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उत्तराखंड पर कवितायें : POEMS ON UTTARAKHAND ~!!!

Started by Dinesh Bijalwan, August 05, 2008, 02:18:42 PM

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

विकास ध्यानी - उत्तराखण्डी
October 24
डामो की लैन यख,और पीना खुणि पानी नी,
डूबगे सार्या पहाड़ पर,रुमुक दा बाटी बिजली नी.

और फिर भी छ्वीं देखो मेरा नेताओं की बल हुंणु डेवलप उत्तराखंड

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

विकास ध्यानी - उत्तराखण्डी
October 20
पलायन की बहार मेरा पहाड़ मा,
यु बंद मोर भोत कुछ ब्वना छी
शायद शब्दों माँ व्यक्त कन की जरुरत नि,
तुम ही बताओ जिम्मेदार कु?

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

विकास ध्यानी - उत्तराखण्डी
October 3
हिटदा जा रे बटोही,
हिकमत न हरी कभी
एक बार जू बड़ी अगनी त
पिछ्नी न हेरी कभी,
भटकी न कभी रस्ता से,
चलदा जा बस चलदा जा
कांडा भी मीलला
फुल भी मिलला
ध्यान न भटकी बस
चलदा रे तू चलदा रे
रस्ता अपरु खोज रे मनखी
क्वी नि यख केकु
यखुली तू आइ यख
यखुलि तू हिट्दा जा
चलदा जा रे मनखी
हिट्दा जा हिटदा जा
#विकास ध्यानी

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

विकास ध्यानी - उत्तराखण्डी
September 22
आवाज आयी कानों में
आवाज आयी कानों में इन खेत और खलिहानों में
गरीब क्रांति का रथ चला ये मेरे पहाड़ों में
चल चकबंदी का संदेश फैला गीत मेरे
मेरे पहाड़ों के किसानों किसानों और जन जन के कानों में
आवाज आयी कानों में इन खेत और खलिहानों में
गरीब क्रांति का रथ चला ये मेरे पहाड़ों में
पलायन रोकने का चकबंदी एक मात्र तरीका है
खुशहाल होगा मेरा पहाड़ उन आशा की निगाहों में
आवाज आयी कानों में इन खेत और खलिहानों में
गरीब क्रांति का रथ चला ये मेरे पहाड़ों में
चल एक आवाज तो भी उठा चल कदम से कदम मिला
इस जन क्रांति में तो पहले अपना नाम लिखा
आवाज आयी कानों में इन खेत और खलिहानों में
गरीब क्रांति का रथ चला ये मेरे पहाड़ों में
आवाज दे रहा गाँव तेरा खेत और खलिहान तेरा
इस बंजर को फिर उपजाऊ बना मट्टी से सोना उगला
आवाज आयी कानों में इन खेत और खलिहानों में
गरीब क्रांति का रथ चला ये मेरे पहाड़ों में
एक उत्तराखंडी
बालकृष्ण डी ध्यानी
देवभूमि बद्री-केदारनाथ
मेरा ब्लोग्स
http:// balkrishna_dhyani.blogspot.com
में पूर्व प्रकाशित -सर्वाधिकार सुरक्षित

