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उत्तराखंड पर कवितायें : POEMS ON UTTARAKHAND ~!!!

Started by Dinesh Bijalwan, August 05, 2008, 02:18:42 PM

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

Parashar Gaur‎Merapahadforum
Yesterday at 7:37am ·

गढवाली मजाक (जोक)

एक पहाड़ी भैजिल कोर्टम तल्लाक वास्ता अर्जी लगाई ! वकील्म गे , अर वेकी फीस पूछी कि कतका लगाला !

वेल वकील से पूछी आपै फीस .... !

वकील -- १०००० हजार ...

भैजी -- न - न वकील साब इत बहुत ज्याद च ! बाणनल हमरु ब्यूओ १०१ रूप्यम कैदे छो !

बकील बोली __ दे ख्याली सस्तो कु नतीजा !

-- पराशर गौर

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

विकास ध्यानी - उत्तराखण्डी
October 20 at 1:59am ·

बल हूणु विकास मेरा उत्तराखंड कु?

इनि फोटो द्यख्दु मी और फिर एक ही बात दिल मा आंद की क्या इलै ही मांग उत्तराखंड?

टुटदी तिबरी,उजड्यू खंड
क्या इलै ही मांग उत्तराखंड?
लोग परदेशों मा बस्या,
रयु क्या वे उत्तराखंड?
खाणी-सीणी परदेशों मा,
पिकनिक खुणि उत्तराखंड?
धुरपालि की पाल टुटी,
देली मा कंडली जमी
फेसबुक मा स्टेट्स द्यखणु,
की आई लव उत्तराखंड।
पलायन पहाड़ कु हुयु
क्या इलै ही मांग उत्तराखंड?
नेता मस्तमौला हुया,
डेरा डल्यु दून मा,
शहीद आंदोलनकारी ह्वेगी,
उत्तराखंड की लड़ै मा,
स्वच्दा होला वु भी आज,
की किलै मांग यु उत्तराखंड?
कुछ त सोचो भाइयो तुम भी,
की किलै मांग यु उत्तराखंड,
आओ फिर से बसोंला पहाड़ मा,
सपनों कु बुण्यु उत्तराखंड,

विकास ध्यानी

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

by-Mukesh Hatwal

आधुनिकता की चकाचौंध में उत्तराखंड अपने पुराने
रीति रिवाज, पर्व-त्यौहार और परम्पराएं
भूलता जा रहा है। पहाड़ में बग्वाल
का अपना ही महत्व है। पूरे साल में यही एक दिन है
जब जब लोग पशुओं को अन्न देते हैं।
दिन में फूलों से घरों को सजाया जाता है
स्वांली (पूरी) और दाल की पकौड़ी, दूध की खीर
आदि कई पकवान बनाये जाते हैं। पशुओं के लिए
झंगोरे की खीर व् जौ के लड्डू तैयार कर
सबको थाली में फूलों से सजाया जाता है।
जानवरों के पैर धोकर धूप दिया जलाकर
उनकी पूजा की जाती है और टीका लगाने के बाद
सींगों पर तेल लगाया जाता है। फिर थाली में
सजा हुआ अन्न उनको खिलाया जाता है।
रात को भैला (चीड़ की लाल लकड़ी केे गठ्ठे
को रस्सी से बांधकर जलाने के बाद घुमाया जाता है)
खेला जाता है। भैला को पूजने के बाद गांव के लोग
चौक या खाली खेतों में एकत्रित होकर ढोल दमाऊ
के साथ नाचते और खेलते हैं, जिसमें लोग तरह-तरह
के करतब दिखाते हैं। यहाँ पटाखों की नहीं,
बल्कि ढोल-दमाऊं की आवाज कानों में रस
घोलती है।

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

विकास ध्यानी - उत्तराखण्डी
10 hours ago
डामो की लैन यख,और पीना खुणि पानी नी,
डूबगे सार्या पहाड़ पर,रुमुक दा बाटी बिजली नी.

