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उत्तराखंड पर कवितायें : POEMS ON UTTARAKHAND ~!!!

Started by Dinesh Bijalwan, August 05, 2008, 02:18:42 PM

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720


By Bhishma Kukreti .

सरू -कुमैण - एक प्रणय जागर गाथा

(गढ़ सुम्याळ का एक भाग


(सन्दर्भ :शिव नारायण सिंह बिष्ट -गढु सुम्याळ, 1928, आगरा प्रेस आगरा में प्रिंट एवं बांघाट व गूमखाळ से वितरित )

अब गंगोलीघाट रौंद बाबा सरू-कुमैण
अब ज्वा सरू -कुमैण हात नि लियेंदी भुयें नि धरेंदी
रमकदी बाहें छमकदी चूड़ी
जिरैलो पिंडो नौन्याळो गाथो
जैको च खंखरियाळो माथो
बड़ी रूपवान छ -वा सरू कुमैण
बारा बर्स की सरू होली भरपूर ज्वान
बंसुरी की धुन ले सरू मोहित ह्वे गय
धन तेरा भाग बाबा ! कै देस का ह्वेल्यो
' को छ बजया ?' बोद मूर्छा हवे गय
xxx xxx
जंगळ जटिया गढ़ु मरमिट खसिया
अब वा सरू कुमैण देखिक गढू का घाबड़ी लगौन्द
अब सै ह्वै जा बैख मेरी बंसी बजैया
अब बारा बीसी भैंसी जैकी चौंकण लगीन

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

मौत का जागर
गजलकार -- मधुसुदन थपलियालै कुछ गजल
(इंटरनेट प्रस्तुति - भीष्म कुकरेती )

मौत का जागर लग्युं छ आज ब्याळी
जिन्दगी ह्वै ग्यायि डौंर -थाळी।
आग चुल्लौं नांघी कोठार पौंछी
पाणी धैरी की नजीकु छिल्ला बा ळी।
तीस माणी , भूख पाथी, सात जीवन
पुंगड़ी पटुळी सेरा सारी पांच नाळी।
बाघ का जजमान बणगिन घ्वीड़ -काखड़
मनख्या -मनिख चैरिगे सरा हर्याळी। .
धगुला देखिक रौंस नि खै कागजूं मां
दस्तखत त असली छन पण हाथ जाळी।
बौग्दु पाणी हेरी की निरसे ना गैल्या
तेरी गंगा होली त त्वैमा ही आली


Copyright @ Madhusudan Thapliyal , Haridwar

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

ऐड़ाट

रचना -- हरीश जुयाल

अपुडी़ थुथरी फर किलै लीसू लगाणी छै तू ।
डुंडी डुंडी हुयीं छै क्यो नि बच्याणी छै तू ।।

प्यार कू अट्टा बणी, जब कभी त्वैफर चिबटू ।
मिथै चट चूंडिकि च्यां उंदू चुटाणी रै तू ।।

जब बि भैंसा जना आंखौं ल द्यखिदि बर्र बौड़िकि ।
यन लगद कि मिथै पींडू सि बुखाणी छै तू ।।

वार बिटै प्वार तलक, पचकयीं ट्यूब छौं मी ।
दाढ़ि कीटिकि मिथै क्यो फुच्च कराणी छै तू ।।

त्यारू चौंठंद हुयूं लबड़न्दु चौमीन छौं मि ।
सट सोसिकि मिथै स्यां उब्बु लिजाणी छै तू ।।

ड्वारा उंद धैरि बिसरिगे आमू दाणू समझिकि ।
ऐंस्वा साल म लोगूं तै हड्यलु दिखाणी छै तू ।।

पींडा का तौला खवैं बैलि बणिगे हमखुणै ।
पर वूंकु कळच्वणि देखिकि सर्र पनाणी छै तू ।।

म्यारा त आँखा बुज्यां अर तु कनी मालिश ।
अब पता चल कि मीफर खौड़ु सराणी रै तू ।।

जुंवा बणिकै तेरी जुलफ्यों मा ख्यन्नू ह्वळ्ळी "जुयाळ"
चट पखड़िकि, खट्ट नंग मा मार जाणी छै तू ।।