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

विकास ध्यानी - उत्तराखण्डी
September 13
Suchana ..............हमें अपनी मात्रभूमि से
जोड़ेगी चकबंदी ...........
राज्य के पर्वतीय अंचल में भूमि बिखराव व
उसका निदान न होने के कारण
अनेकों विसंगतियां पैदा हो रही हैं। खेती के
अलाभकारी होने से निरन्तर खेत बंजर होते जा रहे हैं
और आजीविका के लिये तेजी से पलायन
हो रहा है।
इससे घर खण्डहर व गांव वीरान होते चले जा रहे है
किसी क्षेत्र में यह अधिक है
तो कहीं इसकी गति कम है।
यद्यपि पलायन के लिये कई दूसरे भी कारण हैं
किन्तु भूमि बिखराव इसका सबसे प्रमुख कारण है और
इसका प्रभावी निदान चकबन्दी है। राज्य के
पर्वतीय में चकबन्दी लागू करने
की मांग सामाजिक
संगठन कई सालों से उठा रहे हैं और अपनी ओर से
प्रयासरत हैं। लगातार मांग को देखते हुये सरकार
भी गम्भीर दिख रही और इसे
लागू करवाने के लिये
हाल में एक पृथक निदेशालय का भी गठन किया गया है।
किन्तु चकबन्दी जैसे विषय के पहलुओं पर
परिचर्चा व प्रारूप बनाने की दिशा में आगे काम
किया जाना है। इस पर जानकार लोगों की राय सामने
आ सके और उन पर समाज में चर्चा हो सके इस उद्देश्य
को देखते हुये चकबन्दी की अलख जगाने
के लिये समर्पित संगठन गरीब क्रान्ति अभियान
जनसहयोग से 7-8 अक्टूबर को संस्कृति भवन
प्रेक्षागृह पौड़ी में एक मंथन शिविर का आयोजन
करने जा रहा है। इसमें
चकबन्दी की आवश्यकता,
पर्वतीय क्षेत्र में पुराना कृषि प्रणाली,
कृषि क्षेत्र
की उपेक्षा से पलायन कृषि की उपेक्षा के
प्रभाव, मैदान में चकबन्दी, दूसरे राज्यों में
चकबन्दी के
उदाहरण, चकबन्दी न होने, के कारण
अलाभकारी होती खेती,
भूमि एकत्रीकरण के लाभ,
कृषि क्षेत्र में संभावनायें पारम्परिक फसल बनाम
नकदी फसलें, जड़ी बूटी एवं
सगन्ध पादप की कृषि,
पुष्पोत्पादन, मसाला उत्पादन, औद्यानीकरण, पशुपालन,
ग्रामीण लघु उद्यम, कृषि जन्य
स्वरोजगार, राज्य में भूमि की स्थिति,
कृषि भूमि की मौजूदा स्थिति के
अलावा कृषि भूमि की बर्बादी, अधिग्रहण,
नगरीयकरण, बन्दोबस्त, रिकार्ड सुधारीकरण,
पहाड़
भूमि प्रकार, पहाड़ में चकबन्दी कैसे लागू हो,
भूमि संटवारे के प्राविधान, भूमि सम्बन्धी दूसरे
सवाल व समाधान, पर्यावरण, जंगलों की आग,
जंगली जानवरों के आतंक, सालों से बंजर हो चुके
खेतों व पारम्परिक बीज से लेकर दूसरे
विषयों चर्चा होगी।
इस दो दिवसीय शिविर का कार्यक्रम तैयार किया जा रहा है
जिसके लिये इसके भिन्न भिन्न
जानकारों, विषय विशेषज्ञों, सामाजिक संगठनों,
किसानों, चकबन्दी कार्यकर्ताओं व इसके
पक्षधरों के मध्य चर्चा होने से बाद कई प्रकार के
विचार व सुझाव सामने आने की उम्मीद है।
इस
शिविर की अनुसंशाओं को सरकार को भेजा जायेगा। इस
अवसर पर एक पुस्तक का भी विमोेचन
भी होगा।
Email- garibkranti@gmail.com
धन्यवाद!

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

विकास ध्यानी - उत्तराखण्डी
August 24
अब त गीतों मा जीवित रेगे टिहरी

दिन द्व्येक द्वि चार सांस रेगिन भोल सम्लोंयाँ रै जाण ऐन
दिन द्व्येक द्वि चार सांस रेगिन भोल सम्लोंयाँ रै जाण ऐन
चित भुजै तब देख्या तस्वीर,चित भुजै तब देख्या तस्वीर
मेरों कै जावा भेंट आखिर,हे मेरों कै जावा भेंट आखिर
दिख्यो न दिख्यो अग्नै फीर,दिख्यो न दिख्यो अग्नै फीर !!
जन्म भूमि या टिरी तुम्हारी,जन्म भूमि या टिरी तुम्हारी
दिख्यो न दिख्यो अग्नै फीर,दिख्यो न दिख्यो अग्नै फीर!