और फिर भी छ्वीं देखो मेरा नेताओं की बल हुंणु डेवलप उत्तराखंड

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

विकास ध्यानी - उत्तराखण्डी
October 20
रात के करीब पोने 3 बज चुके है आँखों में नींद सी आ रही है,
आंखे बंद की तो उत्तराखंड के पहाड़ो के बंजर खेत और खंडहर होते मकानों की तस्वीर घुमने लगी,
और बारी आ गयी अपने ही गाँव से थोड़ी दूर अपने खेतो की आज से लगभग 15 साल पहले तो फसल लहलहाती थी यहाँ, आज हर तरफ झाड़ी और गाजरी घास है,
फिर ख्याल आ रहा है की सरकार तो शायद ही कुछ मदद दे पाए
लेकिन अगर खुद ही इन झाड़ियो को काटकर इसमें जुताई की जाये
कुछ बीज बोये जाये,और सिचाई की व्यवस्था की जाये तो अच्छे परिणाम हो सकते है
लेकिन फिर जंगली जानवर?
वो तो इन्हें बर्बाद कर देंगे,
हां बच सकते है न, क्यों न रात को चोकिदारी की जाये इन खेतो की,
लेकिन फिर एक तस्वीर उभरती है इन आँखों के सामने, बहुत ही भयावह तस्वीर,
अगर कोई जंगली जानवर रात को हमला कर दे तो?
वहाँ तो दूर दूर तक गाँव में आवाज भी नहीं सुनाई देगी,
और सुनेगे भी कोन, हर गाँव में मुश्किल से 6-7 परिवार तो है बस अब,
और उनमे भी मजबूर और लाचार लोग,
जो समर्थ थे वो तो आज दिल्ली और देहरादून जैसे शहरो में बस चुके है,
चलो अपने खेतो की तो झाड़ी कटवा दी लेकिन बाकी लोगो के तो दूर दूर तक खेत बंजर है,पूरा जंगल सा लगता है ये तो,
फिर ऐसे जंगल में पूरी रात अकेले?
नरभक्षी का भय अलग,
फिर सोचा वो टाइम कुछ और था जब लोग रात भर लालटेन लेकर, और टीन बजाकर अपने खेतो की रखवाली किया करते थे, लगभग हर 20-30 मीटर पर किसी दुसरे का टैंट हुआ करता था तब संभव था रात को जगा रहकर अपने खेत की रखवाली करना,अपनी फसल को बचा पाना, और खुद की भी सुरक्षा कर पाना, क्यूंकि तब न तो जानवर हमला कर सकता था न कोई और डर पैदा हो सकता था,लेकिन अब तो,
अब ख्याल आ रहा है की वो दिन क्या फिर लोट के आ सकते है?
क्या लोट के आयेंगे वही दिन दुबारा?
#विकास ध्यानी

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

विकास ध्यानी - उत्तराखण्डी
October 20
पलायन की बहार मेरा पहाड़ मा,
यु बंद मोर भोत कुछ ब्वना छी
शायद शब्दों माँ व्यक्त कन की जरुरत नि,
तुम ही बताओ जिम्मेदार कु?
#VikasDHyani

Bhishma Kukreti

महान कुमाउँनी कवि श्री ख्याली  राम जोशी की कविताएँ
Poetries of Khyali Ram Joshi Great Poet of Kumaoni
(Presented by : Bhishma Kukreti )
दीवालिक य सुन्दर सा त्यार
जीवन में ल्यावो उज्याव अपार
लक्षमी जी आओ तुमार द्वार
शुभकामना करो हामरि स्वीकार
Xxx                    xx
पल पल सुन्दर फूल खिलो, कभ्भें नि हो कानोंक सामना
जिंदगी खुशियोंल भरी रवो,यै छू तुमुहैं हामरि शुभकामना
Xx                           xx
जगओ दी और सार दुनी कें जगमगाओ
ल्हिबेर सीता माताकें रामज्यु आप आओ
हर घर हर द्वार में तुम यास दी जगाओ
हर गों हर द्वार अयोध्या जौस है जाओ

Xxx          xx
दाग तुमार फोचिनाक कभ्भें धुलो नि धुलो
भलाई करी तुमरि तराज में तुलो नि तुलो
आजबै कान पकड़ि लियो आपण ऐबों हैं बै
भोव के पत्त तुमार आंख लै खुलो नि खुलो
Xx                        xx
चीनाक बणी दी और पटाखोंक वहिष्कार करो
ऐला दिवाई में आपण देशाक माट दगा प्यार करो
यमें मिली छू भारतीय मेहनतक चनण पिठ्यां
यनु दियांकें प्रज्वलित करि दिवाईक श्रंगार करो
Xxx       xx
तारों में यकलै चन्द्रमा जगमगों
मुश्किलों में यकलै आदिम डगमगों
काना देखि लै झन घबराया दोस्तो
काना में यकलै गुलाब खिलखिलों
Xx                 xx
ख़ुशी यदुग मिलो की आँखों आंशु जामि जाओ

