम आर्थिक पंडितु कथगा बेज्जती हूणी च।

- मन जी ! त क्या  करे जावो ?   

-मै लगद यूएनओ  रिपोर्ट ठीक करणों बान  कपिल सिब्बल जी अर चिदम्बर जी तै यूएनओ  भिजदां . यी द्वी संख्या /फैक्ट -फीगर तै तुड़ण -मरोड़नम उस्ताद छन . उख जैक इ द्वी काळो तै सुफेद सिद्ध त कौरि द्याल।

-अर मनमोहन जी ! इख राहुलो क्या होलु ?

-मैडम जी ! राहुल जी तै राष्ट्रीय स्वयं संघम नागपुर भेजि द्याओ 

- मनमोहन जी यी क्या बुलणा  छंवां। कोंग्रेस की नीति ?

-मैडम जी ऊनि बि क्वा पार्टी  च  ज्वा नीत्युं पर हिटणि च ?

-हाँ ! सिंह जी !  बुलणा त तुम सै छंवां। मि जरा अहमद पटेल जी तै बि पूछि लींदु 


Copyright@ Bhishma Kukreti 8/01/2013

Bhishma Kukreti

गढ़वाली हास्य व्यंग्य
हौंसि हौंस मा, चबोड़ इ चबोड़ मा



                                                                   

                                              फिकर नी कारो -द्वी चीजुं पूरो  इंतजाम च



                                                 चबोड्या : भीष्म कुकरेती

(s=-माने  आधा अ )

                    ब्याळि गांमा कुटुमै बोडि गुजरि त सुबेर सुबेर सुन्दुर भैजिs फोन ऐ बल ब्वे खतम ह्वे गे। कुंडुम लिजाणै परेशानी त नी च . अचकाल बस अड्डा तलक मुरदा जनक्याणो  नेपाळी या बिहारी खार्युं मिल जांदन अर उख मड़घटम बि लखड लाणों बि  नेपाळी या बिहारी मिलि जांदन पण मड़घटम पचास साठ  मुडै नि राला त गां -गौळम (समाजम ) नाक कटि  जालि .

                         पैलि जब बस अर नेपाळी या बिहारी नि छ्या त हमर गांवक मुर्दा लिजाणों सहेलि जन सहकारिताs  प्रदर्शन होन्दु छौ अर गांवक अर न्याड़ -ध्वारो गांवक लोग शंख बजदि खेती पाति से कैजुअल लीव लेकि मुर्दा लिजाणों मुडै बणनम पुण्य समजदा छा। अब बस, नेपाळी या बिहार्युं आण से लोग बाग़ मुडै बणनम  ठसठस लगदन। महादेव चट्टी बस नि जान्दि त अब हमर  गांवक  मड़घट बि महादेव चट्टी घाट से सात मील दूर फूलचट्टी घाट शिफ्ट ह्वे ग्याइ।फूलचट्टी माने हिंवल अर गंगा जी संगम .

सुन्दुर भैजिन पूछ , " भीषम !  पचास साठ मुडै कखन लाणन ?"

"भैजि ! गां मा तुम छंवां। मि मुंबई मा रैक क्या बथों ?" मीन जबाब दे अर अग्वाड़ी ब्वाल ,"  ब्वाडा जीन सरा अडगें (क्षेत्र ) मुर्दा बोकिन त बोडिs जनाजा मा किलै नि लोग आला ?"

"भई अब जमानो बदलि गे ." सुन्दुर  दाs जबाब छौ

मीन ब्वाल ," सि घौरम अपण मुंडीतौ रामु का च, बंसी भैजि च . ऊंकुणि बोल बल लोगुं तै भट्यावन।"

सुन्दुर भैजिक जबाब छयो ," अरे दुयुं दगड कुट्टी हुंईं च . हम एक हैकाक दगड नि बचऴयांदा ."

मीन पूछ ," किलै ?"

" रामु का तै महा गरीब (बीपीओ ) बणन छौ त मेरि गवाही चयाणी छे .इनि बंसी भैजि तै सुदि मुदि सरकारी लोन चयाणु छौ अर मेरि गवाही जरूरी छे . म्यार दिलन गवाही नि दे अर मीन दुयुंक परपंचम गवाही नि दे त द्वी  नरक्याँ (नराज ) छन ." सुन्दुर दान बोलि .