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

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August 21
अब त खुलली रात
पित्रों की कूड़ी,तिबारी टूटी न ,बंजा पड़ी गे पुंगड़ी
बाटा चौक सब उजड़ी न, धारा पन्देरा सुखी नी
बोली भाषा रीति रिवाज छोड़ी की चली गी साथ
अंधेरे हर चलु दूर जालु,अब त खुलली रात
अब त खुलली रात
Photo-Anup Singh Rawat
#विकास ध्यानी

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

जगमोहन सिंह जयाड़ा जिज्ञासु
22 hrs ·

पहाड़ प्रेम मा....

लिख्‍दु छौं मन की बात,
मेरी कलम मेरा हात,
धन्‍य होलु मन सी मैं,
बिंग्‍ला आप,
मेरा मन की बात.......

-जगमोहन सिंह जयाड़ा जिज्ञासु

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

जगमोहन सिंह जयाड़ा जिज्ञासु
19 hrs ·

मेरा गौं बिटि....

दिखेन्‍दा छन,
पूर्व दिशा मा,
हिंसरियाखाळ,
पश्‍चिम दिशा मा,
जामणीखाळ,
उत्‍तर दिशा मा,
रणसोलीधार,
दक्षिण दिशा मा,
ललोड़ीखाळ...

खाळ मा खाळ,
निछन आज,
रै होलि कबरि,
क्‍या बोन्‍न तब,
मेरा मुल्‍क मा,
धार ही धार,
खाळ ही खाळ,
दिखेन्‍दि छन,
दूर दूर तक,
मेरा गौं,
बागी नौसा बिटि....

-कवि "जिज्ञासु" का मन का ऊमाळ
28.10.2014, सर्वाधिकार सुरक्षित

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

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    राजेन्द्र सिंह कुँवर 'फरियादी'‎जगमोहन सिंह जयाड़ा जिज्ञासु
    12 hrs ·

    हिंदी फिल्म के लिए ऑडिशन
    कलाकार चाहिए प्राथमिकता दिल्ली वालों को मिलेगी मगर चयन प्रक्रिया में कोई छुट नहीं
    १. फिल्मांकन का स्थान दिल्ली
    २. उम्र १६ (16 ) से ४० (40) (स्त्री / पुरुष )
    ३. पहनावा जींस और टी-शर्ट ...
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    हिंदी फिल्म के लिए ऑडिशन कलाकार चाहिए प्राथमिकता दिल्ली वालों को मिलेगी मगर चयन प्रक्रिया में कोई छुट नहीं १. फिल्मांकन का स्थान दिल्ली २. उम्र १६ (16 ) से ४० (40) (स्त्री / पुरुष ) ३. पहनावा जींस और टी-शर्ट ४. ऑडिशन का समय १२ बजे से ४ बजे तक ५. आने से पहले अपने प्रोफाइल (अपनी रूपरेखा ) मेल कीजियेगा ६. एक पासपोर्ट फोटोग्राफ अपने साथ लाना होगा ७. जो व्यक्ति या महिला ऑडिशन के लिए इच्छुक है कृपया वो शाम को ४ से ८ बजे के हम से संपर्क भी कर सकते हैं l राकेश कुमार ९८७१७६६९८१ (9871766981) ऑडिशन स्थल : डी. ए . वी . पब्लिक स्कूल, आर्य समाज मंदिर, आर. के. पुरम. सेक्टर -६ नई दिल्ली Audition For Hindi Film... This Audition For Delhi Artists Only... 1. Shooting Location: Delhi NCR 2. Age: 16-40 Yrs (Male/Female) 3. Dress Code: Jeans & T-shirt look 4. Audition Timing: 12:00 To 4:00 PM 5. Mail Your Profile Before You Come 6. Come With One Passport Photograph Interested Artists Can Speak Regarding Audition Info Call Between 4:00-8:00 PM Rakesh Kumar: 9871766981, Address: DAV Public School, Aarya Samaj Mandir R.K.Puram Sector-6 New Delhi-110022 FB Link: www.facebook.com/theatreactorsaapkamanch #आपका_मंच #राकेश_कुमार #ऑडिशन #दिल्ली_ऑडिशन #aapka_manch
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        Mahi Singh Mehta
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    जगमोहन सिंह जयाड़ा जिज्ञासु updated his cover photo.
    19 hrs ·
    जगमोहन सिंह जयाड़ा जिज्ञासु's photo.
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        Gokul Negi, Pramod Bhatt and 42 others like this.
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        जगमोहन सिंह जयाड़ा जिज्ञासु रणसोलीधार से ऊपर की ओर ये धार चंद्रबदनी मंदिर तक जाती है। मंदिर के पास ही हमारा पुरातन गांव झनाऊं था। 1803 में जयाड़ा दख्‍याटगांव चले गए।See Translation
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        Anup Patwal bhut sundar
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        Jot Singh Chand BAHUT SUNDERSee Translation
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        Suresh Kukreti Bahut khoob.
        8 hrs · Like
        Mahi Singh Mehta
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    जगमोहन सिंह जयाड़ा जिज्ञासु
    19 hrs ·

