• Welcome to MeraPahad Community Of Uttarakhand Lovers.
 

उत्तराखंड पर कवितायें : POEMS ON UTTARAKHAND ~!!!

Started by Dinesh Bijalwan, August 05, 2008, 02:18:42 PM

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

Dinesh Dhyani
23 hrs ·

. सीख
ब्यटा मि त्वैम कुछ बुन्न चांदु छाई
पण क्य ब्वन, छन्द हि नि आई
कबि त्वै थैं किताबौं म
कबि कम्प्यूटर परै व्यस्त पाई
म्यर मन को उमाळ
मन मा हि रैग्याई।
ब्यटा तु ता जण्दु छै
हम गरीब घरौं का मनखि छां
बाळपन म हमुन अक्वै कि पैरणु अर
छक्वै कि गफ~फा तक नि पाई।
वो त पितरौं कि कृपा से
अमणि हम्हरू बगत एै ग्याई
पण या ब्यटा बित्यां दिनौं थैं
कनक्वै बिसरणाई?
वनु बि बुल्दन कि जो
अपणु टैम बिसरि ग्याई
वो मनखि कि क्य ह~वाई?
ब्यटा इनै सूण
तु परिवारौ सौब से ठुल्लु छै
त्वै पैथर सैर परिवारौं जिम्मेदारि चा
अरे हम्हरू क्य भर~वसु
अमणि छां भौळ क्य ह~वा
अछांदु घाम क्य भर~वसु चा
कब अछै जा।
इलै बुनौं छौं
भै, बैंणा, घर परिवार
अपण्य पर~यो कि जिम्मेदारि
हूण खाण कि हो"िायारी
सीखि ल्हेदि अपणि जिम्मेदारि।
ब्यटा अब वन्नु बगत रि रैग्या
जब लाटा-कालौं न बि
अपणु टैम निकाळि द~या
अरे ये जमन म ता
सपन अर चालाक मनखि बि
नि खै सकणां त ब्यटा
हम्हरि क्या बिसात चा?
ब्यटा बुल्दन
अळग खुटौं कि हिटै भलि नि होंदि
अपणु परिवे"ा अर बिस्तार से
भैनै जैकि टपोस क्य काई
वै मनखि कि क्वी गत नि ह~वाई।
ब्यटा हम ता भंया का मनखि छां
इलै बुनौं छौं डाळौं मा छ~वीं नि लगा
अरे हवा म कबि बणां छन कैका महल?
अपणु विस्तार देखि छ~वीं लगा
अरे~ थामि ल्हेकि सरकारौं टंगडु
नौकरि छ~वटि चा ता क्या ह~वाई
जरा-जरा कै कि हि मनख्योंन
उन्नति काई।
ब्यटा पैलि अक्वै कि
अपणु खुटु त जमादि
मेरि बात मानि जादि
यनु गिच्चु नि मड़कादि
अरै पैलि त त्यारू बुबा छौं
नथर उमरौ लिहाज त खादि
जरसि थौ खा दि
भंया देखि हिटदि
असमानई असमान
नजर नि लगा
ब्यटा म्यरू ब्वल्यूं मानि जादि
जमनु अर अपणु विस्तार देखि
स्वीणा देखिदि
जैन यों बथौं का संज्ञान ल्याई
वै न हि दुन्य म अपणु
मुकाम बणाई।।
मेरी औण वळि गढवळि कविता संगzह धारवोर-धारपोर म बिटे एक कविता।
20/8/15.
aabhar.

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

कविता उत्तराखंड की बालकृष्ण डी ध्यानी

त ऐ बची जाली

पैडि लियां रोज अपरी गढ़वाली
गढ़ भाषा च ये न्यारी पियारी
दोई आखर तुम रोजी पैडि लेला
बिंगी लेला बोली लेला त ऐ बची जाली

निथर ये भी बोगी जाली
पलायन दगडी भागी जाली
अपर नौनु नौनी दगडी रे
दगड्या तू बचाले त ऐ बची जाली

देक बुरु ना मन्या भैजियों
देक दुसरु क्वी भी नि आन हुलु
हुमन कन जै भी अब कन जी
कैकु सारू नि लाग्न जी त ऐ बची जाली

सोची ले तू अब समझी ले
अपरी माटी अपरी भाषा मा बोलिले
बचे बचे अपरुँ दगड रे भेजी
इतगा स काम तू कैजे त ऐ बची जाली

