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Tribute To Movement Martyrs - उत्तराखण्ड राज्य आन्दोलन के शहीदों को श्रद्धांजलि

Started by Anubhav / अनुभव उपाध्याय, October 03, 2007, 02:14:22 PM

Ravinder Rawat


हे देव! हे परम शक्ति!
पृथक राज्य हेतु जिन लोगों ने अपना बलिदान दिया, उन शहीदों को कभी बिस्मृत करूँ,  ऐसा क्षण मेरे जीवन में न आये.

Charu Tiwari

प्रेरणा पुंज शहीदों को शत्-शत् नमन

त्यर जल्म क जबाव द्यूलों एक दिन,
लाठी-गोली के जबाव द्यूलो एक दिन।
जब तलक् विकास नि हो, उत्तराखंड राज्य नि हो,
अलख जगी रौली उत्तराखंड मा, य लडैं लागि रौली उत्तराखंड मा।
 
राज्य आंदोलन के दौरान इस गीत को गाकर अपने प्राणों का उत्सर्ग करने वाले शहीदों को, जिन्होंने हमारे बेहतर कल के लिये अपना आज बलिदान कर दिया शत्-शत् नमन। हम आपके सपनों का उत्तराखंड बनाने के लिये लड़ाई जारी रखे हैं। आप हमारी प्रेरणा हैं, संबल हैं। जहां डिगते हैं आपका आत्मबल हमारे साथ होता है। कितने भी तूफान आयें उनका मुकाबला करेंगे। राजधानी के सवाल पर आपके सपनों की लड़ाई जारी है। खटीमा और मसूरी में आपके बलिदान ने एक नये इतिहास का निर्माण किया। शहीद कभी मरते नहीं। वे प्रेरणा पुंज हैं व्यवस्था परिवर्तन के। बेहतर समाज और खुशहाल उत्तराखंड की यही प्रेरणा आपने दी है। हम इसे आगे बढ़ाने के लिये कृतसंकल्प हैं। शत्-शत् नमन।

हेम पन्त

खटीमा के अमर शहीदों को शत-शत नमन... आज सुबह समाचार पत्रों में परमजीत सिंह के परिवार की खराब स्थिति के बारे में पढ कर बहुत दु:ख हुआ. परमजीत सिंह खटीमा गोलीकाण्ड के बाद लापता हो गये थे. उनको खटीमा काण्ड का शहीद मानकर उत्तराखंड सरकार ने 10 लाख रुपये की राशि स्वीकृत की लेकिन यह राशि उनकी पत्नी को मिली और वह मप्र में अपना दूसरा घर बसा कर रहने लगी है.

परमजीत के वृद्ध माता-पिता बदहाली में अपना जीवन बिता रहे हैं... हमारे लिये बहुत शर्म की बात है..   

Risky Pathak


हेम पन्त

खटीमा के शहीदो हम शर्मिन्दा हैं
तुम्हारे सपने अभी अधूरे हैं...... तुम्हारे कातिल अभी जिन्दा हैं..

harishchandra_s

Quote from: हेम पन्त on September 01, 2009, 05:13:08 PM
खटीमा के अमर शहीदों को शत-शत नमन... आज सुबह समाचार पत्रों में परमजीत सिंह के परिवार की खराब स्थिति के बारे में पढ कर बहुत दु:ख हुआ. परमजीत सिंह खटीमा गोलीकाण्ड के बाद लापता हो गये थे. उनको खटीमा काण्ड का शहीद मानकर उत्तराखंड सरकार ने 10 लाख रुपये की राशि स्वीकृत की लेकिन यह राशि उनकी पत्नी को मिली और वह मप्र में अपना दूसरा घर बसा कर रहने लगी है.

परमजीत के वृद्ध माता-पिता बदहाली में अपना जीवन बिता रहे हैं... हमारे लिये बहुत शर्म की बात है..   


ये हमरी सभ्यता और संस्क्रिति के पतन के लक्षन है।

शीदो के सम्मान में क्या एक भी समारोह नहि? कोइ स्मारक नहि?