    मेरा गौं बिटि....

    दिखेन्‍दा छन,
    पूर्व दिशा मा,
    हिंसरियाखाळ,
    पश्‍चिम दिशा मा,
    जामणीखाळ,
    उत्‍तर दिशा मा,
    रणसोलीधार,
    दक्षिण दिशा मा,
    ललोड़ीखाळ...

    खाळ मा खाळ,
    निछन आज,
    रै होलि कबरि,
    क्‍या बोन्‍न तब,
    मेरा मुल्‍क मा,
    धार ही धार,
    खाळ ही खाळ,
    दिखेन्‍दि छन,
    दूर दूर तक,
    मेरा गौं,
    बागी नौसा बिटि....

    -कवि "जिज्ञासु" का मन का ऊमाळ
    28.10.2014, सर्वाधिकार सुरक्षित
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        Chandrakant Tiwari पंचुर कख बिटिन दिख्येलु तब See Translation
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    जगमोहन सिंह जयाड़ा जिज्ञासु
    22 hrs ·

    पहाड़ प्रेम मा....

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        Mahi Singh Mehta
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    Bhishma Kukreti‎जगमोहन सिंह जयाड़ा जिज्ञासु
    October 27 at 7:25pm ·

    आमंत्रण

    उत्तराखण्ड आपदा 2013 का एक वर्ष: गंगा चिंतन

    प्रिय साथीगण!
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        Mahi Singh Mehta
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    जगमोहन सिंह जयाड़ा जिज्ञासु
    October 27 at 9:48am ·