बालकृष्ण डी ध्यानी
देवभूमि बद्री-केदारनाथ
मेरा ब्लोग्स
http://balkrishna-dhyani.blogspot.in/search/
में पूर्व प्रकाशित -सर्वाधिकार सुरक्षित

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

नि छौ खयाल कि तू परदेशो ह्वेली

रचना -- दुर्गा प्रसाद घिल्डियाल (1923 -स्वर्गीय , पंदाऴयू , पौड़ी गढ़वाल ) इंटरनेट प्रस्तुति और व्याख्या - भीष्म कुकरेती

जु मैं मु धर्युं छौ , त्वे देइ याले
अपणा हड्गौ रस , जु मैं मु बच्युं छौ
खलैकि यख की , बारा रस्याळी
विदेशु रण मा त्वे तैं पठै छौ।
निभैने तिन बल , भला ही काज
रखे तिन म्यरा , दूध कि लाज
नि छौ खयाल कि तू परदेशो ह्वेली
भरोसो छयो कि तु मैं मु ऐली।
छोड़ी पुराणी नई थैं अंग्यौणो
या प्रथा च भौत पुराणी
पर माँ त माँ च , इनो किलै नि सोची
बर्षु बटि च ज्वा त्वे तैं भट्यौणी।
तख रच्येंदी कविता गयेंदा गीत
पर याँन नि ढकेंदी म्यरि नाँग काँग
नि पौंछदि यख त्यरा गित्तु की भौण
सुद्दी -मुद्दी नि लगौणी लांग फांग।
भैरा का औंदन , मि तैं भ्यंटेणू
भितर जाणा छन भैर ढुंढणू
जु होन्दा सुमन सरीखा लाल मैं मू
मिन नि फैलौणा छा हाथ हाथ त्वेमू।
यख आग भभरौंद , लगदन बडूळी
मी दिन भूक नी रात सेणी
त्यरो याद कन्नो , उन्नि सि दिखेंद
सियां भुला की जसि भुक्की पेणी।
सर्वाधिकार @ दुर्गा प्रसाद घिल्डियाल परिवार

( साभार --शैलवाणी , अंग्वाळ )Copyright @ Bhishma Kukreti interpretation if any

Bhishma Kukreti

Modern Garhwali Folk Songs, Poems
पहाड़ी कख हर्ची , सर अर युवर्स फेथफुल्ली का बीच ?

-रचना --  गोकुलानंद किमोठी   ( जन्म  1930 , किमोठा , पोखरी च ग     ) -इंटरनेट प्रस्तुति और व्याख्या - भीष्म कुकरेती
-
कुछ दिन पैली देखी
एक कौथिग , नेहरू स्टेडियम की छोटी पहाड्यूं पर पहाड्यूं को
ढोल दमौ , गीत प्रीत , मिठै सिठै
सब्बि सुणी , करी , चाखो छै ,
पर ह्वैगे छै बिसर्याँ जमाना की बात ,
याद छ त नार्थ ब्लॉक अर गुलाबबाग का बस स्टैंड ,
यस सर अर युवर्स फेथफुल्ली का बीच ,
पहाड़ी कख हर्ची, मेरा छैल तै बि पता नि लगी
कखि अंग्वाळ (डंडरियाळ ) पढ़ी
जग्वाळ (पारु ) देखी
अर्ध्ग्रामेश्वर (धष्माना ) करी
पर बिजल्वाण नि मिली
कौथिग मा मिन देखी बिकट दंदांलो
बरसों कि बिस्मृति को घास
स्यूं जलड़ो भैर आये तब देखणी पाअड़
अफु से भैर आइक मिन देखी त हकाणो ग्यो मि
येकुला चणा अर भड़भूजा का भाड़ की अबारे कथा हि सच हूणी थै
पहाड़ त सब दिल्ली ऐगें फिर मि यकुल वापस
तबारे धरे कैन मेरा काँध ऐसा हाथ
यु मैं हि थौ अप्पू सांस अफ्वी बन्धौणू
पाsड़ त फ़ैल जालो दुनिया मा
पाsड़ मा रै नि रै पर जड़ियु रै रे जलड़ों से
मी आज भी जुड़्यूं छौं पहाड़ से अपणा पहाड़ से।