टैम हवो यदुग सुन्दर कि बखत लै थामि जाओ

दोस्ती निभोंल हाम तुमु दगै कुछ यैस तरिकैल

कि दगाड़ बिताई हर पल जिन्दगी बणी जाओ
Xx                    xx
जदुग खूबसूरत आज रात्ति छी उ है खूबसूरत भोव हवो
जदुग ख़ुशी तुमार पास आज छन उ है ज्यादा भोव हवो
Xxx                             xxx
कृपा बणी रवो तुमरि हमेसा आपण नानतिना पै हे बाबा भोले नाथ सदा।
म्यार मन मन्दिर तुम बिराजो, गौरा माताक सांथ बाबा भोले नाथ सदा॥
Xx                   xx
हर सांस में हौनै रवो त्यर नामौक जाप बस जिंदगीक छू आश यै।
जब बटिक आयुं मी तेरि शरण में लागों हर पल तू म्यार पास छै॥
Xx      xx
थ्वाड़ भौत जैकें अंग्रेजी ऐं उ हैं सारि दुनि बुलें जी-जी कें
किलै सब मैस देसि समझनि आपण पहाड़ी बुलाणियांकें
आब नानतिना कें लै दूर धरनि आपण पहाड़ीभाषा धे बै
यदुग लै के गलती हैगे महाराज हामरि पहाड़ी भाषा हैं बै
Xx             xxx
कदुग जल्दी बीति जांछी उ टैम जब इजाक पास रौंछी।
जब क्वे दुःख-सुख हौंछी इजाक काखि में ख्वर हौंछी॥
Xx                       xx
दोस्तो तुमौर नि हौंण पर जिन्दगी में यदुग कमी रैं ।
मीचाहे लाख हसड़े कोशिश करूं पर आँखों में नमी रैं॥
Xx                                             xx
ब्याव सूरज कें उछाण सिखें
दियैलौ पतंगा कें जगण सिखें
घुरिणीयां कें तकलीफ हैं पर
ठोकरै इंसान कें चलण सिखें
Xx                         xx
मांफ करि द्यों भगवान लै उकें
जनरी आपणी किस्मत ख़राब हैं
उनूं कें कभ्भें मांफि निमिलैनि
जनरी आपणी नियत ख़राब हैं
Xx               xx
आजै कै दिन य पंजाबैकि धरती में पैद हौ छी एक यस लाल ।
जैल अंग्रेज राजाक जाड़ाकें हिलै बेर बणी गोच्छी उनौर काल॥
Xx                   xx
मी तुमु हैं बै कभ्भें नाराज है नि सकन
दोस्तीक रिस्त हमार ख़राब है निसकन।
तुम चाहे मिकें कदुगै भूलिबेर स्ये जाओ
मी तुमुकें याद करी बिना स्यी निसकन॥
Xxx                     xx
वैण देखनी च्यलांक, पर ऐ जानी च्येली,
नौणि खानी च्याल पर स्वस्त रौनि च्येली।
पढाई करूनि च्यलांक सफल हौनि च्येली,
ठोकर मारनी च्याल, पर समाउनी च्येली ॥
Xxx                   xx
स्वैण देखनी च्यलांक, पर ऐ जानी च्येली,
नौणि खानी च्याल पर स्वस्त रौनि च्येली।
पढाई करूनि च्यलांक सफल हौनि च्येली,
ठोकर मारनी च्याल, पर समाउनी च्येली ॥
Xx           xx
जो घर में बुड़ बाड़ीक लिजी आदर न्हें,
समझो उ घराक नजीक लै भगवान न्हें।
भुलि जानि जो ज्योंन जी मै बाबों कें,
दुनी में उनूं है बेर नीच क्वे इंसान न्हें।
के कमाक ऊं कोठि, महल, कार अगर,
मै बाबोंक रौंणाक लिजी घर बार न्हें।
Xx          xxx
चितैइक ग्वोलज्यु मी दास तुमर,तुमार चरणों में नमन बारम्बार छू।
पग पग पर हों तुमरि दयाक अहसास, तुमार दर्शनोंक मोहताज छू ॥