    मित्रों आपसे अनुरोध है कृपया पधारकर बैठक में शामिल हाने की कृपा करें।

    हिमालय बचाओ आन्दोलन की बैठक
    --------------------------------------------
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    मित्रों आपसे अनुरोध है कृपया पधारकर बैठक में शामिल हाने की कृपा करें। हिमालय बचाओ आन्दोलन की बैठक -------------------------------------------- दिनांक:-2 नवम्बर-2014, स्थान :- तिवाड़ी भवन, 219- दीन दयाल उपाध्याय मार्ग, निकट गांधी शान्ति प्रतिष्ठान ---------- ITO, नई दिल्ली। समय प्रातः -10:30 बजे बैठक एजेंडा : ---------------- जल की उत्पन्नता कैसे हो ? ----------------------------- 1. आज जहाँ एक ओर सारा विश्व, बुद्धिजीवी वर्ग , पर्यावरणविद , सरकार व प्रबुद्ध नागरिक * मौसम परिवर्तन * ग्लोबल वार्मिंग * घटते हुए ग्लेशियर * जल के नाम पर तीसरे विश्व युद्ध की संभावनाएं" --------------------------------------------------------जैसे मुद्दों पर गंभीर चिंतन कर रहे हैं वहीँ आम नागरिकों की भूमिका भी अत्यंत महत्वपूर्ण है।आम व्यक्ति या ग्रामीण के लिए संभवतः इन मुद्दों को समझना थोडा मुश्किल जरूर हो सकता है लेकिन इन मुद्दों के मूल भाव से वह कभी भी अछुता नहीं रहा है. चूँकि यह सारे मुद्दे किसी न किसी रूप से जल के मुद्दों से ही जुडें है चाहे पानी के समाप्त हो रहे श्रोतों के बारे में हो विलुप्त होते हमारे नौले-धारों के बारे में या फिर प्राकृतिक रूप से उत्पन्न श्रोतों के. अतः स्वाभाविक तौर पर प्रत्येक व्यक्ति का जल जैसे गंभीर मुद्दे पर चिंतन करना अति आवश्यक है. यह सारे गंभीर मुद्दे मूलतः जब जल से जुडें हों तो आम व्यक्ति की सहभागिता भी अत्यंत आश्यक है; समग्र रूप से हम सभी को प्रयास करना चाहिए कि आम ग्रामीण यह सवाल पूछे की आखिर 'पानी की उत्पन्नता कैसे की जाय .
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        Asha Negi, Rajiv Nayan Bahuguna Bahuguna, Manoj Istwal and 33 others like this.
        Surinder Singh Bhandari बरखा कु पांणी बगण न देवा. खाल बणे की जमा करा...बहुत खूब...जगमोहन सिंह जीSee Translation
        October 27 at 10:47am · Like
        Kudi Khander Pungadi Banjer dilli me baithkar kuchh nahi ho sakta ,jab tak ground level per kam na ho !!!!
        October 27 at 11:05am · Like
        Surinder Singh Bhandari दिल्ली बेठने नहीं आ रहे है...गराउंड लेवल पर काम करने की रणनिति की बैठक बुलाई है...कमेन्ट करने से पहले पोस्ट अछि तरह पढियेSee Translation
        October 27 at 11:29am · Like
        Vijay Jayara Saathiyon ye badi acchi baat hai ki iss mudde par baat -chit hori hai , lekin iss samsya ka samaadhan kiss roop me dekha jaa raha hai ?
        October 27 at 11:35am · Like
        Mahi Singh Mehta
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    Rajendra Bahuguna‎जगमोहन सिंह जयाड़ा जिज्ञासु
    October 25 at 9:51am ·

    आतंक के श्रोत
    पराधीनता फैलाता हूॅं, राजनीति की जेहाद हूॅं
    इस दुनिया में पनप रहा हूॅं मैं ही तो आतंकवाद हॅूं
    मैं मारूगाॅं मैं काटूगाॅं घर-घर टुकडों में बांटूगाॅं
    मावोवादी, नक्शलवादी पूरी दुनिया से छांटूगा...
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    Rajendra Bahuguna‎जगमोहन सिंह जयाड़ा जिज्ञासु
    October 24 at 11:28am ·

    गोवर्धन पूजा पर प्रस्तुति
    गौ -गंगा -गायित्री
    गौ माता गली गली जाती है
    गन्ध घरों का क्यों खाती है
    मालिक का है दूध का नाता...
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    Rajendra Bahuguna‎जगमोहन सिंह जयाड़ा जिज्ञासु
    October 24 at 9:51am ·