-( साभार --शैलवाणी , अंग्वाळ )Copyright @ Bhishma Kukreti  interpretation if any  Modern Garhwali Folk Songs, Modern Garhwali Folk Verses, Modern Poetries, Contemporary Poetries, Contemporary folk Poetries from Garhwal; Modern Garhwali Folk Songs, Modern Garhwali Folk Verses, Modern Poetries, Contemporary Poetries, Contemporary folk Poetries from Pauri Garhwal; Modern Garhwali Folk Songs, Modern Garhwali Folk Verses, Modern Poetries, Contemporary Poetries, Contemporary folk Poetries from Chamoli Garhwal; Modern Garhwali Folk Songs, Modern Garhwali Folk Verses, Modern Poetries, Contemporary Poetries, Contemporary folk Poetries from Rudraprayag Garhwal; Modern Garhwali Folk Songs, Modern Garhwali Folk Verses, Modern Poetries, Contemporary Poetries, Contemporary folk Poetries from Tehri Garhwal; Modern Garhwali Folk Songs, Modern Garhwali Folk Verses, Modern Poetries, Contemporary Poetries, Contemporary Folk Poetries from Uttarkashi Garhwal; Modern Garhwali Folk Songs, Modern Garhwali Folk Verses, Modern Poetries, Contemporary Poetries, Contemporary folk Poetries from Dehradun Garhwal;
पौड़ी गढ़वाल, उत्तराखंड  से गढ़वाली लोकगीत , कविता ; चमोली गढ़वाल, उत्तराखंड  से गढ़वाली लोकगीत , कविता ; रुद्रप्रयाग गढ़वाल, उत्तराखंड  से गढ़वाली लोकगीत , कविता ;टिहरी गढ़वाल, उत्तराखंड  से गढ़वाली लोकगीत , कविता ;उत्तरकाशी गढ़वाल, उत्तराखंड  से गढ़वाली लोकगीत , कविता ; देहरादून गढ़वाल, उत्तराखंड  से गढ़वाली लोकगीत , कविता ;

--

Bhishma Kukreti

Modern Garhwali Folk Songs, Poems
        रुखा माटा मा प्यार की फसल की   बिडंबना

-रचना --   प्रेम लाल भट्ट   ( जन्म -1931, सेमन , देवप्रयाग , गढ़वाल     ) -इंटरनेट प्रस्तुति और व्याख्या - भीष्म कुकरेती
-
कैन बोलि या रिसी मुन्यूं की
द्यौ अर द्यब्तौं की धरती च
तुम्हीं बता क्या रूखा माटा मा फसल प्यार की उग सकणी च ?
जख भुम्याळ भूखा मौन्ना छन
मेघ तिस्वाळा ही घुमणा छन
रक्षपाल रक्षा का बाना
त्राहि त्राहि ही सब कन्ना छन
वख बल कबि द्यवता रहेंदा छा
बात क्या या तुम तैं खपणी च ?
तुम्हीं बता क्या रूखा माटा मा फसल प्यार की उग सकणी च ?
देव बाला छन भूखा पेट जू
घास का फंची सान्नी सन्नी छन
सोळ हाथ का पाठगौं से जू
ज्वान्नि कि ल्हास ल्हसोण्णी छन
एक मील से रिसि कन्या क्वी
डिब्लु पाणि कू ल्है सकणी  च ? 
तुम्हीं बता क्या रूखा माटा मा फसल प्यार की उग सकणी च ?

-( साभार --शैलवाणी , अंग्वाळ )Copyright @ Bhishma Kukreti  interpretation if any  Modern Garhwali Folk Songs, Modern Garhwali Folk Verses, Modern Poetries, Contemporary Poetries, Contemporary folk Poetries from Garhwal; Modern Garhwali Folk Songs, Modern Garhwali Folk Verses, Modern Poetries, Contemporary Poetries, Contemporary folk Poetries from Pauri Garhwal; Modern Garhwali Folk Songs, Modern Garhwali Folk Verses, Modern Poetries, Contemporary Poetries, Contemporary folk Poetries from Chamoli Garhwal; Modern Garhwali Folk Songs, Modern Garhwali Folk Verses, Modern Poetries, Contemporary Poetries, Contemporary folk Poetries from Rudraprayag Garhwal; Modern Garhwali Folk Songs, Modern Garhwali Folk Verses, Modern Poetries, Contemporary Poetries, Contemporary folk Poetries from Tehri Garhwal; Modern Garhwali Folk Songs, Modern Garhwali Folk Verses, Modern Poetries, Contemporary Poetries, Contemporary Folk Poetries from Uttarkashi Garhwal; Modern Garhwali Folk Songs, Modern Garhwali Folk Verses, Modern Poetries, Contemporary Poetries, Contemporary folk Poetries from Dehradun Garhwal;
पौड़ी गढ़वाल, उत्तराखंड  से गढ़वाली लोकगीत , कविता ; चमोली गढ़वाल, उत्तराखंड  से गढ़वाली लोकगीत , कविता ; रुद्रप्रयाग गढ़वाल, उत्तराखंड  से गढ़वाली लोकगीत , कविता ;टिहरी गढ़वाल, उत्तराखंड  से गढ़वाली लोकगीत , कविता ;उत्तरकाशी गढ़वाल, उत्तराखंड  से गढ़वाली लोकगीत , कविता ; देहरादून गढ़वाल, उत्तराखंड  से गढ़वाली लोकगीत , कविता ;

