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उत्तराखंड पर कवितायें : POEMS ON UTTARAKHAND ~!!!

Started by Dinesh Bijalwan, August 05, 2008, 02:18:42 PM

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

अपना उत्तराखंड
Yesterday at 6:48am ·

मैं हिमालय, हूँ हिमालय, ही रहूँगा मैं सदा
मैं खड़ा, यूँ ही रहूँगा, हिम शिलावों से लदा.
हिल नहीं सकता हूँ मैं, हिलना मुझे आता नहीं
झुक नहीं सकता हूँ मैं, झुकना मुझे भाता नहीं.
मैं हिमालय, हूँ हिमालय, ही रहूँगा मैं सदा ...

मैं निशब्द सा, मौन हूँ पर, ज़ड नहीं चेतन भरा
अस्तित्व ये, सदियों पुराना, उस विधाता का रचा .
मैं अडिग, अविचल हिमालय, भाव से गंभीर हूँ
पर ह्रदय से, अपने बहता ,मैं सदा ही नीर हूँ .
मैं हिमालय, हूँ हिमालय, ही रहूँगा मैं सदा ....

सूर्य की, रश्मियाँ नित, करती मेरा शृंगार है
इन्द्रधनुष, की घटायें, बनती मेरा हार है.
दिव्य हूँ मैं, भव्य हूँ मैं, रत्नों का भंडार हूँ
जनक हूँ ,गौरी का मैं, स्वर्गरोहनद्वार हूँ.
मैं हिमालय, हूँ हिमालय, ही रहूँगा मैं सदा ....

मैं चौखम्बा, मैं ही नंदा, शिखरों का शूल हूँ,
मैं ही नर , मैं ही नारायण, शिव का त्रिशूल हूँ,
शीश हूँ मैं, भाल हूँ मैं, ताज हूँ इस राष्ट्र का
मैं छूता, व्योम को पर, रहता धरा पर हूँ सदा.
मैं हिमालय, हूँ हिमालय, ही रहूँगा मैं सदा I

कविता : डॉ. राजेश्वर उनियाल

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

हुड़की बौल बिना रुपाई के

सड़क है या खेत है
जा पूछों क्यों मैं इस सरकार से
दिल में लगी है कितनी है ठेस
क्यों पूछों मैं इस सरकार से

मै कुछ कह नहीं सकता
पर चुप भी तो मैं रह नहीं सकता
आँखों ने खेला है सारा खेल यंहा
क्यों ना दिखा इस अंधी सरकार को यंहा

आते जाते हुआ यूँ हाल मेरा
देख कितना है बेहाल उत्तरखंड मेरा
फोटो खिंच बस तू अपनों को बता
सोती सरकार को अब तू जाके जगा

हुड़की बौल तू अब बोल दे भुला
ऐसे ना तू अपनी गिची सिला
ऐकि तू बी यख रुपाई मा हाथ लगा
यंहा उगा चावल इस सरकार को खिला

बालकृष्ण डी ध्यानी
देवभूमि बद्री-केदारनाथ
मेरा ब्लोग्स
http://balkrishna-dhyani.blogspot.in/search/
में पूर्व प्रकाशित -सर्वाधिकार सुरक्षित

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

हे सौंण........
...........

हे सौंण तू बरखिगि आज संग्रादी कू
अब त्वेन रोज इनि बछ्छाट ल्योण
एरामा कन भिज्यूं मैं
अब पूरा सोण मैन इन्नी लुतपुथ होण।।॥

तू त बस काळू जन च सिलकणू सिखाई
तब सिलकदी रंदू
मैन घास ल्योण ,फुंग्डियों जाण
पर पता च मैं त्वेन अब मैं रोज भिजोण ॥।॥॥

कटगिळी लाखणा तिंदा छन
कनके मैन आग जगोण
स्कूल्या औंदन भूखा प्यासा
तिंदा लाखडू म कनके भात पकौण॥।।

गोरू भेंसा रमणा छन
कनके तोंक घास ल्योण
बंन्ठा पर नी पाणी क बुंद
कुडू बी चूणू च पठाळी सरकणी छन
अब तू भी इक्कलार्वासियों सी बरखण लैगी॥।।।

हे सोण हबरि सोण कि चार बरख
हबरी जेठ की चार भडक
जादा नि कर तडक भडक
कच्चा कलेजा कू ह्वेग्यूं मै अब
अब बूंदा बांदी म बी भैर नि खिस्कैंदू।।।