    शिशू-धर्म
    क्या भारत इन बच्चों जैसा हो सकता है
    क्या सम्प्रदाय, औकात स्वयं की खो सकता हेै
    स्कूल, मदरसा, क्या शैशवता बो सकता हेै
    दाग कफन पर लगे मजहब भी धो सकता है
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    शिशू-धर्म क्या भारत इन बच्चों जैसा हो सकता है क्या सम्प्रदाय, औकात स्वयं की खो सकता हेै स्कूल, मदरसा, क्या शैशवता बो सकता हेै दाग कफन पर लगे मजहब भी धो सकता है सम्प्रदाय का इन बच्चों को ज्ञान नही है खतना, टोपी, चोटी का अनुमान नही हेै पूजा, नमाज, पाठ, प्रार्थना क्या होती है अचकन, कुर्ता और लंगोटा क्या धोती है बच्चों को तो दुर्गन्ध प्रदूषित ही करती है सम्प्रदाय से शैशवता ही तो मरती है ये कच्ची मिट्टी है जैसा भी खेल बनालो पत्थर, ढेला मारो या खपरैल बनालो ये मन्दिर,मस्जिद, गुरूद्वारे हमने ही खोले अल्लाह, ईश्वर, गुरू,गाड सदा हमने ही बोले बच्चों को आभाष नही कुछ , ज्ञान नही हेै इन सम्प्रदाय के झगडों का अनुमान नही हेै हम पढे़ लिखे ,बूढे हैं,फिर भी भान नही है अनुभव में हरकत तो है, पर जान नही है सम्प्रदाय से राष्ट्र, सदा घुट कर रोता हेै बस, चलने का प्रमाण पहुंचना ही होता हेै इस कट्टर पन ने,कंहा हमें लाकर छोडा है हर बच्चे का पथ,मग,और रग-रग मोडा हेै ये मन्दिर, मस्जिद,गुरूद्वारे,संग्राम अखाडे़ इन बच्चों ने कम, बूढों ने ये चमन उजाडे़ राम,कृष्ण, अल्लाह, ईसा का बचपन देखा कंहा खिंची हैे सम्प्रदाय,मजहब की रेखा टोपी, माला, कण्ठी, क्रास, इन्हे दे डाला ये बीज द्वन्द का बचपन से हमने ही पाला हिन्दू, मुस्लिम, सिक्ख, इसाई सारे आओ इस लव जेहाद को छोडो, भैया-दूज मनाओ क्रिसमस, होली, ईद, मुर्हरम सभी समान है ये भारत तो , हर मजहब का बागवान है बस,शैशवता का क्रन्दन हो,सब झगडे़ छोडो इस मानवता के भाव हृदय में सभी निचोडो क्यों मजहब, अब इस विकार से ही पकता है शैशवता का राग 'आग' ही लिख सकता है!! राजेन्द्र प्रसाद बहुगुणा(आग) मो09897399815 rajendrakikalam.blogspot.com
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        Mahi Singh Mehta
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    Rajendra Bahuguna‎जगमोहन सिंह जयाड़ा जिज्ञासु
    October 23 at 11:17am ·