--

Bhishma Kukreti

Modern Garhwali Folk Songs, Poems , sad poem , Song खुदेड़ गीत

  ब्यटा ! कथगा निर्दै हुयाँ तुम !
-रचना --  सुदामा प्रसाद 'प्रेमी '     ( जन्म  - 1931 , फल्दा , पटवाल स्यूं , पौ.   ग .     ) -इंटरनेट प्रस्तुति और व्याख्या - भीष्म कुकरेती
-
ब्यटा दयाल , कृपाल
जब से तुम परदेश गयां,
तुमन इख को बाटो नी सुंत्याळो
कथगा निर्दै हुयाँ तुम !
जैं ब्वेका तुमन संसधरा पेछा,
जैं ब्वेना तुम नांग भूख सैकी
अपणी छाती पर चिपकैकी रखी छा ,
जैं ब्वेना ज्यू मारी की ,
लाड प्यार से पाळीपोशी की
अपणो मन बुथ्याई छयो -
कि म्यरा गुरबर -गरबर
बच्यां राला , गोरु चरैकी भी -
गुजर बसर कारला।
पर तुम गोरु चरौण्या न रैकी -
मनखी चरौण्या ह्वैग्याँ
याँ की मी तैं भारी ख़ुशी छै:
अपणी कोख मिन धन्य समझी छैः
पर ब्यटा आज मेरा होणा छन कुहाल
टक्क लगैक सूण्ल्या
ब्यटा दयाल -कृपाल



-( साभार --शैलवाणी , अंग्वाळ )Copyright @ Bhishma Kukreti  interpretation if any  Modern Garhwali Folk Songs, Modern Garhwali Folk Verses, Modern Poetries, Contemporary Poetries, Contemporary folk Poetries from Garhwal; Modern Garhwali Folk Songs, Modern Garhwali Folk Verses, Modern Poetries, Contemporary Poetries, Contemporary folk Poetries from Pauri Garhwal; Modern Garhwali Folk Songs, Modern Garhwali Folk Verses, Modern Poetries, Contemporary Poetries, Contemporary folk Poetries from Chamoli Garhwal; Modern Garhwali Folk Songs, Modern Garhwali Folk Verses, Modern Poetries, Contemporary Poetries, Contemporary folk Poetries from Rudraprayag Garhwal; Modern Garhwali Folk Songs, Modern Garhwali Folk Verses, Modern Poetries, Contemporary Poetries, Contemporary folk Poetries from Tehri Garhwal; Modern Garhwali Folk Songs, Modern Garhwali Folk Verses, Modern Poetries, Contemporary Poetries, Contemporary Folk Poetries from Uttarkashi Garhwal; Modern Garhwali Folk Songs, Modern Garhwali Folk Verses, Modern Poetries, Contemporary Poetries, Contemporary folk Poetries from Dehradun Garhwal;
पौड़ी गढ़वाल, उत्तराखंड  से गढ़वाली लोकगीत , कविता ; चमोली गढ़वाल, उत्तराखंड  से गढ़वाली लोकगीत , कविता ; रुद्रप्रयाग गढ़वाल, उत्तराखंड  से गढ़वाली लोकगीत , कविता ;टिहरी गढ़वाल, उत्तराखंड  से गढ़वाली लोकगीत , कविता ;उत्तरकाशी गढ़वाल, उत्तराखंड  से गढ़वाली लोकगीत , कविता ; देहरादून गढ़वाल, उत्तराखंड  से गढ़वाली लोकगीत , कविता ;  .