हे सौंण अपरु भी अर हमारु भी खयाल कर
छुंयालू सण अपरा अपनौं कू मौका नि दी
कुरेडी लगो, बरखा मेसयो पर मेसी पर ओ
मेसी पर जेई।।।।।

मधुरवादिनी

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

Tanu Pant

पैलि लाछ निसुड़ि,
बेदि कि बन्दलि बि लगे द्या,
च्योला मिसेन सज्युलु हेल भी बणि ग्या,
बौड़ हिटली बल्द भी बणि गिन ,
पर जनि ढागौं पर ठेल मनो कु बग्त आयी त
ज्वनि ये पहाड़ अर हमरि पुगड़्यू थैं धकेल ग्या,
पीठ फरके ग्या यूँ दाना मनख्यूँ जने,
सदनि कु यूंकु निपल्टु ह्वेग्या .....

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

मेरि बौ सरैला , नि जाणो ....

इंटरनेट प्रस्तुति - भीष्म कुकरेती

बौ ए . नि जाणो नि जाणो
मेरि बौ सरैला , ए बौ सरैला
ए खाई जाला क्याळा
ए सतपुळि उर्युं च बौ ए
पंचमी कु म्याळा मेरि बौ सरैला
ए लूण भोरि दूण, भोरि दूण
ए सतपुळि नि जाण बौ ए
झगड़ान हूण ,मेरि बौ सरैला
ए ढीबरा का छौना , ए छौना
ए सतपुळि अयाँन बौ ए
तारा दत्ता का नौना
मेरि बौ सरैला
ए बौ हारा जौ का झीस , बौ ए झीस
ए सतपुळि अयूं च बौ ए
त्यार द्यूर 'हरीश' , मेरि बौ सरैला
ए दूदा कि कटोरि , ए बौ कटोरि
ए सतपुळि ऐ गेन बौ ए
कानूं गो, पट्वरि , मेरि बौ सरैला
ए खाई जाली लौकि , बै ए लौकि
ए त्यारा बाना द्याख बौ ए
लैंसडौना चौकि मेरि बौ सरैला
बौ ए . नि जाणो नि जाणो , मेरि बौ सरैला

Curtsey- Shri Totaram Dhoundiyal

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

उत्तराखण्ड का विकास चाहिए....
उत्तराखण्ड का विकास चाहिए....
रिबन काटने के लिये कैंची चाहिए
फाड़ने के लिये कपड़े चाहिए
पहाड़ की पीड़ा क्यों झेले
हमें तो दिल्ली, देहरादून चाहिए
यूं कहें कि उत्तराखण्ड का विकास चाहिए...
एक आलीशान मंच चाहिए
धन लुटाने के लिये सरकार चाहिए
कैसे लुटे धन उसके लिये आपदा चाहिए
जैसे कैसे भी हो
उत्तराखण्ड का विकास चाहिए....
नाक साफ करने को रूमाल नहीं
जेब काटने के लिये ब्लेड चाहिए
पर कैसे कटे जेब गुरू जी
उसके लिये नेता बनने का गुर चाहिये
हमे तो दोस्तो प्यार चाहिये
इसलिये तो उत्तराखण्ड का विकास चाहिए....

सौजन्य:- जय प्रकाश बिष्ट 'छुँयाळ' बटि

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

Sudesh Bhatt

चली ग्यों दीदों डयूटी
पुरी ह्वेगे छुटटी
याद आली तुम्हारी
जब द्योल रात की डयूटी
घुट घुट बडुली मा
याद तुम्हारी आली
जब दुर प्रदेस डांडियूं मा
डयूटी मेरी राली
बथौं बणी ट्रैन दीदों
छुटी ग्या हरिद्वार
जन जन यैथर छौं जाणु
याद आणा घर बार
मां की हथ की भयुं
रुटयुं की याद आंदी
घर म हंदु अबी त मां
मुंड मलासी क कबरी खलै दयांदी
घुट घुटी क बडुल्युं मा
जिकूडी च उदास
तुम्हारी समलोंण च दगडी
होर कुछ नी च खास
भुख लगीं दीदों खुद मा
खाण क ज्यु नी बुल्दू
दगडयों तै खुजण कुन
मोबेल की गैलरी खुल्दु
दीदों जाणा त छौं डयूटी
पर लगणा कुछ छुटी ग्यायी
एक दगडया छया मोबेल दगडी
वैकि भी बैट्री दगा दे ग्यायी
लिखदी लीखद दगडयो
मेरी रेल रुकी ग्यायी
भैर दयाखी मुंड निकाली क त
स्टेसन लक्सर यै ग्यायी
झट ओलु दीदों छुटी
फिर होली मुलाकात
फोन करना रैन दगडयों
करला यमकेश्वर की बात
सुदेश भटट(दगडया)

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

दिवाकर बुडाकोटी's photo.
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उत्तराखंड तै दिदो झणि क्या ह्वेग्याई.
दयबत्तो कि भूमि कनि बिपदा ऐग्याई.
कै खंड खेलि जोंका बाना उत्तराखंड बणाई.
वी मनखि इख बटै कि लापता ह्वे ग्याई.

