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उत्तराखंड पर कवितायें : POEMS ON UTTARAKHAND ~!!!

Started by Dinesh Bijalwan, August 05, 2008, 02:18:42 PM

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

जगमोहन सिंह जयाड़ा जिज्ञासु
October 15 at 1:29pm · Edited ·

नौना का ब्‍यो मा......

हिसाब लगाई,
कथगा मंगौ,
समझ नि आई,
जुगाड़ करि करि,
जब मंगायी,
कुठार पेट लुकाई,
ताळु लगाई....

ब्‍यो कू दिन आई,
सब्‍बि धाणि बणाई,
पेन्‍दारौं की टक्‍क,
खाण सी पैलि,
पेण पर थै,
बिचारौन बताई.....

पेन्‍दारौं पिलाई,
ऊंकी धीत नी भरे,
घंघतोळ ह्वै भारी,
कथगा होलि रयिं,
हिसाब लगाई,
हौर मंगायी,
खौळ्युं सी रैग्‍यौं,
हात क्‍या आई...

सोचि तब मैंन,

घंघतोळ मा पड़िक,
हे समाज त्‍वैन,
या क्‍या बिमारी,
आज लगाई.......

-कवि "जिज्ञासु" का मन का ऊमाळ
16.10.2014, सर्वाधिकार सुरक्षित
पढें और अहसास करें।

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

Khyali Ram 
चीनाक बणी दी और पटाखोंक वहिष्कार करो
ऐला दिवाई में आपण देशाक माट दगा प्यार करो
यमें मिली छू भारतीय मेहनतक चनण पिठ्यां
यनु दियांकें प्रज्वलित करि दिवाईक श्रंगार करो

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

Khyali Ram Joshi
October 20 at 3:28pm ·

तारों में यकलै चन्द्रमा जगमगों
मुश्किलों में यकलै आदिम डगमगों
काना देखि लै झन घबराया दोस्तो
काना में यकलै गुलाब खिलखिलों

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

माठु माठु हिट जरा हौले हौले चल तू,माठु माठु हिट जरा हौले हौले चल
खुट, घुन म्यॉर पुठ टोड़ी जै राखेली तू, खुट, घुन म्यॉर पुठ टोड़ी जै राखेली तू
हौले हौले चल जरा माठु माठु चल तू

मैं लै उनो त्यॉर पीछ रुक जा तू रुक कौ, मैं लै उनो त्यॉर पीछ रुक जा तू रुक कौ
भाजा-भाज किलै हैरे रुक जा तु रुक कौ, भाजा-भाज किलै हैरे रुक जा तु रुक कौ
अरे ..माठु माठु हिट जरा हौले हौले चल तू,माठु माठु हिट जरा हौले हौले चल तू
खुट, घुन म्यॉर पुठ टोड़ी जै राखेली तू, खुट, घुन म्यॉर पुठ टोड़ी जै राखेली तू

तितरी जै सर सर सरकींछै हाय वे, तितरी जै सर सर सरकींछै हाय वे
निमुवै की दाणि जस घुर घुर जैंछी वै, अरे निमुवै की दाणि जस घुर घुर जैंछी वै
तु माठु माठु हिट जरा हौले हौले चल तू,माठु माठु हिट जरा हौले हौले चल
खुट, घुन म्यॉर पुठ टोड़ी जै राखेली तू, खुट, घुन म्यॉर पुठ टोड़ी जै राखेली तू

अरे चढ़ी रे जवानी तुकें खै खै बेर लाल छै, अरे चढ़ी रे जवानी तुकें खै खै बेर लाल छै
बुड़्या-काव ब्या के करौ ऐगो मेरो गाव -गाव, बुड़्या-काव ब्या के करौ ऐगे गाव –गाव बे
जरा माठु माठु चल जरा हौले हौले चल तू,माठु माठु चल जरा हौले हौले चल
खुट, घुन म्यॉर पुठ टोड़ी जै राखेली तू, खुट, घुन म्यॉर पुठ टोड़ी जै राखेली तू