--


  स्वच्छ भारत ! स्वच्छ भारत ! बुद्धिमान भारत !

Bhishma Kukreti

Modern Garhwali Folk Songs, Poems

मैं हिमालय बोलणु  छऊँ (लम्बी कवितांश )
-रचना --    भगवती प्रसाद नौटियाल    ( जन्म  - 1931, गौरी कोट , इडवाल स्यूं, पौड़ी    गढ़वाल    ) -इंटरनेट प्रस्तुति और व्याख्या - भीष्म कुकरेती
-

मैं हिमालय बोलणु  छऊँ
क्य तुम तक म्यरि आवाज
पौंछणी च ?
क्य बोले - बिंगेणू नी च ?
चुचों क्य ह्वे , तुमारि कन्दूड्यों  तैं
म्यरि तरौं तुम अज्युं बुड्या नि होयें    ...
ल्या त हौर जोर   करी बोल्दौं (लरै -लरै कि बोल्द )
अरे भै ! मैं हिमालय, हिमालय  बोलणु  छऊँ
नि बींगि अज्युं बि , तब त
तुम न त उच -कंदुड्या छ्यें न बैरा
औड़ी कीटी तैं बण्या छैं -बैरा
अर वांको कारण ?
कारण मैं बतांदु /गुस्सा नि ह्वेन
म्यरा भूलों , म्यरि भूल्यों /यु कसूर तुम्हारो नी च
कसूर च वीं रीत भौंणो /ज्व तुमन अपणै याले
मि तैं -तुमन भुलै याले
'चल खुट्टि कौथिगै '/तुमतैं आदत पड़गि
मंडा , झंगोरो बाड़ी /अब क्यापि ह्वेगि
म्यरा छा जु /वूं मन्ख्योंन , ऋषि - मुन्योन
म्यरु मान करे , सम्मान करे
वेद अर पुराणों मा /म्यरि स्तुति करे
देव द्यब्तौं न /म्यरि खुगलि खुजाये
शूरबीर , धीर अर पराक्रमी नर नार्यों न
म्यारा अज्वल भाल पर /तिलक लगाये
.......... ......
पर ह्वेकि एक रा
अपणि भाषा अर संस्कृति को
मान करा , सम्मान करा
यीं धर्ती  को
जैंका माटन
तुम तैं
अ , आ सिखाये
मनिखि बणाये
वीं तैं नमन करा
-( साभार --शैलवाणी , अंग्वाळ )Copyright @ Bhishma Kukreti  interpretation if any  Modern Garhwali Folk Songs, Modern Garhwali Folk Verses, Modern Poetries, Contemporary Poetries, Contemporary folk Poetries from Garhwal; Modern Garhwali Folk Songs, Modern Garhwali Folk Verses, Modern Poetries, Contemporary Poetries, Contemporary folk Poetries from Pauri Garhwal; Modern Garhwali Folk Songs, Modern Garhwali Folk Verses, Modern Poetries, Contemporary Poetries, Contemporary folk Poetries from Chamoli Garhwal; Modern Garhwali Folk Songs, Modern Garhwali Folk Verses, Modern Poetries, Contemporary Poetries, Contemporary folk Poetries from Rudraprayag Garhwal; Modern Garhwali Folk Songs, Modern Garhwali Folk Verses, Modern Poetries, Contemporary Poetries, Contemporary folk Poetries from Tehri Garhwal; Modern Garhwali Folk Songs, Modern Garhwali Folk Verses, Modern Poetries, Contemporary Poetries, Contemporary Folk Poetries from Uttarkashi Garhwal; Modern Garhwali Folk Songs, Modern Garhwali Folk Verses, Modern Poetries, Contemporary Poetries, Contemporary folk Poetries from Dehradun Garhwal;
पौड़ी गढ़वाल, उत्तराखंड  से गढ़वाली लोकगीत , कविता ; चमोली गढ़वाल, उत्तराखंड  से गढ़वाली लोकगीत , कविता ; रुद्रप्रयाग गढ़वाल, उत्तराखंड  से गढ़वाली लोकगीत , कविता ;टिहरी गढ़वाल, उत्तराखंड  से गढ़वाली लोकगीत , कविता ;उत्तरकाशी गढ़वाल, उत्तराखंड  से गढ़वाली लोकगीत , कविता ; देहरादून गढ़वाल, उत्तराखंड  से गढ़वाली लोकगीत , कविता ;