Copyright Harish Juyal Kutaj

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

गढ़वाळ का सच्चा कवियों से प्रार्थना (1920 से पहले की कविता )

रचयिता -- चंद्रमोहन रतूड़ी (गोदी , टिहरी 1880 -1920 )

क्या हम कवि पुत्र सरस्वती का
ब्रह्मा की अंधी अर काळि सृष्टि
का आँख मुखीर स्वयं विधाता -
क्या हमन कैकि करणी अपेक्षा ?
क्या छन स्त्रियों का मुख नेत्र पद्म,
बिना हमारी प्रतिभा की किरणयों ?
क्या बीरू का कर्म विचित्र अद्भुत,
बिना हमारी फिरदार बाणी ?
हे नी छ क्या या प्रकृति ही सारी,
निर्जीव बेढंग अर शून्य जंगळ
देवत्व , सौंदर्य , सहानुभूति -
संचारणी शक्ति बिना हमारी ?
तजिक तब सब ग्लानि , लीक बाणी की बीणा
प्रमुदित मन से आपुच्च स्वरसे ही अपणा
परबत बण गंगा बद्री केदार राजा
सब भड़ गढ़ का यै देश की कीर्ति गायैं। .
(चंद्रमोहन रतूड़ी जीक कविता क्लिष्ट ही छन )

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

सुद्दी रकोड़ा रकोड़
रचना --दिनेश ध्यानी

सुद्दी
रकोडा रकोड
बिना बाती
चबोड़
क्यांकू इत्गा
घमंड त्वे अरे तु बि मनखी ही त छै।

कै थैं
कुछ नि
समझदी
कैकु ब्व्ल्यू
तु नि मन्दी
अफ्वी तैं
भारी चितौंदी.

निरबै- निरसा
माटी मनखि छै
निवसे कि रैदी
अगास जनै
देखी की
नि खौलेदि।

करम गति
अरे
विचार से होंद
मनखि बडु
जरा यीं बातौ
विचार कै लेह्दी । ... दिनेश ध्यानी १७/७/१५

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

चाँद चोरी की लायूं छों

औ चाँद चोरी की लायूं छों
चल जैकी बैठी जोंला चर्च के पिछने
हो , ना क्वी देके ना पछाणै
बैठ्याँ डाला कु भुंया
अरे चल जैकी बैठी जोंला चर्च के पिछने

ब्याली बाबा की निन्दी टूटी गे छे मेर लाज कि सोच्यां
ब्याली बाबा की निन्दी टूटी गे छे मेर लाज कि सोच्यां
अरे जो व्हाई छे ब्याल व्हाई छे
आच त आच की सोचा
जगी गयां त
जगन दया
अचा
होय
त चल जैकी बैठी जोंला चर्च के पिछने
औ चाँद चोरी की लायूं छों
औ चाँद चोरी की लायूं छों
चल जैकी बैठी जोंला चर्च के पिछने

चल न्यार परी नवो लेकि चल कखि दूर बगदी जोंला
चल न्यार परी नवो लेकि चल कखि दूर बगदी जोंला
हो खोजी ना पैं गौंऊ वाला किनार से कैकि जोंला
बोल दी त
बोल दे ना
अचा
होय
त चल जैकी बैठी जोंला चर्च के पिछने
औ चाँद चोरी की लायूं छों
औ चाँद चोरी की लायूं छों
चल जैकी बैठी जोंला चर्च के पिछने

एक उत्तराखंडी
बालकृष्ण डी ध्यानी
देवभूमि बद्री-केदारनाथ
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में पूर्व प्रकाशित -सर्वाधिकार सुरक्षित
हिंदी गाणा बोल छंण ... चाँद चुरा के लाया हूँ
चित्रपट : चाँद चुरा के लाया हूँ -देवता १९७८
गढ़वाली मा ये बोल जी कंन लाग्यां जी आप थै बतवा जरुर जी
हिन्दी गाने का ये का गढ़वाली बोळ संस्करण

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

ऐई गैई याद मीथै

ऐई गैई याद मीथै
फिर मेरा पहाड़ की
ये उकाला की म्यारा गढ़वाल की
ऐई गैई याद मीथै
फिर मेरा पहाड़ की
ये उकाला की म्यारा गढ़वाल की