Xx                         xxx
हिन्दी मेरि इमान छू, हिन्दी मेरि पछ्याण छू।
हिन्दी छों मी देश लै म्यर प्यारा हिंदुस्तान छू॥
Xx               xx
त्यार खुशियों मतलब म्यार लीजि,त्येरि मुखड़ेकि हँसि हैं मेरि इजा।
तुकें पत्त छू तेरि मुखड़ैकि उदासी, मेरि हँसि कें लूटि लिजै मेरि इजा॥
Xx                                      xxx
च्येलि पावण च्यलां हैबेर आसान छू
अगर नौक य हामौर समांज निहओ
च्येलियांकें पेट में यसिक क्वे निमारो
अगर चलीनक दैजौक रिवाज निहओ
Xxx                       xx
इजाक पसिणल घर में खिलीं गुलाब
आपणी चाहत कें खुद कुतरि गे इज
जब बटिक ब्वारि ऐगे उ चुप चाप रैं
औलादक कौण छू आब सुधर गे इज
Xx                  xx
क्वे लै मुस्किलैकि आब कै कणी क्वेलै बाट निमिलन।
सायद आब घर बै क्वेलै इजाक खुट छुंई बेर निचलन॥
Xx             xxx
शिक्षक दिवस
इजैल दे हमुकें जनम
बाबु हमरि रक्षा करनी
लेकिन सच्ची मानवता
शिक्षक हमार जीवन में भरनी
सही और न्यायक बाट में हिटण
शिक्षक हमुकें बतौनी
जीवन में संघर्षों दगे लड़ण
शिक्षक हमुकें सिखौनी
ज्ञान दिपैकी जोत जगे बेर
मनमें हमार उज्याव करनी
बिद्या-धन दिबेर शिक्षक
जीवन हमार सुखौल भरनी
जिंदगी में कुछ बणण छौ तो
शिक्षकोंक सम्मान करो
मुनौव झुके बेर इज्जतैल तुम
शिक्षकोंकें प्रणाम करो|
के: आर: जोशी. पाटली (बागेश्वर)
Xx       xx
मुखौड़ देखि लोग प्यार करनी,
आत्मा कें प्यार करों क्वे क्वे।
पाखमें चढ़ै खैंच लिनि सिड़ी,
ख़ुशी कैकी सहन करों क्वे क्वे।
डबल वालोंकि सब पुज करनी,
गरीबैकि हामी भरनी क्वे क्वे।
हाम तो याद धरनूं ससब्बों कें,
पर हमूं कें याद धरनी क्वे क्वे
Xx   xxx
कौनी की प्यार बिना जिन्दगीक गुजार निहुंन,
हौवो सांच प्यार तो वीकि बराबरि रीस निहुनि।
जब करनैछू प्यार तो दोस्तों दगा करो किलैकि,
दोस्तोंक प्यार में ध्वाक जसि क्वे चीज निहुनि॥
Xx   xxx
डुबि जानि किस्ती जबलै औनी तूफान,
याद रैजानि और बिछुड़ जानि इन्सान।
याद धरला दोस्तो भौत नजदीक पाला,
भुलि जाला तो दोस्तो ढुनैनै में रै जाला॥

Xxx              xx
आपण दिल में लुकी यादोंल सवारों तुकें
तू यहाँ देख तो आपण आँखों में उतरुं तुकें
त्यर नाम आपण होटों पै सजै राखौ मील
अगर से लै जौ तो स्वैणा में पुकारूं तुकें
Xx                         xxx
पैलिक आपण नानतीनांक पेट भरें इज
फिर बची खुची में आपण संतोष करें इज
मांगनी न्हें कभ्भें के आपण लिजी इज
आंचोव फैल्यैं आपण नानतिना लिजी इज
आपण नानतिना जिन्दगिक खातिर
आँशुऔंक फूल हर मौसम में बरसें इज
जिन्दगीक सफर में मुशीबतोंक घाम में
जब कें स्योव नि मिलन तो याद ऐं इज
Xx           xx
दोस्त हमार बणनें रओ यदुग लै भौत छू,
सब हर बखत हसनें रओ यदुगै भौत छू।
हर क्वे हर बखत कैका दगाड़ रैनिसकन,
याद एक दुसरै कें करनें रओ यदुगै भौतछू॥
Xxx           xx
पाणील तस्वीर कां बनें
स्वैणोल तकदीर कां बनें
कै दगड़ी दोस्ती करो तो
सांच दिलैल करो किलैकी
य जिंदगी फिर कां मिलैं
Xx                        xxx
इजाक पसिणल घर में खिलीं गुलाब
आपणी चाहत कें खुद कुतरि गे इज
जब बटिक ब्वारि ऐगे उ चुप चाप रैं
औलादक कौण छू आब सुधर गे इज
Xx                      xxx
क्वे लै मुस्किलैकि आब कै कणी क्वेलै बाट निमिलन।
सायद आब घर बै क्वेलै इजाक खुट छुंई बेर निचलन॥