ग्वाई लगान्दु उत्तराखंड जरा सि खडु ह्वाई.
बैरि आपदा , नेतो न तबरि लम्डै द्याई.

उत्तराखंडे धरति सरया डामुन डमे ग्याई.
समलोणया टीहरी पाणी जुगता ह्वेग्याई.

केदार नाथ क्या ह्वे.
यो सबु न देखयाली
कर्म अपडा आघ अन्दिन .
यूँ आंखयूं देखयाली.

अपुडि जन्मभूमि जैन मुख मोडयालि.
हम खुण त दिदो वो.
गंगा जी क जौ ह्वेग्याई.

**********

दिवाकर बुडाकोटी
ग्राम - संगलाकोटी .
(पौडी गढवाल),
8958428911

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

खोल गेनी सब पोल

खोल गेनी सब पोल
जो अब तक छ्या लुक्यां
करोड़ को ऊ ढेर
पैली ही बरखा मा बोग्यां

सरकार नि चेत
उत्तरखंड मा कन लागि ये सौत
बरखा ही बरखा पौड़ी
डंडों डंडो ये सरगा बाटा

कन सीमेंट छ्या यू
कन सड़की कु राज च यू
बोगी लेगी अब बणी पुल
बथा तिल कख खिले फूल

ई द्वि बरसा मा
कुच पाई नि बस बल ख्वाई मिल
अपरा और्री अपडों थे
बस बल अब रडदा मिल पाई यख

बालकृष्ण डी ध्यानी
देवभूमि बद्री-केदारनाथ
मेरा ब्लोग्स
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में पूर्व प्रकाशित -सर्वाधिकार सुरक्षित

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

कू भग्यान होलू डांड्यू मां,

महिला : कू भग्यान होलू डांड्यू मां, येनि भली बांसुरी बजाणु.....बजाणु रे......
कू भग्यान होलू डांड्यू मां..... कू भग्यान.....
पुरुष : होलू क्वी बिचारू मैं जनू, नखर्याली बांद रिझाणु ...रिझाणु ये.....
होलू क्वी बिचारू मैं जनू.... होलू क्वी............

पुरुष : फूल हमथें देख-देखि, पोतलो सन कांणा छीन... पोतलो सन कांणा छीन...
भौंरा देखा दिजा कैंमा, छुई हमरि लगाणा छीन
महिला : को बेशर्म होलू तो सणी तेरि-मेरि माया बिगाणू...... बिगाणू रेsssss.....
पुरुष : होलू क्वी बिचारू मैं जनू .... होलू क्वी.....

महिला : ये डांडी बच्युणि होली कि, डालि बोटी गाणि होली डालि बोटी गाणि होली
रसीला गीतों की भांण, कख बटि आणि होली.....
पुरुष : क्वा घस्येर होली रोल्यू मां, अपडा सौंजर्या थे बत्याणि, बत्याणि रेsssss....
महिला : होली क्वै बिचारी मैं जनी.... होली क्वै
पुरुष : होलू क्वी बिचारू मैं जनू, नखर्याली बांद रिझाणु ...रिझाणु ये.....
होलू क्वी बिचारू मैं जनू.... होलू क्वी............

पुरुष : मनमा बसाई मेरि वा होली दुनिया से न्यारी वा होली दुनिया से न्यारी
आंख्यों मा लुकाई बोल वा हुली हिया की पियारी

महिला :कु बैमाना हुलु बोला जी लगदु जू आपृ सै बी स्वानु स्वानु रेsssss....
होलू क्वी बिचारू मैं जनू.... होलू क्वी............

महिला : कू भग्यान होलू डांड्यू मां, येनि भली बांसुरी बजाणु.....बजाणु रे......

पुरुष : होलू क्वी बिचारू मैं जनू.... होलू क्वी............

गढ़वाली गीत का
बस अनुवाद किया है गढ़वाली भाषा को बढ़वा देने के लिये
एक उत्तराखंडी
बालकृष्ण डी ध्यानी
देवभूमि बद्री-केदारनाथ
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