--

Bhishma Kukreti

Modern Garhwali Folk Songs, Poems

            अपणो मुल्क
-रचना --    जगदीश बहुगुणा 'किरण '   ( जन्म  - 1932 , बुघाणी , चलणस्यूं , पौड़ी गढ़वाल     )
Poem by - Jagdish Bahuguna 'Kirna'
-इंटरनेट प्रस्तुति और व्याख्या - भीष्म कुकरेती
-
मिन त नि जाणी कि अपणो मुल्क भि मुल्क मनिख तै इथगा रुवालो !
बोल्नु कु नौं च अपणो भि गौं च , छन द्वी पुंगड़ी दूर दूर
सौण भि सर्ग खरायुं रहंदू , होंदी नि बरखा की बूर बूर
काळा घम्मु मा , माटाअ कम्मु मा , होंदन हडगा चूर चूर
अर झक् झक् दिन भर जिकुड़ी को होलो
सुखीक पीना -पराळो !
दिन भर फ़िरडि कि डेरा मु ऐकी ह्वे जांद चित्त फीको सी
खट्टा डंकार ऐकि द्वी चार करदन मन क्याप तीखो सी
देखीक झांडी रीती राती म हेरीक कूड़ो रीतो सी
अरे जब्क लगालो मनिख बिचारो
ल्हेकि हाथ मुछ्याळो !
वु भैर मुछयाळो अर दिल मा मुछ्याळो छांदन आंख्युं रात
अर जोन जुन्याळि भै लगदि नि छाळी , करदी मन को क्वात
खौरी -खौरी डेरा खयेंदी , कन क्यांकु खाणै कि बात
अर ह्वे जांदो गाँस्यूँ को खूब ठट्टा
रै जांदी जिकुड़ी तिसाळो !


-( साभार --शैलवाणी , अंग्वाळ )Copyright @ Bhishma Kukreti  interpretation if any  Modern Garhwali Folk Songs, Modern Garhwali Folk Verses, Modern Poetries, Contemporary Poetries, Contemporary folk Poetries from Garhwal; Modern Garhwali Folk Songs, Modern Garhwali Folk Verses, Modern Poetries, Contemporary Poetries, Contemporary folk Poetries from Pauri Garhwal; Modern Garhwali Folk Songs, Modern Garhwali Folk Verses, Modern Poetries, Contemporary Poetries, Contemporary folk Poetries from Chamoli Garhwal; Modern Garhwali Folk Songs, Modern Garhwali Folk Verses, Modern Poetries, Contemporary Poetries, Contemporary folk Poetries from Rudraprayag Garhwal; Modern Garhwali Folk Songs, Modern Garhwali Folk Verses, Modern Poetries, Contemporary Poetries, Contemporary folk Poetries from Tehri Garhwal; Modern Garhwali Folk Songs, Modern Garhwali Folk Verses, Modern Poetries, Contemporary Poetries, Contemporary Folk Poetries from Uttarkashi Garhwal; Modern Garhwali Folk Songs, Modern Garhwali Folk Verses, Modern Poetries, Contemporary Poetries, Contemporary folk Poetries from Dehradun Garhwal;
पौड़ी गढ़वाल, उत्तराखंड  से गढ़वाली लोकगीत , कविता ; चमोली गढ़वाल, उत्तराखंड  से गढ़वाली लोकगीत , कविता ; रुद्रप्रयाग गढ़वाल, उत्तराखंड  से गढ़वाली लोकगीत , कविता ;टिहरी गढ़वाल, उत्तराखंड  से गढ़वाली लोकगीत , कविता ;उत्तरकाशी गढ़वाल, उत्तराखंड  से गढ़वाली लोकगीत , कविता ; देहरादून गढ़वाल, उत्तराखंड  से गढ़वाली लोकगीत , कविता ;

--


  स्वच्छ भारत ! स्वच्छ भारत ! बुद्धिमान भारत !


Bhishma Kukreti

Modern Garhwali Folk Songs, Poems
भूमि को बैकुंठ -उत्तराखंड !