Xxx             xxx
Copyright@  Khyali Ram Joshi, Patli , Bageshwar
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एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

Gyan Pant
3 hrs ·

... जिम कार्बेट पार्काक् शेर

कुदरतै'कि ले
आपणि भाषा छ
जै कैं समझण्
आब् जरूरी छ ।

आब् पहाड़न् में ले
गरम मस्तु हुँण बैग्यो
तबै त "होटल " में
ऐ सी लगूँण पड़ौ ।

यो ले भली बात भै
कि पहाड़न् में ले
घर- घरन् आब्
टीवी फ्रिज और कार भै ।

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

कविता उत्तराखंड की बालकृष्ण डी ध्यानी
October 6
बिरदयू गयुं

हुंयुँ छों तुण्ड बरसाता मा
मि विं बरखा की रात मा
मिली जबेर तेर नशेली नजरि मेर नजरि
बिरदयू गयुं
मि बिरदयू गयुं ऊँ अदा बिच बाट मा

छन कया नशा छै
वीं केशा कि लगुली वे रात कली घटा छे
नि छे वे रात पौड़ी जुन की जुन्याली
विं की मुखडी ही बनिगे पुन्याली
विं पुन्याली देके कि
बिरदयू गयुं
मि बिरदयू गयुं ऊँ अदा बिच बाट मा

दंत पंक्ति की रेघा मा
विं परेली की रेशा मा
कन भाग मेरु अटगि
विं की बिन्दुली मा जै अटकी
विं बिन्दुली देके कि
बिरदयू गयुं
मि बिरदयू गयुं ऊँ अदा बिच बाट मा

मिल बी कै दे सिकेसैरी
विंल जबै मिथे देकि
हैंसि विं ग्लौड़ी देक मेर ग्लौड़ी हैंसि
विं थे देक ना बान बाद मा मेर क्ख क्ख दौड़ी भैंसी
विं हैंसि देके कि
बिरदयू गयुं
मि बिरदयू गयुं ऊँ अदा बिच बाट मा

हुंयुँ छों तुण्ड बरसाता मा
मि विं बरखा की रात मा
मिली जबेर तेर नशेली नजरि मेर नजरि
बिरदयू गयुं
मि बिरदयू गयुं ऊँ अदा बिच बाट मा

एक उत्तराखंडी

बालकृष्ण डी ध्यानी
देवभूमि बद्री-केदारनाथ
मेरा ब्लोग्स
http:// balkrishna_dhyani.blogspot.com
में पूर्व प्रकाशित -सर्वाधिकार सुरक्षित

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

by-Mukesh Hatwal

आधुनिकता की चकाचौंध में उत्तराखंड अपने पुराने
रीति रिवाज, पर्व-त्यौहार और परम्पराएं
भूलता जा रहा है। पहाड़ में बग्वाल
का अपना ही महत्व है। पूरे साल में यही एक दिन है
जब जब लोग पशुओं को अन्न देते हैं।
दिन में फूलों से घरों को सजाया जाता है
स्वांली (पूरी) और दाल की पकौड़ी, दूध की खीर
आदि कई पकवान बनाये जाते हैं। पशुओं के लिए
झंगोरे की खीर व् जौ के लड्डू तैयार कर
सबको थाली में फूलों से सजाया जाता है।
जानवरों के पैर धोकर धूप दिया जलाकर
उनकी पूजा की जाती है और टीका लगाने के बाद
सींगों पर तेल लगाया जाता है। फिर थाली में
सजा हुआ अन्न उनको खिलाया जाता है।
रात को भैला (चीड़ की लाल लकड़ी केे गठ्ठे
को रस्सी से बांधकर जलाने के बाद घुमाया जाता है)
खेला जाता है। भैला को पूजने के बाद गांव के लोग
चौक या खाली खेतों में एकत्रित होकर ढोल दमाऊ
के साथ नाचते और खेलते हैं, जिसमें लोग तरह-तरह
के करतब दिखाते हैं। यहाँ पटाखों की नहीं,
बल्कि ढोल-दमाऊं की आवाज कानों में रस
घोलती है।