    तथाकथित धर्म
    वेद पुरान का छाता देखो,राम कृष्ण की गाथा देखो
    भीड.भयंकर तांता देखो,धरम् करम् का खाता देखो
    वक्ता कैसा बोल रहा है,धनिक कौन है तोल रहा है
    कथा में किस्से खोल रहाहै,मन पागल है डोल रहा है
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    तथाकथित धर्म वेद पुरान का छाता देखो,राम कृष्ण की गाथा देखो भीड.भयंकर तांता देखो,धरम् करम् का खाता देखो वक्ता कैसा बोल रहा है,धनिक कौन है तोल रहा है कथा में किस्से खोल रहाहै,मन पागल है डोल रहा है दीन दुखी की भीड.जमा है,सुनने वाले खूब रवां है नर नारी का खूब संमा है फिर झगडा नहीं थमा है देखो राम कृष्ण की बातें,एक धरम् में कितनी जातें ये सब धन कितना हैं खाते, कैसे कटती इनकी रातें मुल्ला के उपदेश भी देखे, धरती में क्लेष ये भी देखे धरम् करम् के द्वेश भी देखे, कैसे हैं दरवेष भी देखे अब तो सिर्फ ईसाई हस्ती,पैग हाथ में देखो मस्ती मजहब कीमती कौमें सस्ती,फिर भी देखो हालत खस्ती एक जमीं जंहा एक है,अल्लाह ईश्वर सभी नेक है जल में कैसी खींची रेख है,करमगति का अटल लेख है भिक्षु नंगे चलते देखे, धर्मो से मठ पलते देखे बन में जोगी गलते देखे,खाली हाथ मसलते देखे राधास्वामि भीड. है भारी,निरंकार की महिमा न्यारी गुरुद्वारों में लंगर जारी, धरम् का धन्धा है लाचारी देखो सबका एक विधाता,फिर ये मजहब क्यों भटकाता कैसा धरम् करम् का नाता,फिर क्यों आग लगी है भ्राता मजहब शान्त कहां होते हैं,अपने घर को क्यों खोते हैं अब तो मुर्दे भी रोते हैं,धरम् मजहब को क्यों ढोते हैं बैर मजहब में क्यों होता है,बन्दा घुटके क्यों रोता है मूल्य धरम् का क्यों खोता है,सारा धन्धा ही थोता है मठ,मन्दिर में देख चढावा,भ्रष्ट, ट्रस्ट करता है दावा काला- धन भगवान खपायें, वैष्णो, बाला,सांई गायें बाबा महिसासुर सा भैंसा, देख विरक्ति रूप है कैसा सरकारों का संरक्षण है,योग,भोग कैसा भक्षण है भगवानों की माया देखेा,चमक भक्त में काया देखो महाकाल की छाया देखो, मुर्खो ने भरमाया देखो हर शरीर में तत्व पांच हैं,फिर भी तन में लगी आंच है धरम् धरा में बिछी कांच है,पडे.भरम में कहां सांच है पशुओं को कुछ सुन्दर पाया सुन्दरता में भोली काया नभ में देख परिन्दा छाया,सब के उपर रब की माया अन्दर सबके एक खुदा है,फिर क्यों बन्दा जुदा जुदा है भगवान भक्त तालाकशुदा है जिसमें ताकत वही खुदा है।। राजेन्द्र प्रसाद बहुगुणा (आग)
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    Rajendra Bahuguna‎जगमोहन सिंह जयाड़ा जिज्ञासु
    October 22 at 4:17pm ·

