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उत्तराखंड पर कवितायें : POEMS ON UTTARAKHAND ~!!!

Started by Dinesh Bijalwan, August 05, 2008, 02:18:42 PM

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

कविता उत्तराखंड की बालकृष्ण डी ध्यानी
September 27
किले

किले नि जाणा पाई
नि पछाण पाई

कित्गा निर्मल कित्गा सुंदर
पाड़ा हमारू गौं घार हमारू

किले नि जाणा पाई
नि पछाण पाई

पुंगड़ो की माया डालों की साया
हेरालु डंडों कंठों कैन यख बसाया

किले नि जाणा पाई
नि पछाण पाई

बगदी अलकनंद भागीरथी माँ नंदा
बोई गंगा की धारो कैल बग्यू

किले नि जाणा पाई
नि पछाण पाई

आम अखरुट लीची किन्गोड़ा
बुरांस फ्योंली कैल पक्याो कैल फ़ुल्यो

किले नि जाणा पाई
किले नि पछाण पाई

हरी कु द्वारा बद्री केदार को घार
उकलू छोड़ी किले मेरु मन उंदार

किले नि जाणा पाई
नि पछाण पाई

कित्गा निर्मल कित्गा सुंदर
पाड़ा हमारू गौं घार हमारू

एक उत्तराखंडी

बालकृष्ण डी ध्यानी
देवभूमि बद्री-केदारनाथ
मेरा ब्लोग्स
http:// balkrishna_dhyani.blogspot.com
में पूर्व प्रकाशित -सर्वाधिकार सुरक्षित

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

कविता उत्तराखंड की बालकृष्ण डी ध्यानी
October 7
ऐ जा ऐ आंसू ऐ

ऐ जा ऐ आंसू ऐ
आँखि भते बोगी जा ये
तू किले रुनु छे यकुली
परेली दगडी भिजी जा ये

ऐ जा ऐ आंसू ऐ
आँखि भते बोगी जा ये

उमली उमल सरै जालु
अपर ये दिन बी कटे जालु
ना हेर ये बाटा ये
क्वी नि आनु ये पाड़ा ये

ऐ जा ऐ आंसू ऐ
आँखि भते बोगी जा ये

भेंटि जा ये ग्लोडी ये
लुनु खारु नि छोड़ि जा ये
बडुळि मा छे ये रेघा ये
सांकि कि तिस बुझै जा ये

ऐ जा ऐ आंसू ऐ
आँखि भते बोगी जा ये

तेरी विपदा ये तिल जाणा ये
तेरी खैरी ई तिल ही खाणा ये
ना कैर ये भीतर भैर ये
आंसूं मेर बोल्यूं माणी जा ये

ऐ जा ऐ आंसू ऐ
आँखि भते बोगी जा ये
तू किले रुनु छे यकुली
परेली दगडी भिजी जा ये

एक उत्तराखंडी

बालकृष्ण डी ध्यानी
देवभूमि बद्री-केदारनाथ
मेरा ब्लोग्स
http:// balkrishna_dhyani.blogspot.com
में पूर्व प्रकाशित -सर्वाधिकार सुरक्षित

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

जगमोहन सिंह जयाड़ा जिज्ञासु
3 mins · Edited ·

मन मा तुमारा,
छयुं होलु ऊलार,
हे ऐगि ऐगि,
बग्‍वाळि कू त्‍यौहार...

मंग्‍तु दिदा कू,
सिलैयुं कुर्ता सुलार,
किलैकि औणु छ
बग्‍वाळि कू त्‍यौहार....

बग्‍वाळि फर तुम,
भैला जगैल्‍या,
स्‍वाळि पकोड़ी खैल्‍या,
गौं मुल्‍क जैल्‍या,
द्वीं घूंट लगैल्‍या.....

रंगमता ह्वैक,
नाचल्‍या मण्‍डाण,
होला सोचणा तुम,
आलि खूब रसाण.....