उस जननी का सम्मान नही जिसने ऐसे सपुत को जनम दिया जिनके बलिदान के कारण उत्तराखंड अन्दोलन को "अन्दोलन" कि पूर्णता मिली, और उत्तराखंड अस्तित्व मे आया?

हमे अपने राज्य के नेतओ के लिये ये नियम बनाना चहिये कि वो अपना शपथ पत्र पढ़ने से पहले उन शहीदो के माता-पिता के चरण छुए और उनसे उनके पुत्र जैसी त्याग भवना का वर ले।


sanjupahari

Hem ji ki bhawnaoo main shamil hona chahta hu....harish ji ke shabdoon ko sahyog dena chahta hu.....shabhi shaheedoon ko tahe dil se shradhanjali dena chahta hu....yehi kahana chahata hu...jo bhi Uttarakhandi unke balidaan ko bhule wo Uttarakhandi naa rahe....SAT SAT NAMAN hai veer saputoon ko.

Devbhoomi,Uttarakhand

खटीमा व मसूरी के शहीदों को किया याद, श्रद्धासुमन अर्पित

राज्य आंदोलन के दौरान खटीमा में शहीद हुए आंदोलनकारियों के सम्मान में उत्तराखण्ड लोकवाहिनी व परिवर्तन पार्टी ने चौघानपाटा गांधी पार्क में अलग-अलग श्रद्धांजलि सभा की।

उलोवा के केन्द्रीय अध्यक्ष डा.शमशेर सिंह बिष्ट ने खटीमा के शहीदों को श्रद्धासुमन अर्पित करते हुए कहा कि सभी को संकल्प लेना होगा कि राज्य की राजधानी गैरसैंण हो।
यह राज्य आंदोलनकारी के शहीदों का सपना था। शहीदों का सपना पूरा करना ही उन्हे सच्ची श्रद्धांजलि होगी। डा.बिष्ट ने कहा कि राज्य के लिए 44 आंदोलनकारियों ने शहादत दी थी। जिस कारण उन्होंने शहादत दी वह आज भी पूरा नहीं हुआ है। राजधानी गैरसैंण बनाने के लिए एक नए आंदोलन की आवश्यकता पर बल दिया।

श्रद्धांजलि सभा व धरने में वाहिनी के नेता पूरन चन्द्र तिवारी, सुशीला धपोला, हारिस मोहम्मद, विष्णु दत्त जोशी, शमशेर बहादुर जंग, भूपेन्द्र थापा, अमीनुर्रहमान, भूपेन्द्र शाही, कमलेश थापा, सुनीता जोशी, नवीन पाठक सहित अनेक लोग शामिल थे।

इधर उत्तराखण्ड परिवर्तन पार्टी ने खटीमा मसूरी में आज ही के दिन जिन राज्य आंदोलनकारियों ने शहादत दी, उन्हे श्रद्धासुमन अर्पित किए गए।
परिवर्तन पार्टी, उत्तराखण्ड छात्र संगठन के संयुक्त तत्वावधान में शहीदों के सम्मान में उपवास रखा गया। उपवास व धरने में गोविन्द लाल वर्मा, एनडी बिनवाल, प्रदीप गुरूरानी, अनूप तिवारी, हेम पांडे, मोहम्मद शाकिब, कौशल पंत, राजेन्द्र सिंह बिष्ट, योगेश रावत, कैलाश कुमार, हेम मिश्रा, जीवन चन्द्र ने विचार व्यक्त किए।




एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

Merapahad pays tribute to these martyrs who scarified their lives for Uttarakhand State.
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2 सितम्बर, 1994 को मसूरी में निहत्थे आन्दोलनकारियॊं पर चारों तरफ से घेरकर गोलियां बरसाई गई । इस गोलीकांड में हमारे 7 आन्दोलनकारी शहीद हो गये थे। और पुलिस की गोली से ही पुलिस कप्तान उमाकान्त त्रिपाठी भी शहीद हुए.

शहीदों के नाम


श्रीमती बेलमती चौहान
श्री एम एम ममगांई
हंसा धनाई
श्री बलबीर सिंह
श्री आर. एस. बंगारी
श्री धनपत सिंह
श्री जे. एस. बिष्ट
श्री उमाकान्त त्रिपाठी (पुलिस कप्तान)