मीन ब्वाल ," क्वै ना क्वै त तरकीब होलि कि गां अर न्याड़ -ध्वारो गांवका लोग बोडि तै कंधा दीणों ऐ जावन ."

सुन्दुर दान पुळेक ब्वाल ," हाँ छैं  च . तीम  गां अर  न्याड़ -ध्वारो गांवका सौएक लोगुं फोन नम्बर त छैं छन ना ?"

मीन बोलि ," हाँ फोन नम्बर छैं छन ."

" त तू इन कौर तख मुम्बै बिटेन सब्युं कुण  फोन कौर अर आखिरें जोर लगैक जरुर टक लगैक , जोर लगैक बोलि बल मुर्दा फुकेणों परांत द्वी चीजुं पूरो बरोबर इंतजाम च. मुर्दा फुकेणों परांत द्वी चीजुं पूरो बरोबर इंतजाम च बुलण नि बिसरण हां !" सुन्दुर भैजिन आदेस दे .

मीन पूछ भैजि बल यो  द्वी चीजुं पूरो बरोबर इंतजाम च को मतबल क्या च .

सुन्दुर दान ब्वाल ," तू बस फोन कौर।  मीम या बात समजाणो टैम नी च .डांडी , कफनौ  इंतजाम बि करण। तू बस सब्युं कुणि फोन कौर अर द्वी चीजुं पूरो बरोबर इंतजाम च बुलण नि बिसरि"

मीन मुम्बै बिटेन गां अर न्याड़ -ध्वारो गांवका सौएक लोगुं  तै फोन कार बल बोडि  गुजरि गे अर आखिरैं जोर लगैक ब्वाल बल मुर्दा फुकेणों परांत द्वी चीजुं पूरो बरोबर इंतजाम च।

सब्युंन पुळेक जबाब दे बल जब द्वी चीजुं पूरो इंतजाम च त मि  सुंदुरु ब्वे तै कंधा दीणों अर लखड़ दीणों जरूर जौलु .

मेरि समजम अबि बि नि आयि बल पैल मुड्वैयुं तै परसाद खिलान्दा छा त अब या  दुसर नै चीज क्या आयि         

   

दुफरा परांत सुन्दुर भैजिक फोन आयि ," थैंक यु भीषम ! म्यरो बाई हार्ट ब्लेसिंग च , आशीर्वाद च बल जब तू मोरलि त  हजारो लोग त्वे तै कंधा दीणों ऐन ." मि घंगड़े ग्यों अर मेरी समज मा नि आयि बल यो आशिर्बाद च या क्या च। फिर सुन्दुर दाक आवाज बि लड़बड़ाणि छे . मीन घड़याइ बल सैत च ब्वे मोरणों दुःख अब होणु होलु   

मीन ब्वाल , भैजि मीन त सौएक लोगुं तै फोन कार छौ . लकड़ी दीणों क्वी नि आयि क्या ?"

सुन्दुर दान जबाब दे ," अरे न्है रे  त्यार फोनों बदौलत ब्वे तै लखड़ दीणों द्वी सौ आदिम ऐन . इथगा आदिम त कैक सप्ताहम बि नि आन्दन . अर सौब इखम बखत्वारौ होटलम बैठ्यां छन  "

मीन पूछ , " भैजि यि 'द्वी चीजुं पूरो बरोबर इंतजाम च'   मतबल क्या च ? पैल त  मुड्वैयुं तै परसाद खिलान्दा छा अब या नै चीज क्या च ?"

सुन्दुर दाक जबाब छौ ," अबे लाटा ! अब परसादो जमानो नि रै गे . द्वी चीजो इंतजाम माने शिकार अर  शराब ."

मीन खौंळेs ब्वाल ," क्या ! मुरदा फुकणो बाद -शराब अर शिकार ?"

सुन्दुर दान बोलि ," हाँ ! मीन बि छै बुगठ्या अर बीस पचीस मुर्गा मर्वैन अर कुज्याण कथगा बोतळ दारु धौं ! अबि बि मुडै शिकार अर शराब का मजा लीणा छन ."

मीम बुलणों कुछ रयुं बि नि छौ     

     



Copyright@ Bhishma Kukreti 9/01/2013