-कवि "जिज्ञासु" का मन का ऊमाळ
21.10.2014, सर्वाधिकार सुरक्षित
पढ़ा अर अहसास करा भै बंधो, कनि होलि ऐंसु की बग्‍वाळ आपकी।
आपतैं हृदय सी बग्‍वाळि की हार्दिक शुभकामना।

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

जगमोहन सिंह जयाड़ा जिज्ञासु


ऐंसु की बग्‍वाळ भुलौं,
बौड़िक औणि छ,
ह्युंद भी ऐगि,
भारी खुशी होणि छ,
बग्‍वाळ शुभ हो तुमारी,
मेरा मन की आस छ,
रंगीला त्‍यौहार,
औन्‍दा अर जांदा,
पौंन्‍दा होला खुशी तुम,
मेरु यनु बिस्‍वास छ......

-कवि "जिज्ञासु" का मन का ऊमाळ
20.10.2014, सर्वाधिकार सुरक्षित
पढ़ा अर अहसास करा भै बंधो।

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

जगमोहन सिंह जयाड़ा जिज्ञासु
22 hrs · Edited ·

व्‍यथा पहाड़ की......

यख सार्यौं मा पकिग्‍यन, खैणा तिम्‍ला,
त्‍वैनत पहाड़ छोड़्यालि, सुण हे बिम्‍ला....

बांदर सुंगर छन,
निचंत मचौणा,
उंकी डौर कू लोग,
कुछ निछन बोणा...

सार्यौं मा पकिग्‍यन, खैणा तिम्‍ला,
त्‍वैनत पहाड़ छोड़्यालि, सुण हे बिम्‍ला....

दगड़्या तेरी घुघति,
ऊदास होयिं छ,
तेरी याद मा बिम्‍ला,
अफुमा खोयिं छ.....

यख सार्यौं मा पकिग्‍यन, खैणा तिम्‍ला,
त्‍वैनत पहाड़ छोड़्यालि, सुण हे बिम्‍ला....

यख पहाड़ मा आज,
गौं सुनसान होयां छन,
उदौळि सी औन्‍दि,
ऊदास होन्‍दु मन......

क्‍या होलु पहाड़ कू, सुण हे बिम्‍ला,
सार्यौं मा पकिग्‍यन, खैणा तिम्‍ला....

-कवि "जिज्ञासु" का मन का ऊमाळ
20.10.2014, सर्वाधिकार सुरक्षित
पढ़ा अर अहसास करा भै बंधो।

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

जगमोहन सिंह जयाड़ा जिज्ञासु
October 16 at 10:02am · Edited ·

क्‍यौकु लग्‍यां छैं.....

हे लग्‍द बग्‍द,
कुछ त सोचा मन मा,
कैकु तुम भलु भि करा,
ये मनखि जन्‍म मा....

धौंकरा फौंकरी जैका खातिर,
हात कू मैल छ यू पैंसा,
क्‍यौकु पड़़्यां घंघतोळ मा,
दिन मा द्वी घड़ी हैंसा....

माटा कू बण्‍युं छ मनखि,
मन मा केकु घमंड,
दुर्दिन औन्‍दा जब छन,
ह्वै जांदु मनखि झंड.....

कवि "जिज्ञासु" की बात हेजि,
समझ मा क्‍या औणि,
या जिन्‍दगी मनखि तैं,
दिन रात रुवौणि....

क्‍यौकु लग्‍यां छैं,
हे लग्‍द बग्‍द,
मन मा होयुं अभिमान,
जै दिन जैल्‍या,
कफन हि मिललु,
क्‍यौकु जोड़ना छैं,
सौ घड़ी कू सामान.....

-कवि "जिज्ञासु" का मन का ऊमाळ
16.10.2014, सर्वाधिकार सुरक्षित

पढें और अहसास करें।

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

जगमोहन सिंह जयाड़ा जिज्ञासु
October 15 at 1:29pm · Edited ·

नौना का ब्‍यो मा......