-रचना --     भगवान सिंह रावत 'अकेला '   ( जन्म  - 1932  , सिवाई , बिछला नागपुर चमोली गढ़वाल     )
Poem by - Bhagwan Singh Rawat 'Akela'
-इंटरनेट प्रस्तुति और व्याख्या - भीष्म कुकरेती
-
भारत कु सिर- ताज भैजि, सुंदर उत्तराखंड
वेदूं की वेदान्त भूमि , यु अपणु उत्तराखंड
कुबेर कु नंदन -बण केदारकु काँठु
बसुधारा कु ठंडो पाणी कैलास कु बाटो
रंग -रंगीलु हर्युं -भर्युं , भूमि कु बैकुंठ
सरजू पाणी , काळो डांडी न्यारुं की भूमि
बागेश्वर , नैनीताल , नंदा की त्रिशुली रंग -रंगीलु हर्युं -भर्युं , भूमि कु बैकुंठ
पिंडारी बण अलकापुरी , ताल भीमताल
रौंतेलु कूर्माचल अपणु गीतुं कु गढ़वाळ
रंग -रंगीलु हर्युं -भर्युं , भूमि कु बैकुंठ
गंगा , गौमुख केशर क्यारी फूलूं का बगवान
झर झर झरणा , गुण गुण भौंरा , कस्तूरी मृग छन
रंग -रंगीलु हर्युं -भर्युं , भूमि कु बैकुंठ

-( साभार --शैलवाणी , अंग्वाळ )Copyright @ Bhishma Kukreti  interpretation if any  Modern Garhwali Folk Songs, Modern Garhwali Folk Verses, Modern Poetries, Contemporary Poetries, Contemporary folk Poetries from Garhwal; Modern Garhwali Folk Songs, Modern Garhwali Folk Verses, Modern Poetries, Contemporary Poetries, Contemporary folk Poetries from Pauri Garhwal; Modern Garhwali Folk Songs, Modern Garhwali Folk Verses, Modern Poetries, Contemporary Poetries, Contemporary folk Poetries from Chamoli Garhwal; Modern Garhwali Folk Songs, Modern Garhwali Folk Verses, Modern Poetries, Contemporary Poetries, Contemporary folk Poetries from Rudraprayag Garhwal; Modern Garhwali Folk Songs, Modern Garhwali Folk Verses, Modern Poetries, Contemporary Poetries, Contemporary folk Poetries from Tehri Garhwal; Modern Garhwali Folk Songs, Modern Garhwali Folk Verses, Modern Poetries, Contemporary Poetries, Contemporary Folk Poetries from Uttarkashi Garhwal; Modern Garhwali Folk Songs, Modern Garhwali Folk Verses, Modern Poetries, Contemporary Poetries, Contemporary folk Poetries from Dehradun Garhwal;
पौड़ी गढ़वाल, उत्तराखंड  से गढ़वाली लोकगीत , कविता ; चमोली गढ़वाल, उत्तराखंड  से गढ़वाली लोकगीत , कविता ; रुद्रप्रयाग गढ़वाल, उत्तराखंड  से गढ़वाली लोकगीत , कविता ;टिहरी गढ़वाल, उत्तराखंड  से गढ़वाली लोकगीत , कविता ;उत्तरकाशी गढ़वाल, उत्तराखंड  से गढ़वाली लोकगीत , कविता ; देहरादून गढ़वाल, उत्तराखंड  से गढ़वाली लोकगीत , कविता ;

--

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

व्हैग्याई डिजिटल

व्हैग्याई डिजिटल
देश व्हैग्याई डिजिटल
फेसबुक अपरा मुखडी
मुखडी देख रंग ग्याई
व्हैग्याई बल डिजिटल ... २

पाणी नि मिल्नु
बिजली नि अब तक ऐई
बांज पौड़ी गे सारी पुंगड़ी
बल कैल चरण ये मा हैल
व्हैग्याई बल डिजिटल ... २

भूख नंगा अब भी छिन
रोजगार क्ख्क च जरा बोल्दिन्
बेरोजगारों की फौज खड़ी
स्मार्ट मोबाईल हौस बड़ी
व्हैग्याई बल डिजिटल ... २

मिल त कुछ नि बोलण
अब त डिजिटल ही चलण
देखा मुखडी अपरी अपरी सजै
कन देखेणु भुलु मि भी बतै
व्हैग्याई बल डिजिटल ... २

बालकृष्ण डी ध्यानी
देवभूमि बद्री-केदारनाथ
मेरा ब्लोग्स
http://balkrishna-dhyani.blogspot.in/search/
http://www.merapahadforum.com/
में पूर्व प्रकाशित -सर्वाधिकार सुरक्षित