ढुगों और गारों दगडी
छ्वीं लगांदी खिद्क्ती धारा की ,पौड़ी बाजारा की
मेरा पहाड़ की
ऐई गैई याद मीथै
फिर मेरा पहाड़ की
ये उकाला की म्यारा गढ़वाल की

पञ्च प्रयागा की बद्री-केदारा की
देब्तों की ठोंऊँ की अपरा गोँऊँ और मऊँ की
ऐई गैई याद मीथै
फिर मेरा पहाड़ की
ये उकाला की म्यारा गढ़वाल की

मुळ मुळ हैंसणि व्हाली
खुदेड़ अब गीत गाणी व्हाली
खुद थे रूले रूले की खुद थे बथोंणी व्हाली
ऐई गैई याद मीथै
फिर मेरा पहाड़ की
ये उकाला की म्यारा गढ़वाल की

कवि यकुलांस तू यकुलि उडी जांदू कख
लगै दे परै हिलांसा
घुघती दगडी तू बौडी ऐजा घर
ऐई गैई याद मीथै
फिर मेरा पहाड़ की
ये उकाला की म्यारा गढ़वाल की
ऐई गैई याद मीथै
फिर मेरा पहाड़ की
ये उकाला की म्यारा गढ़वाल की

एक उत्तराखंडी

बालकृष्ण डी ध्यानी
देवभूमि बद्री-केदारनाथ
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एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

चम चमा चम, चम-चम चम-चम चम्म चमकि, चमकि चम्म चमकि घाम कांठ्यूं मां
हिवांलि कांठि चांदि की बणि गैनि, हिवांलि कांठि चांदि की बणि गैनि
बणि गैनि... बणि गैनि...
हिवांलि कांठि चांदि की बणि गैनि, हिवांलि कांठि चांदि की बणि गैनि
शिव का कैलाशु ग्याइ पैलि-पैलि घाम,
शिव का कैलाशु ग्याइ पैलि -पैलि घाम
सेवा लगौणुं आइ बदरी का धाम.. बे..
बदरी का धाम बे बदरी का धाम
सर्र फैलि, फैलि, सर्र फैलि- घाम डांडों मां
पौलि पन्छि डांड़ि डाल बौटि बिजि गैनि, पौलि पन्छि डांड़ि डाल बौटि बिजि गैनि
बिजि गैनि... बिजि गैनि
हिवांलि कांठि चांदि की बणि गैनि, हिवांलि कांठि चांदि की बणि गैनि
ठण्डु -माठु चड़ि घाम फुलुं की पाख्युं मां
ठण्डु-माठु चड़ि घाम फुलुं की पाख्युं मां
लागि कुतगैलि तौंकी नागि काख्युं मां ...बे...
नागि काख्युं मां बे नागि काख्युं मां
खिच्च हैसनि, हैसनि, खिच्च हैसनि फूल डाल्यूं मां
भौंरा पौतेला रंगमत बणी गैनि, भौंरा पौतेला रंगमत बणी गैनि
बणी गैनि.. बणी गैनि
हिवांलि कांठि चांदि की बणि गैनि, हिवांलि कांठि चांदि की बणि गैनि
डांड़ि कांठि बिजालि पौंचि घाम गौं मां
डांड़ि कांठि बिजालि पौंचि घाम गौं मां
सुनिन्द पौड़ि छे बेटि ब्वारि ड्यरौं मां.. बे...
ब्वारि ड्यरौं मां बे ब्वारि ड्यरौं मां..
झम्म झौल, झौल, झम्म झौल लागि आख्यूं मां
मायादार आख्यूं का सुपिन्या उड़ि गैनि, मायादार आख्यूं का सुपिन्या उड़ि गैनि
उड़ि गैनि..उड़ि गैनि
हिवांलि कांठि चांदि की बणि गैनि, हिवांलि कांठि चांदि की बणि गैनि
छुयुं मां बिसै गैनि पन्देरु मां पन्देनि
छुयुं मां बिसै गैनि पन्देरु मां पन्देनि
भांणि पुरि गैनि तौकि छुईं नी पुरैनि ..बे...
छुईं नी पुरैनि बे छुईं नी पुरैनि
खल्ल खतै, खतै, खल्ल खतै घाम मुखुड़्युं मां
बिजादिनि मुखड़ि सुना कि बणि गैनि, बिजादिनि मुखड़ि सुना कि बणि गैनि
बणि गैनि..बणि गैनि
हिवांलि कांठि चांदि की बणि गैनि, हिवांलि कांठि चांदि की बणि गैनि
दोफारामां लागि जब बणुं मां घाम तैलु
दोफारामां लागि जब बणुं मां घाम तैलु
बैठि गैनि घसेरि बिसै कि डाला छैलु
बिसै कि डाला तैलु,बिसै कि डाला छैलु
गर्र निन्द, निन्द, गर्र निन्द पड़ि छैलु मां
आइ पतरौलु अर घसेरि लुकि गैनि, आइ पतरौलु अर घसेरि लुकि गैनि
बणि गैनि..बणि गैनि
हिवांलि कांठि चांदि की बणि गैनि, हिवांलि कांठि चांदि की बणि गैनि
ब्याकुलि कु सिलु घाम पैटण बैठि गै
ब्याकुलि कु सिलु घाम पैटण बैठि गै
डाड़्यु का पिछड़ि ज्यूंन हैसण बैठि गै
हैसन बैठि गै बे हैसण बैठि गै
झम्म रात, रात, झम्म रात पौड़ि रौल्यूं मां
फूल-पंछि डाड़ि डालि पौचि सैई गैनि, फूल-पंछि डाड़ि डालि पौचि सैई गैनि
सैई गैनि.. सैई गैनि
फूल-पंछि डाड़ि डालि पौचि सैई गैनि, फूल-पंछि डाड़ि डालि पौचि सैई गैनि
फूल-पंछि डाड़ि डालि पौचि सैई गैनि, फूल-पंछि डाड़ि डालि पौचि सैई गैनि
.
.
गढ़वाली गीत नरेंद्र सिंग नेगी जी का
बस अनुवाद किया है गढ़वाली भाषा को बढ़वा देने के लिये
एक उत्तराखंडी
बालकृष्ण डी ध्यानी
देवभूमि बद्री-केदारनाथ
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एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