हिसाब लगाई,
कथगा मंगौ,
समझ नि आई,
जुगाड़ करि करि,
जब मंगायी,
कुठार पेट लुकाई,
ताळु लगाई....

ब्‍यो कू दिन आई,
सब्‍बि धाणि बणाई,
पेन्‍दारौं की टक्‍क,
खाण सी पैलि,
पेण पर थै,
बिचारौन बताई.....

पेन्‍दारौं पिलाई,
ऊंकी धीत नी भरे,
घंघतोळ ह्वै भारी,
कथगा होलि रयिं,
हिसाब लगाई,
हौर मंगायी,
खौळ्युं सी रैग्‍यौं,
हात क्‍या आई...

सोचि तब मैंन,

घंघतोळ मा पड़िक,
हे समाज त्‍वैन,
या क्‍या बिमारी,
आज लगाई.......

-कवि "जिज्ञासु" का मन का ऊमाळ
16.10.2014, सर्वाधिकार सुरक्षित
पढें और अहसास करें।

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720


सिलैयुं कुर्ता सुलार,
किलैकि औणु छ
बग्‍वाळि कू त्‍यौहार....

बग्‍वाळि फर तुम,
भैला जगैल्‍या,
स्‍वाळि पकोड़ी खैल्‍या,
गौं मुल्‍क जैल्‍या,
द्वीं घूंट लगैल्‍या.....

रंगमता ह्वैक,
नाचल्‍या मण्‍डाण,
होला सोचणा तुम,
आलि खूब रसाण.....

-कवि "जिज्ञासु" का मन का ऊमाळ
21.10.2014, सर्वाधिकार सुरक्षित
पढ़ा अर अहसास करा भै बंधो, कनि होलि ऐंसु की बग्‍वाळ आपकी।
आपतैं हृदय सी बग्‍वाळि की हार्दिक शुभकामना।

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

जगमोहन सिंह जयाड़ा जिज्ञासु
October 20 at 6:05pm ·

ऐंसु की बग्‍वाळ भुलौं,
बौड़िक औणि छ,
ह्युंद भी ऐगि,
भारी खुशी होणि छ,
बग्‍वाळ शुभ हो तुमारी,
मेरा मन की आस छ,
रंगीला त्‍यौहार,
औन्‍दा अर जांदा,
पौंन्‍दा होला खुशी तुम,
मेरु यनु बिस्‍वास छ......

-कवि "जिज्ञासु" का मन का ऊमाळ
20.10.2014, सर्वाधिकार सुरक्षित
पढ़ा अर अहसास करा भै बंधो।

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

जगमोहन सिंह जयाड़ा जिज्ञासु
October 20 at 11:04am · Edited ·

व्‍यथा पहाड़ की......

यख सार्यौं मा पकिग्‍यन, खैणा तिम्‍ला,
त्‍वैनत पहाड़ छोड़्यालि, सुण हे बिम्‍ला....

बांदर सुंगर छन,
निचंत मचौणा,
उंकी डौर कू लोग,
कुछ निछन बोणा...

सार्यौं मा पकिग्‍यन, खैणा तिम्‍ला,
त्‍वैनत पहाड़ छोड़्यालि, सुण हे बिम्‍ला....

दगड़्या तेरी घुघति,
ऊदास होयिं छ,
तेरी याद मा बिम्‍ला,
अफुमा खोयिं छ.....

यख सार्यौं मा पकिग्‍यन, खैणा तिम्‍ला,
त्‍वैनत पहाड़ छोड़्यालि, सुण हे बिम्‍ला....

यख पहाड़ मा आज,
गौं सुनसान होयां छन,
उदौळि सी औन्‍दि,
ऊदास होन्‍दु मन......

क्‍या होलु पहाड़ कू, सुण हे बिम्‍ला,
सार्यौं मा पकिग्‍यन, खैणा तिम्‍ला....

-कवि "जिज्ञासु" का मन का ऊमाळ
20.10.2014, सर्वाधिकार सुरक्षित
पढ़ा अर अहसास करा भै बंधो।