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Ornaments Worn In Uttarakhand - उत्तराखंड में पहने जाने वाले आभूषण

Started by एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720, July 31, 2009, 09:05:45 PM

Devbhoomi,Uttarakhand


तुग्यल

कुमाऊँ क्षेत्र मैं प्रचलित कानों का यह आभूषण चपटी पट्टी के आकार का होता है जो सोने या चाँदी का बना होता है इस पर हरे-लाल नगीने जड़े रहते है !

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गोरख

यह विशुद्ध रूप से पुरुषों का गहना है,जिसे सोने तथा चांदी दोनों धातुओं से बनाया जाता है इस पर सुन्दर झुमके लगे होते हैं,शादी-ब्याह के अवसर पर दूल्हे को दिए जाने वाला यह गहना १० ग्राम का बना होता है !

किन्तु आधुनिक समय में यह विलुप्त हो रहा है,इन गहनों  के अतिरिक्त कानों में झुमके,झुपझुपी,उत्रैली,जल कंछ्व  और मछली भी पहनी जाती हैं !

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                      उत्तराखंड में नाक में पहने जाने वाले आभूषण
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                नथ(नथुली )


कुमाऊं तथा गढ़वाल दोनों क्षेत्रों में नथ या नथुली  सुहाग का प्रतीक तथा प्रमुख आभूषण है,इसकी बनावट मैदानी भागों की नथ से भिन्न होती है !

यह ३० से ५० ग्राम भार की तथा १० सेंटीमीटर अर्ध ब्यास  की गोलाकार छल्ले जैसी आकिरती की होती है जिसके निचले भाग में लाल और हरे रंग के तीन सितारे होते हैं !

इसे एक चांदी की जंजीर से हुक द्बारा बालों पर लटकाकर नाक पर पड़ने वाले भार को कम किया जाता है टिहरी गढ़वाल की नथ,अपनी विशिस्ट बनावट और भार के कारण बहुत प्रशिध है,कहीं-कहीं इसे बेसर भी कहा जाता है !



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बुलाक

यह भी पर्वतीय क्षेत्रों का विशिस्ट आभूषण है,बुलाक ५ से १० ग्राम तक सोने से बनाई जाती है! जिसका उपरी भाग उल्टे "U" के आकार की हुक द्वारा जुदा रहता है !

बुलाक का मध्य चौडा होता है,जो नीचे की ओर शंक्वाकार आकिरती के लेता है नाक के मध्य भाग को छिदवाकर ही बुलाक पहनी जा सकती है !

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फूली,फूल (लोंग)

इसे आजकल कील भी कह जाता है,फूली १०० मिलीग्राम से २ ग्राम तक वजन का यह आभूषण नाक के बायीं ओर छेद करके पहना जाता है,नाम के अनुसार फूली या फूल,की आकृति का मीना जडाहवा या लोंग के आकार का यह गहना सुहाग का सूचक है !

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                        उत्तराखंड में गले में पहने जाने आभूषण
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गुलबंद या गुलोबंद


गुलबंद भी सुहाग का प्रमुख आभूषण है! जो १० से ३० ग्राम सोने का बना होता है इसमें १० से १२ तक चौकोर कलात्मक स्वरण पत्र मखमल या सनील के ३ सेंटीमीटर चौडे पट्टेपर लगे होते हैं इसे गले की गोलाई को छूटे हुए पहना जाता है !
कुमाऊँ में गुलबंद को रामनवमी  भी कहा जाता है,गुलबंद का स्थान वर्तमान में लोकेट ने ले लिया है !



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लोकेट

यह भी बहुत प्रचलित स्वर्ण आभूषण है ,जिसे हार भी कहा जाता है यह प्राय सोने का बनाया जाता है जिसका मानक भार १०० ग्राम  ३०० ग्राम होता है ! प्रौढ़ महिलायें चांदी का पैंडल युक्त ७-८ लड़ियों का हार भी पहनती हैं !

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चरयो  

यह माला होती है,जिसमें सोने या चांदी दोनों के साथ लाख या थालिपोत के दाने कर्म से जुड़े होते हैं ,इसमें सोने के १०-३० ग्राम तथा चांदी की चरयो २० से ४० ग्राम का बनाया जाता है!

सुहाग चिह्न होने के कारण चरयो को भी उतारना अशुभ  माना जाता है,पर्वतीय क्षेत्रों में केवल विवाहित महिलाएं ही पहनती है जेठानी के एनी गहनों की भाँती  देवरानी को भी उसका चरयो पहनना वर्जित है यहाँ जेठ-बहु  के पावन संबंधों के परिपेक्ष में यह स्वस्थ परम्परा मर्यादा का प्रतीक है !



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हँसुली

हँसुली जनसाधारण का लोकप्रिय आभूषण है,यह २०० से ५०० ग्राम तक चांदी से बनाई जाती हैं संपन्न परिवारों में सोने की हँसुली भी पहनी जाती है! गढ़वाली में हँसुली को खग्वाली कहते हैं!

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कंठीमाला


२० से ४० ग्राम भार की यह माला सोने या चांदी के खांचों में नग जड़कर कंठीमाला बनाई जाती है,उः डिजाइन वाली या मछली के आकार की बनाई जाती है !