    नकली पन
    क्या असली है ,क्या नकली हेै कोई तो आभाष करा दो
    भारतभाग्यविधाता सब कुछ नकली है तो नाश करा दो
    शदियो से हम नकली तनमनधन वैभवता जीते आये
    देख रहा हूॅं नकली मानवता की ये कैसी आभाये...
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    नकली पन क्या असली है ,क्या नकली हेै कोई तो आभाष करा दो भारतभाग्यविधाता सब कुछ नकली है तो नाश करा दो शदियो से हम नकली तनमनधन वैभवता जीते आये देख रहा हूॅं नकली मानवता की ये कैसी आभाये हद् हो गयी अब तो कोई ,इसका पर्दाफास करा दो भारतभाग्यविधाता सब कुछ नकली है तो नाश करा दो टाटा नकली,आटा नकली,जूते, चप्पल बाटा नकली देख मुनाफा खोरी नकली,उद्योगों में घाटा नकली चलचित्रों में गाॅंधी,नेहरू,नेता और अभिनेता नकली भारत की भवसागर नैया के क्रेता और खेता नकली कोई आकर चौराहों में इनकी ऐसी रास करा दो भारतभाग्यविधाता सब कुछ नकली है तो नाश करा दो कोटू नकली,घोटू नकली पूजा में भी फोटू नकली मन्दिर,मस्जिद,गिरजे नकली पूजा पाठी पुर्जे नकली घी,तेल और हवन हवि में क्यों नकली सामान पडा है आज पुजारी मन्दिर में है बाहर तो भगवान खडा हेै़ ढोंग ,कपटी मन मन्दिर में ईश्वर का आभाष करा दो भारतभाग्यविधाता सब कुछ नकली है तो नाश करा दो मर्यादा,सम्मान भी नकली,ये रिस्ते मेहमान भी नकली धर्म,कर्म,ये दान भी नकली,कियेगये एहसान भी नकली गीता और कुरानी तोते, हिन्दु, मुशलमान भी नकली अन्तर्द्वंदी मानवता की बाहर से मुस्कान भी नकली नकलीपन में जीने वालों को कुछ तो एहसास करा दो भारतभाग्यविधाता सब कुछ नकली है तो नाश करा दो माॅं,बाप और कुटुम्ब,कबीला नकली पन से चला रहे हो अपने अन्दर की ज्योति को ,घासलेट से जला रहे हो भूल गये हो आदि काल से मन मन्दिर के भगवानों को हर पत्थर के अन्दर मूरत,खोद रहे हो क्यों खानों को झलक मिले उस परमेश्वर की ऐसा भी उपवास करा दो भारतभाग्यविधाता सब कुछ नकली है तो नाश करा दो अहंकार के रथ पर बैठे स्वाभिमान को झलकाते हो नकली मानवता के सन्मुख झूठे नयना पलकाते हो साधू नकली,जोगी नकली,योगी और दिगम्बर नकली धर्म कर्म की इस दुनिया में परमेश्वर पैगम्बर नकली हम उसको पहचान सकें बस कुछ ऐसी अरदास करा दो भारतभाग्यविधाता सब कुछ नकली है तो नाश करा दो पत्र,पुष्प फल,फूल भी नकली भोले का त्रिशूल भी नकली मठ,मन्दिर की प्राणप्रतिष्ठा,बुनियादों में मूल भी नकली मन्दिर,मस्जिद,गिरजों के झगडे़ शदियों सेे देख रहा हूॅं मैं भी अपने दिल की कुण्ठा को शब्दों से फेंक रहा हॅूं झूठी हज ,पूजा,पाठों से ,दुनिया का अवकास करा दो भारतभाग्यविधाता सब कुछ नकली है तो नाश करा दो रक्षाबन्धन और दशहरा,होली और दीवाली नकली धर्म कर्म के संस्कारों में पूजा की थाली भी नकली चोर,उचक्के नेता नकली,डाकू और मवाली नकली राजनीति में कपडे फाडू नेताओ की गाली नकली नकली असली की परिभांषा संसद में भी पास करा दो भारतभाग्यविधाता सब कुछ नकली है तो नाश करा दो खादी और उपाधी नकली,दुल्हा दुल्हन,शादी नकली काम ,वाशना के घर्षण से बढती ये आबादी नकली प्यार मुहब्बत नकली बुनियादों पर कैसे खडा हुआ है हम सब नकली देख रहे हैं,नकली पर्दा पढा हुआ है केवल कवि आग असली है,छन्दो सेे आभाष करा दो भारतभाग्यविधाता सब कुछ नकली है तो नाष करा दो राजेन्द्र प्रसाद बहुगुणा (आग) मो0 9897399815 rajendrakikalam.blogspot.com
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        Mahi Singh Mehta
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    जगमोहन सिंह जयाड़ा जिज्ञासु
    October 22 at 4:12pm · Edited ·

    बग्‍वाळ आई,
    पटाका फोड़़ि क्‍या होन्‍दु,
    मंगसीरुन अपणा बुबा जी,
    मंग्‍तु तैं बताई.....

    मंग्‍तुन बोलि बेटा,
    पटाका की आवाज सुणि,
    भविष्‍य का भूत,
    वर्तमान मा ऐक,
    भूतकाल मा चलि जांदा,
    कुछ मनखि दारु पीक,
    क्‍वी पटाका की आवाज सुणि,
    बेहोश ह्वै जांदा,
    यनु बतौ तू किलै पूछणि छै.....

    मंगसीरुन बताई बुबाजी,
    हमारा गौं की,
    लंब पुंगड़ि का भूत,
    क्‍या बग्‍वाळ फर,
    भगि जाला.......

    -कवि "जिज्ञासु" का मन का ऊमाळ
    22.10.2014, सर्वाधिकार सुरक्षित
    पढ़ा अर अहसास करा भै बंधो, कनि होलि ऐंसु की बग्‍वाळ आपकी।
    आपतैं हृदय सी बग्‍वाळि की हार्दिक शुभकामना।