आप कै कै , कन कन, कळजुग्युं तै जाणदवां ?

कळजुगी -गढ़वाली कविता

भवानीदत्त थपलियाल (1867 -1932 ,खैड़ु मवाळ स्यूं , पौड़ी गढ़वाल )

सुळबुळ संध्या नौ चुळ पाणी , देवता पित्रु की निर्वीजि लाणी
घर घर अंधाधुन्द मचाणी , धर्म कर्म की जड़ उकटाणी
जैकी देखि हूणी खाणी , झटपट तख आग लगाणी
भैला मन ते बात बणाणी ,भितल्या मन ते कर्द चलाणी
पांच सात की सभा बणाणी , फुन्द्या बणिक बात बुजाणी
जब जाणी सब लाइ गैन बाणी , सबकी रकम हजम करि जाणी
कैमु कदापि सच्च नि लगाणी , झूट सदा सब बात बणाणी
अफु नि देणी कै तै , हैकाकी मऊ चट करि जाणी

Presented on Internet -Bhishma Kukreti 17 /7 /15

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

Shailendra Joshi
July 23 at 1:11pm ·

पैली नि देखी कबि
त्वैकु इन्नु सजी धजी
कख जानि
रंगली पिंगली बनी हो
पैली नि पूछी कबि कैन
आज पूछी त बतै द्यौ
जवनि ऐगी मैमू
कै पायी कै चितई
जवनि देखी तिन भयी
चकोर सी आँखि
ह्वेगी दुन्या की म्यरी
जवनि देखी
यी जवनि सिंगार कु
क्वी त मायादार
होलु साँचु
अब साँचु हो या काचु
अबि त जवनि का
रंग मा रंगयु च
सच बोलू त तेरु
रूप देखी आज मि
ढगै ग्यो
सच्ची तू ढगै त
क्या चकडैती
नौ च जवनि .........शैलेन्द्र जोशी