अरे बीसवां बरस की तू मैं है गयूं साठ वै , सुन ले भलिक , अरे बीसवां बरस की तू मैं है गयूं साठ वै
जरा माठु माठु हिट जरा हौले हौले चल तू,माठु माठु हिट जरा हौले हौले चल
खुट, घुन म्यॉर पुठ टोड़ी जै राखेली तू, खुट, घुन म्यॉर पुठ टोड़ी जै राखेली तू
खुट, घुन म्यॉर पुठ टोड़ी जै राखेली तू, खुट, घुन म्यॉर पुठ टोड़ी जै राखेली तू
खुट, घुन म्यॉर पुठ टोड़ी जै राखेली तू, माठु माठु हिट जरा हौले हौले चल तू
ओ मधुली रुक जा रुक जा मधुली

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

जगमोहन सिंह जयाड़ा जिज्ञासु
22 hrs · Edited ·

बग्‍वाळ आई,
पटाका फोड़़ि क्‍या होन्‍दु,
मंगसीरुन अपणा बुबा जी,
मंग्‍तु तैं बताई.....

मंग्‍तुन बोलि बेटा,
पटाका की आवाज सुणि,
भविष्‍य का भूत,
वर्तमान मा ऐक,
भूतकाल मा चलि जांदा,
कुछ मनखि दारु पीक,
क्‍वी पटाका की आवाज सुणि,
बेहोश ह्वै जांदा,
यनु बतौ तू किलै पूछणि छै.....

मंगसीरुन बताई बुबाजी,
हमारा गौं की,
लंब पुंगड़ि का भूत,
क्‍या बग्‍वाळ फर,
भगि जाला.......

-कवि "जिज्ञासु" का मन का ऊमाळ

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

जगमोहन सिंह जयाड़ा जिज्ञासु

दीपावली पर दीपक रोया,
कहां अंधेरा दूर हुआ,
हृदय अंधेरे इंसानों के,
जिन्‍होंने दीप जलाए हैं.....

कवि जगमोहन सिंह जयाड़ा "जिज्ञासु"
दूरभाष: 09654972366, 22.10.201

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720



जगमोहन सिंह जयाड़ा जिज्ञासु


बग्‍वाळ मनैन पर.....

यनु सोचिक,
कखि पटाकौं सी,
प्रदूषण त नि होणु छ,
सिर्फ एक हि पटाकु फोड़्यन,
बच्‍यां पैंसा,
कै गरीब तै देन,
ऊ भि मनालु बग्‍वाळ,
आपकी तरौं.....

-कवि "जिज्ञासु" का मन का ऊमाळ
22.10.2014, सर्वाधिकार सुरक्षित

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

जगमोहन सिंह जयाड़ा जिज्ञासु
October 21 at 9:51am · Edited ·

मन मा तुमारा,
छयुं होलु ऊलार,
हे ऐगि ऐगि,
बग्‍वाळि कू त्‍यौहार...

मंग्‍तु दिदा कू,
सिलैयुं कुर्ता सुलार,
किलैकि औणु छ
बग्‍वाळि कू त्‍यौहार....

बग्‍वाळि फर तुम,
भैला जगैल्‍या,
स्‍वाळि पकोड़ी खैल्‍या,
गौं मुल्‍क जैल्‍या,
द्वीं घूंट लगैल्‍या.....

रंगमता ह्वैक,
नाचल्‍या मण्‍डाण,
होला सोचणा तुम,
आलि खूब रसाण.....

-कवि "जिज्ञासु" का मन का ऊमाळ
21.10.2014, सर्वाधिकार सुरक्षित
पढ़ा अर अहसास करा भै बंधो, कनि होलि ऐंसु की बग्‍वाळ आपकी।
आपतैं हृदय सी बग्‍वाळि की हार्दिक शुभकामना।

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

Khyali Ram Joshi


पल पल सुन्दर फूल खिलो, कभ्भें नि हो कानोंक सामना
जिंदगी खुशियोंल भरी रवो,यै छू तुमुहैं हामरि शुभकामना

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

Khyali Ram Joshi


दीवालिक य सुन्दर सा त्यार
जीवन में ल्यावो उज्याव अपार
लक्षमी जी आओ तुमार द्वार
शुभकामना करो हामरि स्वीकार